गुरुवार, 17 सितंबर 2015

संघ को बदनाम करने से बाज आए कांग्रेस

 म ध्यप्रदेश में लम्बे समय से सत्ता से बाहर रहने के कारण कांग्रेस राजनीति भूल गई है। या फिर उसने भारतीय जनता पार्टी की जगह सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना राजनीतिक विरोधी मान लिया है। गाहे-बगाहे कांग्रेस संघ पर निशाना साधती रहती है। प्रत्येक घटना से संघ को छोड़कर देखने की कोशिश करती है। वर्षों समाज के बीच काम करके आरएसएस ने भरोसा कमाया है। बार-बार संघ पर आरोप लगाकर कांग्रेस उस भरोसे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती रही है। लेकिन, हर बार होता यह है कि आरोपों की आग में कांग्रेस खुद के ही हाथ जला बैठती है। एक तरफ कांग्रेस के बड़े राजनेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पेटलावद विस्फोट की घटना पर राजनीति नहीं करने का संदेश देते हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा पेटलावद पर ओछी राजनीति करते नजर आते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने पेटलावद हादसे के आरोपी राजेन्द्र कासवा को संघ का स्वयंसेवक सिद्ध करने के लिए पे्रस विज्ञप्ति के साथ संघ के पथ संचलन का चित्र जारी किया। पथ संचलन में शामिल एक गणवेशधारी स्वयंसेवक को कांग्रेस प्रवक्ता ने राजेन्द्र कासवा बताया था। संघ की ओर से प्रमाण सहित कांग्रेस के आरोपों का खंडन किया गया है।
        संघ ने बताया कि कांग्रेस प्रवक्ता ने जो चित्र जारी किया है, वह फरीदकोट के पथ संचलन का है, पेटलावद का नहीं। यह चित्र ७ अक्टूबर, २०१४ को द ट्रिब्यून चंडीगढ़ में प्रकाशित किया गया था। चित्र में जिसे पेटलावद विस्फोट का आरोपी राजेन्द्र कासवा बताया जा रहा है, असल में वह फरीदकोट का स्वयंसेवक है। पेटलावद जैसे दु:खद हादसे पर राजनीति करना और उस राजनीतिक कीचड़ में आरएसएस को घसीटने की कोशिश करना, घोर निंदनीय है। 
कांग्रेस को यह समझ लेना चाहिए कि संघ का स्वयंसेवक तो वह है जो पेटलावद हादसे से आहत हुआ। कांग्रेस के नेता जब एसी कमरों में बैठकर हादसे में 'संघ का हाथ' खोज रहे थे तब शाखा से लौट रहे स्वयंसेवक बिना देरी किए राहतकार्य में जुटे हुए थे। उन्होंने घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद की। बहरहाल, मीडिया में भ्रामक जानकारी देने के लिए संघ ने कांग्रेस की निंदा की है। संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि गलत तथ्यों के आधार पर रचे गए षड्यंत्र की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। पेटलावद थाने में मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा और संजय श्रीवास्तव के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। 
       कांग्रेस इससे पूर्व में भी संघ पर झूठे आरोप लगाकर जनता के बीच भरोसा खोती रही है। मध्यप्रदेश विधानसभा में कूटरचित फोटो लहराते हुए कांग्रेस विधायक डॉ. कल्पना परुलेकर ने लोकायुक्त पीपी नावलेकर को संघ की गणवेश में दिखाया था। तब भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी। संघ को बदनाम करने की जिद कांग्रेस को छोड़ देनी चाहिए। भाजपा से लडऩे के लिए वास्तविक मुद्दों की खोज कांग्रेस को करनी होगी। कांग्रेस को फिर से मध्यप्रदेश में उठ खड़ा होना है तो ओछी राजनीति से बाज आकर जनता का विश्वास हासिल करने के लिए जनता से जुड़े मुद्दों की समझ बढ़ानी चाहिए। कांग्रेस जितने षड्यंत्र संघ को बदनाम करने के लिए रचती है, यदि उनकी तुलना में आधे ही रचनात्मक कार्य करने लगे तो वह जनता का भरोसा संभवत: फिर से हासिल कर सकती है। 
मध्यप्रदेश कांग्रेस की ओर से संघ को बदनाम करने के लिए जारी किया गया भ्रामक चित्र.

चित्र की वास्तविकता बताती ट्रिब्यून की वेबसाइट. क्लिक करके देखें

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