गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019

होश में रहे पाकिस्तान

- लोकेन्द्र सिंह - 
आतंकी गिरोहों पर भारतीय वायु सेना के हमले से पाकिस्तान को अधिक दर्द हो रहा है। पाकिस्तान की सरकार और सेना आतंकी गिरोहों के इतने दबाव में है कि उसे भारत पर पलटवार करने को मजबूर होना पड़ रहा है। पाकिस्तान ने मंगलवार शाम से ही सीमा पार से गोलाबारी शुरू कर दी, जिसका भारतीय सेना की ओर से मुंह तोड़ जवाब दिया जा रहा है। पाकिस्तान की बौखलाहट से यह तो साफ हो गया कि वह आतंकी गिरोहों को पालता है। पाकिस्तानी सरकार और सेना के संरक्षण में अनेक आतंकी गिरोह संचालित हैं। यही कारण है कि आतंकी गिरोहों के प्रशिक्षण शिविर तबाह होने पर पाकिस्तान की सरकार और सेना, दोनों को पीड़ा हुई है। अपनी खीज मिटाने के लिए वह सीमा पार से गोलाबारी कर रहे हैं।

बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

सर्जिकल स्ट्राइक-2 : मुंह तोड़ जवाब

- लोकेन्द्र सिंह - 
पुलवामा हमले पर भारत की ओर से पाकिस्तान और उसके संरक्षण में पल रहे आतंकी गिरोहों को सर्जिकल स्ट्राइक-2 से मुंह तोड़ जवाब दिया गया है। पाकिस्तान और आतंकी गिरोहों को भारत के इस जवाब से सबक सीख लेना चाहिए। उन्हें यह बात गाँठ बांध लेनी चाहिए कि यह नया भारत है। यह सिर्फ सबूत ही नहीं सौंपता, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई भी करता है। यह दूसरा अवसर है जब नये भारत ने पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में घुसकर आतंकियों को मार गिराया है। बल्कि इस बार तो भारतीय सेना ने पाकिस्तान के घर (बालाकोट) में घुसकर उसके पालतू आतंकियों को जहन्नुम पहुँचाया।

शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

पुलवामा हमला : व्यर्थ न जाए बलिदान


- लोकेन्द्र सिंह -
आतंकियों के कायराना हमले में हमने भारत माँ के लाल खोये हैं। देश में दु:ख और आक्रोश की लहर है। प्रत्येक राष्ट्रभक्त नागरिक बलिदानियों के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है। उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहा है। हम सबकी जिम्मेदारी है कि बलिदानी जवानों के परिवार की चिंता करें। उनका बलिदान व्यर्थ न जाए, इसकी चिंता सरकार तो करे ही, समाज को भी करनी चाहिए। अपना जीवन गंवाने वाले यह जवान अपने परिवार से दूर रहकर हम सबकी सुरक्षा कर रहे थे। उनके कारण हम अपने परिवार के साथ सानंद रह पा रहे हैं। क्या ऐसे में हमारा दायित्व नहीं बनता कि जवानों के परिवार को हम अपना परिवार बना लें? हुतात्माओं के परिवारों के साथ खड़े होने से उन जवानों का हौसला बुलंद होगा, जो सीमा पर डटे हुए हैं। देश की सेवा में वह बेफिक्री से सजग रहेंगे। अपने देश के नागरिकों के समर्थन से वह कायर आतंकियों को उनके सही ठिकाने पहुँचा सकेंगे।

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

कविताओं में बसी मिट्टी की सौंधी सुगंध

 यु वा कवि लोकेन्द्र सिंह राजपूत का पहला काव्य संग्रह हिन्दी जगत के सम्मुख प्रस्तुत हो रहा है। वह इतनी ही स्वाभाविक घटना है जितनी कि बसंतागमन पर आम्रकुंजों का बौर राशि से संभारित होने लगना या प्राची से सूर्य को मुस्कराते देख किसी गौरैया का चहक-चहक पडऩा। तात्पर्य यह है कि श्री लोकेन्द्र सुमित्रानंदन पंत के 'वियोगी होगा पहला कवि' को चरितार्थ भले ही न करें किन्तु इतना तो है ही कि उनका काव्य सृजन 'वही होगी कविता अनजान' की तरह अनजाने और लगभग अनायास ही बह निकला है। उसके पीछे उनकी भाव प्रवणता ही प्रमुख है। 
  श्री लोकेन्द्र का यह काव्य संग्रह उनकी अपनी मातृभूमि, अपनी मां, अपने समाज और अपने परिवेश के प्रति उठती श्रद्धा, समादर, प्रेम एवं दायित्व चेता भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उनकी यह भावाभिव्यक्ति अत्यन्त सहज, सरल एवं तरल है। कवि श्री लोकेन्द्र अपनी रचनात्मकता में प्राय: अकृत्रिम और कहीं-कहीं सपाट दिख पड़ते हैं। यह उनके काव्य लेखन का वैशिष्ट्य है और यही उनकी, कम से कम उनके साम्प्रतिक कवि व्यक्तित्व की पहचान है।
वीडियो में देखें- क्या कह रहे हैं वरिष्ठ साहित्यकार श्री जगदीश तोमर 


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