रविवार, 15 जुलाई 2018

कांग्रेस से छूट नहीं पा रही हिंदू विरोध और मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति


- लोकेन्द्र सिंह 
कोई भी व्यक्ति या संगठन बनावटी व्यवहार अधिक दिन तक नहीं कर सकता है। क्योंकि, उसका डीएनए इसकी अनुमति नहीं देता है। यदि स्वभाव के विपरीत चलने का प्रयास किया जाए तो अंतर्मन में बनावटी एवं वास्तविक आचरण में एक प्रकार का संघर्ष प्रारंभ हो जाता है। कांग्रेस के साथ भी यही हो रहा है। अपने कथित सेकुलर (मुस्लिम तुष्टीकरण और हिंदुओं की उपेक्षा) के कारण ही कांग्रेस कथित 'सॉफ्ट हिंदुत्व' (सुविधाजनक हिंदू समर्थन) की राह पर चलने में असहज है। कांग्रेस के शीर्ष नेता अकसर ऐसे बयान दे देते हैं, जिससे सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर साध-साध कर रखे जा रहे उसके कदम डगमगा जाते हैं। या यह कहना उचित होगा कि कांग्रेस के नेता सुनियोजित ढंग से समय-समय पर अपने परंपरागत मुस्लिम वोटबैंक को यह भरोसा दिलाते रहते हैं कि उसका 'सॉफ्ट हिंदुत्व' सिर्फ भ्रम है, वास्तविकता में कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण पर ही दृढ़ता से टिकी हुई है। मुस्लिम समुदाय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मंदिर यात्राओं से खिन्न न हो जाए, इसलिए उसे भरोसे में बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने पी. चिदंबरम, दिग्विजय सिंह, मणिशंकर अय्यर, सैफुद्दीन सोज, सुशील कुमार शिंदे, सलमान खुर्शीद और पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी को यह जिम्मेदारी दे रखी है। अब इस सूची में शशि थरूर का नया नाम और जुड़ गया है।
 
          जरा विचार कीजिए, एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मुस्लिम समाज के कथित प्रतिनिधि वर्ग से मिल कर 2019 के लिए उनका साथ पक्का कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के प्रबुद्ध नेता एवं सांसद शशि थरूर 'हिंदुओं' और 'हिंदुस्थान' को एक तरह से गाली दे रहे हैं। शशि थरूर का यह कहना कि यदि भारतीय जनता पार्टी 2019 में जीत गई तो यह देश 'हिंदू पाकिस्तान' बन जाएगा। उनका कहना है कि इस देश के हिंदू पाकिस्तान बनने की शुरुआत भी हो गई है। पढ़े-लिखे नेताओं में शामिल थरूर की भारत के संदर्भ में यह टिप्पणी बहुत आपत्तिजनक है। हिंदू धर्म और हिंदुस्थान की तुलना पाकिस्तान से करना वैचारिक दरिद्रता को दर्शाता है। शशि थरूर इतिहास के अच्छे जानकार हैं, उन्हें यह अवश्य बताना चाहिए कि 1947 में किस 'भारतीय जनता पार्टी' या 'नरेन्द्र मोदी' के कारण पाकिस्तान का निर्माण हुआ? कांग्रेस के नेताओं की सत्ता की भूख ने उस समय भी देश का विभाजन कराया था, अब भी कांग्रेसी नेताओं की स्थिति वही है। कभी कांग्रेस के नेता पाकिस्तान जाकर वहाँ के लोगों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने के लिए मदद माँगते हैं, तो कभी राहुल गांधी उन लड़कों के साथ खड़े दिखाई देते हैं, जो शिक्षा परिसरों में नारा बुलंद करते हैं- 'भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह, इंशाअल्लाह'। 
कांग्रेसी सांसद शशि थरूर ने 'हिंदू पाकिस्तान' की अवधारणा प्रस्तुत करके दुनिया के सबसे सहिष्णु धर्म हिंदू का अपमान किया है। अपनी उदारता के कारण दुनिया में सम्मान पाने वाले हिंदुओं की भावनाओं को ठेस तो पहुँचाई ही है, अपितु उनकी छवि बिगाडऩे का काम भी किया है। आतंक की फैक्ट्री बन चुके पाकिस्तान से तुलना करके उन्होंने हिंदुस्थान की प्रतिष्ठा धूमिल की है। भले ही कांग्रेस ने अपने नेता शशि थरूर की टिप्पणी से पल्ला झाड़ लिया हो, लेकिन उनकी टिप्पणी अनायस आई हुई प्रतीत नहीं होती है। पिछले कुछ समय से मुसलमानों का कांग्रेस से मोह भंग हुआ है। कांग्रेस को एक मुश्त वोट करने वाला मुस्लिम समाज अब क्षेत्रीय पार्टियों के साथ चला गया है। मुस्लिम समाज के प्रगतिशील वर्ग का एक हिस्सा भाजपा के साथ भी आ गया है। जबकि कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है- 'माया मिली न राम'। यही कारण है कि एक ही समय में जब राहुल गांधी मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों से मिलकर उनका भरोसा जीतने का प्रयास करते हैं, उसी समय कांग्रेस के नेता हिंदू विरोधी वक्तव्य देते हैं। ताकि पक्के तौर पर मुस्लिमों को भरोसा दिलाया जा सके कि उनके लिए प्राथमिकता में मुस्लिम हैं, हिंदू नहीं। 
राहुल गांधी की मंदिर यात्राओं पर सवाल उठाने वाला मुस्लिम वर्ग हिंदुओं का विरोध किए बिना कांग्रेस के साथ नहीं आने वाला। यह बहुत आपत्तिजनक और चिंताजनक स्थिति है कि मुस्लिम समुदाय की ओर से राहुल गांधी से उनकी मंदिर यात्राओं के संबंध में स्पष्टीकरण माँगा जाता है। राहुल गांधी की मुस्लिम समुदाय से मुलाकात में यह सवाल आया है तो उन्हें अपने बचाव में कहना पड़ा कि वह मस्जिद और चर्च भी जाते हैं, लेकिन मीडिया दिखाता नहीं। मुस्लिम समाज के कट्टरपंथी धड़े से कांग्रेस डर गई है, वरना राहुल गांधी प्रतियुत्तर भी कर सकते थे कि क्या मंदिर जाने से उनका सेकुलरिज्म या मुस्लिम हितों की चिंता कम हो जाती है? राहुल गांधी पूछ सकते थे- 'क्या मैं मंदिर जाते हुए आपका भरोसा प्राप्त नहीं कर सकता? क्या मुझे आपका साथ तभी प्राप्त होगा, जब मैं मंदिर जाना छोड़ दूं'। यदि इतना साहस कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी में होता, तब संभवत: उनसे स्पष्टीकरण ही नहीं माँगा जाता। तब प्रबुद्ध नेता शशि थरूर को हिंदू विरोधी वक्तव्य ही नहीं देना पड़ता। 
यह सुखद है कि मुस्लिम समाज के एक वर्ग ने राहुल गांधी को सलाह दी है कि टोपी पहनने और मजार पर चादर चढ़ाने से मुस्लिमों का भला नहीं होगा और न ही उनका विश्वास जीता जा सकेगा। कांग्रेस को बुनियादी मुद्दे उठाने चाहिए, क्योंकि मुसलमान भी गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी से मुक्ति चाहता है। किंतु, दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुस्लिम समाज की इस प्रकार की प्रगतिशील आवाजों को कांग्रेस में लंबे समय से अनसुना किया जाता रहा है। अचानक से कांग्रेस ने जो पलटी मारी है, उसे देखकर यह भरोसा करना और भी कठिन हो जाता है कि वह सामान्य जनता से जुड़े मुद्दे उठाएगी। खैर, कांग्रेस मुस्लिम वर्ग का भरोसा जीतने के लिए जैसे चाहे प्रयास करे, किंतु उसे इतना जरूर ध्यान रखना चाहिए कि उसके इन प्रयासों से हिंदू और हिंदुस्थान की साख को चोट न पहुँचे। वहीं, हिंदू समाज को भी अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान के लिए सजग रहना चाहिए। यह अधिकार किसी को नहीं होना चाहिए कि वह उसे असहिष्णु और कट्टर पाकिस्तान जैसा घोषित करने लगे।

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