मंगलवार, 22 मई 2018

सरकार और जनता के साझे प्रयास से स्वच्छता में सिरमौर बनता मध्यप्रदेश

 मध्यप्रदेश  की औद्योगिक राजधानी इंदौर और प्रशासनिक राजधानी भोपाल ने स्वच्छता सर्वेक्षण में क्रमश: प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त कर एक सकारात्मक और अनुकरणीय संदेश दिया है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब सबसे साफ शहरों की सूची में इंदौर और भोपाल सबसे ऊपर हैं। पिछले वर्ष भी इंदौर पहले स्थान पर था और भोपाल दूसरे स्थान पर। दोनों शहरों ने अपना स्थान बरकरार रखा है। हमें याद करना होगा कि इससे पहले दोनों शहर स्वच्छता सर्वेक्षण की सूची के अंतिम हिस्से में थे। किंतु, बाद में जनता ने संकल्प लेकर स्वच्छता को अपनी आदत बना लिया। प्रशासन ने भी आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराने में सक्रियता और गंभीरता से कार्य किया। परिणाम हमारे सामने हैं, मध्यप्रदेश के दो बड़े शहर स्वच्छ शहरों की सूची में शीर्ष पर सुशोभित हैं। यह सब संभव हुआ सरकार और जनता के साझे प्रयास से। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान ने स्वच्छता के मामले में भारत की तस्वीर बदल दी है। 'स्वच्छ भारत अभियान' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष उपलब्धि में गिना जाएगा।
          यह बात सदैव ध्यान में रखने की है कि सरकार अकेले किसी कार्य को स्थायित्व नहीं दे सकती है। वांछित परिणाम भी तब तक प्राप्त नहीं हो सकता, जब तक कि समाज की सक्रिय सहभागिता न हो। समाज और सरकार दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। जब दोनों एक लक्ष्य के लिए ईमानदारी से जुटते हैं तो सकारात्मक परिवर्तन आता ही है। भोपाल और इंदौर, दोनों शहर जनसंख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश के बड़े शहर हैं। ऐसा माना जाता रहा कि अत्यधिक जनसंख्या के कारण स्वच्छता रख पाना आसान नहीं होता है। परंतु, इंदौर एवं भोपाल की जनता और प्रशासन ने इस धारणा को खंडित किया है। इंदौर और भोपाल की जनता ने यह संदेश दिया है कि यदि सब ठान लें कि हम यहाँ-वहाँ कचरा नहीं फेंकेंगे, यथासंभव गंदगी को दूर करेंगे, स्वच्छता में पूर्ण सहयोग देंगे, तब जनसंख्या या दूसरी बातें लक्ष्य के आड़े नहीं आती हैं। 
          यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि जनता और सरकार के ईमानदार प्रयासों से आज स्वच्छता के मामले में मध्यप्रदेश सिरमौर बन गया है। यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है। इंदौर और भोपाल की पुरानी तस्वीर और आज की तस्वीर देख कर यह परिवर्तन स्पष्टतौर पर देखा जा सकता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर इसका श्रेय आमजन को दिया है। यह सही भी है। जैसा कि ऊपर भी कहा  कि जनता के सहयोग के बिना सरकार इस प्रकार के सामाजिक लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकती। इसका दूसरा अर्थ यह भी हुआ कि मध्यप्रदेश की जनता अच्छे कार्यों-प्रयासों में शिवराज सरकार के साथ खड़ी है। एक संदेश यह भी कि मध्यप्रदेश सरकार लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विजन' को धरातल पर उतारने में सबसे आगे है। ग्राम विकास से लेकर डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान में मध्यप्रदेश में सराहनीय कार्य हुआ है। 
           प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक आवश्यक और महत्वपूर्ण 'स्वच्छ भारत अभियान' प्रारंभ से ही अपने हाथ में ले लिया था। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को केवल नारों तक सीमित नहीं रखा और न ही उसे सरकारी अभियान होने दिया। प्रधानमंत्री जानते हैं कि यह जनांदोलन में तब्दील होगा, तब ही भारत की तस्वीर स्वच्छ नजर आएगी। इसलिए उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को जनता का आंदोलन बना दिया। प्रधानमंत्री के आग्रह को स्वीकार कर देश की जनता ने स्वच्छ भारत अभियान को अपना अभियान बना लिया। स्वच्छता को लेकर देश में एक अलग प्रकार का दृष्टिकोण और आग्रह देखने में आया है। यह सुखद है। इसी का परिणाम है कि पहले स्वच्छता सर्वेक्षण में पीछे रहने वाले मध्यप्रदेश के शहर अब आगे आ रहे हैं।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (23-05-2018) को "वृद्ध पिता मजबूर" (चर्चा अंक-2979) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस - राजा राममोहन राय और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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