सोमवार, 1 दिसंबर 2014

राष्ट्रवादी विचारक

 उ न्हें पत्रकार, संगठक, लेखक, चिंतक, विचारक, शिक्षाविद और साहित्यकार के रूप में पहचाना जाता है। उनको चाहने वाले हर भूमिका में उन्हें फिट पाते हैं। उन्होंने भी प्रत्येक जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाया है। पत्रकारिता के सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थान माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के संस्थापक कुलपति (तब महानिदेशक) होने का गौरव उन्हें हासिल है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ध्येयनिष्ठ पत्रकार राधेश्याम शर्मा की। उन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल में शैक्षणिक गुणवत्ता और अकादमिक गतिविधियों से विश्वविद्यालय को देशभर में पहचान दिलाई। आज शायद ही देश का कोई मीडिया हाउस होगा जहां इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी पत्रकारिता को नये आयाम न दे रहे हों। 
      राजस्थान के गांव जोनाइचकलां में 01 मार्च 1934 को जन्मे श्री शर्मा पत्रकारिता और पत्रकारिता के विद्यार्थियों के हित की सदैव चिंता करते रहे हैं। विद्यार्थियों के बीच रहना उन्हें बहुत भाता है। वे माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से ही नहीं वरन् पंजाब यूनिवर्सिटी, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर, रानी अहिल्याबाई यूनिवर्सिटी इंदौर, गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी बिलासपुर में भी पत्रकारिता के अध्यापन से जुड़े रहे हैं। किताबें नई राह दिखाती हैं, दिमाग की खिड़कियां खोलती हैं और ज्ञान का विस्तार करती हैं। किताबें एक से दूसरे हाथ पहुंचे, विद्यार्थी उनका लाभ ले सकें, इसीलिए उन्होंने अपनी किताबी दौलत माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय को समर्पित कर दी। साहित्य अकादमी हरियाणा से प्रकाशित 'जनसंचार' और 'हिंदी पत्रकारिता एवं विविध आयाम' उनकी दो महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं।   
      वर्ष 1952 में काशी हिंदी विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए बनारस से प्रकाशित जनसत्ता से बतौर संवाददाता पत्रकारीय जीवन की शुरुआत करने वाले राधेश्याम शर्मा ने भविष्य में पत्रकारिता को नए आयाम दिए। वे छह साल तक जबलपुर से प्रकाशित युगधर्म के संपादक रहे। 1978  में वे दैनिक ट्रिब्यून, चंडीगढ़ से जुड़ गए और 1982 से 90 तक वहां संपादक रहे। 1997 में चंडीगढ़ और धर्मशाला से प्रकाशित दिव्य हिमाचल के संपादकीय सलाहकार रहे। देश के बड़े अखबारों में शुमार दैनिक भास्कर समूह ने भी चंडीगढ़ संस्करण को मजबूत करने के लिए लम्बे सफर के दौरान पत्रकारिता में कमाए श्री शर्मा के अनुभव का लाभ लिया। साहित्यिक अभिरुचि और पत्रकारिता जगत में उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए हरियाणा सरकार ने 2005 में उनको हरियाणा साहित्य अकादमी का निदेशक नियुक्त किया। दो साल के सेवाकाल में उन्होंने अपनी संगठक दक्षता से युवा साहित्यकारों, कवियों और लेखकों को अच्छी संख्या में अकादमी से जोड़ा। 
     हिन्दी पत्रकारिता में श्री शर्मा के योगदान को भारतीय पत्रकार जगत तो सदैव याद करेगा ही, मध्यप्रदेश सरकार ने भी मामा माणिकचंद वाजपेयी राष्ट्रीय पुरस्कार से उनकी ध्येयनिष्ठ, मूल्याधारित और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता का सम्मान किया है। श्री शर्मा को बलराज साहनी, मातुश्री, राज बदलेव, बाबू बालममुकुंद गुप्त सहित गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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"राष्ट्रवादी विचारक, सत्य को समर्पित पत्रकार, अध्यापक के रूप में गुरु एवं एक मार्गदर्शक मित्र श्री राधेश्याम शर्मा का समग्र व्यक्तित्व आज की पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है।
- प्रो. बृजकिशोर कुठियाला, कुलपति, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल 
-  जनसंचार के सरोकारों पर केन्द्रित त्रैमासिक पत्रिका "मीडिया विमर्श" में प्रकाशित आलेख

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