शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

और कितने सबूत चाहिए, आतंकवाद के साथ है पाकिस्तान

 भा रत के पास फिर एक मौका आया है यह साबित करने के लिए कि पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री है। पाकिस्तान में चल रहे हैं आतंकी कैम्प। पाकिस्तान की नीयत ठीक नहीं है। उसके डीएनए में ही खराबी है। वह लगातार भारत के खिलाफ षड्यंत्र करता है। दोहरा चरित्र है पाकिस्तान का। एक तरफ भारत के साथ बातचीत को ढोंग करता है तो दूसरी तरफ आस्तीन में पाले सांपों को भारत में छोड़ देता है। जब ये सांप जिन्दा पकड़े जाते हैं तो पाकिस्तान की पोल खोल देते हैं। भारत के साहसी नागरिकों ने पाकिस्तान से भेजे गए आतंकी मोहम्मद नावेद याकूब को पकड़ लिया है। नावेद ने कबूल किया है कि वह पाकिस्तान के फैसलाबाद का रहने वाला है। हिन्दुओं की हत्या करने में उसे मजा आता है। अमरनाथ यात्रियों की हत्या करने के लिए वह आया था। बड़ी हैरान करने वाली बात है कि हिन्दुओं ने किसी का क्या बिगाड़ा है? उनको क्यों टारगेट किया जा रहा है? हिन्दू न तो पाकिस्तान में सुरक्षित हैं और न ही हिन्दुस्तान में। आतंकियों के समर्थक जान लें कि नावेद जैसे आतंकियों के इरादे कितने जहरीले हैं। आतंकियों की फांसी पर बेमतलब स्यापा न करें।
       बहरहाल, आतंकी ने स्वीकारा है कि उसे भारत में बम फोडऩे और बेगुनाह लोगों की हत्या करने का प्रशिक्षण पाकिस्तान में दिया गया है लेकिन, सब जानते हैं कि पाकिस्तान साफ मुकर जाएगा। वह अपना दोगला चेहरा छिपाने का प्रयत्न करेगा। 26/11 की आतंकवादी घटना के बाद भी उसने यही किया था। तब आतंकी कसाब जिंदा पकड़ा गया था। उसने भी कबूल किया था कि पाकिस्तान उसका घर है। भारत में दहशतगर्दी फैलाने के लिए उसे विशेष सैन्य प्रशिक्षण दिया गया था। लेकिन, पाकिस्तान इनकार करता रहा कि कसाब पाकिस्तानी नागरिक नहीं है। वह तो भला हो पाकिस्तानी मीडिया का, जिसने ईमानदारी दिखाते हुए स्वयं ही पाकिस्तान में कसाब का मोहल्ला-घर सब खोजकर टेलीविजन पर दिखा दिया। कम उम्र में खतरनाक मंसूबे पालने वाले आतंकी नावेद ने कहा है कि एक पखवाड़ा पहले ही 10-10 आतंकियों के तीन समूह भारत में घुसे हैं। जिनमें से नावेद के एक साथी मोमिन उर्फ नोमान को बीएसएफ के जवानों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। चिंता का विषय है कि करीब 30 आतंकी भारत की सीमा में घुस आते हैं और वे अभी तक न तो पकड़े गए हैं और न ही मारे जा सके हैं। भारत की खुफिया एजेंसियों को और चौकस होना होगा। यह बात बताने की नहीं है, सब जानते हैं कि पाकिस्तान जब भी सीमा पर फायरिंग करता है तब उसका सीधा मकसद आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराना ही होता है। पाकिस्तान कुछ दिनों से लगातार सीज फायर का उल्लंघन कर रहा है। हमें सचेत हो जाना चाहिए था कि पाकिस्तानी रेंजर्स भारतीय सेना का ध्यान क्यों भटका रहे हैं? भारत की सीमा सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने की जरूरत है। 
        बहरहाल, पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए भारत के पास एक अच्छा अवसर आया है। भारत को अपनी कूटनीति का इस्तेमाल करना चाहिए। पाकिस्तान की असलियत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखना चाहिए। यह वक्त है दुनिया को बताने का, भारत तो दोस्ती का हाथ बढ़ाता है लेकिन पाकिस्तान बार-बार धोखा देता है। भारत के खिलाफ विषवमन करने का काम पाकिस्तान कर रहा है। आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की नीयत में खोट है। वह आतंकवाद के खिलाफ नहीं बल्कि आतंकवाद के साथ है। इसी माह भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक भी होनी है। इस बैठक में भारत को पूरी दमदारी के साथ आतंक की गिरफ्तारी से हाथ लगे ठोस सबूत पाकिस्तान के सामने रखने चाहिए। हालांकि यह दीगर बात है कि पाकिस्तान हमेशा की तरह इनकार करेगा। आतंकी जकीउर रहमान लखवी, दाउद इब्राहिम और कसाब के मामले में भी तो वह ढीठ बना रहा। लेकिन, भारत को आक्रामक रुख बनाए रखना पड़ेगा तभी नावेद की गिरफ्तारी का कूटनीतिक लाभ होगा। पाकिस्तान को यह भी ठीक से समझाना होगा कि जिन सांप-बिच्छुओं को वह भारत को डंसने के लिए पाल रहा है, उन्होंने पाकिस्तान को भी डंसना शुरू दिया है। पाकिस्तान में हो रहे धमके इसके उदाहरण हैं। पेशावर में सैकड़ों बच्चों की मौत के बाद भी पाकिस्तान शायद होश में नहीं आया है। अब भी वक्त है, समझ जाए कि आतंकवाद अच्छा और बुरा नहीं होता, आतंकवाद सिर्फ बुरा ही होता है। पाकिस्तान की सरकार भारत के खिलाफ जहर उगलना और षड्यंत्र रचना बन्द करके अपने देश की आवाम की खुशहाली के लिए काम करे तो बेहतर होगा।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (08-08-2015) को "ऊपर वाले ऊपर ही रहना नीचे नहीं आना" (चर्चा अंक-2061) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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