कां ग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान में भारतीय जनता का अपमान किया है। पाकिस्तानी टीवी चैनल से बातचीत करते हुए मणिशंकर अपनी जुबान पर काबू खो बैठे। एंकर ने उनसे पूछा कि भारत-पाकिस्तान के बीच फिर से दोतरफा बातचीत कैसे शुरू की जा सकती है? मणिशंकर ने बहुत उतावले होते हुए जवाब दिया- 'मोदी को हटाइये, हमको लाइये।' क्या मणिशंकर इस देश की जनता को बता सकते हैं कि पाकिस्तान कांग्रेस को कैसे सत्ता में ला सकता है? चुनावों में जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस पाकिस्तान से क्या सांठगांठ कर रही है? कांग्रेस के एक और बड़े नेता सलमान खुर्शीद ने भी पाकिस्तान जाकर हाल में विवादित बयानबाजी की थी। उनके बयानों के कारण भी भारतीय कूटनीति को नुकसान पहुंचा है। दोनों नेताओं ने भारत के सामने असहज स्थितियां खड़ी कर दी हैं। पाकिस्तान दोनों नेताओं के बयानों का भारत के खिलाफ कूटनीतिक उपयोग करेगा।
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शुक्रवार, 20 नवंबर 2015
शनिवार, 19 सितंबर 2015
महागठबंधन पर प्रश्न चिन्ह है तीसरा मोर्चा
बि हार की राजनीति पहर-दर-पहर करवट बदल रही है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर असामान्य गठबंधन बन रहे हैं, टूट रहे हैं और फिर नए गठबंधन बन रहे हैं। एक ओर, भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध नीतीश कुमार के नेतृत्व में बने 'महागठबंधन' के सामने नित नई चुनौतियां आ रही हैं। दूसरी ओर, चुनावी सर्वेक्षण भाजपा के नेतृत्व में बने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के हित में बेहतर स्थितियां बता रहे हैं। फिलहाल तो महागठबंधन के समक्ष मुलायम सिंह के नेतृत्व में गठित 'तीसरा मोर्चा' नई चुनौती बनकर उभरा है। ज्ञात हो कि अपमानजनक व्यवहार के कारण महागठबंधन से नाता तोडऩे वाली समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसीपी) ने 'तीसरा मोर्चा' बनाया है, जिसे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी (एपीपी) भी सहयोग कर रही है। बिहार के कद्दावर नेता राजद के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ झा और बिहार विधान परिषद के सदस्य जदयू के नेता मुन्ना सिंह भी अपनी-अपनी पार्टियां छोड़कर सपा में शामिल हो गए हैं। सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के नेतृत्व में पटना में तीसरे मोर्चे की बैठक हुई है। बैठक में बिहार चुनाव की रणनीति और सीटों के बंटवारे पर चर्चा हुई है। बिहार के चुनावी रण में तीसरे मोर्चे के उतरने से चुनावी गणित में जबरदस्त बदलाव आने वाला है।
सोमवार, 31 अगस्त 2015
क्या आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़ेगा प्रचार अभियान?
प टना के प्रसिद्ध गांधी मैदान से 'महागठबंधन' ने बिहार के स्वाभिमान के नाम पर चुनावी हुंकार भर दी है। बिहार चुनाव प्रचार अभियानों पर पूरे देश की नजर है। ये चुनाव और चुनाव प्रचार दोनों ही महत्वपूर्ण होने वाले हैं। महागठबंधन की स्वाभिमान रैली 'बहुप्रतीक्षित' थी। इसे जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस के गठबंधन के औपचारिक चुनावी अभियान की शुरुआत माना जा रहा था। हालांकि माहौल तो पहले से ही बनने लगा था। स्वाभिमान रैली के मंच से गठबंधन के तीनों प्रमुख दलों के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी को घेरने का प्रयास किया। कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने सीधे तौर मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने नरेन्द्र मोदी की नीतियों और नीयत पर सवाल खड़े किए। श्रीमती गांधी ने कहा कि मोदी की नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था खराब होती जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी प्रचार के लिए प्रधानमंत्री बिहार को बीमारू राज्य कहकर उसका अपमान करते हैं। मोदी को बिहार को नीचा दिखाने में आनंद आता है। नीतीश कुमार ने भी मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि केन्द्र सरकार को 14 महीने बाद बिहार की याद क्यों आई है? बिहार में चुनाव नहीं होते तो मोदीजी बिहार और बिहार की जनता को याद ही नहीं करते। बहरहाल, चुनावी महागठबंधन पिछले कई दिन से रैली की जोरदार तैयारियां कर रहा था। मोदी की परिवर्तन रैली सहित अन्य कार्यक्रमों में उमड़े जनसैलाब से अधिक भीड़ पटना के गांधी मैदान में जमा करने का दबाव भी तीनों पार्टियों पर था। रैली के सफल आयोजन से भारतीय जनता पार्टी पर मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने के लिए नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव ने काफी तैयारी की हैं और कर रहे हैं।
बुधवार, 26 अगस्त 2015
आरक्षण : इधर कुंआ, उधर खाई
पा टीदार समुदाय को आरक्षण देने की मांग को लेकर गुजरात में दो माह से आंदोलन चल रहा है। आंदोलन की कमान 22 साल के नवयुवक हार्दिक पटेल के हाथ में है। अहमदाबाद में मंगलवार को विशाल रैली का आयोजन किया गया। आरक्षण की मांग के लिए रैली में भारी संख्या में भीड़ जमा हुई। हार्दिक पटेल ने जोरशोर से आरक्षण की मांग उठाते हुए फिल्मी स्टाइल में नारे भी दिए हैं। 'जो पाटीदार की सुनेगा, वही पाटीदार पर राज करेगा।' 'हक से दोगे तो ठीक है वरना छीन लेंगे।' बहरहाल, पाटीदार आंदोलन राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। हालांकि गुजरात सरकार ने साफ कर दिया है कि आरक्षण की मांग स्वीकार नहीं। दरअसल, आरक्षण का मसला बहुत संवेदनशील है। आरक्षण को लागू करना और नहीं मानना या खत्म करना किसी भी सरकार के लिए राजनीतिक तौर पर आसान काम नहीं है। आरक्षण की मांग स्वीकार की तो बहुसंख्यक सामान्य वर्ग सरकार से नाराज हो सकता है। यदि मांग नहीं मांगी गई तो संबंधित समाज सरकार के खिलाफ हो जाएगा। यानी सरकार चलाने वाले राजनीतिक दल के लिए 'इधर कुंआ, उधर खाई' की स्थिति हो जाती है।
मंगलवार, 18 अगस्त 2015
घटनाओं को सांप्रदायिक चश्में से देखना बंद करना होगा
भा रत के राजनीतिक दलों और उनके नेताओं में सांप्रदायिक सोच और दृष्टि गहरे तक पैठ कर गई है। इसके पीछे स्पष्ट तौर पर वोट बैंक एकमात्र कारण है। भारत में धर्म संवेदनशील मसला है। हमने धर्म को उसकी मूल प्रकृति से हटाकर पूजा-पाठ, मत-संप्रदाय और पंथ तक सीमित कर दिया है। यह कहना भी अतिशयोक्ति नहीं है कि तुष्टीकरण, वोट बैंक और सांप्रदायिक राजनीतिक नजरिए के कारण धर्म छुईमुई का पौधा हो गया है। आपत्तिजनक स्थिति यह है कि हमारे नेता प्रत्येक घटना में धर्म ढूंढ़ लेते हैं। बात का बतंगड़ बनाते हैं। राजनीतिक चूल्हे पर एक संकीर्ण ढेकची में धर्म को उबालते हैं। विविधता के बावजूद एकसूत्र में बंधे भारतीय समाज को विभाजित कर पॉकेट्स में बांट देते हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 34 साल बाद संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर गए हैं। वे वहां दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी शेख जायेद मस्जिद में भी गए। विभिन्न राजनीतिक दलों की सांप्रदायिक सोच इस मौके पर भी जाहिर हो गई। भाजपा को सांप्रदायिक पार्टी बताने वाले ही प्रत्येक घटना में धर्म को घसीटकर ले आते हैं, ऐसा महसूस होने लगा है। सवाल खड़ा होता है कि सांप्रदायिक कौन है, भाजपा या अन्य? मोदी ने टोपी नहीं पहनी तो हंगामा। मोदी इफ्तार पार्टी में नहीं गए तो मुसलमानों के विरोधी। मोदी ने जो साफा बांधा था उसकी हरा रंग उसमें ऊपर नहीं पूंछ में था। अब मोदी मस्जिद जा रहे हैं तब भी हंगामा। आखिर हम प्रत्येक घटना को सांप्रदायिक चश्मे से देखना कब बंद करेंगे?
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