सोमवार, 2 अगस्त 2021

मध्यप्रदेश में टीके का कुशल प्रबंधन


देश के कई राज्यों में कुप्रबंधन की वजह से कोरोनारोधी टीका बर्बाद हो रहा है, वहीं मध्यप्रदेश टीकाकरण में एक के बाद एक कीर्तिमान बना रहा है। जब समूचे देश में 21 जून से कोरोनारोधी टीकाकरण अभियान के रूप में शुरू हुआ था, तब मध्यप्रदेश में पहले दिन ही यानी 21 जून को मात्र 10 घंटे में लगभग 16 लाख 95 हजार लोगों को टीका लगाने का इतिहास रचा गया। उस दिन मध्यप्रदेश टीकाकरण में देश के अन्य सभी राज्यों से बहुत आगे खड़ा था। इतना ही नहीं, अभी तक एक दिन में इतनी संख्या में दुनिया के किसी भी शहर में टीकाकरण नहीं हुआ है। मध्यप्रदेश की इस उपलब्धि को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। उसके बाद भी मध्यप्रदेश टीकाकरण में लगातार रिकॉर्ड बनाता रहा। अब एक बार फिर मध्यप्रदेश के टीकाकरण के कुशल प्रबंधन एवं संचालन की चर्चा देश में हो रही है। मध्यप्रदेश में अब तक चार करोड़ से अधिक लोगों को टीका लगाया जा चुका है। इसमें लगभग ढाई करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें पहला टीका लगाया जा चुका है और 50 लाख से अधिक लोगों को दूसरा टीका भी लगाया जा चुका है। 
        प्रश्न उठता है कि जब बाकी राज्य टीके की कमी बताकर अपनी नाकामी छिपा रहे हैं, तब मध्यप्रदेश कैसे कीर्तिमान पर कीर्तिमान बनाए जा रहा है? दरअसल, यह सुफल परिणाम कुशल प्रबंधन का है। मध्यप्रदेश में टीका का प्रबंधन इस प्रकार किया जा रहा है कि प्रत्येक वायल (टीके की शीशी) में उपलब्ध दवा से 10 टीके लगाए जा सकते हैं। जबकि उसमें कुछ दवा शेष रह जाती है। यदि ठीक प्रकार से नियोजन हो जाए तो प्रत्येक वायल से औसत 11 टीके लगाए जा सकते हैं। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्यकर्मी यह कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में टीकाकरण के कुशल प्रबंधन एवं संचालन को देखते हुए केन्द्र सरकार ने प्रदेश की जनता के लिए तय कोटे से अधिक टीके दिए हैं। गत माह जुलाई में मध्यप्रदेश को कोटे के अनुसार 78 लाख टीके मिलने थे, लेकिन केंद्र सरकार ने 92 लाख टीके प्रदान किए। अर्थात् तय कोटे से 14 लाख ज्यादा। इसको और ज्यादा में परिवर्तित करने का काम किया हमारे स्वास्थ्यकर्मियों ने। 

यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में लोग टीकाकरण से बच रहे थे। टीकाकरण केंद्र सूने पड़े रहते थे। जबकि अब लगभग सभी टीकाकरण केंद्रों पर टीके के लिए कतार लग रही हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रयासों से प्रभावशाली लोगों ने समाज में टीकाकरण के प्रति जन-जागरण का वातावरण बनाया, जिसका यह परिणाम है। अब लोग टीके से भयभीत नहीं हो रहे बल्कि इसे अपने और अपनों के जीवन के लिए आवश्यक मान रहे हैं। विश्वास है कि मध्यप्रदेश सरकार जल्द ही प्रदेश की संपूर्ण बालिग जनसंख्या का टीकाकरण करा देगी। प्रदेश सरकार के अब तक के प्रयास सराहनीय रहे हैं।

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