गुरुवार, 16 जुलाई 2020

प्रोपोगंडा विशेषज्ञ कम्युनिस्ट ओली


कम्युनिस्ट नेता एवं नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत के संदर्भ में अपने विवादास्पद एवं हास्यास्पद बयानों के लिए अब हद पार चुके हैं। अपने बयानों एवं व्यवहार से वह लगातार भारत-नेपाल के संबंधों में खटास पैदा करने की की कोशिश कर रहे हैं। यह सब वे किसके इशारे पर कर रहे हैं, यह कोई अबूझ पहेली नहीं रह गई है। भगवान श्रीराम के जन्मस्थान के विषय में दिए गए अपने अतार्किक, अप्रमाणिक और हास्यास्पद बयान के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री ओली घर में ही घिर गए हैं। उनके अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म उत्तरप्रदेश स्थित अयोध्या में नहीं हुआ, बल्कि नेपाल के बीरगंज स्थित एक गाँव में हुआ। नेपाल का यह गाँव ही वास्तविक अयोध्या है। तीर्थनगरी अयोध्या और भगवान श्रीराम के बारे में नेपाल के प्रधानमंत्री ओली का बयान इस हद तक तथ्यहीन है कि उनकी सोच-समझ पर गंभीर प्रश्न उठाए जा रहे हैं। नेपाल के बुद्धिजीवी, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व उपप्रधानमंत्री तक ओली के इस बयान पर तंज कसा है और उनकी वास्तविक मंशा पर प्रश्न उठाए हैं। अपने इस बयान को लेकर वे हास्य के पात्र बन गए हैं। स्थिति यह बन गई कि नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ गई है।  
           ओली लगातार भारत-नेपाल के संबंधों को बिगाडऩे का प्रयत्न कर रहे हैं। कभी वे भारत पर कोरोना संक्रमण का आरोप लगाते हैं, तो कभी कहते हैं कि भारत सरकार उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने की कोशिश कर रही है। कभी भारतीय क्षेत्रों पर नेपाल का दावा करते हैं। नेपाल का नया मानचित्र भी संसद में पारित कराते हैं, जिसको लेकर दोनों देशों के संबंध बिगड़ सकते हैं। उनका यह बयान भी उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। भारत सरकार की सराहना की जानी चाहिए कि उसने ओली की ऊल-जलूल हरकतों के बाद भी संयम रखा हुआ है। यह धैर्य और संयम ही दोनों देशों के लिए आवश्यक है। 
          एक तथ्य यह भी है कि भगवान श्रीराम के संदर्भ में सर्वाधिक अपप्रचार कम्युनिस्टों ने ही किया है। श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के राष्ट्रव्यापी स्वरूप लेने के बाद से ही भारत के कम्युनिस्टों ने भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर ही प्रश्न उठाने शुरू कर दिए थे। फर्जी तथ्यों के आधार पर पर्चे लिखे गए, किताबें लिखी गईं, विमर्श खड़े किए गए। श्रीराम को काल्पनिक सिद्ध करने की पुरजोर कोशिशें हुईं। लेकिन, अब तो सर्वोच्च न्यायालय में भी लंबी बहस और तथ्यों-तर्कों के आधार पर सिद्ध हो गया कि उत्तरप्रदेश की अयोध्या ही भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है। वहाँ अब भव्य श्रीराम मंदिर बनेगा। मोदी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आते ही मंदिर निर्माण की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। 
          नेपाल के प्रधानमंत्री ओली भूल गए कि भारत-नेपाल की सांस्कृतिक विरासत एक ही है। श्रीराम का मान-सम्मान एवं उनके प्रति आस्था नेपाल में भी उतनी ही है, जितनी भारत में। नेपाल की जनता उन्हीं श्रीराम को पूजती है जिनका जन्म सरयू किनारे बसी प्राचीन नगरी अयोध्या में हुआ और विवाह जनकपुर की सीता से हुआ। इसलिए नेपाल में भी उनकी इस हास्यास्पद खोज का विरोध सामान्य जनमानस ने किया है।

वीडियो देखें : भगवान श्रीराम के जन्म पर नेपाल के कम्युनिस्ट नेता और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बयान का विश्लेषण


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