शनिवार, 10 अक्तूबर 2015

'मुसलमानों' को चाहिए पाकिस्तान से आजादी

 क श्मीर की आजादी का राग आलापने वाला पाकिस्तान अपने घर को ही नहीं संभाल पा रहा है। सोशल मीडिया पर आई तस्वीरें और वीडियो से पता चलता है कि भारतीय मूल के मुसलमानों के साथ भी पाकिस्तान में ठीक व्यवहार नहीं होता है। बंटवारे के वक्त भारत से पाकिस्तान गए मुसलमानों को वहां की आवाम मुहाजिर कहकर बुलाती है। मुहाजिरों को संदिग्ध नजरिए से देखा जाता है। पाकिस्तान के मुसलमानों ने उन्हें बराबरी का हक नहीं दिया है। मुहाजिरों को 'मुसलमान' ही नहीं समझा जाता है। मुहाजिरों के साथ सरकार भी भेदभाव करती है। वर्षों से इस भेदभाव से पीडि़त मुहाजिरों का दर्द अब बाहर आने लगा है। हाल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ जब यूएन जनरल असेम्बली में कश्मीर राग आलाप रहे थे, उसी वक्त बाहर मुहाजिर पाकिस्तान से आजादी के नारे लगा रहे थे। मुहाजिरों का यह प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान की पोल-पट्टी खोल रहे हैं कि वहां हिन्दुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों के साथ भारत से गए मुसलमानों के साथ भी दोयम दर्जे का व्यवहार होता है।
       यूएन के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोग मुहाजिर कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के सदस्य थे। एमक्यूएम पाकिस्तान में बसे पांच करोड़ मुहाजिरों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ आंदोलन चला रहा है। पाकिस्तानी रेंजर्स आए दिन मुहाजिरों के साथ मार-पीट करते हैं। उन्हें भारत की खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट कहा जाता है। प्रदर्शन में शामिल लोग बताते हैं कि पाकिस्तान में उन्हें अब तक न्यास और सुरक्षा नहीं मिल सकी है। मजबूरन उन्हें पाकिस्तान से बाहर आकर अपनी लड़ाई लडऩी पड़ रही है। यूएन के सामने प्रदर्शन भी इसलिए किया है ताकि दुनिया के तमाम देश हमारी मुश्किलों से वाकिफ हो सकें। 
       गौरतलब है कि हाल में अमरीकी सांसदों ने पाकिस्तान में हिन्दुओं के मानवाधिकार हनन की बात पर चिंता जताई थी। खासकर पाकिस्तान के सिंध में हिन्दुओं के लिए रहने-जीने लायक स्थितियां नहीं बची हैं। वहीं, पाक अधिक्रांत कश्मीर (पीओके) में भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना के अत्याचारों से पीडि़त मुस्लिम आबादी भारत के समर्थन में प्रदर्शन कर रही है। बलूचिस्तान के लोग भी पाकिस्तान से आजाद होने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। ये सब मामले ऐसे हैं जिनसे जाहिर होता है कि पाकिस्तान की सरकार का अपने देश पर नियंत्रण नहीं है। पाकिस्तानी रेंजर्स आवाम पर अत्याचार कर रहे हैं। खासतौर पर, गैर-इस्लामिक आवाम और कट्टरवाद से दूर मुस्लिम पाकिस्तानी रेंजर्स और फिरकापरस्तों के निशाने पर हैं। 
        पाकिस्तान की सरकार सुकून से जीवन जीने वाले अपने ही लोगों की सुरक्षा कट्टरपंथियों से नहीं कर पा रही है तो भला आतंकवाद जैसे भयंकर राक्षस से कैसे लड़ेगी? संयुक्त राष्ट्र संघ में आतंकवाद से किया लडऩे की पाकिस्तान की घोषणा खोखली है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान के इसी खोखले दावे और भारत पर लगाए आरोपों की धज्जियां उड़ा दी थीं। पाकिस्तान की राजनीति, सेना और जनता की मानसिकता कैसी है, इस बात से समझ सकते हैं कि बंटवारे के ६७ साल बाद भी भारत से गए मुसलमान उन्हें स्वीकार नहीं हैं। बहरहाल, पाकिस्तान ने हमेशा की तरह इन प्रदर्शनों के पीछे भी भारत का हाथ बता दिया है। जाहिर होता है कि पाकिस्तान अपने हालात सुधारना नहीं चाहता। दरअसल, भारत विरोध ही पाकिस्तानी राजनेताओं और सेना की नियती हो गई है। भारत विरोधी होना ही वहां सच्चा पाकिस्तानी और मुसलमान होने की गारंटी है।
        वर्तमान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को समझना होगा कि अब भारत से नफरत करके राजनीति करने के दिन लद चुके हैं। पढ़ा-लिखा मुसलमान सब खेल समझ रहा है। इसलिए जम्मू-कश्मीर सहित भारत में आग लगाने की जगह अपने मुल्क की आवोहबा को बदलने की कोशिश करिए। भारत की तरह पंथनिरपेक्ष राष्ट्र बनिए। सबको समानता, सुरक्षा और अवसर उपलब्ध कराइए। वरना, वह दिन दूर नहीं जब पूरा पाकिस्तान ही खुद से आजाद होने की गुहार लगा रहा होगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

पसंद करें, टिप्पणी करें और अपने मित्रों से साझा करें...
Plz Like, Comment and Share

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails