बुधवार, 24 जून 2026

पाकिस्तान की गीदड़ भभकियां

पाकिस्तान के बड़बोले रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु नदी का पानी नहीं मिलने पर भारत पर हमला करने की धमकी दी है, उनका यह बयान पाकिस्तान की गहरी निराशा और बौखलाहट को ही दर्शाता है। इस समय पाकिस्तान अनेक प्रकार की आंतरिक चुनौतियों से घिरा हुआ है। इसलिए वह अपने देश की आवाम का ध्यान भटकाने के लिए कभी परमाणु बम की धमकी देते हैं तो कभी कभी जल युद्ध की हुंकार भरते हैं। दुनिया जानती है कि यह पाकिस्तान की गीदड़ भभकियां हैं। जो देश ऑपरेशन सिंदूर से घबराकर अमेरिका के चरणों में जाकर भारत से बचाने की गुहार लगा चुका हो, उसे इस प्रकार की बातें शोभा नहीं देती हैं। गीदड़ भभकी देने वाले पाकिस्तान को भी पता है कि यह नया भारत है, जो अपने नुकसान की कीमत ब्याज सहित वसूल करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत केवल रक्षात्मक रुख नहीं अपनाता बल्कि आक्रामक जवाब देना भी जानता है। 

युद्ध की गीदड़ भभकी देने वाले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को यह पता होना चाहिए कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को बंद नहीं किया है, उसे विराम दिया है। भारत किसी भी संभावित आक्रमण के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी करके बैठा हुआ है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी पहले ही दुनिया को स्पष्ट संदेश दे चुके हैं कि भारत भविष्य की हर चुनौती और ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ जैसी किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए चौबीसों घंटे तैयार है। यदि इसके बाद भी पाकिस्तान युद्ध की हिमाकत करता है, तो उसे केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि जमीन, आसमान और समुद्र तीनों मोर्चों पर ऐसी विनाशकारी मार झेलनी पड़ेगी जिसकी इस्लामाबाद ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। 

जिस जल संकट का बहाना लेकर पाकिस्तान अपनी हताशा को प्रकट कर रहा है, वह संकट भी उसने स्वयं ही खड़ा किया है। यदि पाकिस्तान भारत से बैर रखेगा तो उसे अन्न और पानी के लिए तरसना ही पड़ेगा। यहाँ-वहाँ पैर पकड़ने की अपेक्षा पाकिस्तान को भारत के सामने दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहिए, इसी में उसकी भलाई है। लेकिन यह तब ही संभव हो पाएगा जब पाकिस्तान सांप्रदायिक और जेहादी सोच से मुक्त होगा। 

बहरहाल, भारत के प्रति पाकिस्तान का नया शोर जल सुरक्षा को लेकर है। ख्वाजा आसिफ का यह कहना कि भारत द्वारा पानी रोके जाने पर हालात युद्ध तक पहुंच सकते हैं, असल में उनकी अपनी आंतरिक कमजोरियों का ही प्रकटीकरण है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अत्यंत स्पष्ट संदेश दे दिया है कि आतंकवाद और बातचीत अब एक साथ नहीं चल सकते। भारत अब सिंधु जल संधि के तहत अपने हिस्से के जल का पूर्ण उपयोग करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे पाकिस्तान को अपनी डगमगाती कृषि व्यवस्था के ढहने का डर सताने लगा है। 

यही नहीं, पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में भी पाकिस्तान बुरी तरह घिर गया है। पीओके की जनता ने पाकिस्तान से मुक्ति के लिए व्यापक आंदोलन छेड़ रखा है, जो आगे चलकर पाकिस्तान का भूगोल बदल सकता है। इसलिए भी पाकिस्तान को भारत की ओर देखने से पहले अपने गिरेबां में कम से कम एक बार झांककर देख लेना चाहिए। आज पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो चुकी है। 70 हजार से अधिक आम लोग पाकिस्तानी सरकार के अनगिनत जुल्मों और ज्यादतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। 

पाकिस्तान को युद्ध की गीदड़ भभकियों की अपेक्षा शांति के तरानों की ओर अपना ध्यान लगाना चाहिए। उसी में पाकिस्तान की बेहतरी है।

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