शुक्रवार, 19 अक्तूबर 2018

श्रीराम मंदिर निर्माण और आरएसएस


- लोकेन्द्र सिंह 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक वर्षभर में प्रमुख छह उत्सव मनाता है, इनमें से एक विजयादशमी है। यह सभी उत्सव सामाजिक महत्व के हैं। विजयादशमी समाज की विजय की प्रवृत्ति को जगा कर रखने वाला उत्सव है। यह प्रत्येक बुराई से जीतने की प्रेरणा देता है। संभवत: यही कारण है कि भारतीय समाज समय-समय पर अनेक बुराइयों को निकाल बाहर करता है। विजयादशमी के दिन सरसंघचालक का जो उद्बोधन होता है, वह संघ के स्वयंसेवकों के लिए तो पाथेय का कार्य करता ही है, संघ की नीति और सामयिक मुद्दों पर उसकी दृष्टि को भी स्पष्ट करता है। इसलिए विजयादशमी का उद्बोधन विशेष महत्व रखता है। नागपुर में 18 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई गई। मंच पर इस बार नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। निश्चित ही संघ विरोधी अब कैलाश सत्यार्थी और उनके काम को निशाना बनाएंगे। खैर, महत्व की बात यह है कि कैलाश सत्यार्थी ने भी अपने उद्बोधन में उन सब बातों को शामिल किया, जिन्हें संघ दोहराता आया है। उन्होंने संघ के प्रति विश्वास जताते हुए स्वयंसेवकों से स्वाभिमानी, संवेदनशील, समावेशी, सुरक्षित और स्वावलंबी भारत बनाने का आह्वान किया।
          संघ के स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने राष्ट्रीय महत्व के अनेक मुद्दे उठाए और उन पर संघ के मत को प्रस्तुत किया। वर्तमान परिस्थितियों से सर्वाधिक चर्चित विषय 'श्रीराम मंदिर' पर भी उन्होंने सरकार को दिशा-संकेत दिया है। देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आने वाले समय में संसद में श्रीराम मंदिर पर कानून कब तक आता है या अभी और अधिक समय तक सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा की जाएगी। श्रीराम मंदिर निर्माण की बात करते समय उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात कही, जिसे 'ओपीनियन लीडर्स' को समझना चाहिए और देश की जनता को भी समझाना चाहिए। सरसंघचालक ने कहा है- 'राम मंदिर हिंदू-मुसलमान का मुद्दा नहीं है। यह भारत का प्रतीक है।' 
          यह सूर्य की तरह अखण्ड और उजला सत्य है कि भगवान श्रीराम हिंदुओं के आराध्य तो हैं, किंतु उससे कहीं अधिक वह भारतीयता के शिखर पुरुष हैं। भारतीयता के प्रतीक हैं। भारतीय संस्कृति के मान-बिंदु हैं। इसलिए इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा बनाने की जगह इसका समाधान खोजना चाहिए। एक लंबा समय बीत चुका है। देश की बहुसंख्यक जनता श्रीरामजन्मभूमि पर उनके भव्य मंदिर के सपने को साकार होते देखना चाहती है। इसलिए सरसंघचालक के कहे अनुसार, जिस रास्ते से मंदिर निर्माण संभव है, मंदिर का निर्माण होना चाहिए। श्रीरामजन्मभूमि पर जल्द से जल्द राम मंदिर बनना चाहिए। सरकार को कानून बनाकर मंदिर निर्माण करना चाहिए। श्रीराम मंदिर निर्माण पर दिए गए उनके वक्तव्य को लेकर देशभर में चर्चा प्रारंभ हो गई है। संघ और भारत विरोधी मानसिकता के लोग एक बार फिर मंदिर निर्माण पर वितंडावाद खड़ा करने का प्रयास करेंगे। उनके मुकाबले प्रत्येक वर्ग से सज्जनशक्ति को सामने आकर खड़े होना चाहिए और इस विजयादशमी पर संकल्प लेना चाहिए कि भारत विरोधी ताकतों को जीतने नहीं देंगे। 

1 टिप्पणी:

  1. पूज्य संघ के पूर्वसरसंघचालकों व वर्तमान सर संघ चालक पूज्य भागवत की को नमन।
    आपका विचार सर्वोपरि व सबके हित का है। आपके निर्देश की आज देश को बहुत आवश्यकता है। लगता है संघ कोई सामान्य लोगों का समूह नहीं, एक दिव्य ईश्वरीय चेतना ही है जो इतने अनुपम विचार पनपाती है।
    पुनः अनुशरण की प्रतिज्ञा के साथ प्रणाम

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