सोमवार, 5 अक्तूबर 2015

शशांक मनोहर का अध्यक्ष बनना

 भा रतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष के तौर पर शशांक मनोहर के नाम पर अंतिम मोहर लग गई है। बीसीसीआई के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के दुनिया से जाने के बाद नए अध्यक्ष को लेकर खेल जगत से लेकर भारतीय राजनीति और मीडिया में खूब खबरें चल रही थीं। नागपुर के वकील और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शशांक मनोहर के फिर से अध्यक्ष बनने की खबरों को अधिक प्रमाणिक माना जा रहा था, जो आखिर सच साबित हुईं। शशांक मनोहर के मुकाबले एन. श्रीनिवासन मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन, रविवार को होने वाली एसजीएम की बैठक से पहले ही श्रीनिवास खेमे ने हथियार डाल दिए। ईस्ट जोन के छह संगठनों ने शशांक मनोहर के नाम पर मोहर लगाई है। बोर्ड की बैठक में अध्यक्ष के लिए एकमात्र नाम होने से उन्हें सर्वसमत्ति से चुन लिया गया।
       एक दिन पूर्व ही सौरव गांगुली ने शशांक मनोहर की तारीफ करके स्पष्ट संकेट दे दिए थे कि रविवार को शशांक मनोहर का दोबारा अध्यक्ष बनना तय है। गांगुली ने कहा है कि शशांक मनोहर निश्चित तौर पर भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा काम करेंगे। उनका पिछला कार्यकाल इस बात का सबूत है। गांगुली ही नहीं बल्कि क्रिकेट के प्रमुख लोग शशांक के अध्यक्ष बनने को भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा बता रहे हैं। उनका पिछला कार्यकाल भी उपलब्धियों से भरा और साफ-सुथरा रहा है। 
       सबसे महत्वपूर्ण उनकी बेदाग छवि ने श्रीनिवास खेमे को परास्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। श्रीनिवास इसलिए भी ठण्डे पड़ गए क्योंकि पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली, बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शरद पवार शशांक मनोहर के साथ खड़े हो गए थे। श्रीनिवास की विवादास्पद छवि उन्हें ले डूबी। पिछले कुछ समय में श्रीनिवास का विवादों में रहा है। इसलिए कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति श्रीनिवास का समर्थन करके मुसीबत मोल लेना नहीं चाह रहा था। सबने श्रीनि से किनारा कर लिया। विवादास्पद व्यक्ति के अध्यक्ष बनने पर क्रिकेट का भला भी नहीं होता। क्रिकेट पर सवाल जरूर उठने लगते। 
       क्रिकेट के सम्मान और उसके प्रति लोगों के प्रेम को बचाने के लिए बोर्ड को एक साफ-सुथरी छवि वाले अध्यक्ष तलाश थी, जो शशांक मनोहर के नाम पर जाकर पूरी होती दिखी। शशांक मनोहर के अध्यक्ष बनने की घटना को 'बुराई पर अच्छाई की जीत' कहा जाए तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं। भारत के क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि नये अध्यक्ष क्रिकेट में स्वच्छा अभियान चलाएंगे। 

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