गुरुवार, 4 मई 2023

‘द केरल स्टोरी’ से सामने आए कई सच

लव जिहाद, कन्वर्जन, आतंकवाद और सांप्रदायिकता के मुद्दे पर बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को लेकर तथाकथित प्रगतिशील, मार्क्सवादी, माओवादी, लेनिनवादी और उनके साथ में तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवी हो-हल्ला मचा रहे हैं। फिल्म को दर्शकों तक पहुँचने से रोकने के लिए इस वर्ग ने एड़ी-चोटी का जोर लगा लिया है। फिल्म दर्शकों के सामने न जाए इसलिए इस पर रोक लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अपील की गई। अच्छी बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सभी प्रकार के कुतर्कों को रद्द करते हुए ‘द केरल स्टोरी’ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कुल मिलाकर फिल्म अभी आई भी नहीं है, उससे पहले ही उसने तथाकथित सेकुलर गिरोह की कलई खोलकर रख दी है। अभिव्यक्ति और सिनेमाई स्वतंत्रता का झंडाबरदार यह समूह वास्तव में असहिष्णु और तानाशाही है। यह समूह वास्तव में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पक्षधर नहीं अपितु उसका विरोधी है।

मंगलवार, 2 मई 2023

‘लाडली लक्ष्मी उत्सव’ : बेटियों को प्रोत्साहित करती शिवराज सरकार

भोपाल से प्रकाशित दैनिक समाचारपत्र 'सुबह सवेरे' में 2 मई 2023 को प्रकाशित

मध्यप्रदेश में बेटियों को लेकर एक सकारात्मक एवं भावनात्मक वातावरण बन गया है। आज मध्यप्रदेश की बेटियां खूब पढ़ रही हैं और आगे बढ़ रही हैं। प्रत्येक कार्यक्षेत्र में भी अपना योगदान दे रही हैं। खेल के मैदान हों, या जोखिम भरी एवरेस्ट की चढ़ाई, बेटियों के कदमों को अब रोका नहीं जाता अपितु उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सब सहयोगी की भूमिका में हैं। लड़ाकू विमान उड़ानेवाली पहली महिला फाइटर पायलट में भी मध्यप्रदेश की बेटी का नाम शामिल है। बेटियां अपने पग से जल, थल, नभ को नाप रही हैं। मध्यप्रदेश में यह बदलाव अचानक नहीं आया है। बेटियों के लिए बना यह वातावरण ‘संकल्प से सिद्धि’ का उदाहरण है। बेटियों के प्रति संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक संकल्प लिया कि वे बेटियों को प्रोत्साहित करनेवाला वातावरण बनाएंगे। इसके लिए उनकी पहल पर 16 वर्ष पूर्व 1 अप्रैल 2007 को मध्यप्रदेश सरकार ने ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ शुरू की। स्वयं को प्रदेश की बेटियों का ‘मामा’ घोषित करके ‘बेटी बचाओ’ का नारा दिया। मुख्यमंत्री का यह विचार इतना शक्तिशाली एवं प्रभावशाली था कि लोकप्रिय राजनेता नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इस नारे को राष्ट्र का नारा बना दिया और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का आह्वान किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की सरकार यहीं नहीं रुकी, अपितु बेटियों को संरक्षण और संबल देने के लिए प्रयास अनेक स्तर पर किए गए। इस सबमें अधिक महत्वपूर्ण है कि उन्होंने इस मुद्दे पर जनता से सीधे और लगातार संवाद किया। जब एक जनप्रिय राजनेता नागरिक समाज से कोई आग्रह करता है, तब उसका सुफल परिणाम आने की संभावनाएं अधिक होती हैं।

सोमवार, 1 मई 2023

अहम् से वयम् की यात्रा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जनप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 100वीं कड़ी पर ‘अपने मन के विचार’ आकाशवाणी, भोपाल से प्रसारित हुए

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जनप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 100वीं कड़ी में देशवासियों के साथ आत्मीय संवाद किया। उनके इस संबोधन में भावुकता, अपनत्व और संवेदनशीलता झलकती है। असल में ‘मन की बात’ कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के लिए बहुत महत्व रखता है, यह उनके दिल से जुड़ा हुआ कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह कोई कर्मकांड नहीं है, बल्कि वे पूरी सिद्धत के साथ ‘मन की बात’ करते हैं। देशभर से ऐसी घटनाओं और व्यक्तियों को चुनते हैं, जो तपस्या की तरह समाज हित में काम कर रहे हैं। अभावों में रहकर भी देश, समाज और प्रकृति को संवारने में जुटे हुए हैं। ‘मन की बात’ के माध्यम से ऐसे लोगों का देशवासियों से परिचय कराते समय कई बार प्रधानमंत्री भावुक हुए हैं। 100वें अंक में बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को स्वीकार भी किया। उनका जिस प्रकार का स्वभाव और अंतःकरण है, उसके कारण यकीनन कई अवसर आते होंगे जब उनकी आंखें भर आती होंगी। उन्होंने अपने लंबे सामाजिक जीवन में वह सब देखा भी है, इसलिए उससे जुड़ना उनके लिए स्वाभाविक है।

बुधवार, 26 अप्रैल 2023

श्री रायरेश्वर : हिन्दवी स्वराज्य की प्रतिज्ञा भूमि

स्वराज्य 350 : श्री रायरेश्वर गढ़ पर वह प्राचीन एवं दिव्य शिवलिंग आज भी है, जहाँ वीर बाल शिवा ने अपने मित्रों के साथ ली ‘हिन्दवी स्वराज्य’ की शपथ



पुणे की दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग 82 किलोमीटर की दूरी पर, रोहिडखोरे की भोर तहसील में, सह्याद्रि की सुरम्य वादियों के बीच, समुद्र तल से लगभग 4694 फीट ऊंचाई पर घने जंगलों में श्री रायरेश्वर गढ़ स्थित है। यह हिन्दवी स्वराज्य का दुर्ग नहीं है, परंतु सह्याद्रि की यही वह पवित्र पहाड़ी है, जो हिन्दवी स्वराज्य के शुभ संकल्प की साक्षी बनी। सह्याद्रि की पर्वत शृंखलाओं में सांय-सांय करती हवा पर कान धरा जाए तो आज भी वीर बालक शिवा की प्रतिज्ञा की वह गूंज सुनी जा सकती है, जिसने धर्मद्रोही मुगलिया सल्तनत को उखाड़ फेंक दिया था। श्री रायरेश्वर के विस्तृत पहाड़ पर वह प्राचीन शिवालय आज भी है, जहाँ एक किशोर ने अपने कुछ मित्रों के साथ ‘स्वराज्य’ की शपथ ली, जिसकी कल्पना करना भी उस समय कठिन था। मुगलिया सल्तनत के अत्याचारों के चलते हिन्दू आत्म विस्मृत हो चला था। उसके मन में यह विचार ही आना बंद हो गया था कि यह भारत भूमि उसकी अपनी है। वह यहाँ मुगलों की चाकरी क्यों कर रहे हैं? देश में गो-ब्राह्मण, स्त्रियां और धर्म सुरक्षित नहीं रह गया था। हिन्दू समाज को इस अंधकार से बाहर निकालने और उसके मन में एक बार फिर आत्मगौरव की भावना जगाने का संकल्प शिवाजी महाराज ने लिया था। श्री रायरेश्वर में शंभुमहादेव के सामने कसम खाने की रोहिड़खोरे में पुरानी परिपाटी थी। हम कह सकते हैं कि हिन्दवी स्वराज्य की संकल्पना का यहीं प्रथम उद्घोष हुआ।

रविवार, 23 अप्रैल 2023

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ताकत हैं ‘अनादिश्री’

चंदेरी में अनादिश्री के साथ लोकेन्द्र सिंह

यदि आपको प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रभाव, उनकी लोकप्रियता, उनके प्रति जन-विश्वास और निश्छल श्रद्धा की अनुभूति करनी है, तब आपको ग्वालियर के ‘अनादिश्री’ से मिलना चाहिए। अनादि से मिलकर आप अभिभूत हो जाएंगे। सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी चिंता स्तुत्य एवं अनुकरणीय है। अनादि स्वयं सेरेब्रल पाल्सी जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं लेकिन देश-समाज के प्रति उतने ही या कहें उससे अधिक चिंतित और जागरूक रहते हैं, जितना की कोई शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति रहता है। सामाजिक परिवर्तन के लिए जो भी आह्वान प्रधानमंत्री मोदी ने किया है, उसे अनादि ने मूक होकर भी बुलंद आवाज दी है। कोविड-19 के दौरान जब प्रधानमंत्री मोदी ने घर पर रहने और कोरोना रोधी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया तब अनादि ने उन सभी को व्यक्तिगत रूप से संदेश भेजे, जो उनके व्हाट्सएप की सूची में थे। जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति भी प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह को अनादि आगे बढ़ाते रहते हैं। स्वच्छता का हमारे जीवन में क्या महत्व है, इस पर उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर भी महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है।

गुरुवार, 20 अप्रैल 2023

पर्यावरण को वैश्विक मुद्दा बनाने का प्रधानमंत्री का आह्वान अनुकरणीय

भारत सहित समूची दुनिया में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विमर्श भी बन गया है और उसके अनुरूप कुछ प्रयास भी प्रारंभ हुए हैं। विश्व पटल पर पर्यावरण को लेकर गंभीरता का निर्माण करने में भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने प्रभावशाली वैश्विक मंचों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रगत एवं प्रगतिशील देशों का न केवल ध्यान आकर्षित किया है अपितु जिम्मेदारी का अहसास भी कराया है। बीते दिन भी जब वे विश्व बैंक द्वारा आयोजित विश्व नेताओं के एक आभासी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, तब भी उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को उठाया। अपने उद्बोधन में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को व्यापक जनांदोलन बनाने का आह्वान किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों के शासन-प्रशासन से नहीं अपितु सीधे नागरिकों से आह्वान किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से अपने रोजमर्या के जीवन में बदलाव लाकर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं।

मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

तमिलनाडु में आरएसएस को रोकने की चाल असफल

RSS route marches at 45 places in Tamil Nadu


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को रोकने का सपना देखनेवाली ताकतों को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी है। तमिलनाडु सरकार अतार्किक बहाने बनाकर आरएसएस के पथ संचलनों पर रोक लगाने के प्रयास कर रही थी। संघ ने राज्य सरकार के पक्षपाती और लोकतंत्र विरोधी निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार के निर्णय को पलट दिया और संघ को पथ संचलन निकालने की अनुमति दे दी। परंतु एन–केन–प्रकारेण संघ को रोकने के लिए तैयार बैठी सरकार कहां उच्च न्यायालय के निर्णय को मानती। सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। लेकिन तमिलनाडु सरकार को यहां भी मुंह की खानी पड़ी। हैरानी होती है कि एक ओर विभिन्न राजनीतिक दल संविधान और लोकतंत्र की बात करते हैं लेकिन व्यवहार ठीक उल्टा करते हैं। हिन्दू और राष्ट्रीय विचार के संगठनों का प्रश्न आने पर तथाकथित सेकुलर समूह किसी तानाशाही की तरह व्यवहार करते दिखाई देते हैं। कई बार तो यही लगने लगता है कि इनके दिखाने के दांत अलग है और खाने के दांत अलग हैं। इन सभी का मूल स्वभाव अलोकतांत्रिक ही है, जो विभिन्न अवसरों पर प्रकट होता रहता है।