संघ शताब्दी वर्ष : ‘मैं’ से ‘हम’ के बोध की यात्रा में लेकर जाते हैं संघ शिक्षा वर्ग, जीवन को सार्थक बनाने की मिलती है सीख
व्यक्तित्व विकास की प्रक्रिया में ‘समर कैंप’ हमारे जीवन का हिस्सा बन गए हैं। गर्मी की छुट्टियां लगते ही युवा अपने व्यक्तित्व को निखारने, नया कौशल सीखने और समय का सदुपयोग करने के लिए अपनी अभिरुचि के अनुसार ‘समर कैंप’ में जाते हैं। नि:संदेह ये समर कैंप युवाओं को बहुत कुछ सिखाते हैं। इसलिए रचनाधर्मी और उत्साही युवाओं के बीच समर कैंप के प्रति आकर्षण बढ़ा है। वहीं, जब हम समर कैंप की तुलना संघ शिक्षा वर्ग से करते हैं, तब स्वयंसेवकों के उत्साह को देखकर सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि इन वर्गों में न केवल व्यक्तित्व का विकास होता है, अपितु राष्ट्र साधना के लिए भी उनका मन तैयार होता है। भारत माँ की सेवा का जो संकल्प स्वयंसेवकों ने धारण किया है, उसको निभाने का प्रशिक्षण भी इन वर्गों में मिलता है। समर कैंप की तुलना करते हुए संघ शिक्षा वर्गों के संबंध में एक बात कहनी हो तो- संघ शिक्षा वर्ग सोने पर सुहागा हैं। यहाँ युवा समय प्रबंधन, कार्यक्रम प्रबंधन, अनुशासन, सामंजस्य, योग, कौशल, कला, संवेदनशीलता, वक्तृत्व कला इत्यादि गुण तो सीखता ही है, इसके अलावा वह अपनी गौरवशाली संस्कृति से परिचित होता है, राष्ट्रप्रेम का भाव और गहरा होता है, नेतृत्व करने की क्षमता का विकास होता है। इस सबके साथ युवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे यशस्वी आंदोलन को समाज में ले जाने का प्रशिक्षण भी प्राप्त करते हैं। संघ शिक्षा वर्ग में प्रशिक्षित युवा ही आगे चलकर संघ के बड़े दायित्व का निर्वहन करने के लिए तैयार होते हैं। हाँ, उनके मन में एक साधारण स्वयंसेवक की भाँति समर्पित भाव से संघ कार्य करने का दायित्व बोध भी गहरा होता है।
संघ शिक्षा वर्ग के लिए जाने वाले युवाओं के उत्साही समूह आपने रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर देखे होंगे। उनके मुख पर चमक देखकर आप भ्रमित न हों कि उनके अगले 15-20 दिन मौज-मस्ती में बीतने वाले हैं। संघ शिक्षा वर्गों की दिनचर्या अत्यंत कठिन होती है। संघ शिक्षा वर्ग किसी साधना से कम नहीं हैं। मई-जून की इस बेहिसाब गर्मी में स्वयंसेवक किसी साधक की भाँति वर्ग में रहते हैं। सोने के लिए न तो पलंग मिलते हैं और न कूलर की ठंडी हवा। धरती पर अपना बिस्तर बिछाकर स्वयंसेवक गुरुकुल के बटुकों की भांति विश्राम करते हैं। जबकि समर कैंप अपेक्षाकृत सर्वसुविधा युक्त होते हैं। सोचिए, आज जबकि मोबाइल फोन ने हमारे जीवन में हद से अधिक घुसपैठ कर ली है, युवा थोड़ी देर भी फोन से दूर नहीं रह सकते हैं, उस स्थिति में संघ शिक्षा वर्ग में स्वयंसेवक मोबाइल फोन से पूरी तरह दूर रहते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में जागरण से लेकर संघ स्थान पर शारीरिक गतिविधियां, श्रम साधना, विभिन्न विषयों पर चर्चा, संवाद और बौद्धिक वर्गों में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर प्रबोधन से लेकर सांस्कृतिक संध्या तक एक-एक क्षण स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। समर कैंप में भी अनुशासित दिनचर्या होती है, लेकिन उसमें थोड़ा लचीलापन रहता है। जबकि संघ शिक्षा वर्ग की दिनचर्या में एक-एक क्षण का उपयोग किया जाता है। आराम के समय में भी उत्साही स्वयंसेवक अतिरिक्त कक्षाओं में गीत, संगीत, संवाद कुशलता इत्यादि का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।
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| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ शिक्षा वर्ग में स्वयंसेवक सीखते हैं राष्ट्रभक्ति, सेवा, समर्पण, व्यक्तित्व विकास और अनुशासन। (यह चित्र हिन्दी विवेक के 24-30 मई, 2026 को प्रकाशित अंक का मुखपृष्ठ है।) |
समर कैंप की तुलना में संघ शिक्षा वर्ग आसान नहीं होते हैं, लेकिन जीवन की दिशा बदलने में सबसे अधिक कारगर होते हैं। इसलिए कई प्रकार की कठिनाइयों के बाद भी स्वयंसेवक संघ शिक्षा वर्ग पूर्ण करने के लिए लालायित रहते हैं। क्योंकि स्वयंसेवक यह भी जानते हैं कि हजारों स्वयंसेवकों के बीच से संघ शिक्षा वर्ग के लिए उनका चयन हुआ है। यानी संघ शिक्षा वर्ग चयनित युवाओं के वर्ग हैं। यहाँ समर कैंप की तरह एक निर्धारित शुल्क चुकाकर कोई भी नहीं आ सकता है। संघ शिक्षा वर्ग का हिस्सा बनने के लिए न्यूनतम अर्हता है कि युवाओं के मन में समाज के लिए कुछ करने की ललक हो, राष्ट्रप्रेम का अंकुर उनके मन में हो, अपनी संस्कृति से प्रेम हो और उसे समझने की जिज्ञासा हो।
संघ शिक्षा वर्ग ‘सामूहिकता’ पर केंद्रित है। इसमें यह सिखाया जाता है कि व्यक्ति का अहंकार शून्य होना चाहिए और उसे समाज/संगठन के एक हिस्से के रूप में काम करना चाहिए। स्वयंसेवक आर्थिक और सामाजिक भेदभाव भूलकर एक-दूसरे के साथ रहते हैं, खाते हैं, खेलते हैं और सीखते हैं। जबकि समर कैंप सामान्यत: ‘व्यक्ति-केंद्रित’ होते हैं। इनका उद्देश्य किसी एक बच्चे या व्यक्ति की छिपी हुई प्रतिभा को निखारना और उसे व्यक्तिगत स्तर पर सफल बनाना है। दरअसल, अपनी रचनात्मकता, शौक को पूरा करने और छुट्टियों को मनोरंजक एवं सार्थक बनाने के भाव से ही युवा समर कैंप में शामिल होते हैं। इसके विपरीत, संघ शिक्षा वर्ग का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है। इसका मूल लक्ष्य व्यक्ति के भीतर राष्ट्रप्रेम के बीज बोना है। यहाँ प्रशिक्षण का अंतिम लक्ष्य एक ऐसा अनुशासित कार्यकर्ता तैयार करना है जो अपना जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित कर सके।
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| संघ शिक्षा वर्ग और समर कैम्प का तुलनात्मक ग्राफिक्स (AI द्वारा निर्मित) |
जब हम बाहर से संघ शिक्षा वर्ग और समर कैंप को देखते हैं तो हमें दोनों ही आवासीय शिविर लगते हैं, जहाँ युवा घर से दूर रहकर कुछ नया सीखते हैं। यद्यपि दोनों का उद्देश्य अनुशासन और व्यक्तित्व निर्माण है, लेकिन यदि गहराई से देखा जाए, तो दोनों के मूल लक्ष्य, प्रकृति और विचारधारा में जमीन-आसमान का अंतर है। समर कैंप अल्पकालिक गतिविधि है जो व्यक्ति की छुट्टियों को मजेदार बनाती है और उसे एक सफल एवं बहुमुखी व्यक्ति बनने में सहायता करती है। लेकिन, संघ शिक्षा वर्ग एक वैचारिक भट्टी है; यह आजीवन चलने वाली साधना की शुरुआत है। समर कैंप एक सफल व्यक्ति गढ़ने का प्रयास करता है, जबकि संघ शिक्षा वर्ग राष्ट्र के लिए एक सार्थक और समर्पित नागरिक गढ़ने का कार्य करता है। संघ शिक्षा वर्ग में प्रशिक्षण प्राप्त करने से युवा केवल अपनी छुट्टियों का ही सदुपयोग नहीं करते, अपितु वे एक सफल और सार्थक जीवन के मार्ग पर आगे बढ़ जाते हैं।
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| संघ शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर 'स्वदेश ज्योति' में 24 मई, 2026 रविवार को प्रकाशित साप्ताहिक स्तम्भ |











