नीट परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन की गर्मी अभी शांत भी नहीं हुई है कि आंदोलनजीवियों ने जनता को भ्रमित करने एवं भड़काने के लिए दूसरा विषय खोजना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ महीनों से एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर एक नकारात्मक नैरेटिव खड़ा करने का प्रयास किया गया है। परिणामस्वरूप, एथनॉल मिश्रित पेट्रोल की नीति को लेकर उठ रही आपत्तियों और राजनीतिक बयानों ने एक बार फिर ऊर्जा संक्रमण की इस प्रक्रिया को व्यापक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। एक तरफ जहां सरकार इसे पर्यावरण संरक्षण, विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों की आय बढ़ाने वाले दूरगामी कदम के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों और आम वाहन चालकों के विरोध प्रदर्शनों ने नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
शनिवार, 1 अगस्त 2026
बुधवार, 22 जुलाई 2026
आंदोलन को बदनाम करते हिंसक प्रदर्शन
अराजक तत्वों ने हड़प लिए छात्रों के जरूरी मुद्दे, उनके मंच पर कब्जाकर अपना नैरेटिव चलाने का किया प्रयास
देश में प्रमुख परीक्षाओं की पारदर्शिता और लाखों युवाओं का भविष्य अत्यंत संवेदनशील विषय हैं। परीक्षाओं के आयोजन में लगातार हो रही गड़बड़ियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार को इस पर कोई ठोस रणनीति बनानी ही चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि नीट परीक्षा को लेकर उठी चिंताएं पूरी तरह उचित हैं। एक अभिभावक की भाँति उन्होंने युवाओं को आश्वस्त किया है कि उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी पर संज्ञान लेकर उसका फिर से व्यवस्थित आयोजन कराया है। इसके बावजूद, इस संवेदनशील मुद्दे की आड़ में जिस तरह दिल्ली की सड़कों पर हिंसा, उपद्रव और ‘चलो संसद’ के नाम पर अराजकता फैलाई गई, वह देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शनिवार, 11 जुलाई 2026
तीजन बाई: भारतीय सांस्कृतिक विरासत की राजदूत
भारत की सांस्कृतिक विरासत की सशक्त पहचान और पंडवानी गायन की जादुई आवाज अब खामोश हो गई है, लेकिन उसकी गूंज सदियों तक भारतीय संस्कृति के आकाश में गूंजती रहेगी। पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में 5 जुलाई, 2026 को रायपुर एम्स में निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं, बल्कि भारतीय लोक कला के एक सुनहरे अध्याय का विश्राम लेना है। अपने नाना से महाभारत की कथाएं सुनकर बड़ी हुई तीजन बाई ने जब तंबूरा हाथ में थामा, तो उन्होंने केवल गीत नहीं गाए, बल्कि महाभारत के चरित्रों को अपनी सशक्त आवाज और प्रभावशाली अभिनय से मंच पर जीवंत कर दिया। उनकी कला और जीवन यात्रा हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो संघर्षों से पार पाना चाहता है। एक ऐसे दौर में जब महिलाओं का मंच पर आकर तेज स्वर में गाना और अभिनय करना आसान नहीं था, उन्होंने सामाजिक बंधनों और रूढ़ियों की परवाह न करते हुए अपनी राह चुनी।
गुरुवार, 2 जुलाई 2026
श्रीराम मंदिर प्रकरण में ‘कालनेमियों’ के विलाप से रहें सावधान
श्री अयोध्या धाम के भव्य श्रीराम मंदिर के कोष में हुई चोरी की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। इस कृत्य से संपूर्ण हिन्दू समाज का आहत और हतप्रभ होना स्वाभाविक है। मंदिर की सुरक्षा, व्यवस्थापन और दान के प्रबंधन पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है। हिन्दू समाज एवं हिन्दू संगठनों की एक राय है कि इस मामले में दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए। लेकिन, इस पूरी घटना के बाद जो सबसे अधिक आश्चर्यजनक और वैचारिक रूप से खोखला पहलू उभर कर सामने आया है, वह है उन राजनेताओं और तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ताओं की अति-सक्रियता, जो जीवनभर भगवान श्रीराम और उनकी जन्मभूमि पर श्रीराम मंदिर निर्माण के विरोधी रहे हैं। यह ध्यान देने वाली बात है कि आज मंदिर के धन की चिंता में जो लोग सबसे ज्यादा मुखर हैं, यह वही वर्ग है जिसका न तो कभी भगवान श्रीराम में विश्वास था और न ही वे उस पवित्र भूमि पर मंदिर निर्माण के पक्षधर थे।
बुधवार, 24 जून 2026
संविधान हत्या दिवस : इतिहास से सीखकर संविधान की रक्षा का संकल्प दिवस
लोकतंत्र और संविधान के महत्व को समझने के लिए 25 जून की तारीख बहुत महत्वपूर्ण है। भारत सरकार ने 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने की अधिसूचना जारी की है। दरअसल, 1975 में 25 जून को ही देश पर आपातकाल थोप दिया गया था। जिसके कारण रातों-रात आम नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे, मीडिया की स्वतंत्रता पर ताले जड़ दिए गए थे, और सवाल पूछने पर लोगों को बिना किसी अपील और दलील के जेल में डाल दिया गया था।
'संविधान हत्या दिवस' मनाने का उद्देश्य किसी पुरानी पीड़ा को कुरेदना नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाना है कि जब संविधान की रक्षा नहीं होती, तो लोकतंत्र कैसे तानाशाही में बदल जाता है। यह दिन एक चेतावनी है और एक संकल्प भी, कि हम दोबारा अपने देश में ऐसा अंधकार कभी नहीं आने देंगे।
शुक्रवार, 5 जून 2026
स्कूल की छुट्टियां : नानी का घर बनाम गैजेट्स की दुनिया
ग्रीष्मकालीन अवकाश : सीखने, समझने और निखरने का उत्तम अवसर
गर्मी की छुट्टियों की प्रतीक्षा किसे नहीं होती है। भले ही समय बदल गया है, पीढ़ी बदल गई है, लेकिन गर्मी की छुट्टियों को लेकर रोमांच कम नहीं हुआ है। छुट्टियों के नाम से आज भी हमारे चेहरों पर एक प्यारी-सी मुस्कान तैर जाती है। हर बच्चे के मन में वार्षिक परीक्षा के बाद आने वाली लंबी छुट्टियों को लेकर अपने-अपने सपने होते हैं। हालांकि इन सपनों या कहें योजनाओं में बड़ा बदलाव आया है। बदलते समय ने हमारे जीने के तरीके को जितना बदला है, उतना ही असर इन छुट्टियों के आनंद पर भी डाला है। एक वह दौर था जब अप्रैल का महीना आते ही मन किसी पंछी की तरह उड़ने को बेताब हो जाता था। फुर्र से उड़कर नानी के आंगन, वहाँ से दादी के घर। खेत-खलियान। नीम की छांव। चाचा के साथ मटरगस्ती। मामा के साथ नदी में छलाँग। भाई-बहनों के साथ अष्टा-चंगा, गिल्ली-डंडा, छुपन-छुपाई, सांप-सीढ़ी और न जाने कितने देशी खेल। एक से मन भरे, दूसरे में आए आनंद। रात में तारों की छांव में सोना। नाना-नानी की किस्सागोई में सिनेमा से बढ़कर मनोरंजन। रोज नई कहानी। नया संस्कार। आम के आम, गुठलियों के दाम। छुट्टियों का आनंद भी और समाज जीवन की शिक्षा-संस्कार भी। एक आज का दौर है, जहाँ छुट्टियां तो हैं, लेकिन उनका रंग-रूप पूरी तरह बदल चुका है। नानी-दादी का घर तो है लेकिन हम जाते चार दिन के लिए ही हैं। मामा, चाचा-ताऊ के बच्चे यानी हमारे भाई-बहनों की मंडली तो है लेकिन हम देशी खेल नहीं खेलते, गैजेट्स में डूबे रहते हैं। जो हम खेल-खेल में सीख लेते थे, उसके लिए हॉबी क्लासेस लगा रहे हैं। कुछ समय तो समर कैम्प भी जीम लेता है। जो आनंद हमें नानी-दादी के घर आता था, उसे मोटी फीस देकर भी हम समर कैम्प में नहीं पा सकते। हालांकि, इस सबका अभिप्राय यह नहीं है कि समर कैम्प और हॉबी क्लासेस का महत्व नहीं है। बदली परिस्थितियों में यह हमारी छुट्टियों को उपयोगी बनाते हैं।
सोमवार, 16 मार्च 2026
अनूठा जन्मदिन : पुस्तकों से तौले गए 8 वर्षीय मारुति
भोपाल में 8 वर्षीय बालक मारुति का जन्मदिन अनूठे ढंग से मनाया गया। पूरे उत्सव में भारतीय संस्कृति की गहरी झलक दिखाई दी। मारुति के माता-पिता और दादा-दादी ने भारतीय पद्धति के अनुसार जन्मदिन की योजना बनाई। इस उत्सव को सार्थक स्वरूप देते हुए 'पुस्तक-तुला' का आयोजन किया गया, जिसमें मारुति को पुस्तकों से तौला गया। तराजू के एक पलड़े में मारुति को बैठाया गया और दूसरे पलड़े में पुस्तकें रखी गईं। जो भी अतिथि आए थे, वे अपने साथ लाई गई पुस्तकें या वहां उपलब्ध पुस्तकों को दूसरे पलड़े में तब तक रखते गए, जब तक मारुति का पलड़ा ऊपर नहीं उठ गया। इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। परिवार 'पुनरुत्थान विद्यापीठ' से जुड़ा हुआ है और इस प्रकार जन्मदिन मनाने की प्रेरणा उन्हें वहीं से प्राप्त हुई। मारुति की शिक्षा भी पुनरुत्थान विद्यापीठ के गुरुकुल में चल रही है।
शुक्रवार, 22 अगस्त 2025
ऐसा शिखालेख आपने देखा नहीं होगा
माखनलालजी का समाचारपत्र ‘कर्मवीर’ बना अनूठा शिलालेख
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| माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के परिसर में स्थापित पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा और उस पर लगा अनूठा शिलालेख |
स्मारक, भवन, परिसर इत्यादि के भूमिपूजन या उद्घाटन प्रसंग पर पत्थर लगाने (शिलालेख) की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। यह इस बात का दस्तावेज होता है कि वास्तु का भूमिपूजन/ उद्घाटन / लोकार्पण कब और किसके द्वारा सम्पन्न किया गया। ये शिलालेख एक प्रकार से इतिहास और महत्वपूर्ण घटनाओं के विवरण को समझने में सहायता करते हैं। इन शिलालेखों का एक तयशुदा प्रारूप है, हम सबने देखे ही हैं। किंतु, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के नवीन परिसर में स्वतंत्रतासेनानी एवं प्रखर संपादक पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के प्रतिमा अनावरण प्रसंग पर लगाया गया शिलालेख अनूठा है और अपने आप में अद्भुत है। मुझे विश्वास है कि ऐसा शिलालेख आपने पहले नहीं देखा होगा। माखनलालजी की प्रतिमा के ‘पेडस्टल’ पर आपको समाचारपत्र का प्रथम पृष्ठ चस्पा दिखायी देगा। दरअसल, समाचारपत्र का यह ‘फ्रंट पेज’ ही दादा माखनलाल चतुर्वेदी की इस प्रतिमा का ‘शिलालेख’ है। यह रचनात्मक और अभिनव शिलालेख अपने सृजनात्मक लेखन के लिए पहचाने जानेवाले विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी की सुंदर कल्पना है। अगर आप माखनलालजी की प्रतिमा के समीप आ रहे हैं, तो यह शिलालेख आपको विश्वविद्यालय की 35 वर्ष की यात्रा, उसकी उपलब्धियों और भविष्य के स्वप्नों से भेंट करा देगा।
रविवार, 17 अगस्त 2025
स्वयं से साक्षात्कार का अवसर
“सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर्स रिट्रीट : रोल ऑफ डिजिटल मीडिया इन ट्रांसफॉर्मिंग सोसायटी”
प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्याल के मीडिया आयाम की ओर से 30 जुलाई से 3 अगस्त, 2025 तक पहली बार ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स रिट्रीट : रोल ऑफ डिजिटल मीडिया इन ट्रांसफॉर्मिंग सोसायटी’ का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से सोशल मीडिया के प्रभावशाली उपयोगकर्ता आए। कई जाने-पहचाने थे तो कुछ से नया परिचय हुआ। उनके काम ने नया सीखने और करने की ललक पैदा की। जब मैं ब्रह्माकुमारीज के इस आयोजन के लिए भोपाल से प्रस्थान कर रहा था तब हृदय में उत्साह था, मन में जिज्ञासा और आत्मा कहीं भीतर से एक नए अनुभव के लिए पुकार रही थी। इस यात्रा का उद्देश्य मात्र एक ‘रिट्रीट’ में भाग लेना नहीं था, बल्कि अपने भीतर छुपी उस नीरव शांति को खोज पाना था, जिसे रोज़मर्रा की भागदौड़ ने जैसे ढंक लिया है। यकीनन, मेरे लिए यह आयोजन ‘सोशल मीडिया रिट्रीट’ से कहीं अधिक स्वयं से साक्षात्कार का अवसर बन गया। आबू रोड स्थित ब्रह्माकुमारी के मनमोहिनीवन परिसर में प्रवेश करते ही आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति हुई। पहले ही दिन प्रतीत हो गया कि आगामी चार दिन, अविस्मरणीय होनेवाले हैं। यह आयोजन मेरे जीवन का एक ऐसा अनमोल अनुभव बना जिसने मेरी सोच, दृष्टिकोण और आत्मिक ऊर्जा को एक नया आयाम दिया। यहाँ से आध्यात्मिक चेतना से जुड़ने की दिशा में एक नये सफर की शुरुआत करने का प्रयास रहेगा।
बुधवार, 13 अगस्त 2025
कुत्तो की चिंता परंतु गो-हत्या पर चुप्पी, क्यों?
आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर आश्रय स्थल भेजने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद कुछ लोगों का श्वान प्रेम अचानक से जाग गया है। जरा सोचिए, इन लोगों का यह प्रेम / चिंता / संवेदना गाय के प्रति क्यों नहीं जागती... अपितु गो-संरक्षण के मुद्दे पर इनके तर्क ठीक उलट होते हैं। गाय के प्रति इनकी सोच इतनी निर्दयी है कि ये लोग गाय को कसाई के हाथों काटे जाने के पक्षधर दिखाई पड़ते हैं। इनके लोग स्वयं भी गाय काटकर सड़क/चौराहों पर उसके रक्त/मांस भक्षण का उत्सव मनाते हैं।
आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर आश्रय स्थल में भेजने के निर्णय का विरोध करने जो 'डॉग लवर्स' सोशल मीडिया/सड़कों पर मोमबत्ती लेकर उतरे हैं, उनमें से कई लोग कई जीवों का भक्षण बहुत स्वाद से करते होंगे। जब ये लोग बोटी/हड्डी को चटकारे लेकर चबाते हैं तब क्या इनके भीतर से आवाज नहीं आती कि अपने स्वाद के लिए किसी के प्राण ही ले लिए? यहां तो कुत्तों को मारा नहीं जा रहा है, उन्हें केवल सड़क से शेल्टर में शिफ्ट किया जा रहा है। कभी सोचा है कि आप लोग तो अपनी जीभ के स्वाद के लिए कितने की बकरों/मुर्गों की हत्या के कारण बन चुके हो?
गुरुवार, 24 जुलाई 2025
उपराष्ट्रपति के त्याग-पत्र ये सियासी प्याली में आया तूफान
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के त्यागपत्र ने सियासी प्याली में तूफान ला दिया है। विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक उनके अचानक त्यागपत्र देने के निर्णय से आश्चर्यचकित है। त्यागपत्र के पीछे की वजह उन्होंने अपने स्वास्थ्य को बताया है, लेकिन उनकी इस बात पर कोई भी सहज विश्वास करने को तैयार नहीं है। राजनीतिक गलियारे से बाहर निकलकर देखते हैं तो सामाजिक क्षेत्र से विशिष्ट एवं आमजन भी हैरान है। दरअसल, उपराष्ट्रपति के रूप में जगदीप धनखड़ ने अपनी एक अलग छवि बनायी थी। उनकी अपनी विशिष्ट शैली थी। स्वभाव से विनम्र थे लेकिन अपनी बात को कहने में कभी कोई संकोच नहीं किया। विपक्ष के नेता उनसे इसलिए परेशान रहते थे क्योंकि सदन को नियमों से चलाने में वे कतई कोताही नहीं बरतते थे। विपक्ष को खरी-खरी सुनाने में और सत्ता पक्ष को चेतावनी देने का कार्य वे बराबर करते थे।
शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2025
अवैध अप्रवासियों की वापसी
अमेरिका से अवैध भारतीय प्रवासियों को वापस भारत भेजे जाने पर विपक्षी दल जिस प्रकार से राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि नियम-कायदों एवं संविधान में उनका विश्वास है या नहीं? संविधान केवल चुनावी सभाओं में लहराने के लिए नहीं होता है, अपितु जीवन में उसका पालन करना होता है। किसी भी देश में रहने के लिए वहाँ के नियम-कानूनों का पालन करना चाहिए। अमेरिका से भारत के उन नागरिकों को वापस भेजा जा रहा है जो वहाँ अवैध रूप से रह रहे थे। अवैध अप्रवासियों के कारण किस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं, उसकी अनुभूति भारत को भली प्रकार से है। अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं के कारण भारत के कई हिस्सों में जनसांख्यकीय असंतुलन के साथ ही सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक खतरे पैदा हो गए हैं। सामाजिक संगठन और आम नागरिक कब से भारत सरकार से माँग कर रहे हैं कि अवैध बांग्लादेशियों एवं रोहिंग्या मुसलमानों को पहचान करके उन्हें वापस भेजा जाए।
बुधवार, 8 जनवरी 2025
घर-घर दीप जलाएं… आओ, एक और दीपावली मनाएं
प्राण-प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ
एक वर्ष पहले पौष शुक्ल द्वादशी (22 जनवरी, 2024) को भारतवासियों ने त्रेतायुग के बाद एक बार फिर अपने आराध्य भगवान श्रीराम के स्वागत में घर-घर दीप जलाए थे। श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में बने भव्य मंदिर में जब श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब प्रत्येक रामभक्त की आँखों से नेह की धारा बह रही थी। आखिर रामभक्त भाव-विभोर हों भी क्यों नहीं, लगभग 500 वर्षों की प्रतीक्षा एवं संघर्ष के बाद जन्मभूमि में उल्लासपूर्वक श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। यह दिन भारत के लिए अविस्मरणीय है। प्रत्येक भारतवासी का मन था कि श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को उत्सव की परंपरा में शामिल कर दिया जाए। जैसे रावण का वध करके प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने की घटना को हमने दीपोत्सव के रूप में त्रेतायुग से आज तक अपनी स्मृति में संजोकर रखा है, उसी तरह श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के उत्सव को भी ‘दीपावली’ की भाँति ही मनाया जाए। पौष शुक्ल द्वादशी को प्रत्येक हिन्दू घर रोशन हो और देहरी-मुडेर पर दीपों की मालिका जगमगाए।
मंगलवार, 7 जनवरी 2025
पत्रकार सुरक्षित होंगे, तभी बचेगा लोकतंत्र
छत्तीसगढ़ के पत्रकार मुकेश चंद्राकार के हत्यारों को मिले कड़ी सजा
लोकतंत्र की मजबूती के लिए पत्रकारिता एवं पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। कहना होगा कि किसी भी देश में पत्रकार सुरक्षित नहीं है। भारत में भी पत्रकारों पर हमले होते रहते हैं। यहाँ तक कि उनकी हत्या कर दी जाती है। हालिया घटना छतीसगढ़ के पत्रकार मुकेश चंद्राकर से जुड़ी हुई है। हत्या के बाद उनके शव को सेप्टिक टैंक में डालकर ऊपर से प्लास्टर कर दिया गया। मुकेश की हत्या के पीछे एक रिपोर्ट को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। यह रिपोर्ट घटिया सड़क निर्माण की पोल खोलने से संबंधित है। पत्रकार मुकेश की रिपोर्ट के अनुसार, ठेकेदार सुरेश चंद्राकार ने मिरतुर से गंगालूर के बीच सड़क बनाने का ठेका लिया था, लेकिन सड़क अधूरी बनने के बाद भी प्रशासन ने 90 प्रतिशत से अधिक भुगतान कर दिया। इस मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। इसी मामले को स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकार मुकेश चंद्रकार ने उजागर किया था। उनकी खोजी रिपोर्ट के सामने आने के बाद सड़क निर्माण की परियोजना पर छत्तीसगढ़ सरकार ने जाँच बैठा दी थी। पूरी आशंका है कि इसी कारण ठेकेदारों ने मुकेश को अपने निशाने पर ले लिया। मामले में मुख्य आरोपी सहित चार लोग पकड़े गए हैं।
सोमवार, 6 जनवरी 2025
आक्रांता और लुटेरा ही था गजनवी
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने महमूद गजनवी को बताया लुटेरा
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने महमूद गजनवी को आक्रमणकारी और डाकू-लुटेरा बताकर खलबली मचा दी है। आसिफ ने समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा है कि “महमूद गजनवी आता था और लूटमार करके वापस चला जाता था। हालांकि, हमारे यहाँ उसे हीरो के तौर पर चित्रित किया जाता है, लेकिन मैं उसे हीरो नहीं मानता”। उनके बयान को पाकिस्तान में ‘एंटी पाकिस्तान’ कहा जा रहा है। पाकिस्तान के दूसरे बड़े नेता रक्षा मंत्री के बयान को ‘भारतीय सोच’ बता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान महमूद गजनवी को अपना आदर्श मानता है। यहाँ तक कि पाकिस्तान ने अपनी मिसाइलों को गजनवी का नाम दिया है। हालांकि, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का कहना बिल्कुल ठीक है क्योंकि जिस समय महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किया और यहाँ लूट-मार की थी, तब पाकिस्तान नाम का अस्तित्व ही नहीं था। भले ही पाकिस्तान इतिहास को झुठलाए लेकिन यह सत्य है कि भारत और पाकिस्तान का साझा इतिहास है। वह इतिहास बताता है कि पाकिस्तान के लिए भी महमूद गजनवी एक लुटेरा ही था।
रविवार, 29 दिसंबर 2024
मेरा 'अमरकंटक' इतना पसंद आया कि लेखक ने अपने नाम से पुस्तक में छाप डाला
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| उस पुस्तक का पृष्ठ, जहाँ मेरे आलेख (संत कबीर साहेब की तपस्थली 'कबीर चबूतरा') की सामग्री को ज्यों का त्यों लिया गया है। |
सतपुड़ा के सौंदर्य के आकर्षण में एक यात्रा वृत्तांत पढ़ रहा था। सतपुड़ा की घाटियों से बैतूल और अन्य स्थानों के वर्णन का रसास्वादन करके अमरकंटक के अध्याय पर पहुंचा। अमरकंटक के प्रति मेरे मन में एक अबूझ-सा प्रेम-आकर्षण है। अमरकंटक पर मैंने भी अपना कुछ लिखा-पढ़ा है, जो कई जगह प्रकाशित भी है।
जैसे ही एक-डेढ़ पैराग्राफ के बाद पढ़ना शुरू किया, मुझे लगा कि यह तो मैंने ही लिखा है। अमरकंटक की यह मेरे हृदय की अनुभूति है। एक स्थान को लेकर क्या दो लेखकों के हृदय की अनुभूति इतनी समान हो सकती है कि एक-एक शब्द, एक-एक पंक्ति, एक-एक भाव एक समान रूप से अभिव्यक्त हो! लेखक ने 2022 में प्रकाशित अपनी पुस्तक में 2019 में लिखे/प्रकाशित मेरे आलेख को जैसे का तैसा उतार (कॉपी-पेस्ट) दिया है। यहां तक कि इस व्यक्तिगत उल्लेख को भी नहीं बदला- पहले ही अनुभव में प्राकृतिक-नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर इस स्थान ने अमिट छाप मन पर छोड़ दी। अच्छी बात यह है कि यहाँ अभी तक बाजार की पहुँच नहीं हुई है। इसलिए यह तीर्थ-स्थल अपने मूल को बचाए हुए है। यहाँ के वातावरण में अब तक गूँज रहे कबीर के संदेश को अनुभूत करने के लिए लगभग तीन-चार घंटे तक यहाँ रहा। यकीन मानिये, माँ नर्मदा के तट पर बैठना और यहाँ कबीरीय वातावरण में बैठना, अमरकंटक प्रवास के सबसे सुखकर अनुभव रहे। उस समय आश्रम में रह रहे कंबीरपंथी संन्यासी रुद्रदास के पास बैठकर कबीर वाणी सुनी-
कबीर बादल प्रेम का, हम पर बरसा आई।
अंतरि भीगी आतमा, हरी भई बनराई ॥
अर्थात् संत कबीर कहते हैं- 'प्रेम का बादल मेरे ऊपर आकर बरस पड़ा, जिससे अंतरात्मा तक भीग गई, आस-पास पूरा परिवेश हरा-भरा हो गया, खुश हाल हो गया, यह प्रेम का अपूर्व प्रभाव है। हम इसी प्रेम में क्यों नहीं जीते।' यकीनन, कबीर की वाणी हमारी अंतरात्मा को भिगो देती है। कबीर चबूतरा से जब लौटे तो लगा कि कबीर प्रेम गहरे पैठ गया है। अंतर्मन एक अल्हदा अहसास में डूबा हुआ है।
मुझे कभी बुरा नहीं लगता कि किसी ने मेरा लिखा बिना बिना अनुमति या बिना उल्लेख/संदर्भ के अपना बता कर छाप दिया। मेरा तो मन प्रसन्न हो होता है कि अपना लिखा लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि वे उसका अपने ढंग से उपयोग कर रहे हैं। इससे पहले भी एक अन्य पुस्तक में मैंने ऐसा देखा। कई लोग तो ऐसे भी देखे जिन्होंने पूरा का पूरा लेख ही उठाकर अपने नाम से प्रकाशित करा लिया। एक बार तो आधा आलेख निर्वाचन आयोग ने मतदाता जागरूकता अभियान में प्रकाशित विज्ञापन में उपयोग किया।
सतपुड़ा का यात्रा वृत्तांत बताकर प्रकाशित उस पुस्तक के बारे में मुझे यही लगता है कि अन्य सामग्री भी इधर-उधर से संकलित की गई। पुस्तक और लेखक की पहचान मैं जानबूझकर उजागर नहीं कर रहा हूँ। क्योंकि मैं नहीं चाहता कि उनकी पुस्तक को पूर्वाग्रह के साथ पढ़ा जाए या फिर उसे पढ़ा ही नहीं जाए।
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- अमरकंटक पर कुछ वीडियो ब्लॉग भी हैं, जिन्हें आप यूट्यूब चैनल 'अपना वीडियो पार्क' पर देख सकते हैं
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अमरकंटक में स्थिति कबीर चबूतरा पर यह वीडियो फिल्म भी अवश्य देखिए-
शुक्रवार, 15 नवंबर 2024
जनजातीय गौरव को बढ़ावा देने में अग्रणी मध्यप्रदेश
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| (जनजातीय गौरव दिवस के प्रसंग पर आलेख) |
मध्यप्रदेश वह राज्य है, जिसकी पहल पर देश को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मिला है। यह बात तो हर कोई मानता है कि मध्यप्रदेश की सरकार ने जनजातीय नायकों का गौरव बढ़ाने के लिए उनसे जुड़े स्मारकों का आगे बढ़कर विकास किया है। राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह, रानी कमलापति, रानी दुर्गावती, टंट्या मामा और भीमा नायक से लेकर कई नायकों के योगदान से लोगों को परिचित कराने के उल्लेखनीय कार्य किए हैं। मंडला के मेडिकल कॉलेज का नाम बलिदानी हृदयशाह के नाम पर किया गया। वहीं, छिंडवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम ‘राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय’ किया। हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘रानी कमलापति रेलवे स्टेशन’ किया गया। जबलपुर में 100 करोड़ की लागत से ‘रानी दुर्गावती स्मारक’ को विकसित किया जा रहा है। जनजातीय गौरव को बढ़ाने के साथ ही जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए भी मध्यप्रदेश सरकार ने उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। विगत 20 वर्षों में जनजातीय योजनाओं का बजट 1000 प्रतिशत बढ़ा है। मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जहाँ जनजातीय समुदाय के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए पेसा कानून को लागू किया गया है। जनजातीय समुदाय से आनेवाली पहली महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की गरिमामयी उपस्थिति में 15 नवंबर, 2022 को मध्यप्रदेश के 20 जिलों के 89 विकासखंडों को पेसा कानून की सौगात मिली।
मंगलवार, 23 जनवरी 2024
राम दीपावली
कैलेंडर में 22 जनवरी पर अंगुली रखते हुए आज सुबह–सुबह बिटिया ने पूछा– “22 तारीख के नीचे कुछ लिखा क्यों नहीं है?”
उसके प्रश्न के मूल को समझे बिना मैंने उत्तर दिया– “लिखा तो है– द्वादशी”। चूंकि भारतीय कालगणना को लेकर बात चल रही थी, इसलिए यह उत्तर मैंने दिया।
अपने प्रश्न का उत्तर न पाकर, उसने फिर से आश्चर्य के भाव के साथ कहा– “हमने कल जो त्योहार मनाया, दीप जलाए, रोशनी की। यहां उसके बारे में कहां लिखा है?”
मैंने हर्षित मन से उसे बताया– “अब जो कैलेंडर छपकर आयेंगे, उन पर लिखा होगा ‘राम दीपावली’। परंतु उसे भी हमें 22 जनवरी को नहीं, पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को ही इसी उत्साह से मानना है”।
“मतलब, अब हम दो बार दीवाली मनाएंगे। फटाखे चलाएंगे और मिठाई भी खायेंगे। जय हो रामलला की”। उसका उत्साह देखते ही बन रहा था। अभी उसे पता नहीं कि अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम का मंदिर बनने का क्या महत्व है? कितना बड़ा संघर्ष इस राम दीपावली के लिए रहा है? मैं उसे पूरी राम कहानी बताऊंगा। भारत के प्राण, उत्साह और विश्वास से परिचित कराऊंगा।
उसे यह जानना ही चाहिए कि ‘राम दीपावली’ मनाने का यह सौभाग्य हमें यूं ही प्राप्त नहीं हो गया है। इसके पीछे 500 वर्ष का संघर्ष, कठिन तपस्या और हजारों रामभक्तों का बलिदान है...
श्री अयोध्या धाम में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का आनंद प्रकट करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर राम ज्योति जलाकर मनाई राम दीपावली
गुरुवार, 26 अक्टूबर 2023
विघटनकार शक्तियों को विफल करने का मंत्र है- भारत माता की भक्ति
भारत दे सकता है विश्व को सुख-शांतिमय नवजीवन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परंपरा में विजयादशमी के उत्सव पर सरसंघचालक के उद्बोधन का विशेष महत्व है। विजयादशमी हिन्दुओं का बड़ा सामाजिक उत्सव होने के साथ ही संघ की स्थापना का उत्सव भी है। इस उत्सव में सरसंघचालक जी का जो उद्बोधन होता है, उसमें स्वयंसेवकों के लिए पाथेय रहता है। इसके साथ ही उनके भाषण में समसामयिक मुद्दों को लेकर समाज की सज्जन शक्ति के लिए भी संदेश रहता है। चूँकि आज संघ पर सबकी निगाहें रहती हैं और विभिन्न विषयों को लेकर संघ के दृष्टिकोण को जानने की भी अपेक्षा रहती है, इसलिए भी विजयादशमी पर होनेवाले सरसंघचालक के उद्बोधन को लेकर सबको विशेष उत्सुकता रहती है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने अपने उद्बोधन में सब प्रकार की बातों को ध्यान रखा। उन सब मुद्दों पर संघ का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिन पर देशभर में चर्चाएं चल रही हैं। विजय का पर्व है, इसलिए देशवासियों के मन में उत्साह का संचार हो इसलिए उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत भारत की उपलब्धियों के साथ ही की। वीरांगना रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती, छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना के 350वें वर्ष, छत्रपति शाहू जी महाराज की 150वीं जयंती और संत श्रीमद् रामलिंग वल्ललार की 200वीं जयंती का उल्लेख करके उन्होंने यही संदेश दिया है कि अमृतकाल में जब हम भारत के ‘स्व’ के जागरण का उपक्रम कर रहे हैं, तब हमें ऐसी महान विभूतियों के जीवन से अवश्य ही प्रेरणा लेनी चाहिए। एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के निर्माण के लिए व्यवहार से लेकर व्यवसाय में और व्यक्ति से लेकर राष्ट्र की नीति में, ‘स्व’ दिखना चाहिए।
RSS Sarsanghchalak Dr. Bhagwat Said, This was also the 350th year of coronation of Chattrapati Shri Shivaji Maharj, who showed us the path of liberation from 350 years of foreign subjugation, by establishing the Hindavi Swaraj based on justice and public welfare. #RSSnagpur2023 pic.twitter.com/7xkSuEqskZ
— लोकेन्द्र सिंह (Lokendra Singh) (@lokendra_777) October 24, 2023
शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2023
हमास के आतंकवाद के विरुद्ध इजरायल के साथ खड़ा है भारत
इजरायल पर हुए आतंकी हमले ने सबको दहला कर रख दिया है। जिस तरह की नृशंसता और वहशीपन के वीडियो सामने आए हैं, उनको देखकर कोई भी भला व्यक्ति हमास के साथ खड़ा नहीं हो सकता। परंतु जो लोग इस सबके बाद भी हमास के साथ खड़े हैं, उनकी मानसिकता को समझना कठिन नहीं है। ये लोग मानवता के विरोधी हैं। इनकी संवेदनाएं झूठी और बनावटी हैं। ये संवेदनाओं का उपयोग विरोधी विचार पर हमला करने के लिए करते हैं। एक तरह से इन्हें बौद्धिक आतंकवादी कहा जा सकता है। इससे यह भी ध्यान आता है कि ऐसी ही बर्बरता यहूदियों के साथ इतिहास के उस कालखंड में की गई होगी, जब उन्हें इजरायल से बेदखल किया गया। हमास के आतंकी जिस बर्बरता से इजरायल की महिलाओं एवं महिला सैनिकों के साथ पेश आ रहे हैं, उसकी एक सुर में भर्त्सना ही की जा सकती है।



















