मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर और प्रशासनिक राजधानी भोपाल ने स्वच्छता सर्वेक्षण में क्रमश: प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त कर एक सकारात्मक और अनुकरणीय संदेश दिया है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब सबसे साफ शहरों की सूची में इंदौर और भोपाल सबसे ऊपर हैं। पिछले वर्ष भी इंदौर पहले स्थान पर था और भोपाल दूसरे स्थान पर। दोनों शहरों ने अपना स्थान बरकरार रखा है। हमें याद करना होगा कि इससे पहले दोनों शहर स्वच्छता सर्वेक्षण की सूची के अंतिम हिस्से में थे। किंतु, बाद में जनता ने संकल्प लेकर स्वच्छता को अपनी आदत बना लिया। प्रशासन ने भी आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराने में सक्रियता और गंभीरता से कार्य किया। परिणाम हमारे सामने हैं, मध्यप्रदेश के दो बड़े शहर स्वच्छ शहरों की सूची में शीर्ष पर सुशोभित हैं। यह सब संभव हुआ सरकार और जनता के साझे प्रयास से। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान ने स्वच्छता के मामले में भारत की तस्वीर बदल दी है। 'स्वच्छ भारत अभियान' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष उपलब्धि में गिना जाएगा।
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मंगलवार, 22 मई 2018
बुधवार, 24 मई 2017
निंदक नियरे राखिए...
केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान 'खुले में शौच मुक्त भारत' पर अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' में लेख लिखकर विवादों में आईं आईएएस अधिकारी दीपाली रस्तोगी को मध्यप्रदेश सरकार ने क्लीनचिट दे दी है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए देशभर में प्रभावी ढंग से अभियान चला रहे हैं, वहीं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में तैनात आदिवासी कल्याण विभाग की आयुक्त दीपाली रस्तोगी ने कुछ दिन पहले इस अभियान को लेकर कुछ सवाल उठाए थे। दीपाली रस्तोगी के अपने लेख में अभियान को लेकर सरकार के अतिउत्साह की आलोचना जरूर की थी, लेकिन यह सीधे तौर पर न तो केंद्र सरकार की आलोचना थी और न ही उन्होंने प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए थे। अपने लेख में उन्होंने अभियान के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों और पानी की कमी को लेकर शौचालय के औचित्य पर सवाल उठाए थे। उन्होंने अपने लेख में व्यावहारिक परेशानियों का जिक्र किया था। अपने लेख में एक जगह जरूर रस्तोगी थोड़ी अधिक नकारात्मक हो गईं थीं, जब उन्होंने अभियान की मंशा को अंग्रेजों की मानसिक गुलामी से जोड़ दिया था। जैसा कि होता है इस लेख को सरकार की आलोचना बताया गया। जमकर बहसबाजी शुरू हुई। सरकारी अधिकारी द्वारा सरकारी अभियान के खिलाफ इस प्रकार आलोचनात्मक लेख लिखना 'सेवा नियमों के विरुद्ध' बताया जाने लगा। बीच बहस में सामान्य प्रशासन विभाग ने रस्तोगी को नोटिस जारी कर जवाब माँग लिया था। जवाब में रस्तोगी ने कहा था कि उनकी भावना अभियान की आलोचना करने की कतई नहीं थी। उन्होंने तो सिर्फ उस व्यावहारिक परेशानी का जिक्र किया था, जो ग्रामीण क्षेत्र में जलसंकट की वजह से सामने आती है। यदि हम जमीन पर उतरकर देखें तब रस्तोगी के सवाल वाजिब दिखाई देते हैं। निसंदेह शौच मुक्त भारत आवश्यक है, लेकिन उससे पहले भारतीय समाज के सामने और भी बुनियादी जरूरतें हैं। बहरहाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक यह मामला पहुँचा। अंतत: सरकार ने अभिव्यक्ति की आजादी को सम्मान देते हुए एक सराहनीय निर्णय लिया। सरकार की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग के राज्यमंत्री लालसिंह आर्य ने कहा कि दीपाली रस्तोगी ने लेख में कुछ गलत नहीं लिखा है। हर एक को स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति का अधिकार होना चाहिए। उनकी मंशा सरकार की खिलाफत करने की नहीं थी। यह निर्णय लेकर सरकार ने विचार प्रक्रिया और उसकी अभिव्यक्ति को अवरुद्ध होने से बचा लिया।
सोमवार, 8 मई 2017
स्वच्छता की ओर बढ़ते कदम
एक बार फिर केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत किए गए सर्वे के परिणाम देश के सामने रखे हैं। सर्वे के आंकड़ों पर भरोसा करें, तब यह स्पष्ट है कि हम स्वच्छता की ओर बढ़ रहे हैं। दरअसल, स्वच्छता अभियान के परिणाम पर भरोसा करने का कारण मात्र आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हमने अनुभव किया है कि धीरे-धीरे स्वच्छता हमारी आदत होती जा रही है। अब हम यहाँ-वहाँ कचरा फेंकने से बचते हैं, जबकि पहले कहीं भी कचरा फेंकने में कोई संकोच नहीं होता था। स्वच्छता अभियान के कारण हमारे मन का संस्कार हुआ है। स्वच्छता के प्रति जागरूक करने वाले सार्वजनिक हित के विज्ञापन और लघु फिल्मों ने हमारे मन को चेताया है। स्वच्छ शहरों की रैंकिंग घोषित करने की सरकार की नीति का भी कहीं न कहीं प्रभाव पड़ रहा है। जागरूक नागरिक और शहर की सरकारें चाहती हैं कि उनके शहर के माथे पर 'अस्वच्छ शहर' का कलंक नहीं लगे। इस तथ्य को हम सर्वे के परिणाम में अनुभूत कर सकते हैं। पूर्व के सर्वेक्षणों में जो शहर स्वच्छता के मामले में बहुत पीछे थे, इस सर्वे में उन्होंने अपनी स्थिति सुधारी है। अर्थात् हम स्वच्छता की ओर बढ़ रहे हैं। हालाँकि हमें पूरी ईमानदारी से यह भी स्वीकार करना होगा कि तस्वीर जितनी उजली दिखाई जा रही है, उतनी है नहीं।
मंगलवार, 10 नवंबर 2015
बीसीसीआई में स्वच्छता अभियान शुरू
भा रतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की 85वीं वार्षिक आम सभा (एजीएम) की बैठक में क्रिकेट को साफ-सुथरा बनाने के लिए कुछ अहम फैसले लिए गए। आर्थिक अनियमितता और स्पॉट फिक्सिंग जैसे गंभीर आरोप झेल रहे एन. श्रीनिवासन को बीसीसीआई ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड (आईसीसी) के अध्यक्ष पद से हटा दिया है। अब बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर श्रीनिवासन की जगह वर्ष 2016 तक आईसीसी का अध्यक्ष पद संभालेंगे। आईपीएल की टीम चैन्नई सुपर किंग के मालिक रहे श्रीनिवासन के कारण पिछले कुछ समय में भारतीय क्रिकेट नकारात्मक खबरों में रही है। श्रीनिवासन प्रकरण के कारण क्रिकेट और खिलाडिय़ों के प्रति खेल प्रेमियों का भरोसा कम हुआ है। जिसे संभावनाओं का खेल माना जाता था, उसमें लोगों को आशंकाएं अधिक नजर आने लगीं। किसी मैच में अप्रत्याशित तरीके से उलट-फेर हो जाए तो उसमें 'फिक्सिंग' के सूत्र तलाशे जाने लगते हैं। हम कह सकते हैं कि क्रिकेट के प्रत्येक मैच को संदिग्ध नजर से देखा जाने लगा है। यह भारतीय क्रिकेट के लिए खतरनाक संकेत हैं।
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015
स्वच्छ भारत अभियान का एक वर्ष
आ ज स्वच्छ भारत अभियान का एक वर्ष पूरा हो रहा है। पिछले वर्ष महात्मा गाँधी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत की थी। अभियान का उद्देश्य शहरों और गाँवों को स्वच्छ बनाने का है। इसके तहत शहरों-गाँवों में शौचालयों का निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा, मैला ढोने की प्रथा का उन्मूलन करना, स्वच्छ और शुद्ध पेयजल का प्रबंध करना आदि शामिल है। अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहते हैं। स्वच्छता को आदत बनाना उनका मुख्य उद्देश्य प्रतीत होता है। इसके लिए उन्हें समाज के प्रमुख और प्रभावशाली व्यक्तियों को स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ा है। ताकि वे स्वच्छता के लिए लोगों को प्रेरित कर सकें।
सोमवार, 10 अगस्त 2015
स्वच्छता को आदत बनाना पड़ेगा
के न्द्र सरकार ने देश के स्वच्छ शहरों की सूची जारी की है। इस सूची में दक्षिण भारत के शहरों ने बाजी मारी है। दक्षिण भारत के 39 शहर शीर्ष 100 शहरों में स्थान बनाने में कामयाब रहे हैं। जबकि उत्तर भारत के महज 12 शहर ही टॉप 100 में आ सके हैं। शीर्ष पर कर्नाटक का मैसूर है। जबकि मध्यप्रदेश का शहर दमोह सूची में सबसे आखिरी स्थान पर रहा। सूची में भिण्ड 475, नीमच 467, ग्वालियर 400 और उज्जैन 355वें पायदान पर रहा। मध्यप्रदेश के लिए सोचने की बात है कि उसकी राजधानी (भोपाल) भी स्वच्छता के मामले में 106वें स्थान पर है। देश के एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की स्वच्छता के मामले में स्थिति क्या है, यह जानने के लिए सरकार ने 31 राज्यों के 476 शहरों का सर्वे कराया था। सर्वे में सरकार ने खुले में शौच, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट, पानी की गुणवत्ता और पानी से होने वाली बीमारियों से मौतों के आंकड़े का अध्ययन किया।
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