मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

आतंकी मसूद अजहर की आड़ में घिनौना खेल खेल रहा चीन

 न्यूक्लियर  सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की दावेदारी पर अड़ंगा लगाने के बाद अब चीन ने एक बार फिर भारत के खिलाफ टेड़ी चाल चली है। संयुक्त राष्ट्र में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को आतंकी घोषित कराने के भारत के अभियान में चीन ने बाधा खड़ी की है। भारत ने आतंकी मसूद को 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में आतंकी घोषित कराने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर परिषद के 14 सदस्य भारत के साथ हैं, लेकिन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य चीन अपनी 'वीटो पॉवर' का दुरुपयोग कर रहा है। चीन के उप विदेश मंत्री ली बाडोंग ने कहा कि 'चीन हर प्रकार के आतंकवाद का विरोध करता है। लेकिन इस पर दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। काउंटर टेरेरिज्म के नाम पर किसी को इसका राजनीतिक फायदा नहीं लेना चाहिए।' चीन की यह टेड़ी चाल न केवल भारत के राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है, बल्कि एक प्रकार आतंकवाद और आतंकी देश का समर्थन भी है। आतंकवाद पर दोहरा मापदण्ड किसका है, यह दुनिया देख रही है। क्या चीन यह कहना चाहता है कि मसूद अजहर आतंकवादी नहीं है?

सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

सुधार क्यों नहीं चाहता मुस्लिम समुदाय

 तीन  तलाक के मुद्दे पर सरकार का हलफनामा स्वागत योग्य है। मुस्लिम महिलाओं की सामाजिक स्थिति और उनके संवैधानिक अधिकार को मजबूत करने के लिए केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में दायर अपने हलफनामे में स्पष्ट कहा है कि तीन तलाक महिलाओं के साथ लैंगिग भेदभाव करता है। केन्द्र सरकार ने उचित ही कहा है कि पर्सनल लॉ के आधार पर किसी को संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। महिलाओं की गरिमा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। केन्द्र सरकार ने यहाँ तक कहा है कि तीन तलाक, हलाला निकाह और बहुविवाह इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। सरकार का यह कहना उचित ही है। यदि यह प्रथाएँ इस्लाम का अभिन्न अंग होती, तब इस्लामिक देशों में इन पर प्रतिबंध संभव होता क्या? दुनिया के अनेक प्रमुख इस्लामिक मुल्कों में तीन तलाक, हलाला निकाह और बहुविवाह प्रतिबंधित हैं। इसलिए भारत में भी महिलाओं के साथ धर्म और पर्सनल लॉ के नाम पर होने वाली ज्यादती रुकनी चाहिए।

शनिवार, 8 अक्टूबर 2016

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कहा- 'खून का दलाल'

 कांग्रेस  उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह अपरिपक्व नेता हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उन्होंने बेहद ओछी और निचले स्तर की भाषा का उपयोग किया है। उत्तरप्रदेश के देवरिया से प्रारंभ हुई अपनी किसान यात्रा के दिल्ली में समापन अवसर पर एक सार्थक भाषण प्रस्तुत करने की बजाय राहुल गाँधी कीचड़ उछालने वाली भाषा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साध रहे थे। उन्होंने कहा कि 'जो हमारे जवान हैं, जिन्होंने अपना खून दिया है। जम्मू-कश्मीर में खून दिया है, जिन्होंने हिन्दुस्तान के लिए सर्जिकल स्ट्राइक किए हैं, उनके खून के पीछे आप (मोदी) छिपे हैं। उनकी आप दलाली कर रहे हो। यह बिल्कुल गलत है।' राहुल गाँधी का यह बयान बेहद शर्मनाक है। यह बयान साबित करता है कि अभी तक राहुल गाँधी सोच-समझकर बोलना नहीं सीख पाए हैं। संभवत: कांग्रेस के प्रवक्ताओं को भी इस बयान का समर्थन करना मुश्किल होगा। देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी अमर्यादित भाषा का उपयोग शायद ही अब तक किसी ने किया हो।

शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2016

नवाज शरीफ, कितने शरीफ?

 पाकिस्तान  के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक बार फिर अपनी 'शराफत' दिखा दी। भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में आतंकी शिविरों पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक से 'खिसयानी बिल्ली' बने नवाज शरीफ ने अपने मुल्क को सफाई देने के लिए संसद का संयुक्त सत्र बुलाया था। बुधवार को पाकिस्तानी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते वक्त उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि पाकिस्तान और वहाँ की सरकार की बुनियाद झूठ एवं भारत विरोध पर टिकी है। देश-दुनिया के सामने अपनी 'कॉलर' बचाने के लिए नवाज शरीफ ने एक के बाद एक झूठ संसद में बोले। हालांकि, नवाज के झूठ उनके चेहरे को छिपा कम रहे थे, बल्कि उजागर अधिक कर रहे थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शायद समझ नहीं पा रहे हैं कि भारत ने उनके मुखौटे में इतने छेद कर दिए हैं कि अब वह अपना खूनी और कायर चेहरा उसके पीछे छिपा नहीं सकता। नवाज यदि गौर से अपने ही मुल्क में देखें तो पाएंगे कि दुनिया को भ्रम में रखना तो बहुत दूर की बाद है, अब वह अपने ही देश की आवाम को बहला नहीं सकते। नवाज शरीफ के झूठ की पोल खोलने के लिए पाकिस्तान की संसद से लेकर सड़क तक आवाजें बुलंद हो रही हैं।

गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

पाकिस्तानी कलाकारों से इतना प्रेम क्यों?

 आतंकवादी  हमलों से आहत भारत के नागरिक चाहते हैं कि पाकिस्तान का समूचा बहिष्कार किया जाए। इस सिलसिले में बॉलीवुड से पाकिस्तानी कलाकारों को बाहर करने और उन्हें काम नहीं देने की माँग जोर पकड़ रही है। यह माँग स्वाभाविक है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन, बॉलीवुड से लेकर अन्य कला और तथाकथित बौद्धिक जगत इस विषय पर भी दो हिस्सों में बँटा नजर आ रहा है। देश का सामान्य आदमी समझ नहीं पा रहा है कि आखिर पाकिस्तानी कलाकारों से इतना प्रेम क्यों है? पाकिस्तानी कलाकारों का समर्थन क्या देशहित से बढ़कर है? पाकिस्तानी कलाकार बॉलीवुड में काम नहीं करेंगे, तब क्या बॉलीवुड ठप हो जाएगा? इन सवालों के जवाब कोई नहीं दे रहा। हद है कि कुछेक लोग पाकिस्तानी कलाकारों को देश से ऊपर रखने का प्रयास कर रहे हैं। उनके लिए कलाकार किसी भी प्रकार की सीमा से ऊपर हैं। वह पूछ रहे हैं कि क्या पाकिस्तानी कलाकारों को भगा देने से आतंकवाद समाप्त हो जाएगा? नहीं होगा, आतंकवाद समाप्त। लेकिन, क्या आप भरोसा दिलाते हैं कि पाकिस्तानी कलाकारों को काम देने आतंकवाद समाप्त हो जाएगा? भारत में आप अभिव्यक्ति की आजादी का बेजा इस्तेमाल करते हैं, इसलिए आप खुद को खुदा समझते हो। यदि वाकई कलाकार संवेदनशील हैं और उनके लिए देश की सीमाएँ कोई मायने नहीं रखती, तब क्या पाकिस्तानी कलाकार बेकसूर लोगों का खून बहाने वाले आतंकवादियों का विरोध कर सकते हैं? पाकिस्तानी कलाकारों के समर्थक क्या इतना भर करा सकते हैं कि कोई फवाद खान पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ बयान जारी कर दे? यह संभव नहीं है। इसलिए पाकिस्तानी कलाकारों के लिए विधवा विलाप बेमानी है।

बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

पाकिस्तान को पसंद आए केजरीवाल के बोल

 देश  का दुर्भाग्य है कि यहाँ के नेता और बुद्धिजीवी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी बेतुकी बयानबाजी करने से बाज नहीं आते हैं। वक्त की नजाकत कहती है कि इस वक्त भारत और पाकिस्तान के संबंध में बहुत संभलकर बोलने की जरूरत है। इस वक्त कोई भी विचार प्रकट करते वक्त यह ध्यान रखना ही चाहिए कि उसका क्या असर होगा? हमारा विचार दुश्मन देश को मदद न पहुँचा दे। अपने किसी भी बयान से भारत सरकार, भारतीय सेना और भारतीय नागरिकों का मनोबल कमजोर नहीं होना चाहिए। लेकिन, स्वार्थ की राजनीति करने वाले नेता बड़ी बेशर्मी से ऐसे प्रश्न खड़े कर ही देते हैं। आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसी ही एक अमर्यादित टिप्पणी 'सर्जिकल स्ट्राइक' के संबंध में कर दी है। दो मिनट 52 सेकंड का एक वीडिया उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी किया है, जिसमें केजरीवाल पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर बात कर रहे हैं।

शनिवार, 1 अक्टूबर 2016

सर्जिकल स्ट्राइक : शक्ति की उपासना का प्रकटीकरण

 आज  से नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। शक्ति की उपासना का पर्व। भारत के पर्व उसकी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रत्येक पर्व अपने साथ सामाजिक संदेश लेकर आता है। यह सुयोग ही है कि शक्ति पर्व के प्रारंभ से पहले पाकिस्तान में पनाह लिए आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करके भारत ने दुनिया को बता दिया कि वह शास्त्र के साथ शस्त्र का भी धारण करता है। हम देखें तो पाएंगे कि हमारे प्रत्येक देवी-देवता शस्त्र और शास्त्र दोनों धारण करते हैं। स्पष्ट संदेश है कि अकेला शस्त्र खतरनाक है और शास्त्र निरर्थक। जैसे पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों के पास शस्त्र तो हैं, लेकिन शास्त्र नहीं हैं। इसलिए दुनिया में भय है कि यह पागल देश परमाणु बम का उपयोग न कर बैठे। इसी तरह उन महान संस्कृतियों का शास्त्र (संदेश) भी कोई नहीं सुनता, जिनके पास शस्त्र नहीं है। शस्त्र और शास्त्र में संतुलन का संदेश भारतीय संस्कृति में है। इसलिए भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र है और पाकिस्तान एक गैर जिम्मेदार देश। भारत शास्त्र का महत्त्व समझता है, इसलिए इतना संयम और धैर्य दिखा पाता है।