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मंगलवार, 5 जुलाई 2016

आतंकवाद और इस्लाम में संबंध क्या है

ढाका हमले में आतंकियों का शिकार बनी भारत की बेटी तारुषी जैन.
 बांग्लादेश  की राजधानी ढाका के प्रतिष्ठित और सुरक्षित क्षेत्र में आतंकी हमले के बाद आतंकवाद और इस्लाम के संबंधों पर फिर से बहस शुरू हो गई है। महत्त्वपूर्ण बात है कि इस बहस में तीखे सवाल स्वयं मुस्लिम ही पूछ रहे हैं। इसलिए इस बहस को गैर मुस्लिमों द्वारा इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने के लिए चलाई गई बहस के रूप में नहीं देखना चाहिए। बल्कि यह बहस इस्लाम और मुसलमानों के लिए आत्म विश्लेषण का जरिया बननी चाहिए। हालाँकि, आतंकवाद और इस्लाम के संबंध पर सबसे पहली आवाज भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य की मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती ने तब उठाई जब आतंकियों ने पंपोर में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के आठ जवानों की हत्या की थी। मुख्यमंत्री मुफ्ती ने कहा था कि मुस्लिम होने के नाते मैं बेहद शर्मिंदा हूं कि पवित्र माह रमजान में आतंकियों ने यह हमला किया है। आतंकियों के इस हमले से जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि इस्लाम और मुसलमान भी बदनाम हुए हैं।

भारत के नजदीक आया इस्लामिक आतंकवाद

 बांग्लादेश  की राजधानी ढाका के डिप्लोमैटिक जोन के होली आर्टीजन बेकरी रेस्तरां में आतंकी हमले ने दुनिया को दहला दिया है। यह हमला बांग्लादेश की अनदेखी का नतीजा है। पिछले कुछ समय से जिस तरह बांग्लादेश में आतंकियों द्वारा उदारवादी लेखकों, ब्लॉगरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हिन्दुओं की सुनियोजित तरीके से हत्या की जा रही थी, उससे बांग्लादेश की सरकार ने कोई सबक नहीं सीखा था। ज्यादतर हत्याओं की जिम्मेदारी आईएस जैसे खतरनाक आतंकी संगठन ने ली थी, लेकिन प्रधानमंत्री शेख हसीना बार-बार खारिज करती रहीं कि उनके देश में आईएस की उपस्थिति नहीं है। जबकि हकीकत उसके उलट थी। हकीकत से नजरें चुराने के कारण ही आईएस के आतंकी ढाका के सबसे संवेदनशील और सुरक्षित क्षेत्र गुलशन डिप्लोमैटिक जोन से यह संदेश देने में सफल रहे कि बांग्लादेश में उनकी सशक्त मौजूदगी है। इस आतंकी हमले की तुलना भारत की आर्थिक राजधानी मुम्बई में होटल ताज में हुए २६/११ से की जा रही है। गौरतलब है कि ढाका हमले में मरने वालों में लगभग सभी विदेशी नागरिक हैं। आतंकियों की बर्बरता का शिकार होने वालों में एक भारतीय युवती तारुषी भी शामिल है। 

सोमवार, 16 नवंबर 2015

आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता और एकजुटता की जरूरत

 दु निया के खूबसूरत शहर पेरिस पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) का हमला समूची मानवता पर हमला है। आईएस के आतंकियों ने पेरिस की सड़कें लाल कर दी हैं। विश्व स्तब्ध है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए विख्यात फ्रांस पर यह तीसरा आतंकी हमला है। कार्टून पत्रिका ’शार्ली एब्दो’ के कार्यालय पर हुआ हमला अभी दुनिया भूली भी नहीं थी कि आईएसआईएस ने 14 नवम्बर (शुक्रवार) को फ्रांस की राजधानी पेरिस में सिलसिलेवार धमाके करके सैकड़ों लोगों की जान ले ली। हमले में सैकड़ों घायल हैं, जो जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए ईश्वर से पूछ रहे हैं कि आखिर उनका क्या दोष था? ये दरिन्दे मानवता का रक्त कब तक बहायेंगे? आईएस के इस हमले से फ्रांस ही नहीं दहला है, आतंक के निशाने पर रहने वाले दूसरे देश भी चिंतित हो उठे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने अपने देश की जनता को भरोसा और साहस देते हुए कहा है कि आतंकवाद के विरुद्ध हम एक ऐसा युद्ध छेड़ने जा रहे हैं, जिसमें किसी पर रहम नहीं होगा। आतंकियों को पता चलना चाहिए कि उनका सामना ‘प्रतिबद्ध-एकजुट’ फ्रांस से हुआ है।

मंगलवार, 15 सितंबर 2015

मुसलमानों की अनुकरणीय पहल

 भा रत के मुसलमानों ने अनुकरणीय और सराहनीय कदम उठाया है। विश्व सभ्यता पर कलंक और मानवता के लिए खतरा बन चुके इस्लामिक स्टेट के खिलाफ भारतीय मुसलमान सड़कों पर उतर आया है। आईएस के खिलाफ मुसलमानों के प्रदर्शन को मीडिया और बौद्धिक विमर्श में अधिक से अधिक कवरेज मिलना चाहिए था। खूब चर्चाएं होनी चाहिए थी। प्राथमिकता के साथ मुसलमानों की इस पहल को दिखाना चाहिए था। इस विषय में लिखना चाहिए था। दुर्भाग्यवश ऐसा पर्याप्त मात्रा में हो नहीं सका। सबको भारतीय मुसलमानों का समर्थन करना चाहिए था। ऐसा बहुत कम होता है जब मुसलमान इस्लामिक कट्टरपंथियों के खिलाफ इस कदर सड़कों पर उतरता है। भारतीय मुसलमानों ने इसकी शुरुआत की है तो बाकि सबका फर्ज बनता है कि उनकी आवाज को दूर तक पहुंचाया जाए। यह छोटी बात नहीं है। दुनिया में दहशत का पर्याय बन चुके आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ भारत के मुसलमानों ने अब तक का सबसे बड़ा फतवा जारी किया है। उन्होंने आईएस का विरोध करते हुए बेगुनाहों की हत्या की निंदा की है। आईएस की गतिविधियों को गैर इस्लामिक और शरीयत के खिलाफ बताया है। इस फतवे को दुनिया के सामने मिसाल के तौर पर पेश किया जाना चाहिए। ताकि दुनिया के मुसलमान भी आगे आकर इस्लामिक आतंकी संगठनों का विरोध करें।

सोमवार, 3 अगस्त 2015

आईएसआईएस की भारत पर बुरी नजर

 अ मरीकी अखबार में खुलासा हुआ है कि आतंक का पर्याय बन चुके आईएसआईएस के निशाने पर भारत है। अमरीकी सुरक्षा एजेंसियों को तालिबान से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक से कुछ दस्तावेज मिले थे। जिनका अध्ययन करने के बाद अमरीकी सुरक्षा एजेंसियां इस नतीजे पर पहुंची हैं कि भारत के खिलाफ जंग का ऐलान करके इस्लामिक स्टेट निर्णायक युद्ध छेडऩा चाहता है। वह जानता है कि भारत जैसे महत्वपूर्ण देश पर हमला किया गया तो अमरीका भी हस्तक्षेप करेगा। अमरीका के हस्तक्षेप करने के बाद आईएसआईएस दुनिया के तमाम आतंकवादी संगठनों और उसकी कट्टर धार्मिक विचारधारा में भरोसा रखने वाले मुस्लिम देशों को एकजुट कर इस्लामिक स्टेट की स्थापना के लिए निर्णायक युद्ध छेड़ सकता है। आईएसआईएस भारत पर हमला करने की तैयारी में जुटा हुआ है। इसके लिए वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सक्रिय जिहादियों के साथ मिलकर षड्यंत्र रच रहा है। भारत के विरुद्ध बड़ी आतंकी कार्रवाई में निश्चित ही आईएस को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों का साथ मिल जाएगा। दोनों आतंकी गुट लम्बे समय से भारत को परेशान कर रहे हैं। भारत में आतंकी विस्फोट कराने में अमूमन इन दोनों गुटों का ही हाथ रहता है। इतिहास को देखते हुए पाकिस्तानी सेना पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता। खबर यह भी है कि पाकिस्तान ने भी आतंकियों को भारत में घुसपैठ करने की छूट दे दी है। पाकिस्तानी रेंजर्स आतंकियों को भारत की सीमा पार कराने में मदद करेंगे। पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तानी सेना सीमा पर गोलाबारी करती है, ताकि भारतीय सेना का ध्यान बंटाया जा सके।