बुधवार, 24 जनवरी 2024

श्रीरामलला का चित्र ही बन गया संपादकीय

 “रघुवर छबि के समान रघुवर छबि बनियां”

22 जनवरी, 2024 को दैनिक समाचारपत्र स्वदेश, भोपाल समूह ने अपने संपादकीय में शब्दों के स्थान श्रीरामलला का चित्र प्रकाशित किया है

‘स्वदेश’ ने श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के प्रसंग पर अपनी संपादकीय में प्रयोग करके इतिहास रच दिया। ‘स्वदेश’ ने 23 जनवरी, 2024 के संस्करण में संपादकीय के स्थान पर ‘रामलला’ का चित्र प्रकाशित किया है। यह अनूठा प्रयोग है। भारतीय पत्रकारिता में इससे पहले ऐसा प्रयोग कभी नहीं हुआ। यह पहली बार है, जब संपादकीय में शब्दों का स्थान एक चित्र ने ले लिया। वैसे भी कहा जाता है कि एक चित्र हजार शब्दों के बराबर होता है। परंतु, स्वदेश ने संपादकीय पर जो चित्र प्रकाशित किया, उसकी महिमा हजार शब्दों से कहीं अधिक है। यह कोई साधारण चित्र नहीं है। इस चित्र में तो समूची सृष्टि समाई हुई है। यह तो संसार का सार है।

मंगलवार, 23 जनवरी 2024

राम दीपावली

कैलेंडर में 22 जनवरी पर अंगुली रखते हुए आज सुबह–सुबह बिटिया ने पूछा– “22 तारीख के नीचे कुछ लिखा क्यों नहीं है?”

उसके प्रश्न के मूल को समझे बिना मैंने उत्तर दिया– “लिखा तो है– द्वादशी”। चूंकि भारतीय कालगणना को लेकर बात चल रही थी, इसलिए यह उत्तर मैंने दिया।

अपने प्रश्न का उत्तर न पाकर, उसने फिर से आश्चर्य के भाव के साथ कहा– “हमने कल जो त्योहार मनाया, दीप जलाए, रोशनी की। यहां उसके बारे में कहां लिखा है?”

मैंने हर्षित मन से उसे बताया– “अब जो कैलेंडर छपकर आयेंगे, उन पर लिखा होगा ‘राम दीपावली’। परंतु उसे भी हमें 22 जनवरी को नहीं, पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को ही इसी उत्साह से मानना है”।

“मतलब, अब हम दो बार दीवाली मनाएंगे। फटाखे चलाएंगे और मिठाई भी खायेंगे। जय हो रामलला की”। उसका उत्साह देखते ही बन रहा था। अभी उसे पता नहीं कि अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम का मंदिर बनने का क्या महत्व है? कितना बड़ा संघर्ष इस राम दीपावली के लिए रहा है? मैं उसे पूरी राम कहानी बताऊंगा। भारत के प्राण, उत्साह और विश्वास से परिचित कराऊंगा।

उसे यह जानना ही चाहिए कि ‘राम दीपावली’ मनाने का यह सौभाग्य हमें यूं ही प्राप्त नहीं हो गया है। इसके पीछे 500 वर्ष का संघर्ष, कठिन तपस्या और हजारों रामभक्तों का बलिदान है...

श्री अयोध्या धाम में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का आनंद प्रकट करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर राम ज्योति जलाकर मनाई राम दीपावली

शनिवार, 13 जनवरी 2024

शंकराचार्यों का आशीर्वाद


यह देखना भी अपने आप में आश्चर्यजनक है कि जिन्हें धर्म में ही विश्वास नहीं, वे रामलला के नये विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा उत्सव में प्रमुख चार पीठों के शंकराचार्यों की उपस्थिति को लेकर चिंतित हो रहे हैं। उन्हें इस बात की चिंता हो रही है कि प्राण प्रतिष्ठा में हिन्दू धर्म शास्त्रों का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं? दरअसल, यह उनकी चिंता नहीं अपितु रामकाज में अड़ंगे लगाने की प्रवृत्ति है। किसी को यह बात नहीं भूलना चाहिए कि देश में एक वर्ग ऐसा रहा है, जिसने अपने समूचे राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक सामर्थ्य का उपयोग श्रीराम मंदिर के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न करने के लिए किया है। उनकी ओर से यहाँ तक कहा गया कि यह कौन सत्यापित करेगा कि राम इसी भूमि पर पैदा हुए? यहाँ कभी राम मंदिर था ही नहीं, यह कुतर्क भी आया ही। जबकि श्रीराम मंदिर को ध्वस्त करनेवाली नापाक ताकतों ने गर्वोन्मति के साथ यह स्वीकार किया है कि उन्होंने हिन्दुओं की आस्था को ध्वस्त करके उसी के अवशेषों पर मस्जिद तामीर करायी। सर्वोच्च न्यायालय तक में यह हलफनामा दायर किया गया कि राम काल्पनिक हैं। श्रीराम मंदिर का निर्णय समय पर नहीं आए इसके लिए वकीलों ऐसी फौज उतारी गई, जो न्यायालय में मामले को अटकाती-भटकाती रही। अब जरा सोचिए कि श्रीराम मंदिर को लेकर इस प्रकार के विचार रखनेवाली ताकतें भला क्यों मंदिर से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव निर्विघ्न सम्पन्न होने देंगी।

शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

हिन्दवी स्वराज्य की आधार स्तम्भ - जिजाऊ माँ साहेब

जिजाऊ मां साहेब की जयंती पौष मास की पूर्णिमा को आती है , ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 12 जनवरी को जिजाऊ मां साहेब की जयंती मनायी जाती है

जिजाऊ माँ साहेब समाधि स्थल, पाचाड़ में श्रीशिव छत्रपति दुर्ग दर्शन यात्रा

हिन्दवी स्वराज्य के जो आधार स्तम्भ हैं, उनमें से एक है- राजमाता जिजाऊ माँ साहेब। उनके बिना हिन्दवी स्वराज्य के महान विचार का साकार होना संभव नहीं था। बाल शिवा के मन में स्वराज्य का बीज उन्होंने ही रोपा। उस बीज को उचित खाद-पानी एवं वातावरण मिले, इसकी भी चिंता उन्होंने की। रामायण-महाभारत और भारतीय आख्यानों की कहानियां सुनाकर माँ जिजाऊ ने शिवाजी के व्यक्तित्व को गढ़ा। वे ही शिवाजी महाराज की प्रथम गुरु भी थीं। प्रतिकूल परिस्थितियों में और अनेक प्रकार के झंझावातों का सामना करते हुए तेजस्विनी माता ने शिवाजी महाराज को वीरता, साहस, निर्भय, धर्मनिष्ठा, दयालुता, संवेदनशीलता और स्वतंत्रता के संस्कार दिए। जिजाऊ माँ साहेब के वात्सल की छांव का ही आशीष था कि कंटकाकीर्ण मार्ग पर भी शिवाजी महाराज मुर्झाये नहीं अपितु हीरे की तरह चमक उठे।

सोमवार, 8 जनवरी 2024

भारत ने मालदीव को दिखाया आईना

भारत के खूबसूरत पर्यटन स्थल लक्षद्वीप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोई भी कदम बहुत सोच-विचारकर उठाते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी लक्षद्वीप में समुद्री किनारों पर यूँ ही टहलने नहीं गए थे। जो लोग उस समय समुद्र किनारे प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीरों को देखकर हँसी-ठिठोली कर रहे थे, उन्हें अब जाकर यह समझ आया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन तस्वीरों के माध्यम से मालदीव को आईना दिखाने का काम किया है। लक्षद्वीप के समुद्री तट पर प्रधानमंत्री मोदी का चहलकदमी करना मालदीप के कुछ नेताओं को इतना अधिक चुभ गया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और भारत के संदर्भ में अशोभनीय टिप्पणी कर दीं। भारत के नागरिकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने देश और प्रधानमंत्री के अपमान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। मालदीव तक उसकी धमक सुनायी पड़ी। परिणामस्वरूप, ओछी टिप्पणी करनेवाली मालदीव की महिला मंत्री मरियम शिउना को कैबिनेट से निलंबित कर दिया गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, शिउना के अलावा दो और मंत्रियों माल्शा शरीफ और अब्दुल्ला महजूम माजिद को भी निलंबित कर दिया गया। वहीं, मालदीव सरकार के प्रवक्ता इब्राहिम खलील को सफाई देनी पड़ गई। उनकी ओर से कहा गया है कि भारत के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट्स के हवाले से जो कुछ चल रहा है, उसके बारे में हमारी सरकार अपना रुख साफ कर चुकी है। विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी किया है। भारत के बारे में टिप्पणी करने वाले सभी सरकारी अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जा रहा है।

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2023

नईदुनिया में प्रकाशित लेखक लोकेन्द्र सिंह से बातचीत

बातचीत : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक लोकेन्द्र सिंह राजपूत ने साहित्य लेखन से जुड़े कई अनुभव साझा किए

नईदुनिया (नवदुनिया, भोपाल) के 'शब्द संसार' कॉलम में लेखक लोकेन्द्र सिंह की साहित्यिक यात्रा पर विशेष बातचीत 28 दिसंबर, 2023 को प्रकाशित हुई

"मुझे स्कूल के दिनों से ही समाचारपत्रों में प्रकाशित कहानियां, बोधकथा, व्यंग्य, यात्रा वृत्तांत के साथ-साथ साहित्यिक पुस्तकें आकर्षित करती रहीं। गर्मी की छुट्टियों में समाचारपत्रों के रविवारीय एवं बुधवारीय परिशिष्ट निकालकर पढ़ने से अध्ययन की शुरुआत हुई। ऐसे ही एक दिन समाचारपत्र पलटते हुए उन्हें अपनी मौसी सरला यादव की लिखी कहानी दिखी, तब उनके भीतर के साहित्यकार ने उमंग ली। मन बनाया कि मैं भी लिखूंगा। उसके बाद अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित होनेवाले साहित्यक गोष्ठियों में साहित्यकारों की संगत मिली तो दिशा और स्पष्ट होती गई"। यह कहना है लोकेन्द्र सिंह राजपूत का। उन्होंने साहित्यिक यात्रा का अनुभव नवदुनिया/नईदुनिया से साझा किया।

गुरुवार, 28 दिसंबर 2023

विपक्षी गठबंधन में हिन्दू विरोध की प्रतिस्पर्धा


ऐसा प्रतीत होता है कि विपक्षी गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों के बीच हिन्दू धर्म और भारतीयता के विचार पर हमला करने की कोई प्रतिस्पर्धा चल रही है। डीएमके के नेताओं के हिन्दू एवं उत्तर भारत विरोधी बयानों के बाद एक बार फिर समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिन्दू धर्म को लेकर घोर आपत्तिजनक बयान दिया है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह भी है कि राजनीतिक स्वार्थों के चलते विपक्षी गठबंधन के लगभग सभी राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं की ओर से हिन्दू विरोधी बयानों की निंदा नहीं की जा रही है। सब चुप्पी साधकर बैठे हैं। केवल भारतीय जनता पार्टी के नेता ही आगे आकर हिन्दू और भारत विरोधी बयानों की निंदा कर रहे हैं। ऐसे में जनता यह क्यों नहीं माने कि हिन्दू धर्म का पक्ष लेने की बात हो तब भाजपा ही सबसे आगे दिखायी देती है। अन्य धर्मों का सम्मान रखने के साथ ही भाजपा प्राथमिकता के आधार पर हिन्दू हित की बात करती है।