शुक्रवार, 11 मई 2012

तुष्टीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की चोट

 ल गता है कांग्रेस पर शनि की साढ़े साती चल रही है। कहा जाता है कि शनि न्याय का देवता है। वह सच्चा न्याय करता है। दोषी को सजा, निर्दोष को मजा। साढ़े साती शनि के दरबार में सुनवाई और फैसले का समय है। जब से कांग्रेसनीत यूपीए सरकार सत्ता में लौटी है तभी से उसका मामला शनि दरबार में है। कभी सुब्रह्मण्यम स्वामी कांग्रेस को न्यायालय खसीट कर ले जाते हैं तो कभी कोर्ट ही (कु)नीतियों को लेकर कांग्रेस की रगड़ा-पट्टी कर देता है। बाबा और अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन भी कांग्रेस को चैन नहीं लेने दे रहे।
    खैर, धीरे-धीरे कांग्रेस की तमाम (कु)नीतियां जनता के सामने आ रही हैं। इन्हें उजागर करने में सुप्रीम कोर्ट ने अहम भूमिका अदा की है। हज सब्सिडी पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। जस्टिस आफताब आलम और रंजना प्रकाश देसाई की बेंच ने हज सब्सिडी को दस साल में खत्म करने के आदेश जारी किए हैं। वहीं, बेंच ने हज यात्रा पर जाने वाले प्रधानमंत्री के भारी-भरकम शिष्टमंडल पर भी नाराजगी जताई है। दरअसल, हज यात्रा पर जाने वाले प्रधानमंत्री के शिष्टमंडल में ३० प्रतिनिधि शामिल हैं। बेंच ने शिष्टमंडल में प्रतिनिधियों की संख्या दो तक सीमित करने के आदेश दिए हैं। सोचने वाली बात है कि भारत को छोडक़र दुनिया में कहीं भी हज सब्सिडी नहीं दी जाती है। इस्लामिक देशों में भी नहीं। पाकिस्तान में भी सुप्रीम कोर्ट ने हज सब्सिडी को गैर-इस्लामिक करार देकर बंद करा दिया है। जबकि भारत में हज यात्रा पर सब्सिडी के नाम पर हर साल करीब ६०० करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर सरकार वाकई अल्पसंख्यकों का भला चाहती है तो उसे इस पैसा का इस्तेमाल शिक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी कार्यों में करना चाहिए। केन्द्र सरकार ने हज यात्रा सब्सिडी के बचाव में हलफनामा दायर किया है।
    सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को कांग्रेस की तुष्टीकरण नीतियों पर चोट के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के लिए तुष्टीकरण का सहारा ले रही है। विपक्षी पार्टियां खासकर भारतीय जनता पार्टी समय-समय पर कांग्रेस के इस रवैए पर विरोध जाहिर करती रही है। अन्य सामाजिक संगठन भी हज सब्सिडी पर सवाल खड़े करते रहे हैं। यही नहीं, कई मुस्लिम संगठन भी हज सब्सिडी को गलत मानते हैं, वे इसे गैर-इस्लामिक परंपरा मानते हैं, कुरान और शरियत के खिलाफ मानते हैं। लेकिन, कांग्रेस को न तो परंपरा से मतलब है, न ही हज सब्सिडी के नाम पर हिन्दू-मुस्लिम के बीच बढ़ रही दरार की। कांग्रेस को तो सिर्फ चिंता है एक मुश्त वोट बैंक की, जो उसे अल्पसंख्यकों को भ्रमित करके मिल जाता है। समय-समय पर सवाल खड़े होते हैं कि एक ही वर्ग को इस तरह की सहूलियत क्यों? क्या दूसरे वर्ग के लोग तीर्थ यात्रा पर भारत के बाहर नहीं जाते हैं? क्या उन्हें सरकारी मदद की जरूरत नहीं? क्या उस वर्ग में सभी लोग सम्पन्न हैं और अपना खर्चा उठा सकते हैं? लेकिन, इन सवालों के जवाब कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने कभी नहीं दिए, हमेशा टालमटोल कर जाते हैं। इस देश के निवासियों का एक तीर्थ मक्का-मदीना ही देश के बाहर नहीं है। ननकाना साहेब है, मानसरोवर है और माता हिंगलाज भी है। लेकिन, यहां जाने वालों को कभी किसी प्रकार की सहूलियत नहीं दी जाती। कारण है, ये तीर्थ बहुसंख्यक वर्ग के हैं और बहुसंख्यकों के वोट एक मुश्त, एक पार्टी को नहीं मिलते। हज सब्सिडी का बचाव और उसे बढ़ावा देने वाली कांग्रेस ने आज तक हिन्दू समाज को उसके तीर्थ स्थलों पर जाने के लिए कोई मदद नहीं दी। कभी कैलाश मानसरोवर (तिब्बत) की यात्रा को सुगम बनाने पहल नहीं की। ननकाना साहेब (पाकिस्तान) जाने वाले श्रद्धालुओं को कोई छूट नहीं। शादानी दरबार की पाकिस्तानी यात्रा पर कोई रियायत नहीं। माता हिंगलाज के दर्शन के लिए बलूचिस्तान जाने वाले हिन्दुओं को भारत सरकार ने आज तक अनुदान में फूटी कौड़ी तक नहीं दी। इस तरह की दोहरी नीतियों से कांग्रेस का चरित्र उजागर होता है। भले ही सांप्रदायिक पार्टी का तमगा भाजपा की छाती पर ठोक दिया गया है लेकिन वस्तुस्थिति कुछ और ही है। ईमानदारी से चीजों को देखा जाए तो कांग्रेस से बड़ी सांप्रदायिक पार्टी कोई और हो ही नहीं सकती। हाल ही में संपन्न हुए उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी यह साफ हुआ कि मुसलमानों के वोट बटोरने के लिए कांग्रेसी नेता किस हद तक गिर सकते हैं। तुष्टीकरण की परिपाटी कांग्रेस में बहुत पुरानी है। कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति जो जाहिर करते कुछ और उदाहरण...
  • कांग्रेस के मंत्री एसएम कृष्णा ने पिछले साल तुगलकी फरमान जारी किया। हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के पासपोर्ट बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन के शीघ्रता से जारी किए जाएं।
  • सेना में भेद बढ़ाने के लिए डॉ. राजिन्दर सच्चर कमेटी द्वारा सेना से जानकारी मांगना कि सेना में कितने मुस्लिम जवान और अफसर हैं।
  • आतंकवादी अब्दुल मदानी की रिहाई के लिए केरल की विधानसभा में प्रस्ताव पारित करना।
  • डेनमार्क में मोहम्मद पैगम्बर के मामले में केन्द्र सरकार की ओर से चिंता व्यक्त करना वहीं भगवान राम को झुठलाने के लिए कोर्ट में हलफनामा पेश करना। रामसेतु को तोडऩे की योजना।
  • प्रधानमंत्री का सांप्रदायिक बयान- देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है।
  • संसद पर हमले के दोषी की फाइल को दबाकर रखना। उसके फांसी से बचाने का प्रयास।
  • कश्मीर के पत्थरबाजों के लिए १०० करोड़ का राहत पैकेज जारी करना वहीं कश्मीर से बेदखल पंडि़तों के लिए दो आंसू भी नहीं।
  • विकीलीक्स का खुलासा - राहुल-सोनिया का यह कहना कि देश को खतरा बहुसंख्यक समाज से है, अल्पसंख्यकों से नहीं।
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा विश्व के सबसे बड़े आतंकी की मौत पर अफसोस जाहिर करना।
  • सांप्रदायिक घटनाओं में बहुसंख्यकों के माथे दोष मढऩे के लिए - सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निरोधक अधिनियम-२०११ तैयार करना।

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