सोमवार, 3 अगस्त 2026

भगवा रंग से चिढ़ क्यों?

राष्ट्रध्वज तिरंगा में सबसे ऊपर है भगवा, भारतीय संस्कृति का का परिचायक, त्याग, वैराग्य, साहस, बलिदान और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है भगवा

खेल मैदान में राष्ट्रीय ध्वज के रंगों का समावेश कोई नई बात नहीं है, लेकिन भारत की राजनीति में जब भी केसरिया या नारंगी रंग की बात आती है, एक खास राजनीतिक वर्ग में असहजता साफ दिखने लगती है। आगामी हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों की नई जर्सी लॉन्च हुई है। पारंपरिक नीले रंग की जगह इस बार नारंगी रंग को प्राथमिक किट के रूप में चुना गया है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व दिग्गज खिलाड़ी दिलीप तिर्की ने स्पष्ट किया कि नीले टर्फ पर नीले रंग की जर्सी के कारण विजिबिलिटी (दृश्यता) की व्यावहारिक समस्या आ रही थी और यह सुझाव सीधे खिलाड़ियों एवं कोचिंग स्टाफ की तरफ से आया था। इसके बावजूद, सुदीर्घ अनुभव रखनेवाले राजनीतिक दल के नेताओं और उनके समर्थकों ने इसे लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा करने का प्रयास किया है। हिन्दू पहचान से चिढ़ने वाले नेताओं का यह बयान आया है कि “देश की पहचान अहिंसा, सत्य और भाईचारे से जुड़ी है और इन्हें बदला नहीं जा सकता”। यह बयान इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक विशुद्ध रूप से तकनीकी और खेल संबंधी फैसले को जबरन वैचारिक संघर्ष में घसीटा जा रहा है। 

जर्सी का रंग बदलने से देश के नैतिक मूल्य कैसे खतरे में पड़ सकते हैं? भगवा रंग से अहिंसा, सत्य और भाईचारे की पहचान कैसे बदल सकती है? यह तर्क न केवल हास्यास्पद है, बल्कि खेल और खिलाड़ियों की जरूरतों का अपमान भी है। क्या इन राजनेताओं को यह नहीं पता कि भगवा रंग भारत की पहचान है? वास्तव में भगवा रंग तो अहिंसा, सत्य और भाईचारे की पहचान है। यह रंग शांति, त्याग और शौर्य की भी पहचान है। वैभव और वैराग्य दोनों का प्रतिनिधि यह भगवा रंग है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान से सबको मोहित करने वाला रंग भगवा ही है। कौन भूल सकता है कि इसी रंग के वस्त्र पहने युवा संन्यास स्वामी विवेकानंद ने 'विश्व धर्म संसद' के मंच से दुनिया को शांति और भाईचारे का पाठ पढ़ाया था। 

भारत के प्रति श्रद्धा रखने वाले किसी भी व्यक्ति को यह समझ नहीं आ रहा है कि इन नेताओं और उनके समर्थकों को किसने बताया कि भगवा रंग से अहिंसा, सत्य और भाईचारे को खतरा पैदा हो जाएगा? अगर ऐसा है, तब भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे पर सबसे ऊपर यह रंग क्यों है? हमारे पूर्वजों ने भगवा रंग को इतना महत्व क्यों दिया कि तिरंगे में उसे सबसे ऊपर स्थान दिया? उल्लेखनीय है कि ध्वज समिति को देशभर से सुझाव तो यही आया था कि हमारे देश का ध्वज एक ही रंग का हो और वह रंग केसरिया हो। यह रंग सदियों से भारत की पहचान है। इसलिए जब तीन रंग का ध्वज चुना गया तब भी भगवा को शीर्ष पर सुशोभित किया गया। 

यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि भ्रमित राजनीति ने मुस्लिम तुष्टीकरण के चक्कर में भगवा रंग को संकीर्ण मानसिकता के साथ देखना शुरू कर दिया है। जबकि ऐसा है नहीं कि मुसलमान चाहते हों कि राजनीतिक दल उनकी खुशामद करने के लिए भगवा रंग से उसी तरह चिढ़ें, जैसे लाल रंग देखकर सांड भड़क उठता है। अपनी कुंठा और हताशा को सही साबित करने के लिए भगवा विरोधी इस गिरोह ने 'भगवा आतंकवाद' जैसी बेसिरपैर की अवधारणा को स्थापित करने के लिए कितनी गहरी साजिश की थी, यह भी सबके सामने है। इसलिए जब भगवा को देखकर इनकी बौखलाहट सामने आती है, तब किसी को कोई आश्चर्य नहीं होता।

याद रहे कि यह पहली बार नहीं है जब भगवा विरोधी गिरोह ने किसी खेल किट में नारंगी रंग के प्रयोग पर आपत्ति जताई हो। 2019 के क्रिकेट विश्व कप के दौरान जब भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ अपनी वैकल्पिक नारंगी जर्सी पहनकर मैदान पर उतरी थी, तब भी संकीर्ण मानसिकता के लोगों ने इसे ‘मोदी सरकार का भगवाकरण एजेंडा’ करार देकर बवाल काटा था। जब हम सब यह देखकर विचार करते हैं तब मन में यही सवाल उठता है कि आखिर इन लोगों को नारंगी या भगवा रंग से इतनी समस्या क्यों होती है? 

उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब भारतीय हॉकी टीम ने अपनी जर्सी में बदलाव किया हो। इससे पहले भी टीम पीली और हल्के नीले रंग की जर्सी पहनकर खेल चुकी है। वर्ष 2014 के हॉकी विश्वकप के दौरान विजिबिलिटी और तकनीकी जरूरतों के कारण जर्सी का रंग बदलकर पीला कर दिया गया था।इसी प्रकार वर्ष 2018 के विश्वकप में टीम की जर्सी का रंग बदलकर एक नए डिजाइन के साथ आसमानी नीला (स्काई ब्लू) किया गया था। इस संबंध में दो बार के ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता प्रसिद्ध गोलकीपर श्रीजेश ने भी संपूर्ण विवाद पर हैरानी जताते हुए कहा है कि "जर्सी का रंग 2014 और 2018 विश्व कप के लिए भी बदला था। यहाँ तक कि हमारी ट्रेनिंग की एक किट भी केसरिया रंग की थी। इस बार विश्व कप से पहले इस पर इतनी चर्चा क्यों हो रही है? क्या इसलिए कि ये केसरिया रंग की है या इसलिए कि रंग बदल गया है"। श्रीजेश ने आग्रह किया है कि जर्सी से जुड़े विवादों को पीछे छोड़कर 50 वर्षों से चला आ रहा पदक का सूखा खत्म करने की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

नईदुनिया (दैनिक जागरण समूह) में 03 अगस्त, 2026 को प्रकाशित समाचार

इसलिए जर्सी का रंग बदलने पर वितंडावाद कर रहे नेताओं को अपनी मानसिकता में बदलाव करना चाहिए। खेल को खेल के मैदान तक ही सीमित रहने देना चाहिए। जब भारतीय खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं, तो उनका एकमात्र लक्ष्य देश का गौरव बढ़ाना होता है, न कि किसी राजनीतिक दल के एजेंडे को आगे बढ़ाना। तिरंगे में शामिल केसरिया रंग को नफरत या संदेह की नजरों से देखना खुद राष्ट्र के प्रतीकों का अनादर है। राजनीतिक दलों एवं उसके नेताओं को यह समझना होगा कि हर नारंगी या भगवा रंग राजनीति से प्रेरित नहीं होता, और राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि रंग से परहेज करके वे अपनी ही राजनीतिक सोच को कटघरे में खड़ा करते हैं।

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