सोमवार, 1 मई 2023

अहम् से वयम् की यात्रा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जनप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 100वीं कड़ी पर ‘अपने मन के विचार’ आकाशवाणी, भोपाल से प्रसारित हुए

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जनप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 100वीं कड़ी में देशवासियों के साथ आत्मीय संवाद किया। उनके इस संबोधन में भावुकता, अपनत्व और संवेदनशीलता झलकती है। असल में ‘मन की बात’ कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के लिए बहुत महत्व रखता है, यह उनके दिल से जुड़ा हुआ कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह कोई कर्मकांड नहीं है, बल्कि वे पूरी सिद्धत के साथ ‘मन की बात’ करते हैं। देशभर से ऐसी घटनाओं और व्यक्तियों को चुनते हैं, जो तपस्या की तरह समाज हित में काम कर रहे हैं। अभावों में रहकर भी देश, समाज और प्रकृति को संवारने में जुटे हुए हैं। ‘मन की बात’ के माध्यम से ऐसे लोगों का देशवासियों से परिचय कराते समय कई बार प्रधानमंत्री भावुक हुए हैं। 100वें अंक में बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को स्वीकार भी किया। उनका जिस प्रकार का स्वभाव और अंतःकरण है, उसके कारण यकीनन कई अवसर आते होंगे जब उनकी आंखें भर आती होंगी। उन्होंने अपने लंबे सामाजिक जीवन में वह सब देखा भी है, इसलिए उससे जुड़ना उनके लिए स्वाभाविक है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस कार्यक्रम की अब तक की यात्रा के संबंध में बहुत महत्वपूर्ण बात कही, जो इस बात को बखूबी रेखांकित करती है कि मोदीजी के जीवन में ‘मन की बात’ का क्या महत्व है– “मेरे लिए मन की बात अहम् से वयम् तक की यात्रा है। 'मन की बात' मेरे मन की आध्यात्मिक यात्रा बन गया है”। उल्लेखनीय है कि 3 अक्टूबर 2014 के दिन ‘मन की बात’ की यात्रा शुरू हुई। एक–एक कड़ी के बाद मन की बात में देश के कोने-कोने से लोग जुड़ते चले गए। हर आयु-वर्ग के लोग जुडे़। और अब इस कार्यक्रम के साथ इतने लोग जुड़ गए हैं कि सबकी चिट्ठियां पढ़ना भी कठिन हो गया है। इस यात्रा के ऐतिहासिक 100वें प्रसारण को सुननेवाले लोगों की गिनती की जाए तो एक विश्व कीर्तिमान बन गया होगा। देशभर में स्थान–स्थान पर व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से मन की बात के 100वें प्रसारण को सुना गया है। 

‘मन की बात’ कार्यक्रम आज सही मायने में ‘जन की बात’ का रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री मोदी के अंधविरोधी कह सकते हैं कि वे सिर्फ मन की बात ही करते हैं, जनता की बात नहीं करते। लेकिन यह सत्य नहीं है। मन की बात की रचना देखें या फिर उसके अब तक प्रसारित अंकों की विषय सामग्री का अध्ययन करें तो ध्यान आता है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह कार्यक्रम पूरी तरह से जन सामान्य को समर्पित है। यह कार्यक्रम जन–अभिव्यक्ति का माध्यम बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों से सुझाव आमंत्रित करते हैं और उसके अनुसार ही संवाद की रचना करते हैं। इसका आधार जन–जन की बात है, इसलिए बड़ी संख्या में इसका श्रोता वर्ग है। 

अभी हाल ही में अलग–अलग संस्थाओं ने ‘मन की बात’ पर शोधकार्य कराये हैं, जिनमें यही निकलकर आता है कि ‘मन की बात’ को सुनने के लिए लोग उत्सुक रहते हैं। यह कार्यक्रम उन्हें प्रेरणा देता है। यह बात सही भी है कि प्रधानमंत्री जिन बातों, कार्यों और व्यक्तियों का जिक्र करते हैं, उनके बारे में जानकर सबको प्रेरित होते हैं। उनके मन में विश्वास पैदा होता है। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस लोकप्रिय कार्यक्रम ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया है। हमारी कामना है कि उनकी यह साधना अनवरत चलती रहे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

पसंद करें, टिप्पणी करें और अपने मित्रों से साझा करें...
Plz Like, Comment and Share