बांग्लादेश से आ रहे समाचार न केवल विचलित करने वाले हैं, बल्कि पड़ोसी देश में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और विशेष रूप से हिन्दू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। बांग्लादेश के जेस्सोर जिले में पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या और अगले ही दिन एक हिन्दू दुकानदार शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। 18 दिन में 6 हिन्दुओं की हत्याओं की घटनाएं सामने आई हैं। मारपीट और शोषण के मामले भी सामने आ रहे हैं। ये घटनाएं महज आंकडे नहीं हैं, बल्कि उस सांप्रदायिक सोच के गवाह हैं, जिसने पिछले कुछ हफ्तों में वहां के हिन्दू समुदाय को दहशत के साये में जीने को मजबूर कर दिया है। घटनाओं की प्रकृति और उनमें अपनाए गए तरीके अत्यंत बर्बर और अमानवीय हैं। एक तरफ जहां राणा प्रताप को सरेआम गोली मारी गई, वहीं शरीयतपुर में व्यापारी खोकन चंद्र दास के साथ जो हुआ, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। धारदार हथियारों से हमला करना और फिर पेट्रोल डालकर जिंदा जला देना, अपराधियों के मन में बैठे गहरे सांप्रदायिक जहर को दर्शाता है।
सांप्रदायिक हिंसा की इनसे भी अधिक वीभत्स घटना झेनाइदह में सामने आई, जहां एक 44 वर्षीय हिन्दू विधवा के साथ न केवल सामूहिक दुष्कर्म किया गया, बल्कि उसे पेड़ से बांधकर पीटा गया और उसके बाल तक काट दिए गए। ऐसा प्रतीत होता है कि इस आधुनिक दौर में भी बांग्लादेश में कबीलाई व्यवस्था चल रही है। जहाँ महिलाओं को माल-ए-गनीमत समझा जा रहा है और काफिरों के कत्ल को ईमान। अपराधियों द्वारा महिला के साथ दुष्कर्म का वीडियो बनाना यह साबित करता है कि उनमें कानून का रत्ती भर भी भय नहीं बचा है। कहने को बांग्लादेश में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद युनुस के हाथ में देश की बागडोर है लेकिन जिस प्रकार से इस्लामिक कट्टरपंथी खुलेआम आतंक मचा रहे हैं, वैसा आतंक इससे पहले कभी नहीं देखा गया। मोहम्मद युनुस सांप्रदायिक ताकतों के साथ ही खड़े नजर आ रहे हैं। अन्यथा इतना सबकुछ होने पर वह कुछ तो बोलते। शांति व्यवस्था नहीं बना पा रहे हैं तो शांति नोबेल की खातिर अपना पद ही छोड़ देते?
पड़ोसी देशों, विशेषकर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में स्थिति बहुत चिंताजनक है। इन देशों में इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों ने प्रारंभ से ही हिंदुओं को अपने निशाने पर लिया है।इस सबके बावजूद तथाकथित मानवाधिकारवादी एवं तथाकथित सेकुलर ब्रिगेड के मुंह से दो शब्द नहीं निकलते pic.twitter.com/gYLq4IIAqp
— लोकेन्द्र सिंह (Lokendra Singh) (@lokendra_777) January 4, 2026
दीपू चंद्र दास से लेकर शरत चक्रवर्ती मणि तक, लगातार हो रही हत्याएं यह बताने के लिए काफी हैं कि बांग्लादेश में सांप्रदायिक तत्व हावी हो चुके हैं और सरकार भी उनके साथ ही खड़ी है। इसे यूँ भी समझ सकते हैं कि बीसीसीआई के कहने पर जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को टीम से निकाला तो उसकी प्रतिक्रिया पूरा बांग्लादेश दे रहा है। अपने गिरेबां में झांकने की बजाय बांग्लादेश भारत को ही आँखें दिखा रहा है। दरअसल, बांग्लादेश पूरी तरह से पाकिस्तान और कट्टरपंथी इस्लामिक गिरोहों की गोद में जाकर बैठ गया है। बांग्लादेश भारत के सारे एहशान भूल चुका है। मजहब, बांग्लादेश के लिए सर्वोच्च हो गया है।
बांग्लादेश में हो रही ये घटनाएं भारत के लिए भी स्वाभाविक चिंता का विषय हैं। एक पड़ोसी राष्ट्र में, विशेषकर जब वहां सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक अस्थिरता का दौर चल रहा हो, हिन्दू अल्पसंख्यकों का इस तरह निशाना बनना एक सुनियोजित षड्यंत्र का संकेत देता है। यह केवल एक देश का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का वैश्विक मुद्दा है। यदि समय रहते इन हिंसक प्रवृत्तियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो नफरत की यह आग पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बन सकती है। बांग्लादेश के नीति-नियंताओं को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि वे जिस राह पर चल रहे हैं, उसमें उनके लिए घोर अंधकार है। जैसे आज पाकिस्तान आतंक की आग में जल रहा है, वह दिन दूर नहीं जब बांग्लादेश भी इस नफरत की आग में खाक हो जाएगा। बांग्लादेश की स्थितियों को देखकर भारत को भी संभलने की जरूरत है। इसके साथ ही भारत को यह विचार करना चाहिए कि बांग्लादेश के हिन्दुओं की रक्षा के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।
बांग्लादेश में पिछले 18 दिन में 6 हिन्दू मारे गए :
- 18 दिसंबर 2025 : मेमनसिंह जिले में 27 वर्षीय दीपू चंद्र दास के साथ मॉब लिंचिंग हुई। उन्हें पेड़ से बांधकर आग लगा दी। यह हत्याकांड ईशनिंदा के झूठे आरोप लगाकर की गई। दीपू की मॉब लिंचिंग करने वाले उनके ही मुस्लिम मित्र थे।
- 24 दिसंबर 2025 : राजबाड़ी जिले के पांशा उपजिला में 29 वर्षीय अमृत मंडल को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था।
- 30 दिसंबर 2025 : मेमनसिंह जिले में कपड़ा फैक्ट्री में बजेन्द्र बिस्वास की उनके सहकर्मी ने गोली मारकर हत्या कर दी।
- 31 दिसंबर 2025 : शारीअतपुर जिले में खोकोन दास को एक भीड़ ने हथियारों से मारकर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। उपचार के दौरान 3 जनवरी 2026 को उनकी मौत हो गई।
- 5 जनवरी 2026 : जेस्सोर में हिन्दू युवक राणा प्रताप की गोली मार कर हत्या कर दी। राणा, बैरागी नारायल से प्रकाशित अखबार दैनिक बीडी खबर के कार्यकारी संपादक थे।
- 6 जनवरी 2026 : नरसिंदी जिले में हिन्दू दुकानदार शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई। 19 दिसंबर को मणि ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर देश में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई थी।

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