बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

सर्जिकल स्ट्राइक-2 : मुंह तोड़ जवाब

- लोकेन्द्र सिंह - 
पुलवामा हमले पर भारत की ओर से पाकिस्तान और उसके संरक्षण में पल रहे आतंकी गिरोहों को सर्जिकल स्ट्राइक-2 से मुंह तोड़ जवाब दिया गया है। पाकिस्तान और आतंकी गिरोहों को भारत के इस जवाब से सबक सीख लेना चाहिए। उन्हें यह बात गाँठ बांध लेनी चाहिए कि यह नया भारत है। यह सिर्फ सबूत ही नहीं सौंपता, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई भी करता है। यह दूसरा अवसर है जब नये भारत ने पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में घुसकर आतंकियों को मार गिराया है। बल्कि इस बार तो भारतीय सेना ने पाकिस्तान के घर (बालाकोट) में घुसकर उसके पालतू आतंकियों को जहन्नुम पहुँचाया।

शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

पुलवामा हमला : व्यर्थ न जाए बलिदान


- लोकेन्द्र सिंह -
आतंकियों के कायराना हमले में हमने भारत माँ के लाल खोये हैं। देश में दु:ख और आक्रोश की लहर है। प्रत्येक राष्ट्रभक्त नागरिक बलिदानियों के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है। उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहा है। हम सबकी जिम्मेदारी है कि बलिदानी जवानों के परिवार की चिंता करें। उनका बलिदान व्यर्थ न जाए, इसकी चिंता सरकार तो करे ही, समाज को भी करनी चाहिए। अपना जीवन गंवाने वाले यह जवान अपने परिवार से दूर रहकर हम सबकी सुरक्षा कर रहे थे। उनके कारण हम अपने परिवार के साथ सानंद रह पा रहे हैं। क्या ऐसे में हमारा दायित्व नहीं बनता कि जवानों के परिवार को हम अपना परिवार बना लें? हुतात्माओं के परिवारों के साथ खड़े होने से उन जवानों का हौसला बुलंद होगा, जो सीमा पर डटे हुए हैं। देश की सेवा में वह बेफिक्री से सजग रहेंगे। अपने देश के नागरिकों के समर्थन से वह कायर आतंकियों को उनके सही ठिकाने पहुँचा सकेंगे।

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

कविताओं में बसी मिट्टी की सौंधी सुगंध

 यु वा कवि लोकेन्द्र सिंह राजपूत का पहला काव्य संग्रह हिन्दी जगत के सम्मुख प्रस्तुत हो रहा है। वह इतनी ही स्वाभाविक घटना है जितनी कि बसंतागमन पर आम्रकुंजों का बौर राशि से संभारित होने लगना या प्राची से सूर्य को मुस्कराते देख किसी गौरैया का चहक-चहक पडऩा। तात्पर्य यह है कि श्री लोकेन्द्र सुमित्रानंदन पंत के 'वियोगी होगा पहला कवि' को चरितार्थ भले ही न करें किन्तु इतना तो है ही कि उनका काव्य सृजन 'वही होगी कविता अनजान' की तरह अनजाने और लगभग अनायास ही बह निकला है। उसके पीछे उनकी भाव प्रवणता ही प्रमुख है। 
  श्री लोकेन्द्र का यह काव्य संग्रह उनकी अपनी मातृभूमि, अपनी मां, अपने समाज और अपने परिवेश के प्रति उठती श्रद्धा, समादर, प्रेम एवं दायित्व चेता भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उनकी यह भावाभिव्यक्ति अत्यन्त सहज, सरल एवं तरल है। कवि श्री लोकेन्द्र अपनी रचनात्मकता में प्राय: अकृत्रिम और कहीं-कहीं सपाट दिख पड़ते हैं। यह उनके काव्य लेखन का वैशिष्ट्य है और यही उनकी, कम से कम उनके साम्प्रतिक कवि व्यक्तित्व की पहचान है।
वीडियो में देखें- क्या कह रहे हैं वरिष्ठ साहित्यकार श्री जगदीश तोमर 


रविवार, 27 जनवरी 2019

रिश्ते



किसी ने तुमसे कह दिया- समुन्दर है सबसे धीर-गंभीर 
और तुमने मान लिया, बाप ने बेटी से कहा। 
पर तुमने कभी मुझसे पूछा ही नहीं 
और कभी मेरे हृदय में देखा ही नहीं।।

किसी ने तुमसे कह दिया- आकाश है सबसे ऊंचा
और तुमने मान लिया, गुरु ने शिष्य से कहा। 
पर तुमने कभी मुझसे जाना ही नहीं 
और कभी मेरे गुरुत्व में देखा ही नहीं।।

किसी ने तुमसे कहा दिया- महासागर में है सबसे अधिक पानी
और तुमने मान लिया, मां ने अपने बच्चों से कहा।
पर तुमने कभी मुझसे पूछा ही नहीं 
और कभी मेरी आंखों में देखा ही नहीं।।

किसी ने तुमसे कह दिया- बरगद की जड़ें हैं सबसे गहरी, मजबूत
और तुमने मान लिया, निश्छल मित्र ने मित्र से कहा
पर तुमने कभी मुझे समझा ही नहीं
और कभी अपनी दोस्ती की जड़ों में देखा ही नहीं।। 

- लोकेन्द्र सिंह -
("मैं भारत हूँ" काव्य संग्रह में शामिल कविता)

गुरुवार, 17 जनवरी 2019

किताब में 'रिपोर्टिंग की क्लास'

- लोकेन्द्र सिंह 
पत्रकारिता पर यूं तो बहुत किताबें उपलब्ध हैं। पत्रकारिता के सबसे महत्वपूर्ण आयाम रिपोर्टिंग के संबंध में भी समय-समय पर अनेक किताबें आती रही हैं। इन सब किताबों के बीच 'क्लास रिपोर्टर' कुछ खास है। उसके खास होने की वजह पत्रकार और मीडिया शिक्षक जयप्रकाश त्रिपाठी का लम्बा अनुभव है, जिसे उन्होंने किताब के रूप में समाज के सम्मुख प्रस्तुत किया है। लेखक श्री त्रिपाठी करीब 30 साल तक पत्रकारिता में सक्रिय रहे हैं। लम्बे समय तक विभिन्न शिक्षण संस्थानों में मीडिया अध्यापन से भी जुड़े रहे। पत्रकारिता के विद्यार्थी को क्लास रूम में पढ़ाने के दौरान ही उन्होंने रिपोर्टिंग पर एक मुक्कमल किताब 'क्लास रिपोर्टिंग' लिखने की योजना संभवत: बना ली थी। पुस्तक में बाईस अध्याय हैं। इन अध्यायों में रिपोर्टिंग के विभिन्न पक्षों पर गहराई से चर्चा की गई है। पुस्तक ऐसी बन गई है कि यह न केवल पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है बल्कि नये रिपोर्टर के लिए भी उतनी ही पठनीय है।

गुरुवार, 10 जनवरी 2019

न्याय में अब देर न हो


- लोकेन्द्र सिंह -
सर्वोच्च न्यायालय में आज फिर श्रीराम जन्मभूमि का मामला आएगा। हिंदुओं की आस्था और भावनाओं से जुड़े इस बहुप्रतीक्षित मामले की सुनवाई के लिए पाँच न्यायमूर्तियों की संवैधानिक पीठ तय हो गई है। हिंदू समाज प्रार्थना कर रहा है कि मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में यह पीठ श्रीराम जन्मभूमि मामले की सुनवाई आज से नियमित करे और शीघ्र ही निर्णय सुनाए, ताकि न्याय की प्रतीक्षा समाप्त हो। इस प्रकरण में न्यायालय का अब तक का रुख देखकर आशंका भी है कि सुनवाई फिर न टल जाए। क्योंकि, मुख्य न्यायाधीश स्वयं भी इसे राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मानते हैं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं अधिवक्ता कपिल सिब्बल पहले ही श्रीराम जन्मभूमि के मामले को 2019 के बाद तक टालने की माँग से लेकर प्रयास तक कर चुके हैं। पिछली बार ही 4 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले पर मात्र 60 सेकंड तक सुनवाई चली। इस दौरान कोई भी पक्ष अपना तर्क प्रस्तुत नहीं कर सका था। उस दिन मात्र 60 सेकंड में न्यायमूर्ति ने मामले को 10 जनवरी तक टाल दिया था। इससे पहले भी न्यायमूर्ति लोग कह चुके हैं कि श्रीराम मंदिर निर्माण का प्रकरण उनकी प्राथमिकता में नहीं है। इसलिए ही हिंदू समाज आशंकित है कि आज से नियमित सुनवाई प्रारंभ हो सकेगी या मामला फिर से टाल दिया जाएगा।

बुधवार, 2 जनवरी 2019

दुर्गा धारा : अमरकंटक का एक और आकर्षक जल प्रपात


- लोकेन्द्र सिंह - 
दुर्गा धारा एक बहुत छोटा जल प्रपात है, लेकिन बहुत रमणीय है। मई माह की गर्मी में भी यह झरना चल रहा था। बारिश में यहाँ के दृश्य की कल्पना करके ही मन आल्हादित हो रहा था और इच्छाएं बार-बार हूँक मार रही थीं कि एक बार इस स्थान पर बरसात में जरूर आना चाहिए। पहाड़ों में ऊपर स्थित अमरनाला या अमरताल से होकर निकली धारा तकरीबन दो-तीन किमी की दूरी सघन वन में तय करके यहाँ जल प्रपात के रूप में गिरती है।