जम्मू-कश्मीर में हुए हिन्दुओं के नरसंहार को सप्रमाण प्रस्तुत करनेवाली फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ भारतीय सिनेमा के लिए एक मील का पत्थर है। जम्मू-कश्मीर को केंद्र में रखकर पहले भी फिल्में बनती रही हैं लेकिन उनमें सच कभी नहीं दिखाया गया बल्कि सच पर पर्दा डालने के प्रयास ही अधिक हुए। निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने हिन्दुओं के नरसंहार को दिखाने का साहस जुटाया है। एक-एक व्यक्ति यह बात कर रहा है कि आज देश में राष्ट्रीय विचार की सरकार नहीं होती तो 30 वर्ष बाद भी यह सच इस तरह सामने नहीं आ पाता। न तो कोई निर्देशक इस तरह की फिल्म बनाने की कल्पना कर पाता और यदि कोई बना भी लेता, तब उसका प्रदर्शन संभव न हो पाता। जिस तरह से तथाकथित सेकुलर खेमा, कांग्रेस समर्थक बुद्धिजीवी और अन्य लोग ‘द कश्मीर फाइल्स’ का विरोध कर रहे हैं, उसे देखकर आमजन की यह आशंका सही नजर आती है। सोचिए न कि 30 वर्ष पुराने इस भयावह घटनाक्रम की कितनी जानकारी लोगों को है? कितने लोगों को पता था कि हिन्दुओं को भगाने के लिए कश्मीर की मस्जिदों से सूचनाएं प्रसारित की गईं। ‘यहां क्या चलेगा, निजाम-ए-मुस्तफा’, ‘कश्मीर में अगर रहना है, अल्लाहू अकबर कहना है’ और ‘असि गछि पाकिस्तान, बटव रोअस त बटनेव सान मतलब हमें पाकिस्तान चाहिए और हिंदू औरतें भी मगर अपने मर्दों के बिना’। यह धमकी भरे संदेश लगातार प्रसारित किए जा रहे थे। कश्मीरी हिन्दुओं के घरों पर पर्चे चिपका दिए गए। ‘कन्वर्ट हो जाओ, भाग जाओ या मारे जाओ’ इनमें से एक ही रास्ता चुनने का विकल्प हिन्दुओं के पास था। महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके बाद नृशंस ढंग से हत्याएं करने की जानकारी कितनों को थी? महिलाओं को पति के रक्त से सने चावल खाने के लिए मजबूर किया गया। ये घटनाएं एक-दो नहीं थी, अनेक थीं।
गुरुवार, 17 मार्च 2022
शुक्रवार, 11 मार्च 2022
आत्मदैन्य से मुक्ति का विमर्श है ‘भारतबोध का नया समय’
पत्रकारिता के आचार्य एवं भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी की नयी पुस्तक ‘भारतबोध का नया समय’ शीर्षक से आई है। स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के अवसर पर उन्होंने पूर्ण मनोयोग से अपनी इस पुस्तक की रचना-योजना की है। वैसे तो प्रो. द्विवेदी सदैव ही आलेखों के चयन एवं संपादन से लेकर रूप-सज्जा तक सचेत रहते हैं क्योंकि उन्होंने काफी समय लोकप्रिय समाचारपत्रों के संपादक के रूप में बिताया है। परंतु अपनी इस पुस्तक को उन्होंने बहुत लाड़-दुलार से तैयार किया है। पुस्तक में शामिल 34 चुनिंदा आलेखों के शीर्षक और ले-आउट एवं डिजाइन (रूप-सज्जा), आपको यह अहसास करा देंगे। संभवत: पुस्तक को आकर्षक रूप देने के पीछे लेखक का मंतव्य, ‘भारतबोध’ के विमर्श को प्रबुद्ध वर्ग के साथ ही युवा पीढ़ी के मध्य पहुँचना रहा है। आकर्षक कलेवर आज की युवा पीढ़ी को अपनी ओर खींचता है। हालाँकि, पुस्तक के कथ्य और तथ्य की धार इतनी अधिक तीव्र है कि भारतबोध का विमर्श अपने गंतव्य तक पहुँच ही जाएगा। पहले संस्करण के प्रकाशन के साथ ही यह चर्चित पुस्तकों में शामिल हो चुकी है।
शनिवार, 5 मार्च 2022
सर्वस्पर्शी शिव-राज
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी यात्रा में बड़ों को आदर देकर, छोटों को स्नेह देकर और समकक्षों को साथ लेकर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। यह उनके नेतृत्व की कुशलता है। उनका व्यक्तित्व इतना सहज है कि जो भी उनके नजदीक आता है, उनका मुरीद हो जाता है। शिवराज के राजनीतिक विरोधी भी निजी जीवन में उनके व्यवहार के प्रशंसक हैं। सहजता, सरलता, सौम्यता और विनम्रता उनके व्यवहार की खासियत है। उनके यह गुण उन्हें राजनेता होकर भी राजनेता नहीं होने देते हैं। वह मुख्यमंत्री हैं, लेकिन जनता के मुख्यमंत्री हैं, जनता के लिए मुख्यमंत्री हैं। 'जनता का मुख्यमंत्री' होना उनको औरों से अलग करता है। प्रदेश में पहली बार शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास के द्वार समाज के लिए खोले। वह प्रदेश में गाँव-गाँव ही नहीं घूमे, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को मुख्यमंत्री निवास पर बुलाकर भी उनको सुना और समझा। अपने इस स्वभाव के कारण शिवराज सिंह चौहान 'जनप्रिय' हो गए हैं। मध्यप्रदेश में उनके मुकाबले लोकप्रियता किसी मुख्यमंत्री ने अर्जित नहीं की है।
मंगलवार, 15 फ़रवरी 2022
हिन्दूहित यानी राष्ट्रहित
भाग्यनगर (हैदराबाद) में चल रहे रामानुजाचार्य सहस्राब्दी समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने जो उद्बोधन दिया है, वह वर्तमान राजसत्ता एवं समाजसत्ता के लिए दिशासंकेत है। उनके उद्बोधन पर संकीर्ण राजनीतिक दृष्टि से नहीं अपितु वृहद भारतीय दृष्टिकोण से चिंतन करने और उसका अनुसरण करने की आवश्यकता है। अपने व्याख्यान में सबसे पहले उन्होंने एक लोककथा के माध्यम से भारतीय समाज को उसके सामर्थ्य से परिचित कराया। भारतीय समाज के सामर्थ्य का ही परिणाम है कि विगत एक हजार वर्षों में अनेक बाह्य आक्रमणों के बाद भी हिन्दू संस्कृति जीवित है। अनेक ताकतों ने हिन्दुओं को नष्ट करने के लिए पूरी ताकत लगा ली लेकिन परिणाम क्या है, सब जानते हैं। इस ओर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि "हमें खत्म करने के अनेक कोशिशें की गईं लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। अगर हमें खत्म होना होता होता तो पिछले 1000 साल में ऐसा हो गया होता लेकिन लगभग पाँच हजार साल पुराना सनातम धर्म आज भी टिका हुआ है और अक्षुण्ण है। जिन्होंने हिन्दुओं को खत्म करने की कोशिश की वो आज पूरी दुनिया में आपस में संघर्ष कर रहे हैं। इतने अत्याचारों के बाद भी आज हमारे पास मातृभूमि है। हमारे पास संसाधनों की कमी नहीं है इसलिए हमें डरने की जरूरत भी नहीं है"।
रविवार, 13 फ़रवरी 2022
लखीराम अग्रवाल : वैचारिक योद्धा की राजनीतिक यात्रा
भारतीय जनता पार्टी को 'पार्टी विद डिफरेंस' का तमगा निश्चित ही लखीराम जी अग्रवाल जैसे ईमानदार, जनसरोकारी और स्वच्छ छवि के राजपुरुषों के कारण ही मिला होगा। सादगी और मिलनसारिता की प्रतिमूर्ति थे लखीराम अग्रवाल। उनको जानने वाले बताते हैं कि राजनीति में लखीराम जैसे आदर्श राजनेता अब कम ही दिखते हैं। वे अलग ही माटी के बने थे। वे उस परम्परा के राजनेता थे, जिसका उद्देश्य राजनीति के मार्फत समाज की बेहतरी, जनसेवा और रचनात्मक सोच को आगे बढ़ाना था। जनसंघ से भाजपा के देशव्यापी पार्टी बनने के सफर में लखीराम अग्रवाल के योगदान को याद करना, सही मायने में भव्य और आलीशान इमारत की नींव के पत्थरों को याद करना है। उनको याद करते हैं तो एक वैचारिक योद्धा की राजनीतिक यात्रा भी याद आती है। इस यात्रा में स्थापित किए मील के पत्थर भी याद आते हैं। वह सब याद आता है जो आज की राजनीति में कम ही नजर आता है। लोकतंत्र के जीवत बने रहने के लिए किस तरह के राजनेताओं की जरूरत है, यह भी याद आता है।
शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2022
हिन्दुत्व ही राष्ट्रत्व
एक ओर बाह्य विचारधारा के प्रभाव में कुछ राजनेता और उनके सहयोगी बुद्धिजीवी ‘हिन्दुत्व’ एवं ‘राष्ट्र’ की अवधारणा पर प्रश्न उठाकर उसे नकार रहे हैं। हिन्दुत्व को लेकर उनका विचार अत्यधिक नकारात्मक है। उन्हें जैसे ही अवसर मिलता है, नकारात्मक बातों के साथ हिन्दुत्व को जोड़कर, हिन्दुत्व के प्रति समाज में घृणा का भाव पैदा करने का प्रयास करते हैं। वहीं, दूसरी ओर राष्ट्रीय विचार से अनुप्रमाणित संगठन हैं, जो हिन्दुत्व को भारत का मूल बता रहे हैं। हिन्दुत्व को सही प्रकार से परिभाषित करते हुए उनकी ओर से बताया जाता है कि उसमें सबके लिए सम्मानपूर्वक स्थान है। इस विमर्श के क्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वक्तव्य को देखा जा सकता है। भाग्यनगर (हैदराबाद) में चल रहे रामानुजाचार्य सहस्राब्दी समारोह में शामिल होने पहुँचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि “हिन्दुत्व ही राष्ट्रत्व है। इसमें दो मत नहीं है। इस बात को कहने में कोई संकोच नहीं है”।
सोमवार, 7 फ़रवरी 2022
शब्द-शब्द आपके भीतर उतर आएगा ‘नर्मदा का सौन्दर्य’
नर्मदा नदी के सौन्दर्य की गाथा | Saundarya ki nadi narmda
सदानीरा माँ नर्मदा का सौन्दर्य अप्रतिम है। शिवपुत्री को निहारन ही नहीं अपितु उसके किस्से सुनना भी अखंड आनंद का स्रोत है। और जब यह किस्से महान चित्रकार आचार्य नंदलाल बोस के यशस्वी शिष्य अमृतलाल वेगड़ सुना रहे हों, तब आनंद की अनुभूति की कल्पना कर ही सकते हैं। ईश्वर ने अमृतलाल वेगड़ की कूची और कलम दोनों पर अपार कृपा की है। जितने सुंदर उनके चित्र हैं, उतने ही रंग शब्द चित्रों में हैं। वेगडज़ी ने नर्मदा माई की परिक्रमा पर तीन पुस्तकें लिखी हैं- सौन्दर्य की नदी नर्मदा, अमृतस्य नर्मदा और तीरे-तीरे नर्मदा।