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रविवार, 17 अगस्त 2025

स्वयं से साक्षात्कार का अवसर

 “सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर्स रिट्रीट : रोल ऑफ डिजिटल मीडिया इन ट्रांसफॉर्मिंग सोसायटी”

प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्याल के मीडिया आयाम की ओर से 30 जुलाई से 3 अगस्त, 2025 तक पहली बार ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स रिट्रीट : रोल ऑफ डिजिटल मीडिया इन ट्रांसफॉर्मिंग सोसायटी’ का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से सोशल मीडिया के प्रभावशाली उपयोगकर्ता आए। कई जाने-पहचाने थे तो कुछ से नया परिचय हुआ। उनके काम ने नया सीखने और करने की ललक पैदा की। जब मैं ब्रह्माकुमारीज के इस आयोजन के लिए भोपाल से प्रस्थान कर रहा था तब हृदय में उत्साह था, मन में जिज्ञासा और आत्मा कहीं भीतर से एक नए अनुभव के लिए पुकार रही थी। इस यात्रा का उद्देश्य मात्र एक ‘रिट्रीट’ में भाग लेना नहीं था, बल्कि अपने भीतर छुपी उस नीरव शांति को खोज पाना था, जिसे रोज़मर्रा की भागदौड़ ने जैसे ढंक लिया है। यकीनन, मेरे लिए यह आयोजन ‘सोशल मीडिया रिट्रीट’ से कहीं अधिक स्वयं से साक्षात्कार का अवसर बन गया। आबू रोड स्थित ब्रह्माकुमारी के मनमोहिनीवन परिसर में प्रवेश करते ही आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति हुई। पहले ही दिन प्रतीत हो गया कि आगामी चार दिन, अविस्मरणीय होनेवाले हैं। यह आयोजन मेरे जीवन का एक ऐसा अनमोल अनुभव बना जिसने मेरी सोच, दृष्टिकोण और आत्मिक ऊर्जा को एक नया आयाम दिया। यहाँ से आध्यात्मिक चेतना से जुड़ने की दिशा में एक नये सफर की शुरुआत करने का प्रयास रहेगा।

शनिवार, 8 जनवरी 2022

सूर्य नमस्कार का मूर्खतापूर्ण विरोध

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय एवं प्रस्ताव स्पष्ट करते हैं कि मुस्लिम समुदाय को पिछड़ा रखने एवं उसमें सांप्रदायिक कट्टरता को बढ़ावा देने में इस संस्था की बड़ी भूमिका है। अपनी सांप्रदायिक सोच एवं प्रस्तावों के कारण यह संस्था विवादों में रहती है। पिछले दिनों भारत में पाकिस्तान के घोर सांप्रदायिक ‘ईशनिंदा कानून’ को भारत में लागू करने की माँग करके मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड विवादों में रहा था। उस समय देशभर में इस सांप्रदायिक माँग का विरोध किया गया। लेकिन उसके बाद भी बोर्ड ने अपनी सोच को बदला नहीं है। अब बोर्ड ने सूर्य नमस्कार का विरोध करके जता दिया है कि उसे कथित ‘गंगा-जमुनी संस्कृति’ से उसको कोई लेना-देना नहीं है। सबको मिलकर ऐसी कट्टर और संकीर्ण विचारों का विरोध करना चाहिए। इस तरह के विचारों को हतोत्साहित करना सभी समुदायों के हित में है।

बुधवार, 22 जून 2016

भारत बन गया विश्व'योग'गुरु

 अतंरराष्ट्रीय  योग दिवस के अवसर पर दुनिया ने बाँहें फैलाकर भारत के ज्ञान का सुख लिया। विश्व के 192 देशों में द्वितीय अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। 21 जून को दुनियाभर में लोगों ने धरती पर माथा टेकते हुए और सूर्य को नमस्कार करते हुए भारत की तकरीबन पाँच हजार साल पुरानी योग परंपरा को अंगीकर किया। भारत की योग विद्या पहले से ही दुनिया को आकर्षित करती रही है। लेकिन, प्रथम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से द्वितीय अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतराल में योग अभूतपूर्व ढंग से लोकप्रिय हुआ है। यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से बीते दो वर्षों में भारत विश्व के लिए योग गुरु बन गया है। चंडीगढ़ में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि योग एक बहुत बड़े कारोबार के रूप में भी विकसित हो रहा है। दुनिया के हर देश में योग प्रशिक्षकों की जरूरत है। निश्चित ही विश्व की यह माँग भारत बेहतर तरीके से पूरी कर सकता है। भारतीय युवाओं के लिए योग ने करियर की नई राह खोल दी है। हालाँकि भारतीय दर्शन योग को कारोबार नहीं मानता, बल्कि योग तो जीवनशैली का एक हिस्सा है। लेकिन, वर्तमान समय में यदि योग किसी के रोजगार में सहायक हो सकता है, तब यह आनंद का विषय होना चाहिए।

मंगलवार, 21 जून 2016

योगमय दुनिया

 अंतरराष्ट्रीय  योग दिवस के अवसर पर दुनिया में भारत के ज्ञान-विज्ञान का परचम फहरेगा। एक बार फिर दुनिया भारतीय संस्कृति के रंग में रंगी दिखाई देगी। 21 जून को विश्व योगमय हो जाएगा। आनंद के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में तैयारियां चल रही हैं। प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए कि योग और आयुर्वेद भारत की ओर से समूचे मानव समाज के लिए श्रेष्ठ उपहार हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा कि विशेषता है कि चर-अचर के हित के किसी भी प्रकार ज्ञान को हमने रोककर नहीं रखा, उसको बांधकर नहीं रखा, उसे दुनिया से छिपाया नहीं, बल्कि दुनिया उसे दुनिया में फैलाया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका यात्रा के दौरान इस बात को कहा भी कि भारत ने कभी योग के पेटेंट के लिए प्रयास नहीं किया है। दरअसल, भारत के मनीषी समूची सृष्टि को ध्यान में रखकर चिंतन और सृजन करते थे। भारतीय चिंतन परंपरा ने सदैव विश्व को एक परिवार की तरह देखा है। अपने इसी व्यापक दृष्टिकोण के कारण हमने कभी मानव कल्याण के ज्ञान-विज्ञान पर अपना एकाधिकार नहीं थोपा।

सोमवार, 15 जून 2015

राष्ट्रीय योग दिवस कब?

 भा रत सरकार 21 जून को 'पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' को दुनियाभर में व्यापक पैमाने पर मनाने की तैयारी कर रही है। 21 जून को दुनिया भारत के साथ योग करेगी। यह सुखद समाचार है। भारतीय संस्कृति और उसकी पहचान के लिए इसे 'अच्छे दिनों' की शुरुआत माना जा सकता है। पिछले वर्ष (2014) 27 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। यह पहली बार था कि भारत सरकार की ओर से अपनी सांस्कृतिक पहचान को दुनिया में स्थापित करने के लिए इस तरह का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव को ईसाई और मुस्लिम देशों सहित करीब 177 देशों का अभूतपूर्व समर्थन मिला। पहली बार पश्चिमी देशों सहित अन्य देशों ने भारतीय वैज्ञानिक परंपरा का स्वागत किया था। 11 दिसम्बर, 2014 को महासभा के 193 सदस्यों ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह पहली बार ही हुआ था कि किसी प्रस्ताव को इस कदर बहुमत मिला। यह भी पहली बार हुआ कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में किसी विशेष दिवस प्रस्ताव को मात्र 90 दिन में स्वीकृति मिल गई।