शुक्रवार, 1 जून 2018

शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो आंदोलन


- लोकेन्द्र सिंह 
मध्यप्रदेश में एक जून से 10 जून तक प्रस्तावित किसानों के 'गांव बंद' आंदोलन को लेकर दोनों पक्ष पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। एक तरफ कांग्रेस और उसके सहयोगी किसी भी तरह किसानों की आड़ में एक बार फिर शिवराज सरकार को घेरने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार भी आंदोलन को हिंसक होने से रोकने के लिए प्रशासनिक और राजनैतिक संवाद के जरिए प्रयत्नशील है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं किसानों के बीच जा रहे हैं, उनसे संवाद कर रहे हैं। बीते दिन उन्होंने मंदसौर में रात बिताई, जहाँ पिछले वर्ष किसान आंदोलन को असामाजिक तत्वों ने हिंसक बना दिया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक भावनात्मक अपील जारी की है कि शांति के टापू मध्यप्रदेश में अंशाति न फैलाएं। किसानों से उन्होंने आग्रह किया है कि किसी के बहकावे में न आएं। मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर कांग्रेस पर आरोप लगाए कि कांग्रेस शांति के टापू मध्यप्रदेश को अशांति में बदलना चाहती है। कांग्रेस प्रदेश में खूनखराबा चाहती है।
          मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आरोपों को समझने के लिए हमें पिछले वर्ष के किसान आंदोलन का स्मरण करना चाहिए। मंदसौर के क्षेत्र में शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे किसान आंदोलन को कांग्रेस के नेताओं और असामाजिक तत्वों ने हिंसक बना दिया था। कांग्रेस इस आरोप से इसलिए नहीं बच सकती, क्योंकि उसके नेता वीडियो में लोगों को हिंसा के लिए भड़काते हुए पाए गए थे। थाने में आग लगाने की बात से लेकर गाडिय़ों  को जलाने तक की अपील कांग्रेस ने नेताओं ने की थी। किसानों की कुछ माँगों को मानने के साथ ही जो आंदोलन 4 जून 2017 को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो गया था, वह अचानक हिंसक हो गया। एक अराजक भीड़ ने निजी और सार्वजनिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया। हिंसा से प्रदेश की जनता और स्वयं किसान भी भौंचक रह गए थे। 
          इस हिंसक आंदोलन के ठीक एक साल बाद फिर से किसानों की आड़ में कुछ राजनीतिक ताकतें सक्रिय हुई हैं। विशेषकर मध्यप्रदेश में कांग्रेस को किसानों का मुद्दा अधिक रास आ रहा है। कांग्रेस यह भली प्रकार जानती है कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को परास्त करन है तो उनकी किसान हितैषी छवि को तोडऩा पड़ेगा। भाजपा सरकार की ताकत किसान ही हैं, जिनके लिए सरकार ने निरंतर नीतिगत कदम उठाए हैं। बीते दिन मंदसौर में शिवराज सिंह चौहान ने उचित ही कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जितना काम किसानों के लिए किया उतना किसी ने भी नहीं किया। प्रदेश सरकार का 14 वर्ष का कार्यकाल और कृषि क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियां उनके वक्तव्य को पुष्ट करती हैं। 
          इसमें कोई दोराय नहीं कि अपनी किसान हितैषी नीतियों और किसानों के परिश्रम के कारण ही आज मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में सिरमौर बनकर बैठा है और अगले पाँच साल में देश के सभी किसानों की आय दोगुना करने के लिए रोडमैप बना रहा है। 14 साल पहले प्रदेश में खेती के लिए न तो बिजली थी और न ही सिंचाई सुविधा। किसानों को 13-14 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण मिल पाता था। खेतों के लिए खाद और बीज भी किसान को उपलब्ध नहीं था। लेकिन, शिवराज सरकार ने अपने प्रारंभ से ही मध्यप्रदेश के किसानों की बेहतरी के लिए प्रयास प्रारंभ किए। उनका ही परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश के लगभग सभी ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 10 घंटे बिजली मिल रही है। किसानों को अब ऋण पर ब्याज नहीं देना पड़ता, बल्कि उन्हें अब ऋणात्मक दस प्रतिशत की ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को कर्ज उपलब्ध कराने में एक क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। पिछले वर्ष ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए 'भावांतर' जैसी नवाचारी योजना प्रारंभ की है। प्रदेश में वर्ष 2003 में जहाँ सिर्फ सात लाख हेक्टेयर के आसपास सिंचित भूमि थी। अब यह 40 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गई है। 
          यह बात सही है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हित में निरंतर सराहनीय प्रयास किए हैं। इसके बावजूद कहना होगा कि अभी भी किसानों की स्थिति सुधारने के लिए बहुत काम किए जाने बाकी हैं। उस दिशा में सरकार प्रयासरत भी है। इसलिए किसानों को यह विचार करना चाहिए कि वह 'गाँव बंद' नाम से जिस आंदोलन को प्रारंभ कर रहे हैं, वह किसी की राजनीति का औजार न बन जाए। किसानों को सुनिश्चित करना होगा कि उनका आंदोलन सही दिशा में शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़े। उन्हें आशान्वित रहना चाहिए कि शिवराज सरकार ने अब तक उनके हित में निर्णय लिए हैं, आगे भी यह सरकार उनके हितों की चिंता करेगी। फिलहाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी किसानों को भरोसा दिलाना होगा। वहीं, कांग्रेस को भी जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका का निर्वहन करते हुए आंदोलन से ऐसे नेताओं को दूर रखना चाहिए जो हिंसा भड़का सकते हैं। किसानों की संवेदनाओं पर राजनीति किसी को नहीं करनी चाहिए। प्रत्येक राजनीतिक दल को यह समझ लेना चाहिए कि वे हिंसा को अपनी राजनीति का हथियार न बनाएं।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति कमजोर याददाश्त - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। एक बार आकर हमारा मान जरूर बढ़ाएँ। सादर ... अभिनन्दन।।

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  2. मुझे तो लग रहा है कि यह लेख श्री लोकेन्द्र सिंह ने नहीं, बल्कि स्वयं मामा श्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा है. कांग्रेस को अपने कुकर्मों की सज़ा मिली है और अभी भी मिल रही है किन्तु व्यापम घोटाले की ख्याति वाले चौहान साहब भी देश को कोई कम चूना नहीं लगा रहे हैं. मुझे तो कोई भी राजनीतिक दल किसानों का हितैषी नहीं लगता है. लगता है कि प्रेमचंद को फिर किसी होरी की दर्दनाक मौत पर फिर कोई 'गोदान' लिखना होगा.

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