रविवार, 9 मई 2010

क्या इतना सहज होता है सांसद व वरिष्ठ पत्रकार

प्रभात झा बने मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष
राज्यसभा सांसद प्रभात झा को मप्र में भारतीय जनता पार्टी का निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष चुन लिया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं मप्र भाजपा चुनाव पर्यवेक्षक कलराज मिश्र भोपाल में इसकी घोषणा की।
प्रभात का प्रदेश अध्यक्ष बनना

माना जा रहा है कि पत्रकार से सांसद बने प्रभात झा के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने से पार्टी कार्यकताओं में नया जोश व ऊर्जा का संचार होगा। प्रभात को संगठन और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता पसंद करते हैं इसी का परिणाम है कि उनके अध्यक्ष बनने पर किसी ने उंगली नहीं उठाई सिवाय ताई (इंदौर से भाजपा की सांसद सुमित्रा महाजन)। चूंकि वे भी प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए लालायतित थीं। लेकिन, पार्टी संगठन की डोर में बंधे होने के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा। वहीं फग्गन सिंह कुलस्ते का भी मन प्रदेश अध्यक्ष बनने का था लेकिन वे संगठन के मनाने पर मन गए। खैर ये राजनीति की बाते हैं अपुन को ज्यादा तो समझ आती नहीं.......
प्रभात जी से मेरा प्रत्यक्ष का संपर्क है सो मैं लिख रहा हूं उनसे हुईं मुलाकात का जिक्र.....
कैंटीन में सीखी उनसे पत्रकारिता
बात उन दिनों की है जब मैं अपने साथियों के साथ जीवाजी यूनिवर्सिटी में थे और हम किताबों में पत्रकारिता पढ़ा करते थे। किसी पत्रकार या बड़े आदमी से हम कुछ सीखने की ललक से मिला करते थे। जब भी कोई बड़ा आदमी और नामचीन पत्रकार आता तो बड़ा सम्भलकर बात करना पड़ती थी। साथ में उनके सम्मान का भी पूरा ख्याल रखना पड़ता था। 
....... भले ही प्रभात जी पत्रकार से राज्यसभा सांसद हो गए हों लेकिन, पत्रकारिता आज भी उनके लिए सर्वोपरि है। गर्मियों के दिन थे शायद मई-जून होगी। प्रभात जी ग्वालियर प्रवास पर आए हुए थे। हमने और हमारे शिक्षक ने सोचा क्यों न प्रभात जी को विश्वविद्यालय आमंत्रित किया जाए और कुछ मार्गदर्शन लिया जाए। हमने उन्हें फोन किया और उनसे आग्रह किया,  वे मान गए और दोपहर का दो बजे का समय दिया। हम हमेशा की तरह अपने मेहमान के स्वागत की जुगत भिड़ाने लगे। तब हमें ख्याल आया अरे यार आज तो संडे है। राजनीति विभाग के एचओडी से कॉनफ्रेंस हॉल की अनुमति के लिए गए। चूंकि वे मन से कांग्रेसी ठहरे सो उन्होंने संडे का बहाना लेते हुए मना कर दिया। हांलाकि इससे पूर्व हम वहां संडे के दिन ही एक आयोजन कर चुके थे। खैर अब हमारा दिमाग खराब हो रहा था। दोपहर के दो बज गए श्री प्रभात जी विश्वविद्यालय परिसर में आए तो हमने उन्हें अपनी परेशानी से अवगत कराया। उन्होंने सहज लेते हुए कहा-बात करने के लिए किसी खास जगह की क्या जरूरत है कहीं भी बैठ लेते हैं। भगवान का शुक्र था कि कैंटीन खुली थी। उन्होंने कैंटीन खुली देख कर कहा चलो कैंटीन की टीनशेड में ही बैठ लेते हैं। हम सभी असहज थे लेकिन वो बिल्कुल सहज दिख रहे थे। करीब उन्होंने एक घंटे का समय बिताया और अपने अनुभव बांटे साथ ही पत्रकारिता करियर के लिए कुछ टिप्स भी दिए। एक राज्यसभा सांसद और एक वरिष्ठ पत्रकार को इतना सहज कभी नहीं देखा।
कर्मयोगी
सहज उपलब्ध 
पत्रकारिता जीवन की शुरुआत होने के बाद की मुलाकात भी जेहन में है। प्रभात जी ने ग्वालियर की तमाम छोटी-मोटी गलियां और हर ओर जाने वाली सड़कें अपने कदमों से नापी हैं अपने पत्रकारिता जीवन में। मेरे मामाजी (नरोत्तम यादव)  उनके अच्छे मित्र थे। एक दफा मैंने बातों बातों में मामा जी से कहा-मैं पत्रकार बनना चाहता हूं। तब उन्होंने प्रभात जी के बारे में मुझे बताया कि पत्रकारिता आसान नहीं, प्रभात जी कांधे एक थैला टांगे सुबह  घर से निकलते हैं और पैदल-पैदल सब दूर हो आते हैं। (तब मैं प्रभात जी को न जानता था).... उनकी बातों से मुझे जान पड़ा पत्रकारिता तो अपने बस की नहीं। लेकिन किस्मत को तो इसी झमेले में फंसाना था, फंसा ही लिया। हां तो बात कर रहा था..... मैं जबलपुर नईदुनिया से इंटर्नशिप करके शहर लौटा था। एक भाईसाहब शाम को मुझसे मिलने आए। अचानक से उन्होंने कहा चलो प्रभात जी से मिल आएं। मैं फुरसत में था और मेरा उनसे मिलने का मन भी रहता है तो तुरंत चल दिया। पडाव स्थित उनके कार्यालय पहुंचे। काफी लोग उनसे मिलने के लिए बैठे थे। वे सो रहे थे। उठने पर जैसे ही उन्हें भाई साहब (राजेश पुरोहित) और मेरे आने के बारे में पता चला उन्होंने अंदर ही हमें बुला लिया। काफी देर तक बात होती रही। मेरे पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की बधाई देते हुए  कार्यकर्ता द्वारा लाई गई मिठाई से मेरा मुंह मीठा कराया। वे पैरों में दवा लगा रहे थे तब मैंने उनके पैरों की ओर  देखा।  तो उनकी तपस्या साफ-साफ दिखी। उन्होंने जो शिद्दत से पत्रकारिता की थी उसके निशा आज भी उनके पैरों में थे। ........... कोई अपने काम के प्रति कितना समर्पित होता है उनको देखकर पता चला।

5 टिप्‍पणियां:

  1. प्रभात जी को प्रदेश अध्यक्ष बनने पर बधाई ....वो उतने ही सहज हेँ जीतना आपने लिखा -जाना मेरा भी थोड़ा बहुत उनसे परिचय है ...आज कल उनसे मिलना होगा ..बधाई

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  2. प्रभात झा जी को प्रदेश अध्यक्ष बनने पर ढेर साडी बधाई मेरी ओर से भी साथ ही एक प्रार्थना की कृपा कर जनहित में ईमानदारी और सत्य की राह को प्राथमिकता देकर ,कुछ अलग करने का प्रयास करें और चाटुकारों से दूर रहें /

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  3. ऐसे प्रखर व्यक्तित्व से परिचय करवाने हेतु धन्यवाद्.

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  4. bhai kuchh ek mulakat me ham bhi sath the. vakai bahut sada aur achchhe insan he......

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  5. प्रभात जी से परिचय करवाने हेतु धन्यवाद्.प्रभात जी को प्रदेश अध्यक्ष बनने पर बधाई ...

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