संघ शताब्दी वर्ष : जिस स्थान पर शाखा लगती है उसे संघस्थान कहते हैं, खेल का मैदान नहीं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक कहते हैं कि संघ को समझना है तो शाखा में आइए। प्रश्न है कि शाखा कहाँ लगती है और किस शाखा में जाना चाहिए? एक बात तो सभी जानते हैं कि सामान्यतौर पर संघ की शाखा खुले मैदान/स्थान पर लगती है। वरिष्ठ प्रचारक मधुभाई कुलकर्णी लिखते हैं- “जिस स्थान पर शाखा लगती है उसे हम संघस्थान कहते हैं, खेल का मैदान नहीं। संघस्थान तैयार करना पड़ता है। संघ में शाखा यानी भारत माता की आराधना ही है। वह स्थान, जहां भारत माता की प्रार्थना होती है तथा जहां अज्ञान का अंधकार दूर करने वाले भगवा ध्वज की स्थापना होती है, वह स्थान कैसा होना चाहिए? वह स्थान होना चाहिए मंदिर के समान स्वच्छ, पानी से धोकर साफ किया, रेखांकन (रंगोली) से सजा-धजा”। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो पार्क या मैदान किसी समय में ऊबड़-खाबड़ थे, संघ की शाखा शुरू होने के बाद स्वयंसेवकों के परिश्रम ने उन्हें व्यवस्थित कर दिया। एक विद्यालय के संचालक संघ शिक्षा वर्ग के लिए स्थान देने को तैयार नहीं थे लेकिन बाद में बहुत आग्रह के बाद उन्होंने स्थान दे दिया। सात दिन के प्राथमिक शिक्षा वर्ग के समापन कार्यक्रम में जब स्कूल संचालक आए और उन्होंने मैदान का कायाकल्प देखा तो हैरान रह गए। बहरहाल, शाखा को संघ की आत्मा कहा जाता है। संघ कार्य का आधार यही शाखाएं हैं, जो खुले मैदान में लगती हैं। यानी संघ का बुनियादी कार्यक्रम एकदम पारदर्शी है।
अब प्रश्न आता है कि संघ की शाखा में कौन आ सकता है? संघ की शाखा में शामिल होने के लिए किसी भी प्रकार की विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं है। किसी भी जाति, संप्रदाय और आयुवर्ग का व्यक्ति संघ की शाखा में आ सकता है। संघ की शाखा सबके लिए है। संघ में किसी प्रकार का पंजीयन नहीं किया जाता है और न ही किसी प्रकार की सदस्यता शुल्क लगती है। संघ का ‘घटक’ बनने के लिए शाखा ही एकमात्र स्थान है। निकटतम स्थान पर लगने वाली शाखा में आकर ही कोई व्यक्ति संघ का स्वयंसेवक बन सकता है। संघ से जुड़ने की प्रक्रिया इतनी ही सरल है। यदि आपको यह जानकारी नहीं है कि आपके आसपास संघ की शाखा कहाँ लगती है, तब आप आरएसएस की अधिकृत वेबसाइट ‘आरएसएस डॉट ओआरजी’ पर जाकर ‘ज्वाइन आरएसएस’ का ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। संघ के स्थानीय कार्यकर्ता आपसे संपर्क कर लेंगे।
सबकी रुचि, प्रकृति और अवस्था को ध्यान में रखते हुए संघ में अलग-अलग प्रकार की शाखाएं लगती हैं। वैसे तो हम किसी भी शाखा में जा सकते हैं। लेकिन यदि हम उचित शाखा का चुनाव करेंगे, तो अधिक आनंद आएगा। ये शाखाएं सामान्यतौर पर आयुवर्ग के आधार पर हैं। इसी आधार पर उन शाखाओं का पाठ्यक्रम है। हमारी आयु अधिक है और हम बच्चों की शाखा में चले गए, तब थोड़ा सामंजस्य बैठाने में कठिनाई आएगी ही। हाँ, उसी शाखा में अधिक आयु के लोगों की संख्या 15-20 है और बच्चों की संख्या भी 15-20 है, तब दोनों आयुवर्ग के अलग-अलग गण बनाकर शाखा के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। संघ ने शाखाओं को इस प्रकार वर्गीकृत किया है-







