शनिवार, 18 जून 2016

स्कूल चलें हम : सब पढ़ें, सब बढ़ें

 प्रत्येक  सरकार का प्राथमिक उद्देश्य होना चाहिए कि वह प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध कराए। किसी भी राज्य/देश के नागरिक सरकार से बुनियादी जरूरतों में रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ गुणवत्ता युक्त शिक्षा और स्वास्थ्य भी चाहते हैं। बल्कि यह कहना अधिक उचित होगा कि उनके लिए शिक्षा सबसे पहली बुनियादी जरूरत होनी चाहिए। शिक्षा न केवल व्यक्ति के विकास में सहायक होती है, बल्कि संस्कारित समाज के निर्माण के लिए भी जरूरी है। यह कहना गलत नहीं होगा कि किसी भी देश की तरक्की में उसके शिक्षित नागरिकों की अहम हिस्सेदारी होती है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने अपने राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षित करने का संकल्प लिया है। अपने संकल्प की पूर्ति के लिए सरकार राज्य में 'स्कूल चलें हम' अभियान का संचालन करती है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं इस अभियान का नेतृत्व करते हैं इसलिए अपेक्षित परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं।
        यहाँ एक बड़ा सवाल है कि मध्यप्रदेश जैसे विशाल राज्य में प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षित करना क्या आसान काम है? सरकार स्कूल/कॉलेज के भवन खड़े कर दे, बढिय़ा बैठक व्यवस्था जमा दे और अच्छे शिक्षकों की नियुक्ति कर दे, क्या इतने भर से सबको शिक्षित किया जा सकता है? सरकार के सामने चुनौती यह भी है कि उसके राज्य में बहुत बड़ी आबादी वनवासी और पिछड़े समाज की है। यह समाज अपने परंपरागत दायरे में बंधा है। सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में सिर्फ स्कूल/कॉलेज की चमचमाती इमारतें खड़ी कर देने से साक्षरता का स्तर सुधारने की दिशा में आगे नहीं बढ़ा जा सकता। इसके लिए जरूरी है एक चरणबद्ध योजना। निश्चित ही सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार का पहला कदम होना चाहिए। लेकिन, इस चरणबद्ध योजना का अगला कदम अधिक महत्वपूर्ण है। किन्हीं कारणों से शिक्षा से दूर बच्चों/तरुणों/युवकों को ज्ञान के मंदिर तक पहुंचने के लिए प्रेरित करने का प्रयास सरकारों को पूरी गंभीरता से करना चाहिए। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि इस काम में मध्यप्रदेश सरकार ईमानदार प्रयास करती है। मध्यप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का संकल्प है कि प्रदेश का प्रत्येक बच्चा स्कूल जाए, पढ़े और आगे बढ़े। मुख्यमंत्री भी मानते हैं कि शिक्षित व्यक्ति समाज और राष्ट्र की प्रगति में अपनी पूर्ण क्षमता के अनुरूप योगदान दे सकता है। इसलिए प्रदेश सरकार योजनाबद्ध तरीके से 'स्कूल चलें हम' अभियान का संचालन करती है। 
        मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 15 जून को रायसेन जिले के सिलवानी में स्कूल की घंटी बजाकर राज्य-स्तरीय 'स्कूल चलें हम' अभियान का शुभारंभ कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए उत्साहित करते हुए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। जिनमें प्रतिभावान विद्यार्थियों को लैपटॉप, साइकिल और आर्थिक सहायता देना प्रमुख है। यह महत्त्वपूर्ण बात है कि प्रदेश में शिक्षा के प्रति लोगों का रुझान बढ़े और प्रत्येक बच्चा स्कूल तक आए, इसके लिए मुख्यमंत्री स्वयं 'स्कूल चलें हम' अभियान का नेतृत्व करते हैं। शिवराज सिंह चौहान साधारण परिवार और परिवेश से आएं हैं, इसलिए उन्हें मालूम है कि समाज में अधिक संख्या में ऐसे बच्चे हैं, जिनको सबसे पहले स्कूल तक लाने के लिए परिश्रम करना होगा। सब बच्चे स्कूल पहुंचे इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समाज के लोगों से आगे आने का आग्रह करते हैं। सुखद बात है कि उनके आग्रह का असर भी हो रहा है, बड़ी संख्या में लोग खासकर युवा वर्ग 'प्रेरक' बनकर इस अभियान से जुड़ रहा है। यह प्रेरक अपने आस-पडोस और अन्य जगह जाकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए उनके अभिभावकों को प्रोत्साहित करते हैं। यह अच्छी बात है कि सरकार समझती है कि शिक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण मसले पर समाज को जागृत करने में समाज ही प्रभावी भूमिका का निर्वाहन कर सकता है।  
        बहरहाल, शिक्षा के प्रति मुख्यमंत्री कितने संवेदनशील हैं, यह सिलवानी में अभियान का शुभारंभ करते वक्त भी दिखाई दिया। सिलवानी के एक शासकीय स्कूल में मुख्यमंत्री शिक्षक के रूप में नजर आए। उन्होंने यहां बच्चों को पढ़ाया। बाकायदा, श्याम-पट (ब्लैक बोर्ड) पर उन्होंने गणित के सवाल लिखकर बच्चों से उनके जवाब माँगे। शिक्षा का महत्त्व समझाया। गुरु द्रोणाचार्य, कौरव-पाण्डव और गांधीजी से जुड़े प्रेरक प्रसंग भी सुनाए। महापुरुषों से जुड़ी घटनाएं सुनाकर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के समक्ष अपनी उस भावना को व्यक्त किया है, जिसके अनुरूप वह मानते हैं कि शिक्षा मूल्य आधारित होनी चाहिए। भविष्य के लिए अच्छे नागरिक तैयार करने के लिए बच्चों को नैतिक शिक्षा देना आज की आवश्यकता है। हम रोजगारोन्मुखी शिक्षा के कारण नैतिक शिक्षा से जितना दूर हुए हैं, उसका उतना ही खामियाजा हमने उठाया है। यही कारण है कि शिवराज सिंह चौहान प्रत्येक पाठ्यक्रम में मूल्य आधारित शिक्षा के समावेश की बात करते हैं। बहरहाल, सिलवानी के प्राथमिक स्कूल में तीसरी कक्षा के विद्यार्थी सुमित ठाकुर ने मुख्यमंत्री को एक चिट्ठी दी, जिसमें उसने बताया कि उसके माता-पिता का देहांत हो गया है और वह आगे पढऩा चाहता है। शिवराज सिंह चौहान ने सुमित को गले लगाया और कहा कि वह मन लगाकर पढ़ाई करे, अब सरकार उसकी जिम्मेदारी उठाएगी। आमजन के प्रति यही संवेदनशीलता शिवराज सिंह चौहान को औरों से अलग एक सरल मुखिया की पहचान देती है। इस मौके पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि आर्थिक कारणों से किसी बच्चे की पढ़ाई नहीं छूटने देंगे। प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से कमजोर प्रत्येक प्रतिभावान बच्चे की पढ़ाई की चिंता करेगी। 
        हम उम्मीद करते हैं कि'स्कूल चलें हम' अभियान अपने उद्देश्य में सफल हो। अभियान के पहले चरण में ग्राम और वार्ड की शिक्षा पंजी, समग्र शिक्षा पोर्टल और डाटा-बेस एवं डाइस (डिस्ट्रिक्ट इनफर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) डाटा-बेस को एकीकृत किया गया है। अब दूसरे चरण में कक्षा-एक से लेकर आठवीं तक में बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है। स्कूल आने के बाद बच्चों की उपस्थिति को नियमित करने के लिए रोचक और गुणवत्ता युक्त शिक्षा ही काम आ सकती है। इसके लिए सरकार को स्कूलों की व्यवस्था पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। अभियान के इस हिस्से में सरकार के साथ-साथ शिक्षकों की भूमिका भी अहम हो जाती है। स्कूल और बच्चों के बीच शिक्षक ही वह कड़ी हैं, जो दोनों को एक-दूसरे के नजदीक लाते हैं। यदि शिक्षक अपनी भूमिका के साथ न्याय कर सके तब एक बार स्कूल आने वाला बच्चा किसी सामान्य कारण के चलते स्कूल से बाहर नहीं जाएगा। प्रदेश सरकार को अपने संकल्प (प्रदेश का प्रत्येक बच्चा गुणवत्ता युक्त शिक्षा हासिल करे) की पूर्ति के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण भी समय-समय करना चाहिए। 'स्कूल चलें हम' अभियान के प्रत्येक चरण को पूरी ईमानदारी और गंभीरता के साथ पूरा किया जाए, तब वह दिन दूर नहीं होगा जब सरकार को किसी से नहीं कहना होगा-'स्कूल चलें हम'। सरकार के प्रयास रंग लाएं ताकि मध्यप्रदेश शत प्रतिशत साक्षर प्रदेश बन जाए।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19-06-2016) को "स्कूल चलें सब पढ़ें, सब बढ़ें" (चर्चा अंक-2378) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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