राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव को भांपकर अपनी रणनीति ढाल लेना ही किसी राजनेता की सबसे बड़ी ताकत होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर बार अपनी ऊर्जावान सक्रियता और अप्रत्याशित पहलकदमी से चौंकाते हैं। वडोदरा में ‘जेन-जी’ के छह हजार युवाओं के बीच प्रधानमंत्री की मौजूदगी महज एक सरकारी या औपचारिक संवाद नहीं थी, बल्कि यह बदलते भारत की नब्ज पर हाथ रखने की एक सोची-समझी राजनीतिक और विकासात्मक कवायद थी। मंच पर क्वीन का कालजयी गीत ‘वी विल रॉक यू’ और ‘आरी आरी’ की गूंज के बीच वाई-आकार के रैंप पर चलकर युवाओं के करीब पहुंचना यह साबित करता है कि वे आज की युवा संस्कृति और उनके तेवर को बखूबी समझते हैं।
गुरुवार, 10 सितंबर 2026
सोमवार, 8 जून 2026
रजनीश अग्रवाल: पत्रकारिता के प्रांगण से राज्यसभा के पटल तक
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के प्रांगण से पत्रकारिता की पढ़ाई करके राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहे पूर्व विद्यार्थी रजनीश अग्रवाल अब राज्यसभा के सम्मानित सदस्य होंगे। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मध्यप्रदेश से देश की सबसे बड़ी पंचायत के उच्च सदन हेतु अपना उम्मीदवार बनाया है। विश्वविद्यालय के लिए यह गौरव की बात है कि उसके विद्यार्थी दादा माखनलाल चतुर्वेदी के आंगन में संचार कौशल सीखकर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। रजनीश अग्रवाल को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाना यह संदेश भी देता है कि राजनीतिक क्षेत्र में बौद्धिक क्षमता, वैचारिक स्पष्टता और उत्कृष्ट संचार कौशल वाले नेताओं को महत्व दिया जा रहा है। रजनीश अग्रवाल का व्यक्तित्व एक राजनेता से कहीं अधिक एक कुशल रणनीतिकार और प्रखर संचारक का है, जिसकी जड़ें पत्रकारिता के मजबूत धरातल से जुड़ी हैं।
बुधवार, 6 मई 2026
भाजपा की ऐतिहासिक जीत, विपक्ष को आईना दिखाता जनादेश
जनता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उसकी सामूहिक चेतना से बढ़कर कोई भी ताकत नहीं है। छल-बल और तुष्टीकरण से सत्ता हथियाने वाली ताकतों को जनता ने आईना दिखा दिया है। जैसे ही पश्चिम बंगाल में जनता को सुरक्षा का आश्वासन मिला, उसने निर्भय होकर बता दिया है कि लोकतंत्र में हिंसा, गुंडागर्दी और मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए कोई स्थान नहीं है। कहना होगा कि पाँच राज्यों (चार राज्य और एक केंद्रशासित प्रदेश) के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। बंपर मतदान और मतदाताओं के अभूतपूर्व उत्साह के बीच जो परिणाम सामने आए हैं, वे न केवल चुनाव पश्चात आए सर्वेक्षण के अनुमानों पर मुहर लगाते हैं, बल्कि लोकतंत्र की जीत की कहानी भी धूमधाम से सुना रहे हैं।
रविवार, 28 दिसंबर 2025
राष्ट्र प्रेरणा स्थल : वैचारिक विरासत को लेकर आगे बढ़ रहे मोदी
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| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना पर आधारित 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' |
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी वैचारिक विरासत को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसका नवीनतम उदाहरण ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती प्रसंग पर प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का लोकार्पण किया। यह स्थान भारतीय राजनीति और समाज के लिए सामान्य नहीं है, अपितु यह उस लंबी वैचारिक यात्रा का गौरवपूर्ण पड़ाव है, जिसने आधुनिक भारत की नियति को बदलने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा भी है कि “राष्ट्र प्रेरणा स्थल, उस सोच का प्रतीक है जिसने भारत को आत्मसम्मान, एकता और सेवा का मार्ग दिखाया है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी जी की विशाल प्रतिमाएं जितनी ऊंची हैं इनसे मिलनी वाली प्रेरणाएं उससे भी बुलंद है”। कहना होगा कि भारतीय राजनीति को राष्ट्रीय दिशा देने में तीनों ही विभूतियों का उल्लेखनीय योगदान है।
शनिवार, 13 दिसंबर 2025
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के दो वर्ष
सशक्त नेतृत्व और संतुलित विकास के दो वर्ष
राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन अकसर अनिश्चितता लेकर आता है, लेकिन मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों ने साबित किया है कि यदि नेतृत्व में स्पष्टता और इच्छाशक्ति हो, तो परिवर्तन ‘विकास की नई गति’ का पर्याय बन जाता है। आज, जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण कर रहे हैं, तो पीछे मुड़कर देखने पर एक ऐसी सरकार की छवि उभरती है जिसने परंपरा, आधुनिकता, कल्याकारी योजनाओं और कठोर प्रशासनिक फैसलों के बीच एक बेहतरीन संतुलन साधा है। 13 दिसंबर, 2023 को जब डॉ. मोहन यादव ने सत्ता की बागडोर संभाली थी, तब उनके सामने ‘लाड़ली बहना’ जैसी लोकप्रिय योजनाओं को जारी रखने के साथ-साथ अपनी अलग पहचान बनाने की चुनौती थी। दो साल बाद, यह कहा जा सकता है कि उन्होंने न केवल अपनी ही पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार के अच्छे कार्यों को आगे बढ़ाया, बल्कि शासन की एक नई, अधिक सख्त और परिणाम-मूलक शैली भी विकसित की है।
गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025
मध्यप्रदेश का स्वदेशी जागरण महाभियान
भारत को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश की मोहन सरकार केंद्र की मोदी सरकार के साथ कदमताल कर ही रही थी कि अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वदेशी के आह्वान को जन-जन तक पहुँचाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय स्वदेशी जागरण सप्ताह का शुभारंभ करके स्वदेशी को जनाभियान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इसे केवल एक सरकारी कार्यक्रम के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। यह तो आत्मनिर्भर भारत के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति मध्यप्रदेश की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भले ही इस महाभियान की योजना 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक (पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती से महात्मा गांधी की जयंती) की गई हो, लेकिन स्वदेशी के विचार को जन-जन तक पहुँचाने के लिए यह आंदोलन लंबा चलना चाहिए। कोई भी आंदोलन लंबा तब ही चलता है, जब समाज की सज्जनशक्ति उसे अपना आंदोलन मानकर चलती है। कहना होगा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से प्रारंभ हुआ ‘स्वदेशी जागरण मंच’ लंबे समय से स्वदेशी के आंदोलन को चला रहा है, जिसके कुछ सुखद परिणाम हमें अपने आस-पास दिखायी पड़ते हैं।
गुरुवार, 7 नवंबर 2024
हिन्दुओं के हितों की चिंता में सबसे आगे हैं भाजपा-मोदी
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| हिन्दू मंदिर पर खालिस्तानी आतंकियों के हमले के विरुद्ध एकजुट होकर प्रदर्शन करता कनाडा का हिन्दू समाज |
भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति हिन्दू समाज में गहरा विश्वास है। इसका कारण है कि जब भी हिन्दू हित की बात आती है, हिन्दू समाज को भाजपा और मोदी अपने साथ खड़े दिखायी देते हैं। वहीं, अन्य पार्टियां हिन्दुओं के हितों की रक्षा के मामले में खुलकर बोलने से बचती हैं। उन्हें गाजा और फिलिस्तीन के मुसलमानों का दर्द तो अनुभव हो जाता है लेकिन बांग्लादेश से लेकर कनाडा तक उन्हें हिन्दुओं की दर्दनाक पुकार सुनायी ही नहीं देती है। अपने दुर्व्यवहार के लिए कुख्यात रोहिंग्याओं के समर्थन में भी उनके झंडे-पोस्टर दिखायी दे जाते हैं लेकिन निर्दोष हिन्दू समाज पर हो रहे हमले उन्हें दिखायी नहीं देते हैं। वहीं, भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी हिन्दुओं पर होनेवाले हमलों का आगे आकर विरोध करते हैं और हिन्दुओं की हिम्मत बनने का प्रयास करते हैं।
I strongly condemn the deliberate attack on a Hindu temple in Canada. Equally appalling are the cowardly attempts to intimidate our diplomats. Such acts of violence will never weaken India’s resolve. We expect the Canadian government to ensure justice and uphold the rule of law.
— Narendra Modi (@narendramodi) November 4, 2024
हालिया मामला कनाडा का है, जहाँ कट्टरपंथी खालिस्तानियों ने हिन्दू मंदिर, महिलाओं एवं बच्चों पर हमला किया है। इस मामले में जहाँ विपक्षी दल स्पष्ट विरोध करने की जगह इधर-उधर की बातें कर रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर पर हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि हिंसा के ऐसे कृत्य भारत के संकल्प को कभी कमजोर नहीं करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘जानबूझकर किया गया हमला’ और ‘हमारे राजनयिकों को डराने का कायरतापूर्ण प्रयास’ करार दिया। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि कनाडा सरकार न्याय सुनिश्चित करेगी और कानून का शासन बनाए रखेगी।
मंगलवार, 16 जुलाई 2024
जनांदोलन बना प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान- ‘एक पेड़ माँ के नाम’
मध्यप्रदेश के इंदौर ने स्वच्छता के बाद अब पौधरोपण में बनाया विश्व कीर्तिमान, एक दिन में लगाए 12 लाख 65 हजार पौधे
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| माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर 'माखनपुरम' में हमने भी 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया |
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह ताकत है कि जब भी वे नागरिकों से किसी प्रकार का आह्वान करते हैं तो वह जनांदोलन में परिवर्तित हो जाता है। एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ का आह्वान करते ही देशभर में लोग उत्साहित होकर पौधरोपण कर रहे हैं। पौधरोपण के मामले में मध्यप्रदेश ने एक बार फिर सर्वाधिक पौधे रोपने का कीर्तिमान रचा है। स्वच्छता के मामले में देश में प्रथम स्थान पर रहकर मध्यप्रदेश का मान बढ़ानेवाले इंदौर ने 12 लाख 65 हजार पौधे रोपकर बड़ा संदेश अन्य शहरों को दिया है। इंदौर में जनसंख्या घनत्व अत्यधिक शहर है। इसे व्यावसायिक दृष्टि से ‘मिनी मुम्बई’ भी कहा जाता है। इसलिए जब यह प्रश्न आया कि इंदौर जैसे शहर में 51 लाख पौधे कहाँ लगाए जा सकेंगे, तब प्रदेश सरकार में मंत्री एवं इंदौर के लोकप्रिय राजनेता कैलाश विजयवर्गीय ने शहरवासियों के नाम एक सार्वजनिक पत्र लिखा और आग्रह किया कि संकल्प में शक्ति हो तो कुछ भी संभव है। इंदौरवासियों ने अपने संकल्प को सिद्ध करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में 24 घंटे में 12 लाख 65 हजार पौधे रोपकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में कीर्तिमान दर्ज करा दिया। इससे पहले एक दिन में सबसे अधिक पेड़ लगाने की उपलब्धि असम के पास थी। असम में एक दिन में 9 लाख 21 हजार पौधे एक दिन में रोपे थे।
बुधवार, 7 फ़रवरी 2024
आत्मविश्वास से भरे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बोले- अबकी बार 400 पार
अपने तीसरे कार्यकाल को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। प्रधानमंत्री को देश की जनता पर विश्वास है कि इस बार पहले की अपेक्षा जनता की ओर से उन्हें और अधिक बड़ा जनादेश मिलेगा। लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की प्रत्येक पंक्ति इस आत्मविश्वास को व्यक्त करती है। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी के आत्मविश्वास के पीछे वर्तमान समय में बना देश का वातावरण है। अयोध्या में श्रीरामलला का मंदिर निर्माण ने जिस प्रकार की ऊर्जा का संचार समूचे देश में किया है, वह अचंभित करनेवाला है। देश में चल रही रामलहर को देखकर कोई भी बता सकता है कि भारत का समाज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की सरकार के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए लोकसभा चुनाव का बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा है।
गुरुवार, 28 दिसंबर 2023
विपक्षी गठबंधन में हिन्दू विरोध की प्रतिस्पर्धा
बुधवार, 13 दिसंबर 2023
जम्मू-कश्मीर में संविधान की जीत
संपूर्ण देश को बेसब्री से प्रतीक्षा थी कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित अलगाववादी अनुच्छेद-370 पर सर्वोच्च न्यायालय क्या निर्णय सुनाता है। वैसे तो सब आश्वस्त थे कि न्यायालय में न्याय, सत्य और संविधान की विजय सुनिश्चित है। इसके बावजूद एक आशंका तो थी ही कि कहीं न्यायालय से प्रतिकूल निर्णय न आ जाए। यदि सर्वोच्च न्यायालय यह मान लेता कि अनुच्छेद-370 को हटाया नहीं जा सकता इसलिए उसे बहाल किया जाए, तब केंद्र सरकार के सामने बड़ी दुविधा खड़ी हो जाती। यह तो विश्वास है कि मोदी सरकार कोई न कोई मार्ग निकालती और इस अलगाववादी अनुच्छेद को पुन: स्थायी रूप से हटा देती। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी का अपनी स्थापना के समय से ही यह संकल्प है कि देश की एकता-अखंडता को प्रभावित करनेवाले इस अनुच्छेद को समाप्त करना आवश्यक है। इसके लिए भाजपा के नेताओं ने अपना बलिदान भी दिया है। भाजपा के वैचारिक प्रेरणास्रोत श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान भी जम्मू-कश्मीर में ‘एक निशान, एक विधान और एक प्रधान’ की माँग करते हुआ।
शुक्रवार, 29 सितंबर 2023
देश का सबसे ‘स्मार्ट राज्य’ है मध्यप्रदेश
किसी समय में मध्यप्रदेश की छवि एक बीमारू और पिछड़े राज्य की थी। पिछले 15-20 वर्षों में मध्यप्रदेश अपनी उस छवि से बाहर निकलकर विकसित एवं समृद्ध प्रदेश के रूप में स्थापित हो गया है। यह कहने में कोई संकोच नहीं कि प्रदेश की प्रगति में और उसका वातावरण बदलने में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उनकी सरकार की नीतियों की भूमिका प्रमुख है। प्रदेश के हिस्से आ रहे विभिन्न प्रकार के राष्ट्रीय पुरस्कार इस बात के साक्षी हैं कि अब मध्यप्रदेश पिछड़ा और बीमारू राज्य नहीं, अपितु विकास पथ पर नये कीर्तिमान रचनेवाला प्रदेश है। स्वच्छ भारत अभियान की रैंकिंग में उत्साह बढ़ानेवाली सफलताएं प्राप्त करने के बाद अब प्रदेश ने स्मार्ट सिटी से संबंधित विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्राप्त करके अपनी प्रतिष्ठा को और बढ़ाया है। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित स्मार्ट सिटी कान्क्लेव में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने जब स्मार्ट सिटी से संबंधित दो श्रेणियों के पुरस्कारों की घोषणा की तो मध्यप्रदेश ने बाजी मार ली। इंदौर को देश की सबसे स्मार्ट सिटी होने का पुरस्कार मिला, वहीं मध्यप्रदेश को देश का सबसे स्मार्ट राज्य होने का सम्मान मिला है। यानी दो मुख्य श्रेणियों में शीर्ष पर मध्यप्रदेश चमक रहा है। इसके साथ ही अपनी विरासत को सहेजने के मामले में भोपाल को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
शनिवार, 12 अगस्त 2023
सामाजिक समरसता का केंद्र बने संत रविदास मंदिर
भारत को कमजोर करने के लिए जातीय द्वेष बढ़ाने में अनेक ताकतें सक्रिय हैं। उनके निशाने पर विशेषकर हिन्दू समाज है। वहीं, भारतीय समाज को एकसूत्र में बांधने के प्रयास करनेवाली संस्थाएं अंगुली पर गिनी जा सकती हैं। चिंताजनक बात यह है कि भारत विरोधी ताकतों के निशाने पर राष्ट्रीयता को मजबूत करनेवाले संगठन भी रहते हैं। ऐन-केन-प्रकारेण उनकी छवि को बिगाड़ने के प्रयास किए जाते हैं। राजनीतिक क्षेत्र में भी कमोबेश यही स्थिति है। वोटबैंक की राजनीति के चलते अनेक नेता एवं राजनीतिक दल भी हिन्दू समाज में जातीय विद्वेष को बढ़ाने के दोषी हैं। इन परिस्थितियों के बीच शिवराज सरकार ने मध्यप्रदेश के सागर जिले में संत शिरोमणि रविदास महाराज के मंदिर का निर्माण करने का सराहनीय निर्णय लिया गया है। सरकार इस मंदिर को सामाजिक समरसता के केंद्र के तौर पर विकसित करना चाहती है। समरसता मंदिर के निर्माण में संपूर्ण हिन्दू समाज की भागीदारी हो, इसके लिए सरकार के प्रयासों से प्रदेशभर में समरसता यात्राएं निकाली जा रही हैं, जो 12 अगस्त को निर्माण स्थल बड़तूमा पहुँचेंगी। यहाँ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बन रहे संत शिरोमणि रविदास मंदिर की नींव रखेंगे। यह मंदिर अपने उद्देश्य के अनुसार आकार ले, इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे समरसता यात्राओं में सहभागिता कर लोगों तक संत रविदास के संदेश को पहुँचाने का भगीरथी प्रयास कर रहे हैं। आनंद की बात है कि संत रविदास समरसता यात्रा का रथ जहाँ-जहाँ से गुजर रहा है, वहाँ के लोग मंदिर निर्माण के लिये अपने क्षेत्र की मिट्टी और नदियों का जल देकर संदेश दे रहे हैं कि निश्चित ही यह स्थान सबको एकसूत्र में जोड़ने में सफल होगा।
बुधवार, 14 जून 2023
किसान कल्याण महाकुंभ में शिवराज सरकार ने किसानों को दी सौगातें
खेती-किसानी और उससे जुड़े व्यवसाय मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था एवं विकास की धुरी हैं। यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उनकी सरकार बखूबी समझती है। मुख्यमंत्री श्री चौहान के हाथ में जब से प्रदेश की कमान है, तब से उन्होंने लगातार किसानों की बेहतरी के लिए प्रयास किए हैं। केंद्र में मोदी सरकार और राज्य में शिवराज सरकार, दोनों ने अपनी प्राथमिकता में किसानों को रखा है। मध्यप्रदेश के राजगढ़ में आयोजित ‘किसान-कल्याण महाकुंभ’ के आयोजन से सरकार ने यही संदेश देने का प्रयास किया है कि वह किसानों के हितों की चिंता करने में सदैव की तरह अग्रणी रहेगी। देश में मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है जहाँ किसानों को ‘किसान सम्मान निधि’ के अंतर्गत 12 हजार रुपये वार्षिक मिलेंगे। चौथी बार मुख्यमंत्री बनने पर शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के किसानों को 4000 रुपये की राशि देने का निर्णय किया था, महाकुंभ में जिसे बढ़ाकर अब 6000 रुपये कर दिया गया है। इस तरह अब प्रदेश के किसानों को केंद्र की मोदी सरकार से 6000 रुपये और प्रदेश की शिवराज सरकार से 6000 रुपये मिलेंगे, अर्थात् 12 हजार रुपये वार्षिक। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इस निर्णय कमजोर आय वर्ग एवं छोटी जोत के किसानों को बहुत बड़ी सहायता मिलेगी। किसान कल्याण महाकुंभ में लिए गए निर्णय बताते हैं कि मध्यप्रदेश की सरकार किसानों को लेकर अत्यंत संवेदनशील है और किसानों को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
शनिवार, 10 जून 2023
महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है शिवराज सरकार
प्रदेश की महिलाओं के बैंक खातों में 10 जून को आएगी ‘लाड़ली बहना योजना’ की पहली किस्त
महिला सशक्तिकरण की दिशा में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की महत्वाकांक्षी ‘लाड़ली बहना योजना’ को लेकर जिस प्रकार का उत्साहजनक वातावरण मातृशक्ति के बीच में बना हुआ है, उससे इस योजना की आवश्यकता एवं महत्व ध्यान में आ रहा है। अभी हाल में ग्वालियर प्रवास के दौरान विभिन्न वर्गों की माताओं-बहनों से बातचीत के बाद दो बातें अनुभव में जुड़ी हैं। एक, महिलाओं के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता गजब की है। यह मामला केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं है, अपितु उन्हें मुख्यमंत्री पर अटूट विश्वास भी है। दो, उनका मानना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं के लिए जितनी योजनाएं शुरू कीं, उतनी किसी और ने कभी नहीं की हैं। बेटी के जन्म से लेकर उसके विवाह और उसके बाद के जीवन की भी चिंता सरकार ने की है। शिवराज सरकार बेटी के साथ माँ का ध्यान भी रखती है। नि:संदेह, शिवराज सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही स्त्री सशक्तिकरण के लिए प्रयासरत दिखी है। मध्यप्रदेश सरकार की महिला नीति को देखने से ध्यान आता है कि यह सरकार सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं शैक्षणिक रूप से महिलाओं को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। बेटी बचाओ अभियान, लाड़ली लक्ष्मी योजना, स्वागतम् लक्ष्मी योजना, गाँव की बेटी योजना, जननी सुरक्षा कार्यक्रम, कन्या अभिभावक पेंशन योजना, उषा किरण योजना और मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अतिरिक्त कई अन्य कार्यक्रम एवं योजनाएं हैं, जिनके माध्यम से सरकार हर कदम पर महिलाओं के साथ खड़ी नजर आती है। स्त्री सशक्तिकरण की इसी शृंखला में ‘लाड़ली बहना योजना’ भी जुड़ गई है।
रविवार, 4 जून 2023
सुराज संकल्प का ‘अमृतकाल’
मोदी सरकार के 9 वर्षों का मूल्यांकन करती पुस्तक ‘अमृतकाल में भारत’
भारतीय संस्कृति में कहा जाता है, 'नयति इति नायक:', अर्थात् जो हमें आगे ले जाए, वही नायक है। आगे लेकर जाना ही नेतृत्व की वास्तविक परिभाषा है। भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार वर्ष 2021 में 75वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान 'अमृतकाल' शब्द का इस्तेमाल किया था, जब उन्होंने अगले 25 वर्षों के लिए देश के लिए एक अद्वितीय रोडमैप को प्रस्तुत किया। अमृतकाल का उद्देश्य भारत के नागरिकों के जीवनशैली में गुणात्मक वृद्धि करना, गांवों और शहरों के बीच विकास में विभाजन को कम करना, लोगों के जीवन में सरकार के हस्तक्षेप को कम करना और नवीनतम तकनीक को अपनाना है।
मंगलवार, 2 मई 2023
‘लाडली लक्ष्मी उत्सव’ : बेटियों को प्रोत्साहित करती शिवराज सरकार
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| भोपाल से प्रकाशित दैनिक समाचारपत्र 'सुबह सवेरे' में 2 मई 2023 को प्रकाशित |
मध्यप्रदेश में बेटियों को लेकर एक सकारात्मक एवं भावनात्मक वातावरण बन गया है। आज मध्यप्रदेश की बेटियां खूब पढ़ रही हैं और आगे बढ़ रही हैं। प्रत्येक कार्यक्षेत्र में भी अपना योगदान दे रही हैं। खेल के मैदान हों, या जोखिम भरी एवरेस्ट की चढ़ाई, बेटियों के कदमों को अब रोका नहीं जाता अपितु उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सब सहयोगी की भूमिका में हैं। लड़ाकू विमान उड़ानेवाली पहली महिला फाइटर पायलट में भी मध्यप्रदेश की बेटी का नाम शामिल है। बेटियां अपने पग से जल, थल, नभ को नाप रही हैं। मध्यप्रदेश में यह बदलाव अचानक नहीं आया है। बेटियों के लिए बना यह वातावरण ‘संकल्प से सिद्धि’ का उदाहरण है। बेटियों के प्रति संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक संकल्प लिया कि वे बेटियों को प्रोत्साहित करनेवाला वातावरण बनाएंगे। इसके लिए उनकी पहल पर 16 वर्ष पूर्व 1 अप्रैल 2007 को मध्यप्रदेश सरकार ने ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ शुरू की। स्वयं को प्रदेश की बेटियों का ‘मामा’ घोषित करके ‘बेटी बचाओ’ का नारा दिया। मुख्यमंत्री का यह विचार इतना शक्तिशाली एवं प्रभावशाली था कि लोकप्रिय राजनेता नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इस नारे को राष्ट्र का नारा बना दिया और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का आह्वान किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की सरकार यहीं नहीं रुकी, अपितु बेटियों को संरक्षण और संबल देने के लिए प्रयास अनेक स्तर पर किए गए। इस सबमें अधिक महत्वपूर्ण है कि उन्होंने इस मुद्दे पर जनता से सीधे और लगातार संवाद किया। जब एक जनप्रिय राजनेता नागरिक समाज से कोई आग्रह करता है, तब उसका सुफल परिणाम आने की संभावनाएं अधिक होती हैं।
शुक्रवार, 16 सितंबर 2022
असाधारण, कुशल एवं प्रभावी वक्ता-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
सार्वजनिक जीवन में संवाद कला का बहुत महत्व है। व्यक्तिगत स्तर और छोटे समूह में लोगों को आकर्षित करना एवं उन्हें अपने से सहमत करना अपेक्षाकृत आसान होता है। किंतु, जन (मास) को अपने विचारों से सहमत करना और अपने प्रति उसका विश्वास अर्जित करना कठिन बात है। सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोग किसी न किसी माध्यम से ही जन सामान्य तक अपनी पहुँच बनाते हैं। इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण है, व्यक्ति किस प्रकार अपने विचार प्रस्तुत करता है। आवश्यक है कि वह जिस रूप में सोच रहा है, वह उसी रूप में जनता के बीच पहुँचे। जो लोग इस प्रकार संवाद कला को साध लेते हैं, वह जनसामान्य से जुड़ जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी संवाद कला को सिद्ध कर लिया है। वह असाधारण वक्ता और प्रभावी संचारक हैं। प्रधानमंत्री मोदी संचार के 7-सी के सिद्धांत को जीते हैं। संचार के विशेषज्ञ फ्रांसिस बेटजिन ने बताया है कि 7-सी के सिद्धांत का उपयोग कर संचारक बहुत ही सरलता और प्रभावी ढंग से जन (मास) के मस्तिष्क में अपनी बात (संदेश) को पहुंचा सकता है। बहुत बड़े जनसमुदाय से अपनत्व स्थापित कर सकता है। इस सिद्धांत की सातों सी- स्पष्टता (Clarity), संदर्भ (Context), निरंतरता (Continuty), विश्वसनीयता (Credibility), विषय वस्तु (Content), माध्यम (Channel) और पूर्णता (Completeness) प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में झलकती हैं।
देखें यह वीडियो : क्या है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाषण कला का राज
शनिवार, 5 मार्च 2022
सर्वस्पर्शी शिव-राज
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी यात्रा में बड़ों को आदर देकर, छोटों को स्नेह देकर और समकक्षों को साथ लेकर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। यह उनके नेतृत्व की कुशलता है। उनका व्यक्तित्व इतना सहज है कि जो भी उनके नजदीक आता है, उनका मुरीद हो जाता है। शिवराज के राजनीतिक विरोधी भी निजी जीवन में उनके व्यवहार के प्रशंसक हैं। सहजता, सरलता, सौम्यता और विनम्रता उनके व्यवहार की खासियत है। उनके यह गुण उन्हें राजनेता होकर भी राजनेता नहीं होने देते हैं। वह मुख्यमंत्री हैं, लेकिन जनता के मुख्यमंत्री हैं, जनता के लिए मुख्यमंत्री हैं। 'जनता का मुख्यमंत्री' होना उनको औरों से अलग करता है। प्रदेश में पहली बार शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास के द्वार समाज के लिए खोले। वह प्रदेश में गाँव-गाँव ही नहीं घूमे, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को मुख्यमंत्री निवास पर बुलाकर भी उनको सुना और समझा। अपने इस स्वभाव के कारण शिवराज सिंह चौहान 'जनप्रिय' हो गए हैं। मध्यप्रदेश में उनके मुकाबले लोकप्रियता किसी मुख्यमंत्री ने अर्जित नहीं की है।
रविवार, 13 फ़रवरी 2022
लखीराम अग्रवाल : वैचारिक योद्धा की राजनीतिक यात्रा
भारतीय जनता पार्टी को 'पार्टी विद डिफरेंस' का तमगा निश्चित ही लखीराम जी अग्रवाल जैसे ईमानदार, जनसरोकारी और स्वच्छ छवि के राजपुरुषों के कारण ही मिला होगा। सादगी और मिलनसारिता की प्रतिमूर्ति थे लखीराम अग्रवाल। उनको जानने वाले बताते हैं कि राजनीति में लखीराम जैसे आदर्श राजनेता अब कम ही दिखते हैं। वे अलग ही माटी के बने थे। वे उस परम्परा के राजनेता थे, जिसका उद्देश्य राजनीति के मार्फत समाज की बेहतरी, जनसेवा और रचनात्मक सोच को आगे बढ़ाना था। जनसंघ से भाजपा के देशव्यापी पार्टी बनने के सफर में लखीराम अग्रवाल के योगदान को याद करना, सही मायने में भव्य और आलीशान इमारत की नींव के पत्थरों को याद करना है। उनको याद करते हैं तो एक वैचारिक योद्धा की राजनीतिक यात्रा भी याद आती है। इस यात्रा में स्थापित किए मील के पत्थर भी याद आते हैं। वह सब याद आता है जो आज की राजनीति में कम ही नजर आता है। लोकतंत्र के जीवत बने रहने के लिए किस तरह के राजनेताओं की जरूरत है, यह भी याद आता है।

















