सोमवार, 11 जून 2018

प्रधानमंत्री की हत्या का षड्यंत्र और हमारी राजनीति का स्तर


- लोकेन्द्र सिंह 
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या का षड्यंत्र रचे जाने की बात सामने आई है। माओवादी कम्युनिस्ट पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करना चाहते हैं। भारत सरकार को तत्काल गंभीरता से इस मामले की जाँच करनी चाहिए और इस षड्यंत्र में शामिल लोगों को गिरफ्तार करना चाहिए। यह बहुत चिंताजनक और गंभीर मामला है। किंतु, इस मामले पर विपक्षी दलों की टिप्पणियां दुर्भाग्यपूर्ण हैं। हमारे नेता प्रधानमंत्री की हत्या के षड्यंत्र की बात पर व्यग्ंय और गैर-जिम्मेदार टिप्पणियां कर रहे हैं, जबकि हमने अपने दो प्रधानमंत्री और कई राजनेता इसी प्रकार की राजनीतिक हिंसा में खो दिए हैं। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी से लेकर कांग्रेस के बड़बोले नेता संजय निरूपम ने बहुत ही हल्की टिप्पणी इस मुद्दे पर की हैं। उन्होंने इसे लोकप्रियता पाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हथकंडा बताया है।
          जेएनयू की छात्रनेता और कम्युनिस्ट विचारधारा से राजनीतिक पोषण प्राप्त कर रही शेहला रशीद तो दो कदम आगे निकल गईं। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि 'ऐसा लगता है कि आरएसएस/गडकरी मोदी की हत्या की योजना बना रहे हैं, इसके बाद इसका आरोप मुस्लिमों और वामपंथियों पर लगा दो, जिससे उन्हें मुस्लिमों को मारने का मौका मिल जाएगा।' जब भाजपा नेता नितिन गडकरी ने ऐसी बेहूदी और आपत्तिजनक टिप्पणी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की बात कही तो शेहला रशीद इसे एक मजाक बताने लगीं। 
          सोशल मीडिया में कांग्रेस-कम्युनिस्ट और अन्य राजनीतिक पार्टियों के जिम्मेदार और आम कार्यकर्ता प्रधानमंत्री मोदी की हत्या के लिए रचे जा रहे षड्यंत्र व्यंग्यात्मक टिप्पणी/फोटो पोस्ट कर रहे हैं। यह टिप्पणियां हमारे नेताओं और उनके समर्थकों के वैचारिक एवं मानसिक दिवालिएपन को उजागर करती हैं। यह टिप्पणियां यह भी बताती हैं कि मोदी विरोध में राजनीति का स्तर कितना धसक गया है। 
          भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़काने के आरोप में पुणे पुलिस की ओर से गिरफ्तार नक्सल समर्थकों से जो चिट्ठी मिली है, उससे कम्युनिस्ट माओवादियों के खतरनाक इरादे जाहिर होते हैं। यह पत्र दिल्ली से गिरफ्तार किए गए रोना जैकब विल्सन से प्राप्त हुआ है। रोना विल्सन जेएनयू से ही पढ़ा-लिखा है। वह वहाँ कम्युनिस्ट विचारधारा के लिए काम करता था। विल्सन के साथ ही पुलिस ने सुधीर ढावले को मुंबई से, सुरेन्द्र गाडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को नागपुर से गिरफ्तार किया है। इनकी गिरफ्तारी से शहरी नक्सलवाद भी उजागर हुआ है। 
          पत्र से स्पष्ट है कि कम्युनिस्ट माओवादी/नक्सली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा के विस्तार से घबराए हुए हैं और वह भाजपा के विस्तार को किसी भी कीमत पर रोकना चाहते हैं। उनकी घबराहट का ठोस कारण भी है। पिछले चार साल में प्रमुख नक्सली मारे गए हैं। स्वयं नक्सलियों ने 2017 में 140 साथियों की मौत की बात स्वीकार की है। वहीं, गृहमंत्रालय की माने तो पिछले चार साल में 126 नक्सल प्रभावित जिलों में से 44 जिले नक्सलमुक्त हो चुके हैं। त्रिपुरा में भी वामपंथियों की सरकार जा चुकी है। पश्चिम बंगाल में वह लगातार हासिए पर खिसकते जा रहे हैं, वहाँ भारतीय जनता पार्टी का जनाधार तेजी से बढ़ रहा है। केरल में भी वामपंथ खूनी राजनीति के सहारे जिंदा है, लेकिन वह कब तक वहाँ टिका रहेगा, यह कहना कठिन है। 
          इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए कम्युनिस्ट माओवादियों ने पत्र में कहा गया है कि 'मोदी 15 राज्यों में भाजपा को स्थापित करने में सफल हुए हैं। यदि ऐसा ही रहा तो सभी मोर्चों पर पार्टी के लिए दिक्कत खड़ी हो जाएगी। ... कॉमरेड किसन और कुछ अन्य वरिष्ठ कॉमरेडों ने मोदी राज को खत्म करने के लिए कुछ मजबूत कदम सुझाए हैं। हम सभी राजीव गांधी जैसे हत्याकांड पर विचार कर रहे हैं। यह आत्मघाती जैसा मालूम होता है और इसकी भी अधिक संभावनाएं हैं कि हम असफल हो जाएं, लेकिन हमें लगता है कि पार्टी हमारे प्रस्ताव पर विचार करे। उन्हें रोड शो में टारगेट करना एक असरदार रणनीति हो सकती है। हमें लगता है कि पार्टी का अस्तित्व किसी भी त्याग से ऊपर है।' माओवादियों से प्राप्त इस चिट्ठी में बड़े पैमाने पर हथियार खरीदने के लिए आठ करोड़ रुपये की जरूरत भी बताई गई है। 
          पत्र की भाषा माओवादियो-नक्सलियों के साथ कम्युनिस्ट पार्टी के गठजोड़ की ओर भी इशारा करती है। सत्ता की ओर टक-टकी लगाकर बैठे राजनेताओं को विचार करना चाहिए कि हिंसा ऐसी आग है, जो सबको जलाकर खाक कर देती है। ऐसी सूचनाओं पर हमें गंभीर राजनीतिक व्यवहार प्रदर्शित करना चाहिए। हमारी लापरवाही पूर्व में हमसे दो लोकप्रिय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को छीन चुकी है। भारत की सुरक्षा एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अब ऐसा न हो। यह भारत की संप्रभुता से जुड़ा मामला भी है।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व बालश्रम निषेध दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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