संघ शताब्दी वर्ष : जहाँ संघ की शाखा लगती है, वहाँ समाज में सकारात्मक परिवर्तन दिखायी देते हैं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा केवल खेलने-कूदने और योगाभ्यास का स्थान नहीं है। किसी शाखा में भले ही 100 स्वयंसेवक नित्य आते होंगे, लेकिन अच्छी शाखा उसे ही माना जाता है, जिसके कारण से शाखा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आए हों। हिन्दू समाज में जागृति आई हो। समाज अपनी चुनौतियों का समाधान करने में स्वयं सक्षम हो गया हो। शाखा की सफलता इसी में है कि वह समाज परिवर्तन का केंद्र बने। इसलिए संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता कहते हैं कि जिन क्षेत्रों में संघ की अच्छी शाखा चलती है, वहाँ की अनेक समस्याओं का समाधान स्वयं ही हो जाता है। शाखा आने वाले स्वयंसेवक अपने क्षेत्र की समस्याओं को चिह्नित करते हैं और समाज की सज्जनशक्ति को साथ लेकर उसका समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। संघ शाखा की सफलता की अनेक कहानियां हैं। यहाँ हम मध्यभारत की कुछ शाखाओं का उल्लेख कर रहे हैं, जिन्होंने समाज परिवर्तन के अनुकरणीय उदाहरण समाज के सामने प्रस्तुत किए हैं।
भोपाल में शाखाओं के माध्यम से पर्यावरण, शिक्षा एवं सेवा के कई प्रकल्प चलाए जाते हैं। ऐसा ही एक प्रकल्प है- एम्स में संचालित ‘सार्थक सेवा केंद्र’। विद्युत भाग की ‘वीर मंगल पांडेय शाखा’ के स्वयंसेवकों ने अनुभव किया कि एम्स में दूर-दूर से मरीजों का आना होता है लेकिन यहाँ परिजनों के लिए रात्रि विश्राम की व्यवस्था नहीं है। इस कारण मरीजों के साथ उनके परिजनों को भी असुविधा होती थी। उन्हें मजबूरी में पार्क के किनारे बैठकर रात गुजारनी पड़ती थी। यह सब देखकर शाखा टोली की बैठक में निर्णय लिया गया कि एम्स में एक सहायता केंद्र प्रारंभ किया जाए। कुछ स्वयंसेवक चिन्हित किए गए और 13 मई 2022 से यहाँ ‘सार्थक सेवा केंद्र’ शुरू कर दिया गया। 10 से 12 स्वयंसेवकों ने दो पालियों में यानी सुबह 8 बजे से 11 बजे तक और उसके बाद 11 से 2 बजे तक समय देने कि योजना बनाई। आज यह प्रकल्प रैन बसेरा, व्हीलचेयर एवं स्ट्रेचर, रक्तदान और एम्बुलेंस की सुविधाएं उपलब्ध कराता है। वहीं, बुधनी के सिविल अस्पताल में भेरुंदा नगर की ‘बजरंग शाखा’ गरम पानी एवं रोगी सहायता केंद्र का संचालन करती है। अस्पताल में आए दिन मरीजों को गर्म पानी, दूध एवं अन्य चीजों के लिए परेशान होना पड़ता था। इसी प्रकार का प्रकल्प ग्वालियर के कमलाराजा अस्पताल में भी चलाया जाता है। यहीं, जयारोग्य चिकित्सालय में सर्दी के समय मरीज के परिजनों को ठंड से बचाने के लिए ‘कंबल केंद्र’ का संचालन किया जाता है।
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मध्यभारत के गुना की विवेकानंद बस्ती में शिव शाखा के स्वयंसेवकों ने देखा कि यहाँ का कैंट मुक्तिधाम अव्यवस्थाओं का शिकार है। स्वयंसेवकों ने तय किया कि मुक्तिधाम को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित करेंगे। इस संकल्प के साथ शाखा के स्वयंसेवक प्रत्येक रविवार को मुक्तिधाम में श्रम साधना करने लगे। यहाँ स्वयंसेवकों ने 250 पौधे लगाए और उनकी देखरेख की। मुक्तिधाम परिसर में बस्ती का पानी आने से कीचड़ हो जाती थी। पानी की निकासी का प्रबंध करके कीचड़ की समस्या का निदान किया। अपने प्रयासों से स्वयंसेवकों ने मुक्तिधाम की तस्वीर बदल दी। गंजबासोदा की केशव शाखा ने नशा मुक्ति का संकल्प लिया। कुछ परिवारों को चयनित कर उनसे व्यक्तिगत मित्रता की और नशा छुड़ाने का प्रयास किया जा रहा है। नशा तस्करों की पहचान कर प्रशासन की सहायता से इस समस्या का काफी हद तक समाधान करने में सफलता मिली है। बरेली की तरूण व्यवसायी शाखा ‘भगत सिंह’ ने सार्वजनिक पार्कों में असामाजिक तत्वों के जमावड़े एवं नशीले पदार्थों के सेवन को बंद कराया है। इसके लिए स्वयंसेवकों ने पार्क में स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर बनवाया। इसके बाद से पार्क में स्थानीय लोगों का आना-जाना बढ़ गया, जिससे असामाजिक तत्वों ने वहां आना बंद कर दिया।
सीहोर जिले के श्यामपुर खंड में निवारिया की ‘महाराणा प्रताप शाखा’ ने सामाजिक समरसता के लिए सराहनीय प्रयत्न किए हैं। ग्राम में जातियों के मध्य मतभेद ज्यादा थे। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लिए भोजन का अलग टेंट लगता था एवं मन्दिर में प्रवेश पर भी कुछ लोग लगातार आपत्ति लेते रहते थे। महाराणा प्रताप शाखा ने ग्राम में सामाजिक समरसता का वातावरण बनाने के लिए जनवरी-2022 से एक अभियान शुरू किया। इसके अंतर्गत प्रति शनिवार हनुमान जी महाराज के मंदिर पर सुंदरकांड का आयोजन शुरु हुआ, जिसमें सभी जाति-वर्गों को शामिल किया जाता है। इसके बाद शाखा ने जुलाई-2022 में सभी ग्रामवासियों के साथ मिलकर सुंदरकांड के साथ-साथ सहभोज भी प्रारंभ किया। ग्राम के सभी परिवारों की सूची बनाई गई। जिसमें बारी-बारी से प्रत्येक समाज के व्यक्तियों द्वारा वहां पर सुंदरकांड और सहभोज का कार्यक्रम होने लगा। अब मन्दिर में सभी लोग प्रवेश करते हैं एवं गांव के सभी कार्यक्रम शादी-विवाह आदि में सब एकसाथ भोजन करते हैं।
संघ के स्वयंसेवक पर्यावरण और मूक प्राणियों के संरक्षण के लिए भी आगे आते हैं। ब्यावरा जिले की केशव शाखा ने ‘चिड़िया बचाओ अभियान’ अभियान चलाने का संकल्प लिया। शाखा में आने वाले बच्चों से जूते-चप्पल के खाली बॉक्स बुलवाए और उन्हें चिड़िया के घर के स्वरूप में बनाकर चिन्हित जगहों पर लगा दिया। जिसका परिणाम यह आया कि बहुत से घरों में गोरैया ने अपना ठिकाना बना लिया। बाद में स्वयंसेवकों ने पानी के सकोरे भी लगाए। शाखा क्षेत्र में लगभग 80 स्थानों पर चिड़ियाओं के लिए 110 घर बनाए गए हैं और लगभग इतने ही सकोरे रखे गए हैं। सीहोर के जावर खंड की माधव शाखा ने गो-संरक्षण की दिशा में सराहनीय कार्य किया है। संघ के स्वयंसेवकों ने जावर खंड में गोवंश के लिए विश्राम गृह बनाया है। इस विश्राम गृह में गायों को लाया जाता है। यहाँ उनके खाने और पानी की व्यवस्था भी की गई है।
शाखा के माध्यम से स्वयंसेवकों ने समाज परिवर्तन के अनूठे प्रयोग किए हैं, जिनके बारे में जानकारी कम ही सामने आ पाती है क्योंकि संघ के स्वयंसेवक इसे अपना स्वाभाविक कार्य मानकर कभी इसका प्रचार नहीं करते हैं। शाखा की सफलता की इन कहानियों के पीछे समर्पण है, त्याग है, करुणा है और समाज के लिए जीने का जज्बा है।
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| संघ शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर 'स्वदेश ज्योति' में 15 फरवरी, 2026 रविवार को प्रकाशित साप्ताहिक स्तम्भ |




