शनिवार, 25 जून 2011

देश बांट कर रहेगी कांग्रेस

'सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण अधिनियम-२०११' की आग में जलेगा देश। कांग्रेस काटेगी वोटों की फसल। बहुसंख्यकों पर होगा अत्याचार।

 कां ग्रेस की नीतियां अब देशवासियों की समझ से परे जाने लगी हैं। संविधान की शपथ लेकर उसकी रक्षा और उसका पालन कराने की बात कहने वाली यूपीए सरकार संविधान विरुद्ध ही कार्य कर रही है। उसने देश को एकसूत्र में फिरोने की जगह दो फाड़ करने की तैयारी की है। वोट बैंक की घृणित राजनीति के फेर में कांग्रेस और उसके नेताओं का आचरण संदिग्ध हो गया है। हाल के घटनाक्रमों को देखकर तो ऐसा ही लगता है कि कांग्रेस फिर से देश बांट कर रहेगी या फिर देश को सांप्रदायिक आग में जलने के लिए धकेलकर ही दम लेगी। सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने 'सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक-२०११' तैयार किया है। लम्बे समय से सब ओर से इस विधेयक का विरोध हो रहा है। लगभग सभी विद्वान इसे 'देश तोड़क विधेयक' बता रहे हैं। इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ माना जा रहा है। इसे कानूनी जामा पहनाना देश के बहुसंख्यकों को दोयम दर्जे का साबित करने का प्रयास है। इसके बावजूद कांग्रेस की सलाहकार परिषद ने बीते बुधवार को इसे संसद में पारित कराने के लिए सरकार के पास भेज दिया।
          'समानांतर सरकार' नहीं चलने देंगे। 'सिविस सोसायटी' को क्या अधिकार है विधेयक तैयार करने का। यह काम तो संसद का है। इस तरह के बहानों से लोकपाल बिल का विरोध करने वाले सभी कांग्रेसी इस विधेयक को पारित कराने के लिए जी जान से जुट जाएंगे। वह इसलिए कि इस विधेयक को उनकी तथाकथित महान नेता सोनिया गांधी के नेतृत्व में तैयार कराया गया है, किसी अन्ना या रामदेव के नेतृत्व में नहीं। इसलिए भी वे पूरी ताकत झोंक देंगे ताकि इस विधेयक के नाम से वे अल्पसंख्यकों के 'वोटों की फसल' काट सकें। अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के सुझाव मानने से तो उनकी 'लूट' बंद हो जाती। जबकि यह विधेयक उन्हें भारत को और लूटने में मददगार साबित होगा। कांग्रेस की यह 'दादागिरी' कि हम पांच साल के लिए चुनकर आए हैं हम जो चाहे करेंगे। इससे देश का मतदाता स्वयं को अपमानित महसूस कर रहा है। अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलन में बड़ी भारी संख्या में शामिल होकर उसने कांग्रेस को बताने का प्रयास किया कि उसकी नीतियां देश के खिलाफ हो रही हैं। वक्त है कांग्रेस पटरी पर आ जाए, लेकिन सत्ता के मद में चूर कांग्रेस आमजन की आवाज कहां सुनती है। आप खुद तय कर सकते हैं कि यह विधेयक देश में सांस्कृतिक एकता के लिए कितना घातक है। फिर आप तय कीजिए क्या ऐसे किसी कानून की देश को जरूरत है? क्या ओछी मानसिकता वाली कांग्रेस की देश को अब जरूरत है? क्या यूपीए सरकार की नीतियां और उसका आचरण देखकर नहीं लगता कि शासन व्यवस्था में 'देशबंधु' कम 'देशशत्रु' अधिक बैठे हैं? क्या कांग्रेस नीत यूपीए सरकार को पांच साल तक सत्ता में बने रहने का अधिकार है? क्या इस तरह देश में कभी चैन-अमन कायम हो सकेगा? क्या इससे 'बहुसंख्यक' अपने को कुंठित महसूस नहीं करेगा?

'सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक-२०११' कहता है...

1- 'बहुसंख्यक' हत्यारे, हिंसक और दंगाई प्रवृति के होते हैं। (विकीलीक्स के खुलासे में सामने आया था कि देश के बहुसंख्यकों को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की इस तरह की मानसिकता है।) जबकि 'अल्पसंख्यक' तो दूध के दुले हैं। वे तो करुणा के सागर होते हैं। अल्पसंख्यक समुदायक के तो सब लोग अब तक संत ही निकले हैं।
2- दंगो और सांप्रदायिक हिंसा के दौरान यौन अपराधों को तभी दंडनीय मानने की बात कही गई है अगर वह अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों के साथ हो। यानी अगर किसी बहुसंख्यक समुदाय की महिला के साथ दंगे के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय का व्यक्ति बलात्कार करता है तो ये दंडनीय नहीं होगा।
3- यदि दंगे में कोई अल्पसंख्यक घृणा व वैमनस्य फैलता है तो यह अपराध नहीं माना जायेगा, लेकिन अगर कोई बहुसंख्यक ऐसा करता है तो उसे कठोर सजा दी जायेगी। (बहुसंख्यकों को इस तरह के झूठे आरोपों में फंसाना आसान होगा। यानी उनका मरना तय है।)
4- इस अधिनियम में केवल अल्पसंख्यक समूहों की रक्षा की ही बात की गई है। सांप्रदायिक हिंसा में बहुसंख्यक पिटते हैं तो पिटते रहें, मरते हैं तो मरते रहें। क्या यह माना जा सकता है कि सांप्रदायिक हिंसा में सिर्फ अल्पसंख्यक ही मरते हैं?
5- इस देश तोड़क कानून के तहत सिर्फ और सिर्फ बहुसंख्यकों के ही खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। अप्ल्संख्यक कानून के दायरे से बाहर होंगे।
6- सांप्रदायिक दंगो की समस्त जवाबदारी बहुसंख्यकों की ही होगी, क्योंकि बहुसंख्यकों की प्रवृति हमेशा से दंगे भडकाने की होती है। वे आक्रामक प्रवृति के होते हैं।
७- दंगो के दौरान होने वाले जान और माल के नुकसान पर मुआवजे के हक़दार सिर्फ अल्पसंख्यक ही होंगे। किसी बहुसंख्यक का भले ही दंगों में पूरा परिवार और संपत्ति नष्ट हो जाए उसे किसी तरह का मुआवजा नहीं मिलेगा। वह भीख मांग कर जीवन काट सकता है। हो सकता है सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का दोषी सिद्ध कर उसके लिए जेल की कोठरी में व्यवस्था कर दी जाए।
८- कांग्रेस की चालाकी और भी हैं। इस कानून के तहत अगर किसी भी राज्य में दंगा भड़कता है (चाहे वह कांग्रेस के निर्देश पर भड़का हो।) और अल्पसंख्यकों को कोई नुकसान होता है तो केंद्र सरकार उस राज्य के सरकार को तुरंत बर्खास्त कर सकती है। मतलब कांग्रेस को अब चुनाव जीतने की भी जरूरत नहीं है। बस कोई छोटा सा दंगा कराओ और वहां की भाजपा या अन्य सरकार को बर्खास्त कर स्वयं कब्जा कर लो।

सोनिया गांधी के नेतृत्व में इन 'देशप्रेमियों' ने 'सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक-२०११' को तैयार किया है।
१. सैयद शहबुदीन
२. हर्ष मंदर
३. अनु आगा
४. माजा दारूवाला
५. अबुसलेह शरिफ्फ़
६. असगर अली इंजिनियर
७. नाजमी वजीरी
८. पी आई जोसे
९. तीस्ता जावेद सेतलवाड
१०. एच .एस फुल्का
११. जॉन दयाल
१२. जस्टिस होस्बेट सुरेश
१३. कमल फारुखी
१४. मंज़ूर आलम
१५. मौलाना निअज़ फारुखी
१६. राम पुनियानी
१७. रूपरेखा वर्मा
१८. समर सिंह
१९. सौमया उमा
२०. शबनम हाश्मी
२१. सिस्टर मारी स्कारिया
२२. सुखदो थोरात
२३. सैयद शहाबुद्दीन
२४. फरह नकवी

18 टिप्‍पणियां:

  1. देखेँगे किसकी दम है ये बिल पास कराने की.

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  2. " एक आँख खोल देने वाली पोस्ट गंभीर चेतावनी ..देश के तुकडे करने में मानने वाली इस सरकार को अब भागना ही देश हित में है ...आखिर कांग्रेस खेल रही है सत्ता पाने के लिए ही ये खेल ..."

    http://eksacchai.blogspot.com

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  3. खान्ग्रेस ने अपनी चल चल दी है देश को बटने की अब ये देखना है की विरोधी पटरियां विशेषकर बीजेपी भी दलाली खा लेती है या इसका विरोध करती है

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  4. खान्ग्रेस ने अपनी चल चल दी है देश को बटने की अब ये देखना है की विरोधी पटरियां विशेषकर बीजेपी भी दलाली खा लेती है या इसका विरोध करती है

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  5. ज्यादा कुछ न कहते हुए मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि इस बिल को निश्चित तौर पर पास होना ही चाहिए। यह अल्पसंख्यकों के लिए हितकर है।
    अल्पसंख्यक है कौन? हिन्दू, सिख, ईसाई और इसी तरह के सम्प्रदाय के लोग। भारत में मुसलमान बहुसंख्यक हैं। हालत यह हो गई है कि हिन्दू लड़कियों को विवाह के लिए कोई योग्य लड़का नहीं मिलता तो बहुत सी हिन्दू लड़कियां मुसलमान लड़के से निकाह कर रही हैं। मसलन अजहर-संगीता, मो. कैफ-पूजा, नवाब पटौदी- शर्मिला, सैफ अली खान-करीना (निकाल हुआ नहीं है पर जल्द हो जाएगा, हमें उम्मीद करनी चाहिए), शाहरुख खान-गौरी। खैर।
    विधेयक तैयार करने वाले जिन लोगों के नाम आपने लिखे हैं, उनमें आप खुद ही देख लीजिए कि कौन अल्पसंख्यक है और कौन बहुसंख्यक। विधेयक में जो बातें कही गई हैं वह हिन्दू और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए ही हितकर हैं। हम अगर सच्चे हिन्दूवादी हैं तो हमें मिलकर विधेयक का पक्ष लेना चाहिए। साथ ही कांग्रेस और गठबंधन सरकार को धन्यवाद देना चाहिए। भाजपा कुछ नहीं कर सकी, कम से कम कांग्रेस ही कुछ कर रही है। अगर कांग्रेस इसी तरह अल्पसंख्यक हिन्दुओं के हित में काम करती रही तो राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने से कोई रोक नहीं सकता।
    जय अल्पसंख्यक-जय कांग्रेस-जय विधेयक

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  6. vaah sahab kya baat chodi hhai...maza aa gay...keep writing...umaah..

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  7. बहुत ही गहन विवेचना की है आपने.. और वर्त्तमान राजनैतिक परिदृश्य तो अन्धकारमय है.. न तो इस अवस्था पर अफसोस होता है, न चिंता.. अराजकता!

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  8. सच कहते हो यह कांग्रेस देश को बाँट कर ही रहेगी...अब भी बहुत से बद्धुजीवी यहाँ बैठे हैं, आपको भी मिल सकते हैं, मेरे भी आस पास हैं जिन्हें अभी भी कांग्रेस से कुछ उम्मीद है...अभी तो रामलीला मैंदान में ही मारा था, शायद इन्हें तब अक्ल आएगी जब घरों में घुस कर मारेंगे, माँ, बहन, बेटियों के साथ बलात्कार करेंगे...
    इतनी गंभीर परिस्थितियाँ सामने हैं फिर भी इन्हें अक्ल क्यों नहीं आती? ऐसे मुर्ख न जाने कब समझेंगे?

    पिछले दिनों जब NAC ने यह बिल बनाया था तब मैंने भी इसपर एक पोस्ट लिखी थी, उस समय मुझे नहीं पता था कि कांग्रेस इतनी जल्दी ही इसे संसद में पेश कर देगी...

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  9. आपकी पोस्ट पढ़कर तो यही लगता है कि देश को अब BJP ही बचा सकती है और BJP को मोदी जी । अल्पसंख्यकों का इलाज भी उन्हीं के पास है । मोदी जी देश को जोड़ते हैं और विकास भी करते हैं , गुजरात गवाह है ।

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  10. बिलकुल सही बात है है. बहतु ही हास्यास्पद नियम बन्ने जा रहा है. कोई आश्चर्य नहीं है. कांग्रेस सरकार के राज में कुछ भी संभव है. वैसे दुःख तो उन लोगो को होना चाइये जिन्होंने इस कांग्रेस सरकार को वोट देकर सरकार में बैठाया है.

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  11. देखते हैं क्या होता है...

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  12. अपराध निवारण में भी भेदभाव? तब तो यह बिल सम्विधान की धारणा के विपरीत हुआ।

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  13. bhaai aalekh to bahut achha likha hai...lekin vishay aur vishay saamagri par koi bhi tippaniya karne ka mannn nahi karta hai.....dekhte hain kaha to jaata hai bhartiye gantantra..........

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  14. बहुत बढ़िया और शानदार आलेख ! बेहतरीन प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  15. सभी पार्टियों का हाल कमोबेश एक जैसा ही है...

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  16. कमेटी के नाम देख कर भी अगल लोग नहीं जागेंगे तो कब जागेंगे ... और देर सवेर ये बिल पास भी हो जायगा ... बीज तो बोया ही गया है इसको बना कर ...

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  17. कोंग्रेस से और उम्मीद भी क्या कर सकते हैं. ये वोट के लिए अपनी माँ के कफ़न भी बेच सकते हैं. और कोंग्रेस में अब असली हिन्दू बचे ही कितने हैं...? या तो सत्ता के लालची हिन्दू या फिर सोनिया भक्त रीढ़ विहीन हिन्दू. वरना उसकी क्या हिम्मत होती? एक सामयिक और जानकारी परक पोस्ट के लिए साधुवाद. लिखते रहिए. आपकी कलम में धार है.

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