गुरुवार, 9 जुलाई 2026

श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण : कर्कश शोर में संघ का विनम्र संदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने दिया वक्तव्य

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर में चढ़ावे से चोरी की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और करोड़ों रामभक्तों की अटूट आस्था पर आघात करने वाली है। इस हृदयविदारक घटना पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी किया गया वक्तव्य इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि संघ के लिए श्रीराम की मर्यादा, पवित्रता और समाज की भावनाएं सर्वोपरि हैं। संघ ने न केवल इस घटना पर गहरी पीड़ा व्यक्त की है, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को उसकी जवाबदेही का कठोरता से स्मरण भी कराया है। संघ ने साफ शब्दों में कहा है कि व्यवस्था और संचालन की कमियों को अविलंब दूर किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल की जांच के आधार पर दोषियों को कठोरतम दंड मिले और भविष्य के लिए एक निर्दोष, पारदर्शी और शुद्ध वित्तीय प्रबंधन की व्यवस्था स्थापित हो, यह संघ की दो टूक मांग है।

यह वक्तव्य इस बात को पुष्ट करता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक ऐसा प्रामाणिक और देशभक्त संगठन है, जो किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अपवित्रता को कतई बर्दाश्त नहीं करता, फिर चाहे मामला कितने भी उच्च स्तर का क्यों न हो। विडंबना देखिए कि इस दुखद प्रकरण की आड़ लेकर आज वे शक्तियां और राजनीतिक दल संघ और हिंदू समाज पर कीचड़ उछालने का प्रयास कर रहे हैं, जिनका पूरा इतिहास ही राम मंदिर के विरोध से सना हुआ है। आज ये लोग चढ़ावे से चोरी पर ऐसे छाती पीट रहे हैं जैसे इन्हें राम मंदिर की बहुत चिंता हो। इन्हें आईना दिखाया जाना बेहद जरूरी है। ये वही लोग हैं जिन्होंने न्यायालयों में हलफनामा देकर भगवान श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया था। 

ये वही लोग हैं- जिन्होंने राम मंदिर निर्माण को अटकाने, भटकाने और लटकाने के लिए वकीलों की पूरी फौज खड़ी कर दी थी। 

ये वही लोग हैं- जिनके राज में निहत्थे रामभक्त कारसेवकों की छातियों पर गोलियां दागी गईं थीं और सरयू का जल लाल हो गया था। 

आज जब इनकी सत्ता नहीं है और रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हैं, तो ये इस चोरी की घटना को एक राजनीतिक हथियार बनाकर संघ जैसी राष्ट्रभक्त संस्था को बदनाम करने का कुत्सित षड्यंत्र रच रहे हैं। इनका असली दर्द दानपात्र की चोरी नहीं है, बल्कि इनका दर्द यह है कि अयोध्या में राम मंदिर बन कैसे गया। इन अवसरवादी और हिंदू-विरोधी शक्तियों को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि आज यदि अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य और दिव्य मंदिर गर्व से सिर उठाए खड़ा है, तो उसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों का दशकों का अथक परिश्रम, जन-जागरण, त्याग और बलिदान है। संघ ने पीढ़ियों के उस संघर्ष को वह वैचारिक और जमीनी नेतृत्व प्रदान किया, जिसके कारण यह स्वप्न साकार हो सका। जिस संगठन ने मंदिर निर्माण के लिए अपना सर्वस्व झोंक दिया हो, उस पर उंगली उठाने का तनिक भी नैतिक अधिकार इन राम-विरोधियों को नहीं है।

श्री दत्तात्रेय होसबाले जी का यह आह्वान अत्यंत सामयिक और महत्वपूर्ण है कि संपूर्ण हिंदू समाज इस कठिन क्षण में धैर्य और संयम का परिचय दे। यह समय भावुकता में बहकर अपनों पर अविश्वास करने का नहीं, बल्कि उन राष्ट्र-विरोधी और हिंदू-विरोधी शक्तियों के षड्यंत्रों को विफल करने का है, जो इस घटना का लाभ उठाकर हिंदू धर्म और समाज को कलंकित करना चाहती हैं। न्यायपालिका और शासन अपना काम कर रहे हैं। मंदिर की व्यवस्थाएं निश्चित तौर पर और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनेंगी। करोड़ों रामभक्तों की आस्था अखंड है, और इस प्रकरण के बहाने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले अवसरवादियों का घिनौना चेहरा एक बार फिर पूरे देश के सामने बेनकाब हो गया है। 

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