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मंगलवार, 9 जून 2026

विश्व का नेतृत्व करेगा संगठित भारत

संघ शताब्दी वर्ष : सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और मुख्य अतिथि कुमार मंगलम बिरला ने दिखाई भविष्य के भारत की तस्वीर, वर्तमान की तैयारियों की ओर किया संकेत

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग-2 के समापन समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और मुख्य अतिथि प्रसिद्ध उद्योगपति एवं पद्मभूषण से सम्मानित कुमार मंगलम बिरला के वक्तव्य भविष्य के भारत की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं, जो स्वयं सशक्त और आत्मनिर्भर होकर विश्व बंधुत्व की भावना का प्रवर्तक बनेगा। जिस समय दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी-बड़ी शक्तियों के बीच संघर्ष चल रहा है, शांति की कोई राह दिखाई नहीं देती, तब भारत का दर्शन सबका मार्ग प्रशस्त कर सकता है। दुनिया को सुख-शांति से जीना है, तब उसे भारत की ओर देखना ही होगा। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने उचित ही कहा कि “भारत का समय आ गया है। कलह और स्वार्थ में फँसकर लड़खड़ाती हुई इस दुनिया को आज केवल भारत की ही आवश्यकता है”। भारत दुनिया को इस कलह से बाहर निकाल सकता है, उसके लिए सबसे पहले हमें अपने देश को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना पड़ेगा। दुनिया भी उसी के सत्य को सुनती है, जो शक्ति सम्पन्न होता है।

शनिवार, 20 सितंबर 2025

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी : भारतीय कालगणना की ओर बढ़ते कदम

भारत का समय-पृथ्वी का समय

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री आवास के बाहर लगी 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी'

पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश की धरती सांस्कृतिक पुनरुत्थान का केंद्र बन गई है। सांस्कृतिक पुनरुत्थान के इन प्रयासों में नयी कड़ी है- विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास पर ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अनावरण करके भारतीय कालगणना की ओर आम लोगों का ध्यान तो खींचा ही है, इसके साथ ही कालगणना की अपनी परंपरा को फिर से लोक प्रचलन में लाने के प्रयासों का केंद्र बिन्दु भी मध्यप्रदेश को बना दिया है। यह पहल उम्मीद जगाती है कि भविष्य में पंचांग पर आधारित यह ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ लोक प्रचलन में आ जाएगी और तिथि, मुहूर्त, माह, व्रत, त्योहार की सटीक जानकारी प्राप्त करने की हमारी कठिनाई को दूर कर देगी। सबको उम्मीद है कि हमारे हाथ पर बंधी डिजिटल घड़ियों में भी जल्द ही यह सुविधा आ जाएगी कि हम उनमें ‘भारत का समय’ देख सकें। फिलहाल ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ऐप के रूप में उपलब्ध है, जिसे हम अपने मोबाइल फोन में उपयोग कर सकते हैं। हमें याद रखना चाहिए कि मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक नगर उज्जैन का कालगणना के साथ गहरा नाता है। यहाँ प्रकाशित ज्योतिर्लिंग को इसलिए ही ‘महाकाल’ कहा गया है। यह शुभ संयोग ही है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी महाकाल की नगरी उज्जैन से आते हैं।

सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

ओलंपिक की मेजबानी करने उत्साहित है भारत

मोदी सरकार के कार्यकाल में अन्य क्षेत्रों की भाँति खेल के क्षेत्र में भी भारत ने उत्साहवर्धक प्रगति की है। देश में खेलों को लेकर एक सकारात्मक वातावरण बन गया है। जिसका परिणाम हैं कि भारत के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अतंरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों से उत्साहित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते शनिवार को ओलंपिक समिति के एक सत्र को संबोधित करते हुए वह बात कह दी, जिसको सुनने की प्रतीक्षा भारत के नागरिक लंबे समय से कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी भारत करना चाहेगा। ओलंपिक की मेजबानी प्राप्त करने के लिए भारत कोई कसर नहीं छोड़ेगा। यदि भारत ओलंपिक खेलों की मेजबानी प्राप्त करने में सफल होता है, तब यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।

सोमवार, 28 अगस्त 2023

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आग्रह स्वीकार करें युवा वैज्ञानिक


वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्रा से सीधे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पहुंचे। यहां उन्होंने चंद्रयान–3 की उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया है। इस अवसर पर उनके चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था। मानो वे भारत की इस सफलता का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। मानो चंद्रयान–2 की आंशिक विफलता के बाद उन्होंने पूर्ण सफलता का संकल्प ले रखा हो। यह सच भी है। इसरो के वैज्ञानिकों ने खुलकर इस बात को कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें चंद्रयान सहित अन्य परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहित किया है। उनके जैसा नेतृत्व मिलना कठिन है। उनके कारण से वैज्ञानिक क्षेत्र को एक संबल मिला है। हम सबको याद है कि पिछली बार रोवर की सफल लैंडिंग नहीं होने पर जब वैज्ञानिक निराश हो रहे थे तब प्रधानमंत्री मोदी से उन्हें गले लगाकर संबल दिया और फिर से तैयारी करने को कहा। हमें वह दौर भी याद है जब नंबी नारायण जैसे महान वैज्ञानिक को फंसाने के लिए षड्यंत्र किया गया। उनको अनेक प्रकार से प्रताड़ित किया गया। दोनों समय का यही फर्क है।

शुक्रवार, 25 अगस्त 2023

अब सूरज की ओर... अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम

पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष विज्ञान में मिली बड़ी सफलताओं ने भारत के वैज्ञानिकों को नया हौसला दिया है। चंद्रयान–3 की सफलता के बाद से तो अब विश्व भी भारत की ओर आशा से देखने लगा है। भारत की जिस प्रकार की तैयारी है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि नया भारत दुनिया को निराश नहीं करेगा। चंद्रमा पर अपना झंडा गाड़ने के बाद अब भारत सूरज की ओर अपने कदम बढ़ाने को तैयार है। भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थान (इसरो) के वैज्ञानिकों ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। इसी सितंबर में सूर्य तक पहुंचने के लिए आदित्य एल-1 की लॉन्चिंग हो सकती है।

रविवार, 27 नवंबर 2022

संविधान के प्रति आरएसएस का दृष्टिकोण

आरएसएस और संविधान



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का प्रभावशाली सांस्कृतिक संगठन है। उसके विचार एवं गतिविधियों से समाज का मानस बनता और बदलता है। इसलिए अकसर विभिन्न विषयों को लेकर चर्चा चलती है कि उन विषयों पर संघ का विचार क्या है? कई बार ऐसा भी होता है कि भारतीयता विरोधी और विदेशी विचार से अनुप्राणित समूह भी राष्ट्रीय प्रतीक और संघ के संदर्भ में मिथ्याप्रचार कर देते हैं। दोनों ही कारणों से बौद्धिक जगत से लेकर आम समाज में भी संघ के दृष्टिकोण को जानने की उत्सुकता रहती है। भारतीय संविधान भी ऐसा ही विषय है, जिस पर संघ के विचार सब जानना चाहते हैं। दरअसल, भारत विरोधी ताकतों ने अपने समय में यह मिथ्याप्रचार जमकर किया है कि आरएसएस संविधान विरोधी है? वह वर्तमान संविधान को खत्म करके नया संविधान लागू करना चाहता है। मजेदार बात यह है कि गोएबल्स की अवधारणा में विश्वास रखनेवाले गिरोहों ने इस तरह के झूठ की बाकायदा एक पुस्तिका भी तैयार करा ली, जिस पर वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का चित्र एवं नाम प्रकाशित किया गया और लिखा गया था- नया भारतीय संविधान। संघ की ओर से इस दुष्प्रचार के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी गई, उसके बाद से यह मिथ्याप्रचार काफी हद तक रुक गया। और भी अनेक प्रकार के भ्रम खड़े करने के प्रयास संघ विरोधी एवं भारत विरोधी ताकतों की ओर से किए गए हैं लेकिन बिना पैर के झूठ संघ की प्रामाणिक एवं देशभक्त छवि के कारण समाज में टिकते ही नहीं हैं।

रविवार, 4 सितंबर 2022

गुलामी के चिह्न मिटाकर ‘स्व’ की स्थापना

नया भारत विश्व क्षितिज पर अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के साथ ही अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। अपनी जड़ों से जुड़कर ही भारत अनंत आकाश को नाप सकेगा। स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद जब भारतीय नौसेना को अपना प्रथम स्वदेशी विमान वाहक पोत मिला तब नया भारत एक नया इतिहास लिख रहा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसे कुछ इस तरह अभिव्यक्ति दी- ‘‘केरल के समुद्री तट पर पूरा भारत एक नए भविष्य के सूर्योदय का साक्षी बन रहा है। आईएनएस विक्रांत पर हो रहा यह आयोजन, विश्व क्षितिज पर भारत के बुलंद होते हौसलों की हुंकार है’’। प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में विश्वास की गूंज है, जो अब दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को सक्षम बनाने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जो सपना देखा और दिखाया, अब हम उसकी ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

बुधवार, 13 अक्टूबर 2021

अंतरिक्ष विज्ञान में भारत के बढ़ते कदम


भारतीय अंतरिक्ष संघ (इंडियन स्पेस एसोसिएशन) की स्थापना के साथ भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। अंतरिक्ष विज्ञान में भारत को नयी ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अपना एक दृष्टिकोण है। विज्ञान के क्षेत्र में भारत नवोन्मेष का केंद्र बने, इसके लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के साथ न केवल उन्होंने संवाद बढ़ाया है बल्कि वैज्ञानिकों को नवोन्मेष के लिए प्रोत्साहित भी किया है। पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

सोमवार, 9 अगस्त 2021

ओलिंपिक में भारत के लिए ‘स्वर्ण’ की शुरुआत


टोक्यो ओलिंपिक में भारत के सुनहरे सफर का समापन स्वर्ण पदक के साथ हुआ। भारतीय सेना के जवान एवं खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने 121 वर्ष की लंबी प्रतीक्षा के बाद एथलेटिक्स में पहला स्वर्ण पदक दिलाया है। भाला फेंक प्रतियोगिता में उन्होंने अपने परिश्रम से भारत के भाल को स्वर्ण से अलंकृत कर दिया। टोक्यो ओलिंपिक भारत के लिए अब तक का सबसे सफल ओलिंपिक रहा है। भारत ने एक स्वर्ण और दो रजत पदक सहित कुल 7 पदक जीते हैं। इससे पहले हमने लंदन ओलिंपिक में 6 पदक जीते थे। इस बार नीरज चोपड़ा के स्वर्ण के अलावा मीराबाई चानू ने भारोत्तोलन में रजत, कुश्ती में रवि दहिया ने रजत, कुश्ती में ही बजरंग पूनिया ने कांस्य, पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में कांस्य और लवलिना बोरगोहेन ने मुक्केबाजी में कांस्य पदक भारत के नाम किए। हालाँकि भारत से और अधिक बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा थी। टोक्यो ओलिंपिक भारत के लिए अब तक का सबसे सफल ओलिंपिक रहा, इसके पीछे मोदी सरकार की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सोमवार, 26 जुलाई 2021

आज की आवश्यकता है 'भारत जोड़ो आंदोलन'

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देश के नागरिकों से महत्वपूर्ण आह्वान किए हैं। प्रधानमंत्री की पहल पर समूचा देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने पर 'आजादी का अमृत महोत्सव' मना रहा है। देश के ऐसे बलिदानियों को याद किया जा रहा है, जिन्हें इतिहास की पुस्तकों या अन्यत्र वह स्थान नहीं मिला, जो मिलना चाहिए था। इस उत्सव को और अधिक विस्तार देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मोदी ने अपील की है कि यह किसी राजनीतिक दल या सरकार का आयोजन नहीं है बल्कि यह सभी भारतवासियों का कार्यक्रम है। इसलिए सभी लोगों को अमृत महोत्सव से जुडऩा चाहिए और महापुरुषों का स्मरण करें। यकीनन जब हम अपने महापुरुषों को याद करेंगे, तब उनके व्यक्तित्व के साथ उनका कृतित्व का स्मरण भी करेंगे, जो हमें गौरव की अनुभूति से भरेगा। साथ ही यह भी ध्यान आएगा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए हमने कितना संघर्ष किया है। स्वतंत्रता का मूल्य क्या है? अपने महापुरुषों का स्मरण करेंगे तब हम भारत, भारतीयता और भारतीय मूल्यों के अधिक नजदीक भी जाएंगे। 

'मन की बात' के 79वें संस्करण में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सामयिक आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि "बात जब आजादी के आंदोलन और खादी की हो तो पूज्य बापू का स्मरण होना स्वाभाविक है। जैसे बापू के नेतृत्व में 'भारत छोड़ो आंदोलन' चला था, वैसे ही आज हर देशवासी को 'भारत जोड़ो आंदोलन' का नेतृत्व करना है"। 'भारत जोड़ो आंदोलन' यदि जनांदोलन बन जाता है तब उसके अनेक सुखद परिणाम आएंगे। पहला, अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत जिस तेजी और मजबूती से आगे बढ़ रहा है, उसमें भारत की स्थिति और सशक्त होगी। दूसरा, भारत में सक्रिय 'ब्रेकिंग इंडिया ब्रिगेड' के मनसूबे ध्वस्त होंगे और भारत आंतरिक तौर पर और अधिक शक्तिशाली हो जाएगा। यह आंतरिक शक्ति भारत को प्रत्येक क्षेत्र में मजबूत करेगी। 

पिछले कुछ समय को गौर से देखें तो ऐसी अनेक भारत विरोधी ताकतें सक्रिय हैं, जो वर्ग, जाति, संप्रदाय एवं अन्य प्रकार के संघर्ष उत्पन्न करने की साजिशें रच रही हैं। उन उसको मुंहतोड़ जवाब देने के लिए 'भारत जोड़ो आंदोलन' की अनिवार्यता नजर आ रही है। भारत को स्वतंत्र कराने के लिए महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के विरुद्ध 'भारत छोड़ो आंदोलन' खड़ा किया। आज उसी स्वतंत्रता को मजबूत करने के लिए भी 'भारत जोड़ो आंदोलन' की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी के इस आह्वान के साथ सभी देशवासियों को जुडऩा चाहिए और इस आंदोलन को ऐतिहासिक रूप देकर भारत को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका का निर्वाहन करना चाहिए। 

मंगलवार, 19 मई 2020

‘देशप्रेम की साकार और व्यावहारिक अभिव्यक्ति है स्वदेशी’



मुझे आज तक एक बात समझ नहीं आई कि कुछ लोगों को स्वदेशी जैसे अनुकरणीय, उदात्त और वृहद विचार का विरोध क्यों करते हैं? स्वदेशी से उन्हें क्या दिक्कत है? आपको यह समझ आये कि ये लोग स्वदेशी का विरोध क्यों करते हैं या उसका मजाक क्यों बनाते हैं तो कृपया कमेंट बॉक्स में मुझे भी बताईयेगा।

मुझे लगता है कि स्वदेशी का विरोध वे ही लोग करते हैं जो मानसिकरूप से अभी भी गुलाम हैं या फिर उनको विदेशी उत्पाद से गहरा लगाव है। संभव है इनमें से बहुत से लोग उन संस्थाओं और संगठनों से जुड़े हों या प्रभावित हों, जो विदेशी कंपनियों से चंदा पाते हैं। 

जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया है और लोकल के लिए वोकल होने के लिए कहा है, तब से ही कुछ लोग सोशल मीडिया पर बढ़-चढ़ कर स्वदेशी का विरोध कर रहे हैं। आप इन्हें अच्छी तरह पहचान लीजिये, ये कौन लोग हैं जो भारत में बनी वस्तुओं और उनके उपयोग को हतोत्साहित कर रहे हैं। 

स्वदेशी भारत की अनेक समस्याओं का समाधान है। स्वदेशी का विचार लोगों के मन में बैठ गया तो लाखों लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। स्थानीय प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिलगा। हमारे कुशल कारीगरों के हाथ मजबूत होंगे। उनके उत्पाद की मांग बढ़ेगी तो किसे लाभ होगा? भारत को, भारत के लोगों को ही उसका लाभ मिलेगा। इसलिए जो लोग स्वदेशी का विरोध कर रहे हैं, असल में वे भारत का विरोध कर रहे हैं।
स्वदेशी केवल उत्पाद से जुड़ा हुआ विषय नहीं है बल्कि यह एक विचार है। एक आन्दोलन है। भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन का एक प्रमुख विचार रहा है, स्वदेशी। 

महात्मा गाँधी कहते थे- “स्वदेशी केवल रोटी, कपड़ा और मकान का नहीं अपितु सम्पूर्ण जीवन का दृष्टिकोण है। स्वदेशी देश की प्राणवायु है, स्वराज्य और स्वाधीनता की गारंटी है। गरीबी-भुखमरी और गुलामी से मुक्ति का उपाय है यह। स्वदेशी के अभाव में राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और मानसिक स्वातंत्र्य सर्वथा असंभव है।”


अपने आप को महात्मा गाँधी का उत्तराधिकारी बताते वाले ‘नकली लोगों’ को महात्मा गाँधी जी को ठीक से पढ़ना चाहिए, वे स्वदेशी के बारे में क्या सोचते थे। उनका तो पूरा जीवन ही स्वदेशी को समर्पित था। चरखे से सूत कातना और खादी के कपड़े पहनना, क्या था? विदेशी कपड़ों की होली जलना और नमक क़ानून का उल्लंघन, ये सब स्वदेशी की भावना को मजबूत करने और सब प्रकार की स्वतंत्रता प्राप्त करने के महात्मा गाँधीजी के प्रयोग थे। हम गाँधीजी के स्वदेशी के विचार को कैसे भूल सकते हैं, जबकि इस वर्ष हम उनकी 50वीं जयंती माना रहे थे। 

गाँधी-इरविन पैक्ट के समय चर्चा चल रही थी। दोपहर में चाय का समय था। वायसराय साहब के लिए चाय आई और महात्मा गाँधी के लिए नींबू पानी आया। वायसराय देख रहे थे कि गांधीजी क्या करते हैं? गांधीजी ने एक पुड़िया निकाली और उसे खोलकर उसमें से कुछ नींबू पानी में डाल दिया। वायसराय को समझ नहीं आया कि गाँधीजी ने क्या किया तो उन्होंने पूछा कि आपने यह क्या डाला पानी में? गांधीजी ने उत्तर दिया- “आपके नमक क़ानून का उल्लंघन कर मैंने जो नमक बनाया था, उस नमक की पुड़ी को मैंने इसमें डाला है।” इतना मजबूत और विस्तृत है स्वदेशी का विचार। 

स्वदेशी क्या है, उसे और विस्तार देते हुए प्रख्यात स्वदेशी चिन्तक दत्तोपंत ठेंगडी ने कहा है- “यह मानना भूल है कि ‘स्वदेशी’ का सम्बन्ध केवल माल या सेवाओं से है। यह फौरी किस्म की सोच होगी। इसका मतलब है देश को आत्मनिर्भर बनाने की प्रबल भावना, राष्ट्र की सार्वभौमिकता और स्वतंत्रता की रक्षा तथा समानता के आधार पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग।” उनका स्पष्ट मानना था कि स्वदेशी, देशप्रेम की साकार और व्यावहारिक अभिव्यक्ति है। 

स्वदेशी के विरोध में दो बहुत उथले तर्क दिए जाते हैं- एक, आप अपना मोबाइल फेंक दीजिये, टीवी फोड़ दीजिये, क्योंकि वे विदेशी उत्पाद हैं। दूसर कुतर्क है, सरकार विदेशी सामान के आयत पर प्रतिबन्ध क्यों नहीं लगा देती। पहले दूसरे कुतर्क का जवाब है कि अंतर्राष्ट्रीय नीतियों के कारण सरकार की कुछ मजबूरी हो सकती है, लेकिन हमारी क्या मजबूरी है विदेशी उत्पाद खरीदने की? हम खुद क्यों नहीं विदेशी उत्पाद से दूरी बना लेते। जब हम खरीदेंगे ही नहीं तो भविष्य में कभी वह माल बिकने के लिए यहाँ आएगा ही नहीं। 

इसको एक ऐतिहासिक उदाहरण से समझिये। एक वर्ष अमेरिका में प्रचुर मात्र में संतरे का उत्पादन हुआ। जापान की महिलाओं को संतरे बहुत पसंद थे। अमेरिका ने जापान को अपने संतरे बेचने के लिए उचित बाज़ार समझा और जापान पर दबाव बनाया कि वह अमेरिका के संतरे अपने बाज़ारों में बिकने दे। पहले तो जापान ने इनकार किया, लेकिन अमेरिका की धौंस-पट्टी के कारण उसे अपने बाज़ार खोलने पड़े। लेकिन, जैसे ही जापान की महिलाओं और अन्य नागरिकों को यह ज्ञात हुआ कि हमारे बाजारों में जो संतरे की भरी आवक दिख रही है, उसके पीछे अमेरिका की धौंस-पट्टी है तो उन्होंने बहुत पसंद होने के बाद भी संतरे नहीं खरीदे। यह है स्वदेशी के प्रति नागरिक बोध। कोई भी अंतर्राष्ट्रीय नीति या दबाव नागरिकों को मजबूर नहीं कर सकता।

पहले कुतर्क का उत्तर, स्वदेशी के लिए लम्बे समय से आन्दोलन चला रहे संगठन स्वदेशी जागरण मंच का एक नारा है- ‘चाहत से देसी, जरूरत से स्वदेशी और मजबूरी में विदेशी’। इस नारे में ही उस कुतर्क का सटीक उत्तर छिपा है, साथ में स्पष्ट सन्देश है। इसके बाद भी स्वदेशी विरोधियों को कुछ समझ न आये तो उनको कहिये कि उनसे कुछ हो न पायेगा। वे बस विरोध करते रहें। उनका विरोध भारत के कारीगरों, कामगारों और उत्पादकों के विरोध में हैं। वे नहीं चाहते कि देश के उत्पाद आगे बढ़ें, यहाँ के कारीगर-उत्पादकों का लाभ हो। 

अब जरा सोचिये, देशभक्त नागरिक होने के नाते आपको क्या करना है? बहुत सरल मंत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया है- “लोकल के लिए वोकल हो जाईये।” अपने बंधुओं द्वारा निर्मित स्वदेशी उत्पादों पर गर्व कीजिये। जहाँ तक संभव हो सके स्वदेशी वस्तुएं खरीदिये। स्वदेशी विचार को जीवन में उतरिये। 

शनिवार, 22 सितंबर 2018

समाधानमूलक प्रश्नोत्तरी

भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण
- लोकेन्द्र सिंह
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 'भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण' व्याख्यान माला में अंतिम दिन अभ्यागतों के प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रश्न वही थे, जो हमेशा संघ से पूछे जाते हैं किंतु इस बार यह प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण थे क्योंकि उनको समाधानमूलक उत्तरों ने पूर्ण कर दिया। संघ ने 'सनातन प्रश्नों' के उत्तर अधिकृत एवं सर्वोच्च पदाधिकारी के माध्यम से संपूर्ण समाज के सम्मुख रख दिए हैं। भले ही कोई उनसे सहमत हो या असहमत, किंतु अब कम से कम अनेक प्रश्नों पर संघ का अधिकृत पक्ष तो सार्वजनिक हो गया है। हालाँकि अनेक प्रश्नों के उत्तर संघ पूर्व में भी अपने कार्य-व्यवहार, अधिकृत वक्तव्यों एवं प्रस्तावों के माध्यम से समाज के सामने रख चुका है। कुल मिलाकर इस बौद्धिक यज्ञ की पूर्णाहुति लोक-विमर्श और लोक-व्यवहार को दिशा देने वाली रही। व्याख्यानमाला में शामिल अभ्यागतों के 215 प्रश्नों के उत्तर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने दिए। तीसरे दिन के आयोजन को कुछ नाम देना हो तो 'समाधानमूलक प्रश्नोत्तरी' दिया जा सकता है।

गुरुवार, 20 सितंबर 2018

हिंदुत्व का अर्थ

भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण-3
- लोकेन्द्र सिंह 
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 'भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ का दृष्टिकोण' में हिंदुत्व पर बहुत ही महत्वपूर्ण विचार देश के सामने रखे हैं। उनके विचार हिंदुत्व की भारतीय संकल्पना को पूर्ण रूप से स्पष्ट करते हैं। 'हिंदुत्व' गाहे-बगाहे बौद्धिक और राजनीतिक जगत में चर्चा का विषय बना रहता है। दुर्भाग्य से भारत में कुछ ऐसी ताकतें हैं, जो भारतीय अवधारणाओं के प्रति सामान्य जन के मन में घृणा उत्पन्न करने का प्रयास करती रहती हैं। राष्ट्रवाद और हिंदुत्व ऐसे ही शब्द हैं, जिनको लेकर भारत विरोधी विचार से प्रेरित लोग सदैव नकारात्मक ढंग से बात करते हैं। हिंदुओं की नाराजगी से बचने के लिए आजकल उन्होंने 'हिंदुत्व' पर रणनीति बदल ली है। अब वह दो हिंदुत्व बताते हैं- कट्टर हिंदुत्व और सॉफ्ट हिंदुत्व। हिंदुत्व को श्रेणीबद्ध करते समय वह आगे कहते हैं कि आरएसएस का हिंदुत्व कट्टर है। हिंदुत्व को बदनाम करने के लिए चलने वाले इस षड्यंत्र के मुकाबले सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बहुत ही सहजता से हिंदुत्व के विराट, उदार, सहिष्णु स्वरूप के दर्शन सबको कराए हैं। उन्होंने सकारात्मक ढंग से अपना विचार रखा।

बुधवार, 19 सितंबर 2018

संघ एक परिचय

'भविष्य का भारत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण' - 2 
- लोकेन्द्र सिंह
संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 'भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण' विषय पर पहले दिन के व्याख्यान में संघ का परिचय प्रस्तुत किया। संघ की विकास यात्रा को देश-दुनिया के महानुभावों के सम्मुख रखा। सहज संवाद में अनेक प्रश्नों के उत्तर दिए। सबसे महत्वपूर्ण बात अपने संबोधन के प्रारंभ में उन्होंने कही- 'मैं यहां आपको सहमत करने नहीं आया, बल्कि संघ के बारे में वस्तुस्थिति बताने आया हूं।' यह कहते हुए उन्होंने बताया कि आप संघ के संबंध में अपना विचार बनाने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन, संघ के संबंध में वस्तुस्थिति जानकार आप अपना मत रखेंगे तो अच्छा होगा। उनका यह कहना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्यादातर लोग संघ के संबंध में टिप्पणी तो करते हैं किंतु उसके संबंध में बुनियादी जानकारी भी नहीं रखते हैं। इस संबंध में उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव का हालिया वक्तव्य उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है। व्याख्यानमाला का आमंत्रण मिलने पर उन्होंने कहा कि वह संघ के बारे में अधिक नहीं जानते हैं। स्वयं उन्होंने स्वीकारा कि वह संघ के संबंध में अधिक नहीं जानते, इसके बाद भी वह आगे कहते हैं कि वह इस आयोजन में नहीं जाएंगे, क्योंकि संघ पर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने प्रतिबंध लगाया था और जिन कारणों से प्रतिबंध लगाया गया था, वह कारण अभी तक समाप्त नहीं हुए हैं। यह एकमात्र उदाहरण नहीं है। देश के ज्यादातर राजनेता एवं अन्य लोग संघ के संबंध में जानकारी रखते नहीं है, इसके बाद भी संघ पर अनर्गल टिप्पणी करते हैं।

सोमवार, 17 सितंबर 2018

संघ की पहल

'भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण' - 1
- लोकेन्द्र सिंह 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम पर सबकी नजर है। देश में भी और देश के बाहर भी। सब जानना चाहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन आरएसएस ‘भविष्य का भारत’ को किस तरह देखता है? संघ का ‘भारत का विचार’ क्या है? दरअसल, यह उत्सुकता इसलिए भी है क्योंकि पिछले 93 वर्षों में कुछेक राजनीतिक/वैचारिक खेमों से संबद्ध राजनेताओं, लेखकों, पत्रकारों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर अनेक मिथक गढ़ दिए हैं। किंतु, संघ सब प्रकार के दुष्प्रचारों की चिंता न करते हुए समाज के बीच कार्य करता रहा और तमाम आरोपों का उत्तर अपने आचरण/कार्य से देता रहा। परिणामस्वरूप आज संघ का विस्तार ‘दशों दिशाओं...’ में हो गया है। उसके निष्ठावान स्वयंसेवक सबदूर ‘दल बादल...’ से छा गए हैं। इसके बावजूद व्यापक स्तर पर किए गए दुष्प्रचार के कारण समाज के कुछ हिस्सों में संघ को लेकर स्पष्टता नहीं है। एक विश्वास व्यक्त किया जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण आयोजन से बहुत हद तक भ्रम और मिथक के बादल छंट जाएंगे।