बुधवार, 29 नवंबर 2017

'शिव' के 12 बरस, विश्वास का 'राज'

 मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश जैसे बड़े प्रदेश को बखूबी संभाला है। संभाला ही नहीं है, वरन प्रदेश को 'बीमारू राज्य' की श्रेणी से निकाल कर विकास के पथ पर अग्रसर कर दिया है। प्रदेश में विकास की गंगा बहे, इसके लिए वह निरंतर प्रयासरत रहे हैं। उनके प्रयासों का ही सुफल है कि आज अनेक क्षेत्रों में मध्यप्रदेश की छवि चमकी है। प्रदेश भाजपा ने अपने लोकप्रिय मुख्यमंत्री के कार्यकाल के बारह वर्ष पूरे होने के अवसर को विकास पर्व के रूप में मनाने का निर्णय किया है। शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री हैं, जो लगातार 12 वर्षों से प्रदेश के मुखिया हैं। प्रदेशभर में विकास पर्व के तहत राज्य में चल रहीं 12 प्रमुख योजनाओं- मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान एवं निकाह योजना, मेधावी छात्र योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, अटल ज्योति अभियान, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना, अन्नपूर्णा योजना, मुख्यमंत्री छात्र गृह योजना, भावांतर योजना, बलराम ताल योजना और महिला सशक्तिकरण योजना पर केंद्रित कार्यक्रम प्रदेशभर में आयोजित किए जाएंगे।

गुरुवार, 23 नवंबर 2017

कांग्रेस की ओछी सोच

'तू जा चाय बेच... ' कह कर कांग्रेस ने किसका अपमान किया?
 प्र धानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर कांग्रेसी नेताओं के मन में किस प्रकार के भाव हैं, यह एक बार फिर प्रकट हो गया है। गुजरात में जारी चुनाव प्रचार के बीच यूथ कांग्रेस की ऑनलाइन मैगजीन के ट्विटर हैंडल से बहुत आपत्तिजनक फोटो (मीम) जारी किया है। यूथ कांग्रेस की ऑनलाइन मैगजीन के ट्विटर हैंडल 'युवा देश' के जरिए पोस्ट किए गए मीम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चायवाला बताकर उनका मजाक बनाया गया था। इस मीम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेजा की तस्वीर है। तस्वीर पर काल्पनिक संवाद लिखे गए हैं। मीम में ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेजा से मोदी को कहलवाया गया है- 'तू जा चाय बेच।'

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

बेटी के लिए कविता-3


भले ही तुम हो गई हो
तीन साल की।
फर्क क्या आया? 
आज भी तुम्हारी भाषा-बोली को 
हम दो लोग ही समझते हैं।

हाँ, तुम्हारा भाई भी समझने लगा है
बल्कि, कर्ई दफा 
हमसे ज्यादा वह ही तुम्हें समझता है
जैसे हम दूसरों को बताते हैं
किसी अनुवादक की तरह 
तुमने क्या बोला?
ठीक उसी तरह, कई दफा
वह हमें बताता है
तुमने क्या बोला?

चलो, अच्छा है
हम संवाद के लिए
परस्पर निर्भर हैं। 
उच्चारण स्पष्ट हो जाए
तब भी, एक-दूसरे को समझने की
परस्पर निर्भता बनी रहे।
- लोकेन्द्र सिंह -
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ऋष्वी के जन्मदिन की तीसरी वर्षगाँठ पर... 21 नवंबर, 2017

शनिवार, 18 नवंबर 2017

कांग्रेस की दृष्टि में धर्मनिरपेक्षता अर्थात् हिंदू विरोध

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी नई किताब में लिखा, दीपावली पर हिंदू संत को गिरफ्तार कर लिया, परंतु क्या ईद पर मौलवी को पकडऩे का साहस किया जा सकता है?
 भारत  के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी पुस्तक 'कोअलिशन इयर्स 1996-2012' के एक अध्याय में कांग्रेस के हिंदू विरोध एजेंडे और छद्म धर्मनिरपेक्षता को उजागर किया है। वैसे तो यह कोई छिपा हुआ तथ्य नहीं है। दोनों आरोपों को लेकर कांग्रेस अकसर कठघरे में खड़ी दिखाई देती है। परंतु, जब प्रणब मुखर्जी इस संबंध में लिख रहे हैं, तब इसके मायने अलग हैं। वह खांटी कांग्रेसी नेता हैं। वह कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी राजनेता हैं। उन्होंने कांग्रेस को बहुत नजदीक से देखा है। कांग्रेस का उत्थान एवं पतन दोनों उनकी आँखों के सामने हुए हैं। आज कांग्र्रेस जिस गति को प्राप्त हुई है, उसके संबंध में भी उनका आकलन होगा। पूर्व राष्ट्रपति प्र्रणब मुखर्जी ने अपनी नई किताब में लिखा है- 'मैंने वर्ष 2004 में कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। एक कैबिनेट बैठक के दौरान मैंने गिरफ्तारी के समय को लेकर काफी नाराजगी जताई थी। मैंने पूछा था कि क्या देश में धर्मनिरपेक्षता का पैमाना केवल हिन्दू संतों महात्माओं तक ही सीमित है? क्या किसी राज्य की पुलिस किसी मुस्लिम मौलवी को ईद के मौके पर गिरफ्तार करने का साहस दिखा सकती है? '

रविवार, 5 नवंबर 2017

हिंदी मीडिया के चर्चित चेहरों से मुलाकात कराती किताब

 हम  जिन्हें प्रतिदिन न्यूज चैनल पर बहस करते-कराते देखते हैं। खबरें प्रस्तुत करते हुए देखते हैं। अखबारों और पत्रिकाओं में जिनके नाम से प्रकाशित खबरों और आलेखों को पढ़कर हमारा मानस बनता है। मीडिया गुरु और लेखक संजय द्विवेदी की किताब 'हिंदी मीडिया के हीरो' पत्रकारिता के उन चेहरों और नामों को जानने-समझने का मौका उपलब्ध कराती है। किताब में देश के 101 मीडिया दिग्गजों की सफलता की कहानी है। किन परिस्थितियों में उन्होंने अपनी पत्रकारिता शुरू की? कैसे-कैसे सफलता की सीढिय़ां चढ़ते गए? उनका व्यक्तिगत जीवन कैसा है? टेलीविजन पर तेजतर्रार नजर आने वाले पत्रकार असल जिन्दगी में कैसे हैं? उनके बारे में दूसरे दिग्गज क्या सोचते हैं? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब यह किताब देती है। किताब को पढ़ते वक्त आपको महसूस होगा कि आप अपने चहेते मीडिया हीरो को नजदीक से जान पा रहे हैं। यह किताब पत्रकारिता के छात्रों सहित उन तमाम युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है जो आगे बढऩा चाहते हैं। पुस्तक में जमीन से आसमान तक पहुंचने की कई कहानियां हैं। पत्रकारों का संघर्ष प्रेरित करता है। पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रहे युवाओं को यह भी समझने का अवसर किताब उपलब्ध कराती है कि मीडिया में डटे रहने के लिए कितनी तैयारी लगती है। इस तरह के शीर्षक से कोई सामग्री किताब में नहीं है, यह सब तो अनजाने और अनायस ही पत्रकारों के जीवन को पढ़ते हुए आपको जानने को मिलेगा।

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