बुधवार, 29 नवंबर 2017

'शिव' के 12 बरस, विश्वास का 'राज'

 मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश जैसे बड़े प्रदेश को बखूबी संभाला है। संभाला ही नहीं है, वरन प्रदेश को 'बीमारू राज्य' की श्रेणी से निकाल कर विकास के पथ पर अग्रसर कर दिया है। प्रदेश में विकास की गंगा बहे, इसके लिए वह निरंतर प्रयासरत रहे हैं। उनके प्रयासों का ही सुफल है कि आज अनेक क्षेत्रों में मध्यप्रदेश की छवि चमकी है। प्रदेश भाजपा ने अपने लोकप्रिय मुख्यमंत्री के कार्यकाल के बारह वर्ष पूरे होने के अवसर को विकास पर्व के रूप में मनाने का निर्णय किया है। शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री हैं, जो लगातार 12 वर्षों से प्रदेश के मुखिया हैं। प्रदेशभर में विकास पर्व के तहत राज्य में चल रहीं 12 प्रमुख योजनाओं- मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान एवं निकाह योजना, मेधावी छात्र योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, अटल ज्योति अभियान, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना, अन्नपूर्णा योजना, मुख्यमंत्री छात्र गृह योजना, भावांतर योजना, बलराम ताल योजना और महिला सशक्तिकरण योजना पर केंद्रित कार्यक्रम प्रदेशभर में आयोजित किए जाएंगे।
          विकास पर्व के आयोजन का मतलब साफ है कि अगले वर्ष चुनाव हैं और भाजपा शिवराज ब्रांड की योजनाओं का प्रचार करके जनता का ध्यान आकर्षित करना चाहती है। भाजपा के विकास पर्व पर कांग्रेस प्रश्न उठा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद कमलनाथ ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर जश्न के मुद्दों पर 12 सवाल पूछे हैं। बहरहाल, कांग्रेस विपक्ष की भूमिका का निर्वाहन कर रही है। उसका सवाल पूछना लाजमी है। वैसे भी सरकार के काम-काज को लेकर सहमति एवं असहमति हो सकती है। जनता को भी सौ फीसदी संतुष्ट और सहमत नहीं किया जा सकता। शिवराज के कार्यकाल में हुए विकास पर जनता में भी अलग-अलग पक्ष हो सकते हैं, परंतु इसके बावजूद इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पिछले 12 वर्षों में प्रदेश ने अपनी छवि एवं स्थिति को मजबूत किया है। जनता ने कदम-दर-कदम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति भरोसा जताया है।
          पर्यटन के क्षेत्र में एक दशक में मध्यप्रदेश ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय फलक पर ही नहीं, अपितु विदेशी पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने में भी मध्यप्रदेश सफल रहा है। पर्यटन के क्षेत्र में निवेश बढ़ा है, उसके साथ ही रोजगार का सृजन भी हुआ है। प्रदेश में आधारभूत ढांचा भी सुदृढ़ हुआ है। किसी समय अंधकार में डूब रहे प्रदेश में आज बिजली का संकट खत्म हो गया है। प्रदेश में बिजली का उत्पादन सरप्लस में है। 
          बारह वर्ष पहले तक प्रदेश का सड़क मार्ग खस्ताहाल था। किंतु, आज सड़क परिवहन अच्छी सड़कों के निर्माण से न केवल सुगम हुआ है, बल्कि इसमें बढ़ोतरी भी हुई है। प्रदेश की सड़कों को लेकर अमेरिका में दिए गए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान पर भले ही व्यंग्य बाण चलाए गए हों, परंतु प्रदेश की जनता जानती है कि पिछले बारह वर्षों में तस्वीर तो सुधरी है। प्रदेश में सड़कों का जाल फैला है। गाँव-शहर की दूरी कम हुई है। 
          कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पिछले पाँच वर्ष से शीर्ष पर है। पिछले पाँच वर्षों से लगातार वह कृषि कर्मण पुरस्कार जीत रहा है। मौसम और बढ़ी हुई लागत की मार से देश के सभी प्रांतों के किसान आहत हैं, मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। किंतु, यहाँ किसानों को एक भरोसा है, उन्हें उम्मीद है कि उनके प्रदेश का मुखिया कोई समाधान निकाल लाएगा। खेत-खलिहान में पसीना बहाने का अनुभव रखने के कारण शिवराज किसानों के दर्द को अधिक अच्छे से समझ पाते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री का पद संभालने के पहले दिन से अब तक वह लगातार किसानों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते रहे हैं। उनके नेतृत्व में ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने से लेकर किसान को उसके पसीने का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर जैसी योजना लेकर आने में प्रदेश अव्वल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब अपनी महत्वाकांक्षी और किसान हितैषी 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' का शुभारंभ करने का निर्णय लिया, तो उन्हें मध्यप्रदेश की उर्वरा भूमि ही याद आई।
         मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच अच्छी समझ विकसित होने का सबसे अधिक लाभ प्रदेश को मिल रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश की नीतियों का राष्ट्रीयकरण कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री चौहान केंद्र की नीतियों पर सबसे पहले अमल कर प्रदेश की जनता को उनका लाभ पहुँचा रहे हैं। प्रदेश की 'बेटी बचाओ' अभियान को प्रधानमंत्री ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान में बदल कर नया आयाम दे दिया। जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र की 'मेक इन इंडिया' की तर्ज पर 'मेक इन मध्यप्रदेश' योजना को प्रारंभ किया। डिजिटल इंडिया की तर्ज पर डिजिटल मध्यप्रदेश को बढ़ाया दिया। ई-भुगतान की दिशा में भी प्रदेश सरकार ने पहल की और सरकारी भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी कर दिया। सुशासन की दिशा में ई-गवर्नेंस के तहत प्रदेश ने अनेक जरूरी नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन किया है। वहीं, स्वच्छ भारत अभियान में भी मध्यप्रदेश का उल्लेखनीय योगदान सामने आया है।  
          मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले बारह वर्षों में चुनाव ही नहीं, बल्कि नेतृत्व कुशलता, सहज-सरल व्यवहार, संवेदनशीलता और अपनेपन से प्रदेश की जनता का भरोसा जीता है। अनेक सहमतियों-असहमतियों के बावजूद शिवराज पर जनता का अटूट विश्वास बना हुआ है। आज जब शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने का कीर्तिमान रच रहे होंगे, तब नई चुनौतियाँ उनके सम्मुख उपस्थिति दर्ज करा रही होंगी। किसी अग्निपरीक्षा की भाँति विधानसभा चुनाव आ रहे हैं। विजय कठिन तो है, किंतु मुश्किल नहीं है, क्योंकि शिवराज के पास जनता के भरोसे की बड़ी पूँजी है।
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