बुधवार, 28 सितंबर 2016

भारत ने 10 मिनट में पाकिस्तान को धोया

 भारत  की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अंतरराष्ट्रीय मंच से मात्र 10 मिनट में पाकिस्तान को दुनिया के सामने एक बार फिर बेनकाब कर दिया। अपने उद्बोधन में श्रीमती स्वराज ने बड़ी स्पष्टता के साथ पाकिस्तान और भारत में अंतर स्थापित कर दिया। उनके भाषण की खासियत रही कि उन्होंने पहले भारत के वर्तमान और भविष्य को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। सबको बताया कि भारत किस प्रकार विश्व कल्याण के मार्ग पर अग्रसर है। उसके बाद उन्होंने बताया कि विश्व शांति में एक देश (पाकिस्तान) किस प्रकार खतरनाक सिद्ध हो रहा है। यह देश आतंक ही बोता है, आतंक ही उगाता है और आतंक ही बेचता है। आतंक को पालना इसका शौक हो गया है। भारत के साथ ही पेरिस, न्यूयोर्क, ढाका, इंस्ताबुल, ब्रूसेल और काबुल में हुए आतंकी धमाकों जिक्र करके विदेश मंत्री ने दुनिया को बताने की कोशिश की कि पाकिस्तान सिर्फ भारत के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में पैदा हो रहा आतंकवाद दुनिया को बर्बाद कर देगा।

सामने आया कैराना का सच

 अब  यह साबित हो चुका है कि उत्तरप्रदेश में कानून व्यवस्था संभालने में समाजवादी पार्टी की सरकार और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव असफल रहे हैं। लगभग साढ़े तीन महीने पहले उत्तर प्रदेश के कैराना में हिंदू समुदाय की पलायन की खबरें सामने आई थीं। यह पलायन चर्चा के केंद्र में लंबे समय तक रहा। इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर तथाकथित सेकुलर जमात ने न केवल आँखें बंद कर ली थीं, बल्कि हिंदू पलायन को पूरी तरह खारिज कर दिया था। हिंदुओं के पलायन को खारिज करने के लिए इस सेकुलर जमात ने एक से बढ़कर एक कुतर्क गढ़े थे। यहाँ तक की कैराना जाकर फर्जी तथ्यों या अपवाद के आधार पर यह साबित करने का पूरा प्रयास किया कि कैराना से पलायन स्वाभाविक है। यह पलायन रोजगार और बेहतर जीवन के लिए हुआ है। मीडिया के एक धड़े ने भी इस जमात को भरपूर सहयोग दिया था। लेकिन, मानवाधिकार आयोग ने इन ढ़ोंगी सेकुलरों का मुँह नोंच लिया है। इनके झूठ को उजागर कर दिया है। मानवाधिकार आयोग ने अपनी जाँच में पाया है कि हिंदू परिवारों का पलायन सत्य है, कोई झूठ नहीं। पलायन की मुख्य वजह भी मुस्लिम समाज के दबंगों की गुंडागर्दी है। 

रविवार, 25 सितंबर 2016

राजनीति में संस्कृति के दूत थे दीनदयाल उपाध्याय

 एकात्म  मानवदर्शन के द्रष्टा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 100वीं जयंती 25 सितंबर को है। चूँकि दीनदयाल उपाध्याय भाजपा के राजनीतिक-वैचारिक अधिष्ठाता हैं। इसलिए भाजपा के लिए यह तारीख बहुत महत्त्वपूर्ण है। उनके विचारों और उनके दर्शन को जन सामान्य तक पहुँचाने के लिए भाजपा ने इस बार खास तैयारी की है। दीनदयाल उपाध्याय लगभग 15 वर्ष जनसंघ के महासचिव रहे। वर्ष 1967 में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुना गया। चूँकि उन्हें केरल के कालीकट (कोझीकोड) में राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। इसलिए दीनदयाल जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केरल के कोझीकोड से विशेष उद्बोधन देंगे। देशभर में बूथ स्तर पर इस भाषण के सीधे प्रसारण के लिए भाजपा तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री का यह भाषण भाजपा और उसकी विचारधारा से जुड़े लोगों के बीच ही नहीं, वरन कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच भी चर्चा का विषय बनने वाला है। क्योंकि, अब तक कांग्रेस-वाम गठजोड़ दीनदयाल उपाध्याय जैसे महापुरुष की अनदेखी ही करता आया है। वर्तमान सरकार में महापुरुषों के साथ होने वाली भेदभाव की यह परंपरा खत्म होती दिखाई दे रही है। भारतीय राजनीति के 70 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब महात्मा गांधी, सरदार पटेल, डॉ. भीमराव आंबेडकर, सुभाषचंद्र बोस और जवाहरलाल नेहरू के साथ-साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भी समान आदर दिया जा रहा है। यह भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है कि जिस भाजपा के साथ राजनीतिक छूआछूत का व्यवहार किया गया, उसका नेतृत्व अपने ही पितृपुरुष को सबसे आखिर में याद कर रहा है।

मंगलवार, 20 सितंबर 2016

शहीदों के परिजनों की सुनो सरकार

 उड़ी  हमले से देश गमगीन है। देशभर में शहीद जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किए जा रहे हैं। शहीद जवान जिस गाँव/शहर/राज्य के बेटे थे, वहाँ के सभी नागरिक बंधु इस दु:ख की घड़ी में उनके परिवारों के साथ खड़े हैं। इस मुसीबत की घड़ी में परिवार के परिवार बिलख रहे हैं। शहीदों की विधवाएं, उनके बच्चे, माता-पिता, बहन-भाई सब एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि हमारे सोते हुए सैनिकों पर हमला करने वाले कायर पाकिस्तान को जवाब कब और कैसे दिया जाएगा? यह सवाल सिर्फ शहीदों के परिजन ही नहीं पूछ रहे, बल्कि यह प्रश्न आम नागरिकों का भी है। शहीद नायक एसके विद्यार्थी की बेटी ने कहा है कि सुरक्षा बलों पर जिन लोगों ने हमला किया है, उन्हें माकूल जवाब दिया जाना चाहिए। वहीं, शहीद अशोक की पत्नी अपने पति की मौत के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए वह कहती हैं कि पाकिस्तान तो कुत्ता है, उसके बारे में इससे ज्यादा क्या कहूं। शहीद जी. दलाई के पिता ने भी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। जबकि शहीद जवान नायमन कुजूर की पत्नी वीणा अपने पति की मौत का बदला चाहती है। वीणा ने कहा है कि ऐसा लग रहा है कि मैं खुद जाऊं और आतंकियों को गोली मार दूं। वह चाहती है कि सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा कृत्य करने का साहस नहीं जुटा सके।

सोमवार, 19 सितंबर 2016

प्रहार हो

 भारत  माँ के 21 लाल, जो माँ की सेवा में बलिदान हो गए, उन्हें प्रणाम। विनम्र श्रद्धांजलि। भारत सरकार से आग्रह, साहब कुछ कीजिए इस तरह की घटनाएँ भारतीय जनमानस को तकलीफ दे रही हैं। आखिर कब तक हम अपने जवानों को 'राक्षसों' का शिकार होते रहने देंगे? जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में सेना के जवानों पर आतंकी हमला हमारे लिए खुली चुनौती है। हमारे खिलाफ जंग का सीधा ऐलान। क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे? हम जानते हैं कि पिछले दो साल में सेना के हाथ खोले गए हैं। सेना आतंकियों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है। अनेक आतंकवादी हमलों को नाकाम किया गया है। इसलिए आतंकवादी संगठन बौखलाकर सीधे सुरक्षा जवानों को निशाना बना रहे हैं। लेकिन, यह भी सच है कि हम अब भी रक्षात्मक नीति अपना रहे हैं। इस नीति में बदलाव जरूरी है। आपको चुना भी बदलाव के लिए है। प्रतिकार करना होगा। 21 जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। सरकार को आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का अपना संकल्प न केवल दोहराना होगा, बल्कि उसे धरातल पर उतारना होगा। बहुत बर्दाश्त हुआ। अब आतंकवाद और उसके पोषकों पर खुलकर 'प्रहार हो'।

शनिवार, 17 सितंबर 2016

राष्ट्रवादी विचार से भयभीत कम्युनिस्ट पार्टी

 केरल  में कम्युनिस्ट पार्टी खुलकर असहिष्णुता दिखा रही है। लेकिन, असहिष्णुता की मुहिम चलाने वाले झंडाबरदार कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। क्या उन्हें यह असहिष्णुता प्रिय है? यह तथ्य सभी के ध्यान में है कि कम्युनिस्ट विचारधारा भयंकर असहिष्णु है। यह दूसरी विचारधाराओं को स्वीकार नहीं करती है, अपितु अपनी पूरी ताकत से उन्हें कुचलने का प्रयास करती है। दुनियाभर में इसके अनेक उदाहरण हैं। भारत में केरल की स्थितियाँ भी इसकी गवाह हैं। कम्युनिस्ट विचारधारा के लाल आतंक से कौन बेखबर है? केरल को वामपंथ का गढ़ कहा जाता है। वर्तमान में यहाँ कम्युनिस्ट विचार की सरकार भी है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सरकार का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर एक तरफ मार्क्सवादी गुंडे राष्ट्रवादी विचारधारा को मानने वाले लोगों की हत्याएँ कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार स्वयं भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दबाने के लिए सत्ता की ताकत का दुरुपयोग कर रही है। माकपा सरकार ने मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर संघ की शाखा को प्रतिबंधित और मंदिरों की सम्पत्ति एवं प्रबंधन को अपने नियंत्रण में लेने की तैयारी की है। सरकार का यह निर्णय अपनी विरोधी विचारधारा के प्रति घोर असहिष्णुता का परिचायक है। यह लोकतंत्र और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का भी हनन है।

मंगलवार, 13 सितंबर 2016

सोमनाथ मंदिर को सोने से सजाकर अपनी चमक बढ़ा रहे हैं नरेन्द्र मोदी

 हिंदुओं  की आस्था के प्रमुख मानबिंदु सोमनाथ मंदिर को स्वर्ण से सुसज्जित किया जा रहा है। अब तक 105 किलो सोने से मंदिर के अंदरूनी हिस्से और शिखर को सजाया जा चुका है। यह सोना एक भक्त ने दान में दिया है। सरकार ने इस काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, सरकार इस दीपावली तक सोमनाथ मंदिर को सोने से जगमग कर देना चाहती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सोमनाथ को स्वर्णमयी करने के इस महत्त्वपूर्ण कार्य पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष नजर है। बीते दिनों दिल्ली में प्रधानमंत्री निवास पर नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की बैठक हुई है। मंदिर को भव्यता प्रधान करने की इस परियोजना में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दिलचस्पी से महत्त्वपूर्ण संकेत समाज में जा रहे हैं। एक, भव्य मंदिर की सौगात देकर गुजरात के लोगों को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि गुजरात अब भी उनकी प्राथमिकताओं में है। दो, उन्हें हिंदू हितों की चिंता है। तीन, हिंदुओं के आस्था स्थलों को प्रतिष्ठा दिलाने के अपने संकल्प पर भारतीय जनता पार्टी कायम है। इसका एक संदेश यह भी हो सकता है कि भविष्य में अवसर आने पर राममंदिर का निर्माण भी इसी भव्यता के साथ किया जाएगा। यह काम कोई और नहीं कर सकता। इसका सबूत यह है कि पिछले वर्षों में सोमनाथ मंदिर को भव्य रूप प्रदान करने की पहल किसी ने नहीं की। यदि लौहपुरुष सरदार पटेल न होते तब यह भी संभव था कि सोमनाथ मंदिर का निर्माण ही नहीं होता, क्योंकि सेकुलरवाद किसी भी सूरत में मंदिर निर्माण की इजाजत देने के लिए तैयार नहीं था।