शनिवार, 9 दिसंबर 2017

रसातल में पहुंची राजनीतिक बयानबाजी

 गुजरात  का चुनावी महासंग्राम विकास पर बहस के साथ प्रारंभ हुआ था। किंतु, जैसे-जैसे यह बहस आगे बढ़ी, विकास के मुद्दे कहीं गायब हो गए। भाषा का स्तर लगातार गिरता गया। कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर का बयान इस बात का प्रमाण है कि राजनीतिक बयानबाजी पूरी तरह से रसातल में पहुंच चुकी है। मणिशंकर अय्यर कोई अनपढ़ नेता नहीं है, बल्कि बेहतरीन संस्थानों में पढ़े-लिखे और कांग्रेस के प्रबुद्ध वर्ग में शुमार हैं। किंतु, नरेन्द्र मोदी के प्रति उनकी नफरत एवं घृणा, उनके भाषाई स्तर को निम्नतम स्तर पर पहुंचा देती है। अय्यर ने देश के प्रधानमंत्री के लिए जिस प्रकार के शब्द का उपयोग किया है, वह न केवल घोर आपत्तिजनक है, बल्कि आपराधिक भी है। 'नीच' शब्द को गाली के रूप में उपयोग किया जाता है। अय्यर ने प्रधानमंत्री को 'नीच' और 'असभ्य' कह कर अपनी संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया है। उन्होंने यह भी बताया है कि वह प्रधानमंत्री मोदी से किस हद तक घृणा करते हैं।
          यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर ने नरेन्द्र मोदी के लिए अमर्यादित शब्द का उपयोग किया है। आम चुनाव-2014 में भी उन्होंने मोदी का अपमान करने के लिए 'चायवाला' शब्द इस्तेमाल किया और चाय बेचने की नसीहत दी। अय्यर के इस बयान से कांग्रेस को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। अब तो मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री को गाली ही दे दी है। अय्यर के इस बयान का खामियाजा कांग्रेस को गुजरात चुनाव में उठाना ही पड़ेगा। हालांकि, नुकसान की मात्रा एवं आशंका को कम करने के लिए कांग्रेस ने तत्काल मणिशंकर अय्यर को पार्टी की निष्काषित कर दिया और उनकी प्राथमिक सदस्यता खत्म कर दी है। कांग्रेस के भावी अध्यक्ष राहुल गांधी से फटकार पडऩे के बाद अय्यर ने मांफी मांगने की नौटंकी भी की है। 'नीच' शब्द के लिए उन्होंने अपनी 'कमजोर हिंदी' की आड़ लेने का प्रयास किया है, जो कि बेहद बचकाना है। मणिशंकर नीच शब्द का अर्थ नहीं जानते होंगे, यह बात किसी भी सामान्य व्यक्ति के गले नहीं उतरेगी।
          प्रधानमंत्री मोदी के प्रति मणिशंकर अय्यर के मन में कितनी कड़वाहट भरी हुई है, यह सब जानते हैं। इसलिए मणिशंकर के बयान पर किसी को आश्चर्य भी नहीं हुआ। मणिशंकर वह व्यक्ति है, जो पाकिस्तान जाकर वहाँ के टीवी चैनल से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी को हराने के लिए पाकिस्तान का सहयोग माँग चुका है। बहरहाल, मणिशंकर अय्यर को पार्टी से निकाल कर कांग्रेस ने अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है। हालाँकि इस निर्णय के पीछे राजनीतिक कारण भी हैं, क्योंकि गुजरात चुनाव में थोड़ा-बहुत जो माहौल बन गया है, पार्टी उसे खत्म करना नहीं चाहती। कांग्रेस कितनी सफाई पसंद पार्टी है, यह भी किसी से छिपा नहीं है।
          भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर उन अपशब्दों की सूची प्रस्तुत की है, जो कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए उपयोग किए गए हैं। स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मोदी के विरुद्ध आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं। बहरहाल, भले ही कांग्रेस ने गुजरात चुनाव में होने वाले नुकसान का ध्यान रखते हुए मणिशंकर अय्यर को पार्टी से निष्काषित किया है, किंतु यह परंपरा अच्छी है। कांग्रेस के इस निर्णय की सराहना की जानी चाहिए। इससे कांग्रेस सहित बाकी सभी पार्टियों, सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं पर भी दबाव बनेगा। राजनीतिक बयानबाजी को रसातल से उठाकर उच्च स्तर पर ले जाने के लिए इस प्रकार की कार्रवाइयां आवश्यक हैं।

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

ध्रुवीकरण का ओछा प्रयास है पादरी की चिट्ठी

 गुजरात  चुनाव में चर्च ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का सीधा प्रयास किया है। गांधीनगर के आर्चबिशप (प्रधान पादरी) थॉमस मैकवान ने चिट्ठी लिखकर ईसाई समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे गुजरात चुनाव में 'राष्ट्रवादी ताकतों' को हराने के लिए मतदान करें। यह स्पष्टतौर पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय एवं चुनाव आयोग की आचार संहिता का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसी वर्ष जनवरी में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 (3) की नए सिरे से व्याख्या करते हुए निर्णय दिया था कि कोई भी धर्म, जाति, समुदाय या भाषा इत्यादि के आधार पर वोट नहीं माँग सकता। यहाँ तक कि धार्मिक नेता भी अपने समुदाय को किसी उम्मीदवार या पार्टी के पक्ष में मतदान करने के लिए नहीं कह सकता। किंतु, जिनकी आस्थाएं भारत के संविधान की जगह कहीं और हों, उन्हें संविधान या संवैधानिक संस्थाओं के निर्देशों की चिंता नहीं होती। बल्कि, उन्हें उनकी चिंता अधिक रहती है, जो उनके स्वार्थ एवं धार्मिक एजेंडे को पूरा करने में सहयोगी होते हैं।

बुधवार, 29 नवंबर 2017

'शिव' के 12 बरस, विश्वास का 'राज'

 मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश जैसे बड़े प्रदेश को बखूबी संभाला है। संभाला ही नहीं है, वरन प्रदेश को 'बीमारू राज्य' की श्रेणी से निकाल कर विकास के पथ पर अग्रसर कर दिया है। प्रदेश में विकास की गंगा बहे, इसके लिए वह निरंतर प्रयासरत रहे हैं। उनके प्रयासों का ही सुफल है कि आज अनेक क्षेत्रों में मध्यप्रदेश की छवि चमकी है। प्रदेश भाजपा ने अपने लोकप्रिय मुख्यमंत्री के कार्यकाल के बारह वर्ष पूरे होने के अवसर को विकास पर्व के रूप में मनाने का निर्णय किया है। शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री हैं, जो लगातार 12 वर्षों से प्रदेश के मुखिया हैं। प्रदेशभर में विकास पर्व के तहत राज्य में चल रहीं 12 प्रमुख योजनाओं- मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान एवं निकाह योजना, मेधावी छात्र योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, अटल ज्योति अभियान, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना, अन्नपूर्णा योजना, मुख्यमंत्री छात्र गृह योजना, भावांतर योजना, बलराम ताल योजना और महिला सशक्तिकरण योजना पर केंद्रित कार्यक्रम प्रदेशभर में आयोजित किए जाएंगे।

गुरुवार, 23 नवंबर 2017

कांग्रेस की ओछी सोच

'तू जा चाय बेच... ' कह कर कांग्रेस ने किसका अपमान किया?
 प्र धानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर कांग्रेसी नेताओं के मन में किस प्रकार के भाव हैं, यह एक बार फिर प्रकट हो गया है। गुजरात में जारी चुनाव प्रचार के बीच यूथ कांग्रेस की ऑनलाइन मैगजीन के ट्विटर हैंडल से बहुत आपत्तिजनक फोटो (मीम) जारी किया है। यूथ कांग्रेस की ऑनलाइन मैगजीन के ट्विटर हैंडल 'युवा देश' के जरिए पोस्ट किए गए मीम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चायवाला बताकर उनका मजाक बनाया गया था। इस मीम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेजा की तस्वीर है। तस्वीर पर काल्पनिक संवाद लिखे गए हैं। मीम में ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेजा से मोदी को कहलवाया गया है- 'तू जा चाय बेच।'

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

बेटी के लिए कविता-3


भले ही तुम हो गई हो
तीन साल की।
फर्क क्या आया? 
आज भी तुम्हारी भाषा-बोली को 
हम दो लोग ही समझते हैं।

हाँ, तुम्हारा भाई भी समझने लगा है
बल्कि, कर्ई दफा 
हमसे ज्यादा वह ही तुम्हें समझता है
जैसे हम दूसरों को बताते हैं
किसी अनुवादक की तरह 
तुमने क्या बोला?
ठीक उसी तरह, कई दफा
वह हमें बताता है
तुमने क्या बोला?

चलो, अच्छा है
हम संवाद के लिए
परस्पर निर्भर हैं। 
उच्चारण स्पष्ट हो जाए
तब भी, एक-दूसरे को समझने की
परस्पर निर्भता बनी रहे। 
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ऋष्वी के जन्मदिन की तीसरी वर्षगाँठ पर... 21 नवंबर, 2017

शनिवार, 18 नवंबर 2017

कांग्रेस की दृष्टि में धर्मनिरपेक्षता अर्थात् हिंदू विरोध

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी नई किताब में लिखा, दीपावली पर हिंदू संत को गिरफ्तार कर लिया, परंतु क्या ईद पर मौलवी को पकडऩे का साहस किया जा सकता है?
 भारत  के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी पुस्तक 'कोअलिशन इयर्स 1996-2012' के एक अध्याय में कांग्रेस के हिंदू विरोध एजेंडे और छद्म धर्मनिरपेक्षता को उजागर किया है। वैसे तो यह कोई छिपा हुआ तथ्य नहीं है। दोनों आरोपों को लेकर कांग्रेस अकसर कठघरे में खड़ी दिखाई देती है। परंतु, जब प्रणब मुखर्जी इस संबंध में लिख रहे हैं, तब इसके मायने अलग हैं। वह खांटी कांग्रेसी नेता हैं। वह कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी राजनेता हैं। उन्होंने कांग्रेस को बहुत नजदीक से देखा है। कांग्रेस का उत्थान एवं पतन दोनों उनकी आँखों के सामने हुए हैं। आज कांग्र्रेस जिस गति को प्राप्त हुई है, उसके संबंध में भी उनका आकलन होगा। पूर्व राष्ट्रपति प्र्रणब मुखर्जी ने अपनी नई किताब में लिखा है- 'मैंने वर्ष 2004 में कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। एक कैबिनेट बैठक के दौरान मैंने गिरफ्तारी के समय को लेकर काफी नाराजगी जताई थी। मैंने पूछा था कि क्या देश में धर्मनिरपेक्षता का पैमाना केवल हिन्दू संतों महात्माओं तक ही सीमित है? क्या किसी राज्य की पुलिस किसी मुस्लिम मौलवी को ईद के मौके पर गिरफ्तार करने का साहस दिखा सकती है? '

रविवार, 5 नवंबर 2017

हिंदी मीडिया के चर्चित चेहरों से मुलाकात कराती किताब

 हम  जिन्हें प्रतिदिन न्यूज चैनल पर बहस करते-कराते देखते हैं। खबरें प्रस्तुत करते हुए देखते हैं। अखबारों और पत्रिकाओं में जिनके नाम से प्रकाशित खबरों और आलेखों को पढ़कर हमारा मानस बनता है। मीडिया गुरु और लेखक संजय द्विवेदी की किताब 'हिंदी मीडिया के हीरो' पत्रकारिता के उन चेहरों और नामों को जानने-समझने का मौका उपलब्ध कराती है। किताब में देश के 101 मीडिया दिग्गजों की सफलता की कहानी है। किन परिस्थितियों में उन्होंने अपनी पत्रकारिता शुरू की? कैसे-कैसे सफलता की सीढिय़ां चढ़ते गए? उनका व्यक्तिगत जीवन कैसा है? टेलीविजन पर तेजतर्रार नजर आने वाले पत्रकार असल जिन्दगी में कैसे हैं? उनके बारे में दूसरे दिग्गज क्या सोचते हैं? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब यह किताब देती है। किताब को पढ़ते वक्त आपको महसूस होगा कि आप अपने चहेते मीडिया हीरो को नजदीक से जान पा रहे हैं। यह किताब पत्रकारिता के छात्रों सहित उन तमाम युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है जो आगे बढऩा चाहते हैं। पुस्तक में जमीन से आसमान तक पहुंचने की कई कहानियां हैं। पत्रकारों का संघर्ष प्रेरित करता है। पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रहे युवाओं को यह भी समझने का अवसर किताब उपलब्ध कराती है कि मीडिया में डटे रहने के लिए कितनी तैयारी लगती है। इस तरह के शीर्षक से कोई सामग्री किताब में नहीं है, यह सब तो अनजाने और अनायस ही पत्रकारों के जीवन को पढ़ते हुए आपको जानने को मिलेगा।

सोमवार, 30 अक्तूबर 2017

जम्मू-कश्मीर पर कांग्रेस का अलगाववादी सुर

 कांग्रेस  के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर पर भारत विरोधी टिप्पणी करके अपनी पार्टी को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर पर चिदंबरम का बयान अलगाववादियों और पाकिस्तानियों की बयानबाजी की श्रेणी का है। यदि चिदंबरम का नाम छिपा कर किसी से भी यह पूछा जाए कि जम्मू-कश्मीर की आजादी का नारा कौन लगाता है, तब निश्चित ही उत्तर में अलगाववादियों और पाकिस्तानी नेताओं का नाम ही आएंगे। प्रगतिशील बुद्धिजीवियों का नाम भी अनेक लोग ले सकते हैं। कांग्रेस के शीर्ष श्रेणी के नेता पी. चिदंबरम ने बीते शनिवार को कहा था कि जब कश्मीरी कहें आजादी तो समझिए स्वायत्तता। उन्होंने कहा कि 'कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 का अक्षरश: सम्मान करने की मांग की जाती है। इसका मतलब है कि वो अधिक स्वायत्तता चाहते हैं। चिदंबरम का यह बयान भारतीय हित को नुकसान पहुँचाता है।

शुक्रवार, 20 अक्तूबर 2017

गौ-हत्यारों एवं तस्करों के विरुद्ध कब मुखर होंगे हम

 गौरक्षा  के नाम पर पिछले समय में हुई कुछ हिंसक घटनाओं पर देश का तथाकथित प्रबुद्ध वर्ग एवं मीडिया काफी मुखर रहा है। रहना भी चाहिए। संविधान एवं कानून के दायरे से बाहर जाकर गौरक्षा हो भी नहीं सकती। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं भी गौरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा का विरोध कर चुके हैं। इसके बाद भी कथित बुद्धिजीवी एवं पत्रकारों ने हिंसा की घटनाओं को आधार बना कर गौरक्षा जैसे पुनीत कार्य और सभी गौरक्षकों को लांछित करने का प्रयास किया है। इसके लिए वह असहिष्णुता, मॉबलिंचिंग और नॉटइनमायनेम जैसी मुहिम चला चुके हैं। परंतु, उनकी प्रत्येक मुहिम संदेहास्पद रही है। उनके प्रत्येक आंदोलन का उद्देश्य और एजेंडा भेदभावपूर्ण रहा है, इसलिए उन्हें सफलता नहीं मिली।

गुरुवार, 19 अक्तूबर 2017

अयोध्या की दीपावली

 दीपावली  भारत का प्रमुख पर्व है। त्रेता युग में भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन के बाद दीपावली मनाई गई थी। श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर और अत्याचारी रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे। समूची अयोध्या उनकी प्रतीक्षा कर रही थी। कार्तिक अमावस्या के अंधेरे को दूर करने के लिए प्रत्येक अयोध्यावासी ने अपने राजा राम के लिए देहरी-देहरी दीप जलाए थे। अयोध्या जग-मग हो उठी थी। तभी से पूरे देश में दीपावली मनाई जाती रही है। परंतु, दु:ख की बात है कि राम जिस देश की आत्मा हैं, उसी देश में उनके साथ न्याय नहीं हो रहा है। पहले राम के जन्मस्थल पर बने मंदिर को ध्वस्त कर वहाँ विधर्मियों और आक्रांताओं ने मस्जिद तामीर करा दी थी। अब वहाँ मस्जिद तो नहीं है, परंतु मंदिर भी नहीं है। अपने ही घर में राम तंबू में हैं। सहिष्णु और उदार हिंदू समाज न्याय के मंदिर की ओर अपेक्षा से देख रहा है। उसे न्याय की प्रतीक्षा है। केन्द्र और राज्य में सरकार बदलने से जनमानस में एक भरोसा पैदा हुआ है। सरकार की ओर से भी मंदिर निर्माण पर सकारात्मक संकेत दिए जा रहे हैं। हालाँकि, सभी पहले न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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