सोमवार, 26 जुलाई 2021

आज की आवश्यकता है 'भारत जोड़ो आंदोलन'

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देश के नागरिकों से महत्वपूर्ण आह्वान किए हैं। प्रधानमंत्री की पहल पर समूचा देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने पर 'आजादी का अमृत महोत्सव' मना रहा है। देश के ऐसे बलिदानियों को याद किया जा रहा है, जिन्हें इतिहास की पुस्तकों या अन्यत्र वह स्थान नहीं मिला, जो मिलना चाहिए था। इस उत्सव को और अधिक विस्तार देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मोदी ने अपील की है कि यह किसी राजनीतिक दल या सरकार का आयोजन नहीं है बल्कि यह सभी भारतवासियों का कार्यक्रम है। इसलिए सभी लोगों को अमृत महोत्सव से जुडऩा चाहिए और महापुरुषों का स्मरण करें। यकीनन जब हम अपने महापुरुषों को याद करेंगे, तब उनके व्यक्तित्व के साथ उनका कृतित्व का स्मरण भी करेंगे, जो हमें गौरव की अनुभूति से भरेगा। साथ ही यह भी ध्यान आएगा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए हमने कितना संघर्ष किया है। स्वतंत्रता का मूल्य क्या है? अपने महापुरुषों का स्मरण करेंगे तब हम भारत, भारतीयता और भारतीय मूल्यों के अधिक नजदीक भी जाएंगे। 

'मन की बात' के 79वें संस्करण में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सामयिक आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि "बात जब आजादी के आंदोलन और खादी की हो तो पूज्य बापू का स्मरण होना स्वाभाविक है। जैसे बापू के नेतृत्व में 'भारत छोड़ो आंदोलन' चला था, वैसे ही आज हर देशवासी को 'भारत जोड़ो आंदोलन' का नेतृत्व करना है"। 'भारत जोड़ो आंदोलन' यदि जनांदोलन बन जाता है तब उसके अनेक सुखद परिणाम आएंगे। पहला, अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत जिस तेजी और मजबूती से आगे बढ़ रहा है, उसमें भारत की स्थिति और सशक्त होगी। दूसरा, भारत में सक्रिय 'ब्रेकिंग इंडिया ब्रिगेड' के मनसूबे ध्वस्त होंगे और भारत आंतरिक तौर पर और अधिक शक्तिशाली हो जाएगा। यह आंतरिक शक्ति भारत को प्रत्येक क्षेत्र में मजबूत करेगी। 

पिछले कुछ समय को गौर से देखें तो ऐसी अनेक भारत विरोधी ताकतें सक्रिय हैं, जो वर्ग, जाति, संप्रदाय एवं अन्य प्रकार के संघर्ष उत्पन्न करने की साजिशें रच रही हैं। उन उसको मुंहतोड़ जवाब देने के लिए 'भारत जोड़ो आंदोलन' की अनिवार्यता नजर आ रही है। भारत को स्वतंत्र कराने के लिए महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के विरुद्ध 'भारत छोड़ो आंदोलन' खड़ा किया। आज उसी स्वतंत्रता को मजबूत करने के लिए भी 'भारत जोड़ो आंदोलन' की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी के इस आह्वान के साथ सभी देशवासियों को जुडऩा चाहिए और इस आंदोलन को ऐतिहासिक रूप देकर भारत को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका का निर्वाहन करना चाहिए। 

बुधवार, 21 जुलाई 2021

भारत की संस्कृति के साक्षी

भारत की मूल संस्कृति क्या है? इसको लेकर दिग्भ्रिमित करने वाले अनेक विमर्श चलते रहते हैं। एक शायर ने तो यहाँ तक कह दिया कि यहाँ सब किराएदार हैं, कोई मकान मालिक नहीं। उनके कहने का आशय यही था कि भारत में अलग-अलग समय में लोग आते गए और बस गए। भारतीय मूल का कोई नहीं है। दरअसल, वे आर्य-द्रविणवाली कपोल कल्पना के लिए गढ़े गए झूठ के या तो वाहक थे या फिर उसके फेर में फंस गए होंगे। भारत के मूल लोग कौन थे, उनकी संस्कृति क्या थी, जीवन पद्धति क्या थी, धर्म क्या था, यह सब कोई शायर नहीं बता सकता, बल्कि भारत की मिट्टी इसका स्वयं जवाब देती है कि उसमें किसका रक्त शामिल है। अयोध्या से लेकर मथुरा, राखीगढ़ी से लेकर उज्जैन तक खुदाई में भारतीय संस्कृति के प्रमाण मिलते हैं।

शनिवार, 17 जुलाई 2021

बेहतर जीवन के लिए आवश्यक है जनसंख्या नियंत्रण

उत्तरप्रदेश की योगी सरकार देश में सर्वाधिक जनसंख्या वाले प्रदेश के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने जा रही है। 11 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तरप्रदेश जनसंख्या विधेयक-2021 के मसौदे के बारे में स्वयं लोगों को जानकारी दी। दरअसल, विपक्षी राजनीतिक एवं उनके सहयोगी बुद्धिजीवी अत्यंत आवश्यक कानून को भी सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास करने लगे थे। तथाकथित प्रगतिशील बुद्धिजीवी वर्ग का दोगलापन एवं पाखंड अब खुलकर सामने आ गया है। उत्तरप्रदेश जनसंख्या विधेयक किसी एक संप्रदाय की जनसंख्या को रोकने का एजेंडा नहीं है। यह कानून सब पर एक समान रूप से लागू होगा। यह कानून किसी विशेष संप्रदाय को लक्षित करके तैयार नहीं किया गया है। इसके बावजूद विपक्षी नेता एवं अन्य लोग जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास को मुुस्लिम विरोधी बता रहे हैं। जबकि यही लोग यह दावा भी करते हैं कि मुस्लिमों की जनसंख्या दर में हिन्दुओं की अपेक्षा कमी आई है। यानी अब मुस्लिम भी सात-आठ बच्चे पैदा नहीं कर रहे बल्कि वे भी हम दो-हमारे दो की अवधारणा पर चल रहे हैं। जब यह सच है कि मुसलमानों ने आधुनिक सोच के साथ कदमताल करना शुरू कर दिया है, तब यह कानून उनके विरुद्ध कैसे हो सकता है?

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर चिंता


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना संक्रमण की तीसरी आवृत्ति (तीसरी लहर) को लेकर चिंता जताई है। संक्रमण की दूसरी आवृत्ति से पहले जिस तरह के संकेत मिले थे, ठीक वैसे ही संकेत इस समय देश के विभिन्न राज्यों में देखे जा रहे हैं। महाराष्ट्र, केरल, ओडिशा, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में पिछले कुछ समय से कोरोना संक्रमण के नये मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। महामारी की दूसरी आवृत्ति से पूर्व भी इन राज्यों में संक्रमण बढ़ा था। देश के अन्य राज्यों में भले ही स्थितियां नियंत्रित दिख रही हैं, लेकिन खतरा बरकरार है। कोरोना संक्रमण को एक राज्य से दूसरे राज्य में फैलने में अधिक समय नहीं लगता है। हमने दूसरी आवृत्ति में स्थितियों को अचानक से भयावह और अनियंत्रित होते हुए देखा है। केंद्र सरकार ने तब भी राज्यों को चेताया था और जरूरी प्रबंध करने के निर्देश दिए थे लेकिन तब सरकारें ही नहीं, आम नागरिक भी गफलत में चले गए थे। सबकी मिला-जुली लापरवाही के कारण परिस्थितियां बहुत बिगड़ गई थीं। सरकारों को ही नहीं, अपितु नागरिकों को भी दूसरी लहर के पीड़ादायक परिणामों से सबक लेने की आवश्यकता है।

शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

समान नागरिक संहिता की आवश्यकता


देश में लंबे समय से समान नागरिक संहिता की माँग हो रही है, लेकिन वोटबैंक की राजनीति करने वालों ने इस मामले को मुस्लिम समुदाय से जोड़कर अत्यधिक संवेदनशील बना दिया है। मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का ही असर है कि देश में सबके लिए समान नागरिक संहिता नहीं है, जबकि संविधान में इसका आग्रह किया गया है। समान नागरिक संहिता नहीं होने से सर्वाधिक नुकसान उसी मुस्लिम संप्रदाय का है, जिसके नाम पर समान नागरिक संहिता का विरोध किया जाता है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने समान नागरिक संहिता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी कर लंबे समय से चली आ रही माँग को तेज कर दिया है। मीणा जनजाति की एक महिला और उसके पति के बीच तलाक के प्रकरण की सुनवाई के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता है और इसे लाने का यही सही समय है। उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस मामले में जरूरी कदम उठाने को कहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि भारतीय समाज में जाति, धर्म और समुदाय से जुड़े अंतर समाप्त हो रहे हैं। इस बदलाव की वजह से दूसरे धर्म और दूसरी जातियों में शादी करने और फिर तलाक होने में दिक्कतें आ रही हैं। आज की युवा पीढ़ी को इन दिक्कतों से बचाने की जरूरत है। इस समय देश में समान नागरिक संहिता होनी चाहिए। अनुच्छेद-44 में समान नागरिक संहिता को लेकर जो बात कही गई है, उसे हकीकत में बदलना होगा। 

उच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद जैसा कि तय था- देश में स्वयं को सेकुलर एवं संविधान हितैषी कहलाने वाला वर्ग समान नागरिक संहिता के विरोध में उतर आया। बुद्धिजीवियों का यह वर्ग आज तक इस बात को नहीं समझा सका है कि समान नागरिक संहिता भला किस प्रकार से किसी संप्रदाय के विरुद्ध हो सकती है? एक तरफ यह वर्ग संविधान से देश चलना चाहिए, इस बात की रट लगाता है, वहीं दूसरी ओर अनेक विषयों में संविधान को दरकिनार करना चाहता है। यह दकियानूसी सोच उस समय भी सक्रिय हो गई थी, जब बाबा साहेब डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर देश की आधी आबादी (महिलाओं) को उनके अधिकार देने के लिए समान नागरिक संहिता का विधेयक प्रस्तुत करना चाहते थे। विरोध को देखते हुए डॉ. अंबेडकर ने प्रस्ताव किया कि समान नागरिक संहिता पर एक राय बनाकर उचित समय पर इसे लागू किया जाना चाहिए। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि आज तक इस पर एक राय नहीं बन सकी है। अब तक सत्ता के केंद्र में रहे राजनीतिक दलों ने कभी इस दिशा में आम सहमति बनाने के प्रयास भी नहीं किए। बल्कि उन्होंने तो इस माँग को वोटबैंक की राजनीति का माध्यम बना लिया। 

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सर्वोच्च न्यायालय भी समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कह चुका है। उस समय तो अल्पसंख्यक समुदाय (ईसाई) के एक व्यक्ति ने ही सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई थी कि एक देश में अलग-अलग कानून क्यों हैं? विरोध करने वाले कूपमंडूकों को समझना चाहिए कि समान नागरिका संहिता सबको समान अधिकार देगी। इसलिए इसका स्वागत किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार से अपेक्षा है कि वह जल्द ही इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए। 

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रविवार, 11 जुलाई 2021

अपना शहर-अपने लोग

देखें वीडियो : ग्वालियर तू बहुत याद आता है | Gwalior


गोपाचल पर्वत पर शान से खड़ा

आसमान का मुख चूमता 'दुर्ग'

नदीद्वार, ज्येन्द्रगंज, दौलतगंज

नया बाजार से कम्पू को आता रास्ता

वहां बसा है मेरा प्यारा घर

मुझे बहुत भाता है 

ग्वालियर तू मुझे बहुत याद आता है। 


सात भांति के वास्तु ने संवारा

सबको गोल घुमाता 'बाड़ा' 

दही मार्केट में कपड़ा, टोपी बाजार में जूता

गांधी मार्केट में नहीं खादी का तिनका

पोस्ट ऑफिस के पीछे नजर बाग मार्केट में 

मेरा दोस्त कभी नहीं जाता है

ग्वालियर तू मुझे बहुत याद आता है। 


सन् 1857 के वीरों की विजय का गवाह

शहर की राजनीति का बगीचा 'फूलबाग'

बाजू से निकला स्वर्णरेखा नाला

कईयों को कर गया मालामाल

नए-नए बने चौपाटी की चाट खाने

शाम को सारा शहर जाता है

ग्वालियर तू मुझे बहुत याद आता है। 


चाय की दुकान, कॉलोनी का चौराहा

यहां सजती हैं दोस्तों की महफिल

देश की, विदेश की, आस की, पड़ोस की

बातें होती दुनिया जहांन की

मां की ममता, पिता का आश्रय 

बहन का दुलार, पत्नी का प्यार बुलाता है

ग्वालियर तू मुझे बहुत याद आता है। 


- लोकेन्द्र सिंह -

(काव्य संग्रह "मैं भारत हूँ" से)

मंगलवार, 6 जुलाई 2021

सबर कर...

देखें वीडियो : सबर कर | ये वक्त गुजर जायेगा | Ye Waqt Guzar Jayega



ये वक्त गुजर जाएगा तू जरा सबर कर

ये हकीकत है तू खुशी से बसर कर।


कलयुग है भाई बहुत काजल है फैला

दाग न लगे दामन पर, तू फिकर कर। 


चरैवेति में असली मजा है ठहराव तो सजा है

मंजिल है दूर, हौसला रख, तू सफर कर।


बहुत मौका परस्त है ये जमाना लोकेन्द्र

कौन दोस्त-दुश्मन, तू जरा ये खबर कर।


दरियादिली से दुश्मन की हिमाकत बढ़ रही है

अदब से रहेगा वो, तू जरा तिरछी नजर कर।


- लोकेन्द्र सिंह -
(काव्य संग्रह "मैं भारत हूँ" से)