सोमवार, 29 मार्च 2021

चार पाकिस्तान बनाने का विचार 'लीगी मानसिकता'

जिस मुस्लिम लीगी मानसिकता ने भारत का विभाजन किया था, वह अब भी मौजूद है। भारत की अखंडता, एकता और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए यह विभाजनकारी मानसिकता खतरनाक संकेत है। बंगाल के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस के नेता शेख आलम ने भारत के टुकड़े करके चार पाकिस्तान बनाने संबंधी देश विरोधी भाषण दिया है। बीरभूम जिले के नानूर विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने पहुँचे शेख आलम ने कहा कि "हमारी जनसंख्या 30 प्रतिशत है और वो (हिन्दू) 70 प्रतिशत हैं। अगर पूरे भारत में हम 30 प्रतिशत लोग इकट्ठे हो जाते हैं तो हम चार-चार पाकिस्तान बना सकते हैं। फिर कहां जाएंगे ये 70 प्रतिशत लोग"? शेख आलम का यह बयान स्पष्ट तौर पर देशद्रोह की श्रेणी में आता है और इसके साथ ही यह भारत के विरुद्ध अंदरखाने में चल रही भयंकर साजिश की ओर भी इंगित करता है।

भारत हितैषी संगठनों एवं व्यक्तियों द्वारा बार-बार जब यह चेतावनी दी जाती है कि मुस्लिम बाहुल्य वाले क्षेत्र भारत की एकता एवं अखंडता के लिए खतरा बन सकते हैं, तब उनकी बातों को तथाकथित सेक्युलर ताकतें सांप्रदायिक कह कर खारिज कर देती हैं। लेकिन, यही सेक्युलर समूह/व्यक्ति शेख आलम जैसे कट्टरपंथी एवं लीगी मानसिकता के लोगों के बयानों पर चुप्पी साध जाते हैं। बल्कि पुलिस प्रशासन द्वारा जब इनके विरुद्ध कार्रवाई की जाती है, तब यह गैंग तख्ती एवं मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतर आती है। इससे पहले भारत से पूर्वोत्तर राज्यों को तोडऩे की योजना बताने वाले शर्जील इमाम के मामले में देश ने देखा ही कि कैसे तथाकथित प्रगतिशील उसकी तरफदारी कर रहे थे। 

बंगाल में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहाँ लीगी मानसिकता का प्रभाव दिखाई देता है। इस संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस की सरकार में मंत्री फिरहाद हकीम के उस बयान का उल्लेख आवश्यक हो जाता है, जिसमें उन्होंने माना कि बंगाल के कई क्षेत्र 'पाकिस्तान' बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव के पांचवे चरण के मतदान से पहले मंत्री फिरहाद हकीम ने पाकिस्तान के एक पत्रकार से कहा था- "आप हमारे साथ आइए, हम अपको कोलकाता के मिनी पाकिस्तान ले चलते हैं"। वैसे यह स्थिति प्रत्येक उस शहर में बन गई है, जहाँ मुस्लिम आबादी 15 से 30 प्रतिशत है। मुस्लिम बाहुल्य वाले इन क्षेत्रों में सांप्रदायिक तनाव स्पष्ट तौर दिखाई देता है। जहाँ शेख आलम ने आपत्तिजनक बयान दिया है, उसी बीरभूमि के एक गाँव में 300 हिन्दू परिवारों को लगातार चौथे वर्ष दुर्गा पूजा का आयोजन करने के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ी। ममता सरकार में कई बार यह स्थिति बनी है कि दशहरा और दुर्गा पूजा से हिन्दुओं को रोका गया है। अपनी परंपरा-संस्कृति का पालन करने और धार्मिक स्वतंत्रता के अपने मौलिक अधिकार के लिए हिन्दुओं को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। 

यह स्थिति चिंताजनक है। शेख आलम के बयान को हवा में उड़ाना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। शासन-प्रशासन के साथ ही देशभक्त नागरिकों को लीगी मानसिकता पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। 

यह भी देखें - कश्मीरी हिन्दुओं की हत्या के पीछे जेहादी मानसिकता




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