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शुक्रवार, 16 मई 2025

एक सिक्के के दो पहलू हैं आतंकवाद और पाकिस्तान

भारतीय सेना ने प्रेसवार्ता में बताया कि आतंकियों के जनाजे में पाकिस्तानी सेना के अधिकारी शामिल हुए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा था कि अगर पाकिस्तान ने आतंकवाद का साथ नहीं छोड़ा तो वह तबाह हो जाएगा। यह बात सौ फीसदी सच है। लेकिन पाकिस्तान कुत्ते की दुम की तरह है, जिसे बारह वर्ष भी पुंगी में रखेंगे, तो टेड़ी ही रहेगी। वह आतंकवाद का साथ छोड़ ही नहीं सकता। यह कहना सर्वथा उपयुक्त है कि पाकिस्तान और आतंकवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। पाकिस्तान को ‘आतंकिस्तान’ भी कहा जा सकता है। पाकिस्तानी सरकार ने भारतीय हमले में मारे गए आतंकवादियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। अंतरराष्ट्रीय आतंकी मसूद अजहर के 14 आतंकी रिश्तेदार भारतीय सेना के हमले में मारे गए हैं। इस तरह पाकिस्तान की सरकार संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित आतंकी मसूद अजहर को 14 करोड़ रुपये देने की तैयारी कर रही है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान यह भी साबित हो गया कि आतंकवादी समूह पाकिस्तानी सेना का हिस्सा हैं। अन्यथा क्या कारण था कि आतंकवादियों के जनाज में पाकिस्तान के बड़े अधिकारी पहुंचते। पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने भी मारे गए आतंकियों के प्रति अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट कीं। पाकिस्तान सेना और आतंकियों के बीच के गठजोड़ को लेकर फोटो-वीडियो भी सामने आया है। इसमें पाकिस्तानी नेता और सैन्य अधिकारी, लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर अब्दुल रऊफ के साथ जनाजे की नमाज पढ़ते दिख रहे थे। इस संदर्भ में पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा है कि “वर्दीधारी पाकिस्तानी अधिकारी आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। यह दर्शाता है कि आतंकवादी और आईएसआई या पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के सदस्य के बीच कोई अंतर नहीं है”। पाकिस्तान की सेना के एक अधिकारी ने प्रेसवार्ता में यह भी स्वीकार किया है कि उनकी सेना का प्रशिक्षण इस्लामिक तौर-तरीकों के साथ ही होता है। जिहाद उनके प्रशिक्षण का हिस्सा है। संभव है कि पाकिस्तानी सेना इसी कारण कई बार बर्बर तौर-तरीके अपनाती है।

बुधवार, 14 मई 2025

ध्यान से सुनें पाकिस्तान और ‘दुनिया के चौधरी देश’

ऑपरेशन सिंदूर पर प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ दिया, जिसमें उन्होंने सबकी एकजुटता के लिए धन्यवाद दिया। जिस प्रकार की एकजुटता भारत के लोगों ने दिखायी, उसको रेखांकित करना आवश्यक भी था। जब किसी देश के नागरिक ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से भर जाते हैं, तब वह देश किसी भी क्षेत्र में सबसे श्रेष्ठ प्रदर्शन करता है। एकजुटता से बड़ा कोई संदेश नहीं होता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बहुत ही नपे-तुले शब्दों में भारत का अभिमत रखा है। उनका यह संबोधन भले ही देश के नागरिकों के लिए था, लेकिन इसमें समूची दुनिया के लिए संदेश था। इसलिए उम्मीद है कि पाकिस्तान और दुनिया के चौधरी के रूप में खुद का प्रस्तुत करनेवाले देश के बड़बोले नेताओं ने भी भारत की बात को ध्यान से सुना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान को दुनियाभर में गुहार लगाने के लिए मजबूर कर दिया। इसलिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सीजफायर के बाद अमेरिका को कई बार धन्यवाद दिया। जबकि भारत ने एक बार भी अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया। इस अंतर को समझना बहुत जरूरी है। यह भारत और पाकिस्तान की स्थिति के अंतर को भी बताता है। यह साफ संदेश है कि भारत ने किसी के दबाव में या किसी के कहने पर सीजफायर नहीं किया बल्कि पाकिस्तान की गुहार पर आतंकवाद पर अपनी कार्रवाई को स्थगित किया है। अगर ट्रंप अभी भी श्रेय लूटने की कोशिश करते हैं, तब इसे उनका बड़बोलापन ही कहा जाएगा, जिसका प्रदर्शन वे पहले भी कई अवसरों पर करते आए हैं।

मंगलवार, 13 मई 2025

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर प्रश्न उठाने वालों को शंका की दृष्टि से देखिए

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता की जानकारी देती भारतीय सेना

भारतीय सेना ने एक बार फिर देश और दुनिया को बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हमने आतंकवादियों और पाकिस्तान के साथ क्या किया है? इसके साथ ही सेना ने चेतावनी भी दी है कि यदि पाकिस्तान और आतंकियों ने फिर से कोई गलती की तो उसे इससे भी भारी अंजाम भुगतना होगा। भारतीय सेना की ओर से कहा गया है – “भय बिन होई न प्रीति। यानी बिना डर के प्रीत होना संभव नहीं है”। पाकिस्तान की फौज और आतंकवादियों में भारतीय सेना का भय होना चाहिए। सेना ने जिस तरह से पाकिस्तान के भीतर तक उसके मुख्य आतंकी एवं सैन्य ठिकाने तबाह किए हैं, उससे आतंकियों के भीतर खौप पैदा होना स्वाभाविक है। 

पाकिस्तान और पाकिस्तानपरस्त लोगों द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों की हवा निकालते हुए सेना ने यह भी कहा कि भारत के सभी सैन्य ठिकाने एवं हथियार न केवल सुरक्षित हैं बल्कि हम अलगे हमले के लिए भी तैयार हैं। पाकिस्तान की अभी इतनी ताकत है ही नहीं कि वह हमारी सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगा पाता। भारतीय सेना को सुनने के बाद किसी भी देशभक्त नागरिक के मन में कोई प्रश्न और शंका नहीं होनी चाहिए। अपने देश को मजबूत बनाने के लिए हमें एकजुट होकर अपनी सरकार और सेना के साथ खड़ा होना चाहिए।

लक्ष्य प्राप्ति में सफल रहा ऑपरेशन सिंदूर

पाकिस्तान पर हमले के संबंध में भारतीय सेना द्वारा जारी किया गया चित्र।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में सुरक्षित बैठे आतंकियों को जहन्नुम पहुँचाने के अपने लक्ष्य में ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह सफल रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान द्वारा वर्षों से पोषित आतंकियों एवं उनके रिश्तेदारों की मौत पर पाकिस्तान की सेना बौखला गई और उसने भारत के नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने का प्रयास किया। भारत ने अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के लगभग सभी हमलों को विफल कर दिया। वहीं, पलटवार में भारत ने पाकिस्तान के भीतरी ठिकानों को निशाना बनाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए। पाकिस्तान माइक-कैमरा पर आकर कुछ भी कहे लेकिन भारतीय सेना का रौद्र रूप देखकर वह भीतर से भयभीत था। इसलिए पाकिस्तान की सेना और सरकार ने मिलकर हमले रोकने के लिए गुहार लगाना शुरू कर दिया था। भारत ने अपनी शर्तों पर पाकिस्तान को घुटनों पर बैठने के लिए मजबूर किया है। सीजफायर में भारत ने अपनी शर्तें मनवायी हैं। भविष्य में किसी भी आतंकवादी हमले को ‘युद्ध की घोषणा’ समझा जाएगा। यह भारत के सामर्थ्य की जीत है।

हालांकि, भारत को हमेशा सावधान रहना होगा। पाकिस्तान की सेना, सरकार और उसके द्वारा पोषित आतंकवाद पर किसी भी सूरत में विश्वास नहीं किया जा सकता है। भारतीय वायुसेना ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर एक पेशेवर ऑपरेशन था, जिसमें हमें सफलता मिली है। तात्कालीक लक्ष्य हमने पहले दिन ही प्राप्त कर लिए थे। वायुसेना ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के विरुद्ध यह ऑपरेशन जारी रहेगा। भारतीय सेना का यह वक्तव्य बहुत कुछ कहता है। हालांकि, यहाँ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जल्दबाजी दिखाते हुए भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का श्रेय लूटने की घोषणा करके भारत के महत्व को कम करने का राजनीतिक अपराध किया है, जिसे संभवत: भारत कभी भूलेगा नहीं।

बुधवार, 7 मई 2025

भारत के स्वाभिमान की अभिव्यक्ति है ‘ऑपरेशन सिंदूर’

भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए आतंकियों और उसके संरक्षक पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश भेज दिया है। यह नया भारत है, जो हिसाब-किताब में पक्का है। यह नया भारत है, जो केवल निंदा प्रस्ताव पारित नहीं करता है अपितु शत्रु को भी यह अवसर देता है कि वह भी निंदा प्रस्ताव पारित करे। यह नया भारत है, जो अपराध की सजा अपराधी को अनिवार्य रूप से देता है। भारत अपने स्वाभिमान और प्रभुत्व की रक्षा के लिए यथासंभव कदम उठा सकता है, यह उसने बता दिया। किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह भारत के गिरेबां पर हाथ डाले। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पहलगाम हमले का बदला तो है ही, यह भारत के स्वाभिमान की अभिव्यक्ति भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर कहा है कि “ये नया भारत है। पूरा देश हमारी ओर देख रहा था। यह तो होना ही था”।

शनिवार, 22 फ़रवरी 2025

छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना के हथियार और उनकी विशेषताएं

रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता का मंत्र देनेवाले छत्रपति शिवाजी महाराज

सिंहगढ़ किले पर तानाजी मालुसरे और अन्य मावलों की अलग-अलग हथियारों के साथ प्रतिमाएं बनी हुई हैं।

एक उन्नत राष्ट्र के लिए रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। शासन में ‘स्व बोध’ की स्थापना करनेवाले छत्रपति शिवाजी महाराज ने रक्षा उत्पादन में भी स्वदेशी के महत्व को स्थापित किया। उन्होंने पैदल सैनिकों के हथियारों से लेकर नौसेना के लिए लड़ाकू जहाज तक स्वदेशी तकनीक पर तैयार कराए थे। सैन्य उपकरणों एवं हथियारों के निर्माण में छत्रपति की दृष्टि अत्यंत सूक्ष्म थी, वे देश-काल-परिस्थिति को ध्यान में रखकर हथियारों के डिजाइन को अंतिम रूप देते थे। छत्रपति ने विदेशी नौकाओं एवं जहाजों की होड़ करके वैसे ही बड़े जहाज नहीं बनवाए बल्कि उन्होंने अपने समुद्री तटों पर तेजी से चलनेवाली छोटी नौकाओं पर जोर दिया। इन्हीं छोटी लड़ाकू नौकाओं ने अंग्रेजों, पुर्तगालियों और मुगलों के हथियारों से सुसज्जित सैन्य जहाजों को हिन्द महासागर के किनारे पर डुबो दिया था। हिन्दवी स्वराज्य की नौसेना के बेड़े में बड़े आकार के जहाज भी शामिल थे।

शनिवार, 21 अक्टूबर 2023

अटारी बॉर्डर : झंडा ऊंचा रहे हमारा

Bharat's Tallest National Flag Tiranga Unfurled at Attari-Wagah Border 

भारत-पाकिस्तान सीमा ‘अटारी बॉर्डर’ (पूर्व में वाघा बॉर्डर) पर अब पाकिस्तान के झंडे से भी ऊंचा भारत का तिरंगा लहरा रहा है। विशेष सर्विलांस तकनीक से सुसज्जित यह ध्वज सरहद पर निगरानी में हमारे जवानों की सहायता करेगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 19 अक्टूबर को अटारी बॉर्डर पर ‘स्वर्ण जयंती द्वार’ के सामने देश का सबसे ऊंचा तिरंगा फहराया। पहले भी यहाँ 360 फीट ऊंचे ध्वज स्तम्भ पर विशाल तिरंगा फहराता था, जिसे वर्ष 2017 में स्थापित किया गया था। प्रत्येक युद्ध में पराजय का सामना करनेवाले पाकिस्तान ने भारत को नीचा दिखाने के लिए 400 फीट ऊंचे पोल पर अपना झंडा फहरा दिया। ऐसा करके पाकिस्तान ने सोचा होगा कि अब भारत का झंडा सदैव पाकिस्तान के झंडे से नीचे रहेगा। परंतु पाकिस्तान भूल गया कि यह नया भारत है। पाकिस्तान को इस मनोवैज्ञानिक युद्ध में भी विजय नहीं मिलनी थी। भारत का ध्वज, पाकिस्तान के झंडे से नीचे लहराए, यह किसे बर्दाश्त होता। अंतत: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की पहल पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 3.5 करोड़ रुपए में अटारी बॉर्डर पर 418 फीट के नये ध्वज स्तंभ को स्थापित किया है। जिस पर फहरा रहा हमारा प्यारा तिरंगा अब बहुत दूर से ही, सबसे ऊपर, नीले गगन में शान से लहराता हुआ दिखायी देता है। उल्लेखनीय है कि अटारी पर फहरा रहा तिरंगा, अब देश में सबसे ऊंचा तिरंगा हो गया है। इससे पहले कर्नाटक के बेलगाम में देश का सबसे ऊंचा झंडा 360.8 फीट पर फहरा रहा था।

रविवार, 4 सितंबर 2022

गुलामी के चिह्न मिटाकर ‘स्व’ की स्थापना

नया भारत विश्व क्षितिज पर अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के साथ ही अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। अपनी जड़ों से जुड़कर ही भारत अनंत आकाश को नाप सकेगा। स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद जब भारतीय नौसेना को अपना प्रथम स्वदेशी विमान वाहक पोत मिला तब नया भारत एक नया इतिहास लिख रहा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसे कुछ इस तरह अभिव्यक्ति दी- ‘‘केरल के समुद्री तट पर पूरा भारत एक नए भविष्य के सूर्योदय का साक्षी बन रहा है। आईएनएस विक्रांत पर हो रहा यह आयोजन, विश्व क्षितिज पर भारत के बुलंद होते हौसलों की हुंकार है’’। प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में विश्वास की गूंज है, जो अब दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को सक्षम बनाने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जो सपना देखा और दिखाया, अब हम उसकी ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

रविवार, 3 मार्च 2019

विजय ही विजय : जयतु भारत

- लोकेंद्र सिंह -
भारत के लिए पिछले तीन-चार दिन बहुत महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। एक के बाद एक तीन विजयश्री भारत के खाते में आई हैं। सबसे पहले भारत ने सीमा पार जाकर आतंकी ठिकानों को नष्ट कर अपने शौर्य का परिचय दिया। उसके बाद आतंकियों को खुश करने की खातिर किए गए पाकिस्तान के हमले को नाकाम कर भारत ने सीमा सुरक्षा पर अपनी मजबूती प्रदर्शित की। भारत के शूरवीर पायलट अभिनंदन ने पाकिस्तान के लड़ाकू विमान एफ-16 को मार कर आकाश में विजयी पताका फहराई। उसके बाद जब समूचा देश अपने लड़ाके अभिनंदन के लिए चिंतित हो रहा था, तब भारत सरकार ने पाकिस्तान पर कूटनीतिक विजय प्राप्त की। भारत सरकार ने पाकिस्तान पर इतना अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया कि उसे मात्र दो दिन में ही भारतीय पायलट अभिनंदन को छोडऩा पड़ा। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार के संबंधों और कूटनीति की बड़ी जीत है कि अभिनंदन अल्प समय में ही सकुशल घर लौट आए हैं।

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019

होश में रहे पाकिस्तान

- लोकेन्द्र सिंह - 
आतंकी गिरोहों पर भारतीय वायु सेना के हमले से पाकिस्तान को अधिक दर्द हो रहा है। पाकिस्तान की सरकार और सेना आतंकी गिरोहों के इतने दबाव में है कि उसे भारत पर पलटवार करने को मजबूर होना पड़ रहा है। पाकिस्तान ने मंगलवार शाम से ही सीमा पार से गोलाबारी शुरू कर दी, जिसका भारतीय सेना की ओर से मुंह तोड़ जवाब दिया जा रहा है। पाकिस्तान की बौखलाहट से यह तो साफ हो गया कि वह आतंकी गिरोहों को पालता है। पाकिस्तानी सरकार और सेना के संरक्षण में अनेक आतंकी गिरोह संचालित हैं। यही कारण है कि आतंकी गिरोहों के प्रशिक्षण शिविर तबाह होने पर पाकिस्तान की सरकार और सेना, दोनों को पीड़ा हुई है। अपनी खीज मिटाने के लिए वह सीमा पार से गोलाबारी कर रहे हैं।

बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

सर्जिकल स्ट्राइक-2 : मुंह तोड़ जवाब

- लोकेन्द्र सिंह - 
पुलवामा हमले पर भारत की ओर से पाकिस्तान और उसके संरक्षण में पल रहे आतंकी गिरोहों को सर्जिकल स्ट्राइक-2 से मुंह तोड़ जवाब दिया गया है। पाकिस्तान और आतंकी गिरोहों को भारत के इस जवाब से सबक सीख लेना चाहिए। उन्हें यह बात गाँठ बांध लेनी चाहिए कि यह नया भारत है। यह सिर्फ सबूत ही नहीं सौंपता, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई भी करता है। यह दूसरा अवसर है जब नये भारत ने पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में घुसकर आतंकियों को मार गिराया है। बल्कि इस बार तो भारतीय सेना ने पाकिस्तान के घर (बालाकोट) में घुसकर उसके पालतू आतंकियों को जहन्नुम पहुँचाया।

शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

पुलवामा हमला : व्यर्थ न जाए बलिदान


- लोकेन्द्र सिंह -
आतंकियों के कायराना हमले में हमने भारत माँ के लाल खोये हैं। देश में दु:ख और आक्रोश की लहर है। प्रत्येक राष्ट्रभक्त नागरिक बलिदानियों के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है। उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहा है। हम सबकी जिम्मेदारी है कि बलिदानी जवानों के परिवार की चिंता करें। उनका बलिदान व्यर्थ न जाए, इसकी चिंता सरकार तो करे ही, समाज को भी करनी चाहिए। अपना जीवन गंवाने वाले यह जवान अपने परिवार से दूर रहकर हम सबकी सुरक्षा कर रहे थे। उनके कारण हम अपने परिवार के साथ सानंद रह पा रहे हैं। क्या ऐसे में हमारा दायित्व नहीं बनता कि जवानों के परिवार को हम अपना परिवार बना लें? हुतात्माओं के परिवारों के साथ खड़े होने से उन जवानों का हौसला बुलंद होगा, जो सीमा पर डटे हुए हैं। देश की सेवा में वह बेफिक्री से सजग रहेंगे। अपने देश के नागरिकों के समर्थन से वह कायर आतंकियों को उनके सही ठिकाने पहुँचा सकेंगे।

शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

सेना के साथ खड़ा है देश

 जम्मू-कश्मीर  में सेना के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज किया जाना समूचे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। जम्मू-कश्मीर सरकार को यह एफआईआर वापस लेनी चाहिए। केंद्र सरकार को बिना देरी इस मामले में दखल देना चाहिए। जम्मू-कश्मीर की सरकार में पीडीपी के साथ भारतीय जनता पार्टी भी सहयोगी है। भले ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सेना के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के प्रकरण में भाजपा के विधायकों ने विरोध किया हो, किंतु इस प्रकार का विरोध करना ही पर्याप्त नहीं है। भाजपा को पीडीपी पर दबाव बनाना चाहिए। क्योंकि, राज्य सरकार के इस कदम से सेना की प्रतिष्ठा पर प्रश्न उठ रहा है। राज्य सरकार के इस निर्णय का लाभ देश विरोधी ताकतें उठाएंगी। 

शनिवार, 8 जुलाई 2017

भारतीय योद्धाओं के बलिदान ने लिखी इजरायल की आजादी की इबारत

 पराजय  का इतिहास लिखने वाले इतिहासकारों ने बड़ी सफाई से भारतीय योद्धाओं की अकल्पनीय विजयों को इतिहास के पन्नों पर दर्ज नहीं होने दिया। शारीरिक तौर पर मरने के बाद जी उठने वाले देश इजरायल की आजादी के संघर्ष को जब हम देखेंगे, तब हम पाएंगे कि यहूदियों को 'ईश्वर के प्यारे राष्ट्र' का पहला हिस्सा भारतीय योद्धाओं ने जीतकर दिया था। वर्ष 1918 में हाइफा के युद्ध में भारत के अनेक योद्धाओं ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। समुद्र तटीय शहर हाइफा की मुक्ति से ही आधुनिक इजरायल के निर्माण की नींव पड़ी थी। इसलिए हाइफा युद्ध में भारतीय सैनिकों के प्राणोत्सर्ग को यहूदी आज भी स्मरण करते हैं। इजरायल की सरकार आज तक हाइफा, यरुशलेम, रामलेह और ख्यात के समुद्री तटों पर बनी 900 भारतीय सैनिकों की समाधियों की अच्छी तरह देखरेख करती है। इजरायल के बच्चों को इतिहास की पाठ्य-पुस्तकों में भारतीय सैनिकों के शौर्य और पराक्रम की कहानियाँ पढ़ाई जाती हैं। प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को भारतीय योद्धाओं को सम्मान देने के लिए हाइफा के महापौर, इजरायल की जनता और भारतीय दूतावास के लोग एकत्र होकर हाइफा दिवस मनाते हैं। जहाँ, एक तरफ हमारे लिए गौरव की बात है कि इजरायल के लोग भारतीय योद्धाओं के बलिदान को अब तक सम्मान दे रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर दु:ख की बात है कि अपने ही देश भारत में इस महान जीत के नायकों के शौर्य के किस्से पढ़ाये और सुनाये नहीं जाते हैं। हालाँकि भारतीय सेना जरूर 23 सितंबर को हाइफा दिवस मनाती है। अब हम समझ सकते हैं कि भारत और इजरायल के रिश्तों में सार्वजनिक दूरी के बाद भी जो गर्माहट बनी रही, वह भारतीय सैनिकों रक्त की गर्मी से है।

शुक्रवार, 9 जून 2017

कम्युनिस्टों का एजेंडा, सेना को करो बदनाम

 भारतीय  सेना सदैव से कम्युनिस्टों के निशाने पर रही है। सेना का अपमान करना और उसकी छवि खराब करना, इनका एक प्रमुख एजेंडा है। यह पहली बार नहीं है, जब एक कम्युनिस्ट लेखक ने भारतीय सेना के विरुद्ध लेख लिखा हो। पश्चिम बंगाल के कम्युनिस्ट लेखक पार्थ चटर्जी ने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की तुलना हत्यारे अंग्रेस जनरल डायर से करके सिर्फ सेना का ही अपमान नहीं किया है, बल्कि अपनी संकीर्ण और बीमार सोच का भी परिचय दिया है। तथाकथित समाजविज्ञानी और इतिहासकार चटर्जी ने एक बार पुन: यह सिद्ध किया है कि कम्युनिस्टों के मन में सेना के प्रति कितना द्वेष भरा है। इतिहास गवाह है कि कम्युनिस्टों ने हमेशा सेना का अपमान करने का ही प्रयास किया है। कम्युनिस्ट कभी सेना को बलात्कारी सिद्ध करने के लिए बाकायदा शोध पत्र पढ़ते हैं, तो कभी सैनिकों की मौत पर जश्न मनाते हैं। कम्युनिस्ट सैनिकों को वेतन लेने वाले आम कर्मचारी से अधिक नहीं मानते हैं। सैनिकों की निष्ठा और देश के प्रति उनके समर्पण को पगार से तौलने का प्रयास वामपंथी विचारक ही कर सकते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर में सेना को बदनाम करने का षड्यंत्र या तो पाकिस्तान रचता है या फिर पाकिस्तान परस्त लोग। सेना पर लांछन लगाकर कम्युनिस्ट भी पाकिस्तान की लाइन पर आगे बढ़ते रहे हैं। वह कौन-सा अवसर है जब कम्युनिस्टों ने जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना को 'विलेन' की तरह प्रस्तुत करने की कोशिशें नहीं की हैं? जबकि भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर में अदम्य साहस और संयम का परिचय देती है। जम्मू-कश्मीर के लोगों का भरोसा जीतने के लिए उनके बीच रचनात्मक कार्य भी करती है। जब भी प्राकृतिक आपदा आती है, तब यही सेना जम्मू-कश्मीर के लोगों के आगे ढाल बनकर खड़ी हो जाती है। जम्मू-कश्मीर और समूचे देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान दाँव पर लगाने वाली सेना और सेना प्रमुख की तुलना जनरल डायर से करना कहाँ तक उचित है? क्या यह सरासर सेना का अपमान नहीं है?

मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

पत्थरबाजों का समर्थन करने से बाज आएं नेता

 जब  सेना के जवानों की पिटाई और उनके साथ बदसलूकी का वीडियो सामने आया, तब देश के ज्यादातर लोग खामोश थे। भारत और भारतीय सेना के लिए जिनके मन में सम्मान है, सिर्फ उन्हीं महानुभावों को वीडियो में अमानवीय हरकतें देखकर दु:ख हुआ। उन्होंने अपने-अपने ढंग से सेना के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट भी कीं। क्रिकेट में भारत का झंडा बुलंद करने वाले खिलाड़ी वीरेन्द्र सहभाग और गौतम गंभीर ने बहुत ही कठोर प्रतिक्रिया दीं। जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ के जवानों पर पत्थरबाजों ने जिस तरह लात-घूसे बरसाये, उसे देखकर निश्चिय ही देश के नागरिकों और सुरक्षा बलों के परिवारों को बहुत कष्ट हुआ होगा। लेकिन, इससे भी अधिक कष्ट पत्थरबाजों के समर्थकों के कुतर्क सुनकर हो रहा है। मतिभ्रम लोग जिस तरह आतंकियों की ढाल बने पत्थरबाजों के समर्थन के लिए सुरक्षा बलों को खलनायक बनाकर प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं, उससे क्रोध ही उत्पन्न हो सकता है।

रविवार, 30 अक्टूबर 2016

सैनिकों के साथ दीपावली

 दीपोत्सव  प्रारंभ हो चुका है। समूचे देश में यह पर्व बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। अध्ययन और रोजगार के लिए जो लोग अपने घर से दूर होते हैं, उनका प्रयास रहता है कि दीपावली पर अपने घर पहुँचें। हम देखते हैं कि दीपावली के आसपास रेलगाडिय़ों में पाँव रखने के लिए भी जगह नहीं मिलती है। त्यौहार का आनंद तो परिवार के साथ ही है। इसीलिए दीपावली पर ज्यादातर परिवार एकत्र आ जाते हैं। मानो सब राम छोटे-छोटे वनवास समाप्त कर अपने-अपने अयोध्या पहुंते हैं। लेकिन, हमारे ही आसपास ऐसे अनेक परिवार हैं, जिनके राम नहीं आएंगे। हम सब सुरक्षित वातावरण में सुख और शांति से अपने परिवार के साथ दीपावली मना सकें, इसलिए उन परिवारों के राम सीमा खड़े हैं। अत्याचारी रावण के साथ युद्धरत हैं, उनके राम। हमारी खातिर। हमारी अयोध्या को युद्ध से बचाने के लिए। इसलिए हमारा नैतिक दायित्व बनता है कि सैनिकों के परिवारों से हम मिलें। उन्हें धन्यवाद दें। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस आशय की अपील की है। सैनिकों के प्रति उनकी संवेदनाएं जग जाहिर हैं।

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिल के करीब है हृदयप्रदेश

 याद  कीजिए उन दिनों को जब लोकसभा का चुनाव प्रचार चरम पर था, जब नतीजे भारतीय जनता पार्टी या कहें नरेन्द्र मोदी के पक्ष में आए, जब नरेन्द्र मोदी की ताजपोशी हो रही थी। याद आए वह दिन। गुजरात में मोदी और मध्यप्रदेश में शिवराज के विकास ने, दोनों को भाजपा का 'पोस्टर बॉय' बना दिया था। इसलिए उन दिनों गुजरात बनाम मध्यप्रदेश की बहस को जानबूझकर उछाला गया था। नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान को आमने-सामने खड़ा कर दोनों के बीच खटास डालने का प्रयास किया जा रहा था। यहाँ तक कहा कि प्रधानमंत्री बनते ही नरेन्द्र मोदी सबसे पहले मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बदलेंगे। लेकिन, सब उलट हो रहा है। सारे कयास, सारे गणित, सारे विश्लेषण गलत साबित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच न केवल संबंधों में गाढ़ापन आ रहा है, बल्कि भाजपा की एक नई जोड़ी बनती दिखाई दे रही है। शिवराज के आमंत्रण पर प्रधानमंत्री का बार-बार मध्यप्रदेश आना, अपनी महत्त्वाकांक्षी योजनाओं एवं अभियानों की मध्यप्रदेश की भूमि से घोषणा करना, शिवराज को महत्त्व देना, मोदी मुख से शिवराज की तारीफ और शिवराज द्वारा मोदी की प्रशंसा, यह सब किस ओर इशारा करते हैं। पिछले ढाई साल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जितनी बार गुजरात नहीं गए होंगे, उससे अधिक बार मध्यप्रदेश आ चुके हैं। यह देखकर लगता है कि हृदयप्रदेश प्रधानमंत्री के दिल के करीब है। प्रधानमंत्री के आज के प्रवास को भी इसी संदर्भ में देखा जा सकता है। मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है कि उसे प्रधानमंत्री के आतिथ्य का अवसर लगातार मिल रहा है।

बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

पाकिस्तान को पसंद आए केजरीवाल के बोल

 देश  का दुर्भाग्य है कि यहाँ के नेता और बुद्धिजीवी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी बेतुकी बयानबाजी करने से बाज नहीं आते हैं। वक्त की नजाकत कहती है कि इस वक्त भारत और पाकिस्तान के संबंध में बहुत संभलकर बोलने की जरूरत है। इस वक्त कोई भी विचार प्रकट करते वक्त यह ध्यान रखना ही चाहिए कि उसका क्या असर होगा? हमारा विचार दुश्मन देश को मदद न पहुँचा दे। अपने किसी भी बयान से भारत सरकार, भारतीय सेना और भारतीय नागरिकों का मनोबल कमजोर नहीं होना चाहिए। लेकिन, स्वार्थ की राजनीति करने वाले नेता बड़ी बेशर्मी से ऐसे प्रश्न खड़े कर ही देते हैं। आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसी ही एक अमर्यादित टिप्पणी 'सर्जिकल स्ट्राइक' के संबंध में कर दी है। दो मिनट 52 सेकंड का एक वीडिया उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी किया है, जिसमें केजरीवाल पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर बात कर रहे हैं।

शनिवार, 1 अक्टूबर 2016

सर्जिकल स्ट्राइक : शक्ति की उपासना का प्रकटीकरण

 आज  से नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। शक्ति की उपासना का पर्व। भारत के पर्व उसकी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रत्येक पर्व अपने साथ सामाजिक संदेश लेकर आता है। यह सुयोग ही है कि शक्ति पर्व के प्रारंभ से पहले पाकिस्तान में पनाह लिए आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करके भारत ने दुनिया को बता दिया कि वह शास्त्र के साथ शस्त्र का भी धारण करता है। हम देखें तो पाएंगे कि हमारे प्रत्येक देवी-देवता शस्त्र और शास्त्र दोनों धारण करते हैं। स्पष्ट संदेश है कि अकेला शस्त्र खतरनाक है और शास्त्र निरर्थक। जैसे पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों के पास शस्त्र तो हैं, लेकिन शास्त्र नहीं हैं। इसलिए दुनिया में भय है कि यह पागल देश परमाणु बम का उपयोग न कर बैठे। इसी तरह उन महान संस्कृतियों का शास्त्र (संदेश) भी कोई नहीं सुनता, जिनके पास शस्त्र नहीं है। शस्त्र और शास्त्र में संतुलन का संदेश भारतीय संस्कृति में है। इसलिए भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र है और पाकिस्तान एक गैर जिम्मेदार देश। भारत शास्त्र का महत्त्व समझता है, इसलिए इतना संयम और धैर्य दिखा पाता है।