यह सर्वविदित तथ्य है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहरा नाता है। संघ की शाखा में प्रधानमंत्री मोदी का संस्कार हुआ है। उनके व्यक्तित्व में सादगी, त्याग, अनुशासन और देशभक्ति की जो अभिव्यक्ति होती है, उसके पीछे संघ का ही संस्कार है। अपने नागपुर प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी संघ के संस्थापक एवं आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ‘डॉक्टर साहब’ और द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’ के समाधि स्थल ‘स्मृति मंदिर’ पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ ही ‘अभ्यागत पंजीयन’ (विजिटर बुक) में जो विचार दर्ज किया है, वह समाज जीवन में संघ की भूमिका को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उचित ही लिखा है कि “राष्ट्रीय चेतना के जिस विचार का बीज 100 वर्ष पहले बोया गया था, वह आज एक महान वटवृक्ष के रूप में खड़ा है। सिद्धांत और आदर्श इस वटवृक्ष को ऊंचाई देते हैं, जबकि लाखों-करोड़ों स्वयंसेवक इसकी टहनियों के रूप में कार्य कर रहे हैं। संघ भारत की अमर संस्कृति का आधुनिक अक्षय वट है, जो निरंतर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को ऊर्जा प्रदान कर रहा है”।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी अब तक की यात्रा में उक्त बातों को चरितार्थ करके दिखाया है। उपहास, उलाहना और विरोध का सामना करते हुए संघ के लोगों ने अपने जीवन से समाज का मन जीता है। 1925 में जब डॉक्टर साहब ने संघ कार्य प्रारंभ किया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह संगठन समाजजीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पहुँच जाएगा। दरअसल, डॉक्टर साहब ने संघ को अभिनव पद्धति दी, उसे व्यक्तिवाद और परिवारवाद से मुक्त रखा, इसलिए वह निर्विवाद रूप से, अपने अखंड स्वरूप में आगे बढ़ता रहा। वटवृक्ष की ‘बरोह’ (जिन्हें हम जड़ें कहते हैं) की भाँति संघ की शाखाओं ने उसे और विस्तार दिया।
वर्ष प्रतिपदा एवं @RSSorg के आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव हेडगेवार जी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री @narendramodi जी ने स्मृति मंदिर (रेशिमबाग नागपुर) में श्रद्धासुमन अर्पित किए। #VarshaPratipada #Hedgewar #100YearsOfRSS #RSS100 pic.twitter.com/VkL8hyNKE6
— लोकेन्द्र सिंह (Lokendra Singh) (@lokendra_777) March 30, 2025
उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के प्रसिद्ध यूट्यूबर लेक्स फ्रीडमैन को दिए पॉडकास्ट में भी संघ की भूमिका के संदर्भ में विस्तार से चर्चा की थी। संघ की प्रेरणा से चलनेवाले संगठन सेवा भारती, विद्या भारती और भारतीय मजदूर संघ सहित अन्य संगठनों का उल्लेख करके भी यह बताने का प्रयास किया कि संघ को संकुचित दृष्टिकोण से देखने पर उसके विराट स्वरूप के दर्शन नहीं हो सकते हैं।
यह बात सही है कि संघ के संस्कार पाकर स्वयंसेवक जिस भी क्षेत्र में काम करने निकले, वहाँ उन्होंने राष्ट्रभक्ति का वातावरण खड़ा कर दिया। संघ लोगों को यही सीख देता है कि वे जहाँ भी रहें, देश को आगे रखकर अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करें। कहना होगा कि प्रधानमंत्री के रूप में जब नरेन्द्र मोदी अपने मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विशेषताओं को बताते हैं, तो वह केवल देश में ही नहीं अपितु दुनियाभर में पहुंचती हैं। इससे संघ के बारे में लोगों के भ्रम दूर होते हैं और संघ की वास्तविक छवि सामने आती है।
याद रखें कि प्रधानमंत्री मोदी नागपुर संघ कार्यालय में भ्रमण के लिए नहीं गए थे अपितु वे माधव नेत्रालय की नये विस्तारित भवन की आधारशिला रखने के लिए गए थे। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में माधव नेत्रालय का बड़ा एवं विश्वसनीय नाम है। संघ इस प्रकार के अनेक प्रकल्प चलाता है, जिनका सीधा लाभ समाज को मिलता है। यह बात सामान्यतौर पर सामने नहीं आती हैं क्योंकि संघ स्वयं का प्रचार करने से बचता है। वहीं, हमारे यहाँ बुद्धिजीवी एवं पत्रकार अकसर संघ की चर्चा राजनीति और भाजपा से जोड़कर ही करते हैं। संघ जब अपने शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है, तब हम सबको संघ को देखने का अपना दृष्टिकोण बड़ा करना चाहिए।
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