हम विकट संकट से गुजर रहे हैं। इस प्रकार के वैश्विक संकट का सामना सामूहिक प्रयासों, धैर्य एवं सकारात्मक मन के साथ ही किया जा सकता है। निराश और हतोत्साहित मन से हम इस मुसीबत से पार नहीं पा सकते। वैसे भी दुनिया में यह सामाजिक व्यवस्था है कि दु:ख एवं कष्ट की स्थिति में व्यक्ति के दु:ख को बढ़ाने का काम नहीं किया जाता, अपितु उसे सांत्वना दी जाती है, धैय दिया जाता है और उसके दु:ख में शामिल होकर उसको हिम्मत दी जाती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समाज में सेवा एवं राहत कार्यों को करने के साथ ही अपने इस दायित्व को भी स्वीकार किया। निराशा के गर्त में धकेले जा रहे अपने समाज के मन में जीत का विश्वास जगाने के उद्देश्य से संघ की प्रेरणा से ‘कोविड रिस्पॉन्स टीम’ ने पाँच दिवसीय ‘हम जीतेंगे - पाजिटीविटी अनलिमिटेड’ व्याख्यानमाला का आयोजन किया। इस व्याख्यानमाला में सामाजिक एवं धार्मिक नेतृत्व ने समाज में आत्मविश्वास जगाने का प्रयास किया।
मंगलवार, 18 मई 2021
शुक्रवार, 14 मई 2021
संवेदनशीलता शिवराज सरकार
बेसहारा परिवार को पाँच हजार पेंशन और बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा का सराहनीय निर्णय
हम सब जानते हैं कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने किसी को संभलने का अवसर नहीं दिया। बहुत तेजी से फैली महामारी की यह लहर अपने पीछे अनेक प्रकार के दु:ख और कष्ट छोड़कर जाने वाली है। यह दु:ख और कष्ट छोटे हो सकते हैं यदि समाज और सरकार मिलकर प्रयास करें। कोरोना संक्रमण की त्रासद घटनाओं के कारण यह महामारी अब हमारे लिए सामाजिक समस्या भी बन गई है। अनेक परिवार बेसहारा हो गए हैं। उनमें जो कमाने-खिलानेवाले थे, उनका दु:खद निधन हो गया है। बेसहारा परिवार और बच्चों के सामने अनेक चिंताएं हैं। हमें प्रयास करना चाहिए कि हम सब ऐसे परिवारों की चिंताओं का समाधान कैसे कर सकते हैं? मध्यप्रदेश सरकार ने पहलकदमी करते हुए बेसहारा परिवारों को पाँच हजार रुपये मासिक पेंशन, बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा और राशन की नि:शुल्क व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय बाकी राज्यों की सरकारों के लिए अनुकरणीय हो सकता है।
इस तरह के प्रयासों में सरकारों के साथ सामाजिक संगठनों एवं जागरूक व्यक्तियों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। सरकार ऐसे परिवारों के लिए कोई योजना बनाए और सामाजिक संगठन एवं जागरूक नागरिक जरूरतमंद व्यक्ति तक इन योजनाओं का लाभ पहुँचाने में सहयोगी बनें। साथ यह भी नजर रखी जाए कि कोई जरूरतमंदों का हक न मार ले। योजनाओं का सीधा लाभ पीडि़त व्यक्ति को मिले। उसमें बिचौलिए आकर उनको सहायता देने की जगह उनके दर्द को बढ़ाने का काम न करें। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस बात के लिए प्रशंसा के पात्र हैं कि उन्होंने बेसहारा हुए परिवारों एवं बच्चों को प्रत्येक माह पाँच हजार रुपये की पेंशन देने का निर्णय लिया है। बेसहारा परिवारों के लिए यह बड़ी राहत होगी। यह निर्णय बताता है कि शिवराज सिंह चौहान बहुत संवेदनशील मुख्यमंत्री हैं। उनके लिए अंत्योदय की चिंता प्राथमिक है। वह उन परिवारों की चुनौतियों को समझते हैं, जो कमजोर आय वर्ग से हैं। पाँच हजार रुपये की मासिक पेंशन के साथ ही उन्होंने ऐसे बच्चों की नि:शुल्क पढ़ाई की व्यवस्था एवं परिवारों को नि:शुल्क राशन की व्यवस्था करने का निर्णय भी लिया है।
इसके साथ ही महिलाओं को काम प्रारंभ करने के लिए सरकार की गारंटी पर बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय भी सराहनीय है। इस बात के लिए लोगों को अधिक प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि वे स्वावलंबी बनें और स्वरोजगार कर बाकी सबके लिए भी उदाहरण बनें। मध्यप्रदेश सरकार का यह निर्णय एक आत्मविश्वास पैदा करता है, एक भरोसा जगाता है एवं आश्वासन देता है कि कठिन परिस्थितियों में सरकार हमारा सहारा बनेगी और हम फिर से उठ खड़े होंगे। आज की निराशाजनक परिस्थिति में इस प्रकार का भरोसा बहुत जरूरी है। यह भरोसा ही इस कठिन लड़ाई में जीतने का हमारा सबसे बड़ा सहारा बनेगा।
शनिवार, 24 अप्रैल 2021
संघ फिर मैदान में
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान लोगों को संकट से उबारने एवं उन्हें सहायता देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता एक बार फिर मैदान में नजर आ रहे हैं। पिछले वर्ष जब पहली बार देश कोरोना संक्रमण की चपेट में आया था और लोगों का जीवन बचाने के लिए सरकार ने कठोर निर्णय लेते हुए लॉकडाउन लगाया था, तब संघ के स्वयंसेवकों ने बड़े स्तर पर सेवा एवं राहत कार्यों का संचालन किया था। देश में जब भी आपदा की स्थिति होती है, संघ के स्वयंसेवक सबसे आगे खड़े नजर आते हैं। यह भावना देश और समाज के प्रति उनके समर्पण को बताती है। एक बार फिर जब देश में संक्रमण फैल रहा है, तब घर से लेकर अस्पताल तक संघ के स्वयंसेवक संक्रमितों एवं उनके परिजनों के लिए देवदूत बनकर कार्य कर रहे हैं। मरीजों को दवा, भोजन और अस्पताल तक पहुँचाने के काम में स्वयंसेवक लगे हुए हैं।
अकसर यह मन में प्रश्न आता है कि बिना किसी विशेष प्रशिक्षण के संघ के स्वयंसेवक यह सब कैसे कर लेते हैं? पिछले वर्ष सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने उद्बोधन में इस बात की स्पष्टता सबको दी थी। दरअसल, संघ के लिए सेवाकार्य, किसी पर उपकार नहीं है। उसके लिए सेवाकार्य करणीय कार्य है। शाखा स्थान पर स्वयंसेवकों का मानस ही इस प्रकार तैयार हो जाता है कि यह समाज हमारा अपना है, प्रत्येक परिस्थिति में इसकी चिंता हमें ही करनी है। इसलिए अपने जीवन को भी दांव पर लगाकर वह कठिनतम परिस्थितियों में भी अग्रिम पंक्ति में खड़ा होता है।
कोरोना संकट में सहायता के लिए पुनः आगे आईं सेवा भारती एवं समाजसेवी संस्थाएं#मैं_भी_कोरोना_वारियर @SewaGatha @sewabharati @SewaBhartiMP @SewaMadhya @RSSorg @ChouhanShivraj @OfficeofSSC @PIBBhopal @JansamparkMP @editorvskbharat @vsk_mp pic.twitter.com/cbZZR21De6
— लोकेन्द्र सिंह (Lokendra Singh) (@lokendra_777) April 24, 2021
वर्तमान समय में संघ ने समूचे देश में, विशेषकर जहाँ कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है, वहाँ कोरोना सहायता केंद्र बनाए हैं। मध्यप्रदेश की ही बात करें तो यहाँ संघ ने प्रांतश: कोरोना हेल्प डेस्क बनाई हैं, जो लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही हैं। इसके साथ ही संघ की प्रेरणा से संचालित सरस्वती शिशु मंदिर, सेवा भारती, विद्या भारती ने अपने संस्थान क्वारन्टाइन सेंटर बनाने के लिए प्रशासन को सौंप दिए हैं। अनेक स्थान पर संघ के स्वयंसेवक स्वयं ही क्वारन्टाइन एवं आइसोलेशन सेंटर चला रहे हैं।
भोपाल में RSS ने शुरू किए 4 क्वारेन्टीन सेंटर @RSSorg @PMOIndia @ChouhanShivraj @CMMadhyaPradesh @MoHFW_INDIA
— लोकेन्द्र सिंह (Lokendra Singh) (@lokendra_777) April 20, 2021
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संघ से संबंधित संस्थाओं के अस्पताल एवं स्वास्थ्य केंद्र भी कोरोना मरीजों की सेवा में समर्पित हो गए हैं। संघ ने विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से बात करके उनकी धर्मशालाओं, भोजनशालाओं एवं अस्पतालों को भी कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में उपलब्ध करवाया है। कोरोना के विरुद्ध युद्ध स्तर पर कार्य कर रहे संघ के स्वयंसेवक सबको साथ लेकर चल रहे हैं। संघ के इन प्रयासों को साधुवाद। अन्य सामाजिक संगठन भी संघ से प्रेरणा लेकर अपने दायित्व निर्वहन के लिए आगे आएं।
देखें 2 मिनट की यह फिल्म - 'समिधा: सेवा परमो धर्म'
गुरुवार, 8 अप्रैल 2021
कोरोना से बचने स्वास्थ्य-आग्रह
मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण अनियंत्रित होता जा रहा है। मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहाँ कोरोना महामारी की दूसरी लहर तेजी से फैल रही है। कोरोना संक्रमितों के मामले में मध्यप्रदेश देश में सातवें स्थान पर पहुंच गया है। विगत सात दिन में इंदौर का औसत पॉजिटिविटी रेट 15 जबकि भोपाल का 19 पर पहुँच गया है। यह स्थिति चिंताजनक है। ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उस भूमिका में सक्रिय हो गए हैं, जिसकी अपेक्षा किसी भी जनप्रतिनिधि से होती है। मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रतिनिधि बाजारों में निकल कर लोगों को कोरोना संक्रमण के खतरे के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इस संदर्भ में मंगलवार को उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने से ‘स्वास्थ्य-आग्रह’ की शुरुआत की। कोरोना महामारी के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए समाज के प्रमुख लोगों से आग्रह करने का यह अभिनव प्रयोग है।
पिछले कुछ समय से कोरोना संक्रमण को लेकर सामान्य नागरिकों में जिस प्रकार की उदासीनता एवं लापरवाही बढ़ती गई है, ऐसी स्थिति में उन्हें फिर से सावधान करने के लिए समाज के ही प्रभावशाली लोगों का सहयोग आवश्यक है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक एवं पत्रकारों-साहित्यकारों से भी बातचीत कर उनसे कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में सहयोग की माँग की है। नि:संदेह यदि सब मिलकर अपने आस-पास के लोगों को जागरूक करेंगे, तब कोरोना को हराना आसान होगा। जिस तरह प्रतिदिन मुख्यमंत्री श्री चौहान आम लोगों से मिल कर मास्क लगाने, शारीरिक दूरी रखने एवं स्वच्छता का आग्रह कर रहे हैं, वैसे प्रयास सभी क्षेत्रों के नेतृत्वकारी लोगों को करना चाहिए। कोरोना संक्रमण समूची मानवता के लिए खतरा बन गया है। दूसरी लहर में जिस प्रकार यह अधिक घातक हो गया, वैसे में अपने समाज को बचाना हम सबकी जवाबदेही है। शासन के साथ हर स्तर पर सहयोग करना ही इस समय हमारा धर्म होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अपने घर पर अपनी सहधर्मिणी एवं पुत्र को मास्क पहनाकर प्रतीकात्मक ढंग से संदेश दिया है कि कोरोना के विरुद्ध जन-जागरूकता की लड़ाई हमें अपने घर से ही शुरू करनी होगी। मुख्यमंत्री बार-बार चेता रहे हैं कि लॉकडाउन जैसी स्थितियां बनने से रोकना होगा, अन्यथा सरकार को अपने नागरिकों का जीवन बचाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। एक बात स्पष्ट है कि आज की स्थिति में हम सब लॉकडाउन लगाने की स्थिति में नहीं है, अब लॉकडाउन लगा तो वह हम पर बहुत भारी पड़ेगा। इसलिए आवश्यक है कि हम सब अपने जवाबदेही को पहचाने और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ‘स्वास्थ्य-आग्रह’ के आह्वान को समझें। हमें अपनों के साथ ही समाज के प्रत्येक बंधु-भगिनी के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए उनसे आग्रह करना होगा कि मास्क पहनें, स्वच्छ रहें और शारीरिक दूरी का पालन करें। साथ ही अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें।
सोमवार, 29 मार्च 2021
चार पाकिस्तान बनाने का विचार 'लीगी मानसिकता'
जिस मुस्लिम लीगी मानसिकता ने भारत का विभाजन किया था, वह अब भी मौजूद है। भारत की अखंडता, एकता और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए यह विभाजनकारी मानसिकता खतरनाक संकेत है। बंगाल के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस के नेता शेख आलम ने भारत के टुकड़े करके चार पाकिस्तान बनाने संबंधी देश विरोधी भाषण दिया है। बीरभूम जिले के नानूर विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने पहुँचे शेख आलम ने कहा कि "हमारी जनसंख्या 30 प्रतिशत है और वो (हिन्दू) 70 प्रतिशत हैं। अगर पूरे भारत में हम 30 प्रतिशत लोग इकट्ठे हो जाते हैं तो हम चार-चार पाकिस्तान बना सकते हैं। फिर कहां जाएंगे ये 70 प्रतिशत लोग"? शेख आलम का यह बयान स्पष्ट तौर पर देशद्रोह की श्रेणी में आता है और इसके साथ ही यह भारत के विरुद्ध अंदरखाने में चल रही भयंकर साजिश की ओर भी इंगित करता है।
ये नया भारत है, अब नया पाकिस्तान बनाना संभव नहीं। जो बन गया है, जल्द वह भी पुनः भारत का हिस्सा हो सकता है। 30% में से 3% भी तुम्हारी साजिश का हिस्सा नहीं बनेंगे। सब भारत के साथ हैं। तुम अपनी खैर मनाओ... https://t.co/WIZozFCYN4
— लोकेन्द्र सिंह (Lokendra Singh) (@lokendra_777) March 25, 2021
भारत हितैषी संगठनों एवं व्यक्तियों द्वारा बार-बार जब यह चेतावनी दी जाती है कि मुस्लिम बाहुल्य वाले क्षेत्र भारत की एकता एवं अखंडता के लिए खतरा बन सकते हैं, तब उनकी बातों को तथाकथित सेक्युलर ताकतें सांप्रदायिक कह कर खारिज कर देती हैं। लेकिन, यही सेक्युलर समूह/व्यक्ति शेख आलम जैसे कट्टरपंथी एवं लीगी मानसिकता के लोगों के बयानों पर चुप्पी साध जाते हैं। बल्कि पुलिस प्रशासन द्वारा जब इनके विरुद्ध कार्रवाई की जाती है, तब यह गैंग तख्ती एवं मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतर आती है। इससे पहले भारत से पूर्वोत्तर राज्यों को तोडऩे की योजना बताने वाले शर्जील इमाम के मामले में देश ने देखा ही कि कैसे तथाकथित प्रगतिशील उसकी तरफदारी कर रहे थे।
बंगाल में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहाँ लीगी मानसिकता का प्रभाव दिखाई देता है। इस संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस की सरकार में मंत्री फिरहाद हकीम के उस बयान का उल्लेख आवश्यक हो जाता है, जिसमें उन्होंने माना कि बंगाल के कई क्षेत्र 'पाकिस्तान' बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव के पांचवे चरण के मतदान से पहले मंत्री फिरहाद हकीम ने पाकिस्तान के एक पत्रकार से कहा था- "आप हमारे साथ आइए, हम अपको कोलकाता के मिनी पाकिस्तान ले चलते हैं"। वैसे यह स्थिति प्रत्येक उस शहर में बन गई है, जहाँ मुस्लिम आबादी 15 से 30 प्रतिशत है। मुस्लिम बाहुल्य वाले इन क्षेत्रों में सांप्रदायिक तनाव स्पष्ट तौर दिखाई देता है। जहाँ शेख आलम ने आपत्तिजनक बयान दिया है, उसी बीरभूमि के एक गाँव में 300 हिन्दू परिवारों को लगातार चौथे वर्ष दुर्गा पूजा का आयोजन करने के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ी। ममता सरकार में कई बार यह स्थिति बनी है कि दशहरा और दुर्गा पूजा से हिन्दुओं को रोका गया है। अपनी परंपरा-संस्कृति का पालन करने और धार्मिक स्वतंत्रता के अपने मौलिक अधिकार के लिए हिन्दुओं को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।
यह स्थिति चिंताजनक है। शेख आलम के बयान को हवा में उड़ाना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। शासन-प्रशासन के साथ ही देशभक्त नागरिकों को लीगी मानसिकता पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
यह भी देखें - कश्मीरी हिन्दुओं की हत्या के पीछे जेहादी मानसिकता
बुधवार, 24 मार्च 2021
हर बूँद अनमोल
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| Lokendra Singh |
विश्व जल दिवस पर जल शक्ति अभियान की शुरुआत कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मनुष्यता एवं प्रकृति-पर्यावरण के हित में एक महत्वपूर्ण शुरुआत की है। जल संरक्षण और जल प्रबंधन एक-दूसरे के पूरक हैं। बिना जल संरक्षण किए अगर हम जल का दोहन करेंगे, तो आने वाले समय में जल संकट की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। भारत के अनेक हिस्सों में अब हम इस संकट का सामना करने की स्थिति में आ चुके हैं। यह संभलने का समय है। यह अभियान हमें संभलने का अवसर देता है। इस अभियान को ‘कैच द रैन’ नाम दिया गया है। वर्षा जल का संचयन करना, इसका उद्देश्य है।
शहरीकरण की प्रक्रिया में एक बड़ी चूक पिछले वर्षों में हुई है कि वर्षा जल के संचयन की प्राकृतिक एवं नैसर्गिक संरचनाओं को हमने ध्वस्त कर दिया या बदहाल होने दिया। स्थिति यह है कि वर्षा जल का ज्यादातर हिस्सा बह कर शहर से बाहर चला जाता है, जबकि उसको वहाँ की भूमि में समाना चाहिए था। भू-जल स्तर को बनाए रखने में वर्षा जल का बहुत महत्व है। थोड़ी जागरूकता एवं थोड़े ही प्रयासों से हम वर्षा जल का संचयन कर सकते हैं। इसलिए इस अभियान को वर्षा जल के संचयन से जोडऩा अनुकरणीय है।
मध्यप्रदेश में अनेक स्वयंसेवी संस्थाएं एवं समाजसेवी वर्षा जल के संचयन के लिए क्रांतिकारी पहल प्रारंभ कर चुके हैं। मध्यप्रदेश के बैतूल में पर्यावरण पुरुष मोहन नागर बारिश के पानी को सहजने के लिए ग्रामवासियों के सहयोग से ‘गंगा अवतरण अभियान’ एवं ‘बोरी बंधान’ जैसे परंपरागत वैज्ञानिक प्रयोगों का संचालन करते हैं। इन प्रयोगों के कारण जिन गाँवों में कभी जल संकट भयावह हो जाता था, आज वहाँ संग्रहित वर्षा जल का उपयोग सिंचाई के लिए भी होने लगा है। वहीं, झाबुआ में शिव गंगा अभियान के चला कर पद्मश्री महेश शर्मा ने एक लाख से अधिक जल संरचनाएं खड़ी कर दीं। दोनों ही महानुभाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरणा लेकर पर्यावरण संरक्षण के महती अभियान में जुटे हुए हैं।
पर्यावरण पुरुष मोहन नागर के प्रयासों पर केन्द्रित फिल्म
यह ठीक बात है कि सरकार ने वर्षा जल संरक्षण की चिंता की है लेकिन यह जब तक समाज की चिंता का विषय नहीं बनेगा, तब तक वांछित लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। जल संरक्षण प्रत्येक मनुष्य का दायित्व होना चाहिए। जीवन में जल का क्या महत्व है, हमारी संस्कृति में, ऋषियों ने इसे भली प्रकार रेखांकित किया है। उन्होंने बताया है कि पृथ्वी का आधार जल और जंगल है। इसलिए उन्होंने पृथ्वी की रक्षा के लिए वृक्ष और जल को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा है- “वृक्षाद् वर्षति पर्जन्य: पर्जन्यादन्न सम्भव:” अर्थात् वृक्ष जल है, जल अन्न है, अन्न जीवन है। हिन्दुओं के चार वेदों में से एक अथर्ववेद में बताया गया है कि आवास के समीप शुद्ध जलयुक्त जलाशय होना चाहिए। जल दीर्घायु प्रदायक, कल्याणकारक, सुखमय और प्राणरक्षक होता है। छान्दोग्योपनिषद् में अन्न की अपेक्षा जल को उत्कृष्ट कहा गया है। महर्षि नारद ने भी कहा है कि पृथ्वी भी मूर्तिमान जल है। अन्तरिक्ष, पर्वत, पशु-पक्षी, देव-मनुष्य, वनस्पति सभी मूर्तिमान जल ही हैं। जल ही ब्रह्मा है।
आधुनिक जीवनशैली में हम अपनी संस्कृति की सीखों को पीछे छोड़ते आए हैं, जिसके कारण आज अनेक प्रकार के संकटों का सामना कर रहे हैं। जल शक्ति अभियान के माध्यम से हमारे पास एक अवसर आया है कि हम अपनी संस्कृति के संदेशों को आत्मसात करें, दुनिया के सामने आचरण हेतु प्रस्तुत करें और प्रकृति के साथ अपने आत्मीय संबंध को पुन: प्रगाढ़ करें। याद रखें, जल का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए इसका संरक्षण एवं संचयन अनिवार्य है।
मंगलवार, 2 मार्च 2021
पिता ने क्या किया
यूट्यूब चैनल 'अपना वीडियो पार्क' पर देखें
- लोकेन्द्र सिंह -
(काव्य संग्रह "मैं भारत हूँ" से)
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| मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी की पत्रिका 'साक्षात्कार' के अगस्त-2020 के अंक में प्रकाशित |





