भ्र ष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का चेहरा रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने 'लालू-केजरी मिलन' प्रकरण पर खुशी जताई है। लेकिन, यह खुशी अरविन्द केजरीवाल के लिए चिंता का बहुत बड़ा विषय होना चाहिए। कई ऐसे अवसर-प्रकरण गवाह हैं जब सब ओर से केजरीवाल की कड़ी आलोचना हो रही थी तब अन्ना ने केजरीवाल की पीठ पर हाथ रखा था। उनके प्रयासों का समर्थन किया था। आलोचकों के सामने खड़ा होने का हौसला दिया था। लेकिन, भ्रष्टाचार को गले लगाने के प्रकरण में अन्ना ने केजरीवाल से न केवल पल्ला झड़ा लिया है बल्कि कड़ी टिप्पणी भी कर है। उन्होंने कहा- 'लालू प्रसाद यादव को गले लगाकर अरविन्द ने अच्छा काम नहीं किया है। इससे समाज में गलत संदेश गया है। मैं खुश हूं कि मैं अरविन्द से नहीं जुड़ा हूं। वरना केजरीवाल की इस गलती पर लोग मुझ पर भी सवाल उठाते।'
बुधवार, 25 नवंबर 2015
शनिवार, 21 नवंबर 2015
बेटी के लिए कविता-2
"मेरी चिड़िया,
आज तुम पूरे एक साल की हो गयी हो।
तुम्हारी हँसी के मौसम में मौज का एक साल कब निकल गया,
पता ही नहीं चला।
तुम्हारे आने के बाद असल में अहसास हुआ,
पिता होने का अर्थ क्या है?
हृदय और अधिक संवेदनशील हो गया है।
लौट आया है मेरा भी बचपन तुम्हारे साथ।
तुम्हारी नन्ही कोमल अंगुलियां जब मेरे गालों को स्पर्श करती हैं,
मेरा रोम-रोम पुलकित हो उठता है।
सुबह-सुबह ऑफिस जाते वक्त रोज देखता हूँ,
किवाड़ के उस पार छूटता हुआ मेरा मन
और इस पार घुटने-घुटने चलकर आता तुम्हारा मन।
शाम को घर लौटने की व्याकुलता रहती है,
तुम्हारी हँसी के साथ झरने वाले
चमेली-चम्पा-गेंदा-गुलाब समेटने के लिए।
पता नहीं तुम कौन-सा जग जीत लेती हो,
मुझे सामने पाकर।
अपने नन्हे घुटनों पर खड़ी हो जाती हो, दोनों हाथ विजयी मुद्रा में उठाकर।
जब तक कलेजे से लटक नहीं जाती हो,
सुकून नहीं मिलता तुम्हें और मुझे भी।
मेरे साथ से तुम्हें कौन-सा खजाना मिलता, मुझे पता नहीं।
लेकिन हाँ, मुझे जरूर धरती पर स्वर्ग मिल जाता है।
तुम्हारी अजब लीला है।
मेरे घर आने के बाद तो जैसे धरती पर कांटे उग आते हैं,
गोदी से उतरने का नाम नहीं लेती हो।
फिर तो नींद भी तुम्हें मेरे कंधे पर ही आती है।
खैर, बहुत बात हैं लिखने-कहने को, ख़त्म नहीं होंगी।
कभी-कभी मन करता है, घड़ी की सुईयों से लटक जाऊँ,
कालचक्र के पहिये को थाम लूँ।
ऐसे ही रहे यह समय, हमेशा के लिए।
तुम नन्ही परी और मैं अल्हड़ पिता।"
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- लोकेन्द्र सिंह -
शुक्रवार, 20 नवंबर 2015
कांग्रेस की पाकिस्तान से क्या सांठगांठ है?
कां ग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान में भारतीय जनता का अपमान किया है। पाकिस्तानी टीवी चैनल से बातचीत करते हुए मणिशंकर अपनी जुबान पर काबू खो बैठे। एंकर ने उनसे पूछा कि भारत-पाकिस्तान के बीच फिर से दोतरफा बातचीत कैसे शुरू की जा सकती है? मणिशंकर ने बहुत उतावले होते हुए जवाब दिया- 'मोदी को हटाइये, हमको लाइये।' क्या मणिशंकर इस देश की जनता को बता सकते हैं कि पाकिस्तान कांग्रेस को कैसे सत्ता में ला सकता है? चुनावों में जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस पाकिस्तान से क्या सांठगांठ कर रही है? कांग्रेस के एक और बड़े नेता सलमान खुर्शीद ने भी पाकिस्तान जाकर हाल में विवादित बयानबाजी की थी। उनके बयानों के कारण भी भारतीय कूटनीति को नुकसान पहुंचा है। दोनों नेताओं ने भारत के सामने असहज स्थितियां खड़ी कर दी हैं। पाकिस्तान दोनों नेताओं के बयानों का भारत के खिलाफ कूटनीतिक उपयोग करेगा।
बुधवार, 18 नवंबर 2015
क्या अब राष्ट्रपति की सुनेंगे साहित्यकार?
रा ष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सम्मान लौटा रहे तथाकथित बुद्धिजीवियों को नसीहत दी है। उन्होंने कहा है कि जिन लोगों को देश की तरफ से प्रतिष्ठित सम्मान/पुरस्कार मिलते हैं, उन्हें इन पुरस्कारों का सम्मान करना चाहिए। अपनी असहमति को बहस, तर्क और विमर्श के माध्यम से प्रकट किया जाना चाहिए। भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। राष्ट्रपति के बयान के बाद सम्मान लौटाने वाले लोगों के सामने बड़ी विकट स्थिति खड़ी हो गई है। पहले से ही उनके सम्मान वापसी अभियान का विरोध हो रहा था। अनुपम खेर, नरेन्द्र कोहली, सूर्यकांत बाली, मधुर भंडारकर सहित अनेक हस्तियां सम्मान वापस करने वाले लोगों के चयनित दृष्टिकोण और चयनित विरोध के खिलाफ प्रदर्शन कर चुकी हैं। सम्मान वापसी अभियान के प्रत्युत्तर में किताब वापसी अभियान भी पाठकों ने चला रखा है। किताब वापसी अभियान में पाठक सम्मान लौटाने वाले साहित्यकारों की पुस्तकें उनके घर जाकर वापस कर रहे हैं। अब राष्ट्रपति की टिप्पणी ने सम्मान लौटाकर विरोध करने के तरीके पर सबसे बड़ा प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया है।
उत्तरप्रदेश में महागठबंधन की सुगबुगाहट
बि हार में राजद, जदयू और कांग्रेस के महागठबंधन की विजय के बाद अब उत्तरप्रदेश में भी भाजपा से पार पाने के लिए एक नए महागठबंधन की सुगबुगाहट हो रही है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे और हवा दे दी है। उन्होंने कहा है कि बिहार की तरह उत्तरप्रदेश में भी महागठबंधन बन सकता है। हालांकि उनके चाचाश्री और कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने पहली फुरसत में ही उत्तरप्रदेश में महागठबंधन से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी अपनी दम पर चुनाव लडऩे में सक्षम है। यदि गठबंधन बनाना ही होगा तो फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा। इससे पूर्व राज्यमंत्री फरीद महमूद किदवई भी कह चुके हैं कि उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को मिलकर चुनाव लडऩा चाहिए। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी ने भी भारतीय जनता पार्टी को कमजोर करने के लिए उत्तरप्रदेश में महागठबंधन की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि उत्तरप्रदेश में ही क्यों, पूरे देश में भाजपा विरोधियों को एकजुट हो जाना चाहिए।
सोमवार, 16 नवंबर 2015
आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता और एकजुटता की जरूरत
दु निया के खूबसूरत शहर पेरिस पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) का हमला समूची मानवता पर हमला है। आईएस के आतंकियों ने पेरिस की सड़कें लाल कर दी हैं। विश्व स्तब्ध है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए विख्यात फ्रांस पर यह तीसरा आतंकी हमला है। कार्टून पत्रिका ’शार्ली एब्दो’ के कार्यालय पर हुआ हमला अभी दुनिया भूली भी नहीं थी कि आईएसआईएस ने 14 नवम्बर (शुक्रवार) को फ्रांस की राजधानी पेरिस में सिलसिलेवार धमाके करके सैकड़ों लोगों की जान ले ली। हमले में सैकड़ों घायल हैं, जो जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए ईश्वर से पूछ रहे हैं कि आखिर उनका क्या दोष था? ये दरिन्दे मानवता का रक्त कब तक बहायेंगे? आईएस के इस हमले से फ्रांस ही नहीं दहला है, आतंक के निशाने पर रहने वाले दूसरे देश भी चिंतित हो उठे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने अपने देश की जनता को भरोसा और साहस देते हुए कहा है कि आतंकवाद के विरुद्ध हम एक ऐसा युद्ध छेड़ने जा रहे हैं, जिसमें किसी पर रहम नहीं होगा। आतंकियों को पता चलना चाहिए कि उनका सामना ‘प्रतिबद्ध-एकजुट’ फ्रांस से हुआ है।
रविवार, 15 नवंबर 2015
गांधी और बुद्ध का है देश भारत
भा रत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ’असहिष्णुता’ का सामना इंग्लैंड में भी करना पड़ गया। इंग्लैंड के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता को संबोधित करने के दौरान बीबीसी के पत्रकार ने मोदी से सवाल किया था कि भारत क्यों लगातार असहिष्णुता बनता जा रहा है? प्रधानमंत्री मोदी ने इसका बड़ा ही खूबसूरत और सटीक जवाब दिया। उन्होंने कहा- ‘भारत बुद्ध की धरती है, गांधी की धरती है और हमारी संस्कृति समाज के मूलभूत मूल्यों के खिलाफ किसी भी बात को स्वीकार नहीं करती है।’ गांधी और बुद्ध शांति और सहिष्णुता के वैश्विक प्रतीक हैं। इनके माध्यम से दुनिया को भारत का चरित्र बताना अधिक आसान है। भारत में जो बुद्धिजीवी ‘कथित बढ़ती असहिष्णुता’ को मुद्दा बनाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी दुनिया को यह संदेश देना चाहिए था। लेकिन, अपने स्वार्थ के कारण उन्होंने भारत की छवि का ध्यान नहीं रखा। अपने बाहरी संपर्कों का उपयोग करते हुए उन्होंने ‘असहिष्णुता’ को आधार बनाकर दुनिया में भारत की छवि को नकारात्मक ढंग से प्रस्तुत किया है।
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