बुधवार, 30 दिसंबर 2015

सच से क्यों भाग रही है कांग्रेस?

 कां ग्रेस की मुंबई इकाई के मुखपत्र 'कांग्रेस दर्शन' में प्रकाशित लेखों में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सोनिया गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि लेखों के शीर्षक 'कांग्रेस की कुशल सारथी सोनिया गांधी' और 'पिता ने सबसे पहले सोनिया नाम से पुकारा था' से प्रथम दृष्टया यही प्रतीत होता है कि यह लेख कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की स्तुति में लिखे गए हैं। संभवत: लेख का शीर्षक देखकर ही 'कांग्रेस दर्शन' के कंटेंट एडिटर सुधीर जोशी गच्चा खा गए होंगे। कांग्रेस के मुखपत्र में नेहरू-गांधी परिवार के शीर्ष व्यक्तियों के खिलाफ सामग्री प्रकाशित होने की गलती पर सुधीर जोशी को उनके पद से हटा दिया गया है। हालांकि कांग्रेस के कई नेता कांग्रेस दर्शन के संपादक संजय निरुपम को जिम्मेदार मान रहे हैं। क्योंकि, उनकी देखरेख में ही 'कांग्रेस दर्शन' का प्रकाशन होता है।

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

नमो-नवाज का मेल, कांग्रेस का क्यों जला दिल

 प्र धानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अप्रत्याशित तरीके से पाकिस्तान का दौरा करके दुनिया को चौंका दिया है। मोदी रूस से लौटते वक्त पहले अफगानिस्तान और फिर वहां से अचानक पाकिस्तान पहुंचे। लाहौर में 2 घंटे 40 मिनट रुके। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ उन्हें रिसीव कर जट्टी उमरा में अपने घर ले गए। मोदी करीब डेढ़ घंटे नवाज के घर थे। वहां नवाज की नातिन मेहरुन्निसा की शादी की रस्में चल रही थीं। नवाज शरीफ के जन्मदिन का भी अवसर था। करीब १२ साल बाद भारत के प्रधानमंत्री का पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को उनके घर पहुंचकर जन्मदिन की बधाई देना, नातिन को आशिर्वाद देना और माँ के चरण छूना, भारत-पाक संबंधों की नई इबारत लिखने जैसा है। 

नक्सलियों की क्रूरता के खिलाफ बच्चियों का आक्रोश

 ज ब कभी पुलिस के हाथों कोई नक्सली मारा जाता है, तब तमाम मानवाधिकारी और वामपंथी विचारक आसमान सिर पर उठा लेते हैं। लेकिन, नक्सलियों की क्रूरता के खिलाफ इनके होंठ सिल जाते हैं। धिक्कार है ऐसे वामपंथी विचारकों और मानवाधिकारियों के प्रति जिन्होंने एक दुधमुंही बच्ची की हत्या पर शर्मनाक तरीके से खामोशी की चादर ओढ़ रखी है। गौरतलब है कि बीजापुर जिले में क्रूर नक्सलियों ने चार माह की दुधमुंही बच्ची की जघन्य हत्या कर दी थी। आखिर कोई बता सकता है कि उस दुधमुंही बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा होगा? नक्सलियों से उसकी क्या दुश्मनी रही होगी? कोई इतना निर्दयी कैसे हो सकता है कि एक नन्हीं कली को ही मसल दिया? इस तरह की हिंसा किस तरह के समाज का निर्माण करेगी? इस नक्सलवाद ने खूबसूरत बस्तर को नर्क बना दिया है। नक्सलियों की इस बर्बरता पर भले ही मीडिया, वामपंथी बुद्धिजीवियों और मानवाधिकारी खामोश रह गए हों लेकिन बस्तर की बच्चियों ने साहस दिखाया है। उन्होंने नक्सलवाद का घिनोना चेहरा दुनिया को दिखाने का प्रयास किया है। 

मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

'सर्वसमावेशी है हिन्दुत्व' : उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी का स्वागत

 उ च्चतम न्यायालय ने 'हिन्दुत्व' को सर्वसमावेशी बताया है। न्यायालय का मानना है कि हिन्दुत्व में सबके लिए जगह है। उच्चतम न्यायालय की इस राय का अध्ययन उन सब सेक्युलर बुद्धिजीवियों और राजनेताओं को करना चाहिए, जिन्होंने देश में हिन्दुत्व को बदनाम करने का अधिकतम प्रयास किया है। अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए वामपंथी और तथाकथित सेक्युलर बुद्धिजीवियों ने प्रेरणास्पद दर्शन 'हिन्दुत्व' को विवादास्पद बना दिया है। गैर-ब्राह्मणों को मंदिरों में पुजारी बनाने की अनुमति देने वाला तमिलनाडु का एक नियम उच्चतम न्यायालय में समीक्षा के लिए लाया गया था। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने इस नियम की समीक्षा करने से इनकार कर दिया है। तमिलनाडु में मंदिरों के पुजारी एक खास जाति के लोग ही हो सकते थे। तमिलनाडु सरकार ने कानून बनाकर दूसरे जाति के लोगों के लिए भी मंदिर का पुजारी बनने का रास्ता खोल दिया है। अब किसी भी जाति का वह व्यक्ति मंदिर का पुजारी बन सकता है, जिसे परंपराओं और रीति-रिवाजों की सही जानकारी हो।

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

माफी मांगी, लेकिन बाकि है अकड़

 त थाकथित असहिष्णुता के मसले पर अपने विवादास्पद बयान के लिए बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान ने माफी मांग ली है। उन्होंने कहा है कि देश में कोई असहिष्णुता नहीं है और अगर उन्होंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई हो तो वह माफी मांगते हैं। गौरतलब है कि अपने ५०वें जन्मदिन के अवसर पर शाहरुख खान ने कहा था कि पिछले कुछ समय से देश में असहिष्णुता बढ़ रही है। देश का माहौल ठीक नहीं है। देश में तेजी से कट्टरता बढ़ रही है। शाहरुख खान ने अवार्ड वापस कर रहे लोगों का समर्थन भी किया था। उन्होंने कहा था कि यदि मुझसे कहा जाता है तो मैं भी प्रतीकात्मक सम्मान लौटा सकता हूँ। देश के बहुत बड़े वर्ग ने उनके इस बयान को देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला माना था। लोगों का मानना था कि शाहरुख खान को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए। क्योंकि, देश में ऐसा कोई माहौल है नहीं। जनता ने शाहरुख खान से पूछा भी था कि देश के हालात जब बहुत खराब थे, तब वे चुप क्यों थे?

गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

भ्रष्टाचार का आरोपी कैसे बन गया केजरीवाल का प्रधान सचिव

 दे श की जनता को हैरानी है कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के सहारे राजनीति में आने वाले अरविन्द केजरीवाल और उनका दल भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारी को पाक-साफ साबित करने का प्रयास क्यों कर रहा है? आआपा और केजरीवाल प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार के साथ खड़े क्यों दिखाई दे रहे हैं? मान लीलिए कि राजेन्द्र कुमार पर लगे आरोप सही साबित हो जाएं, तब अरविन्द केजरीवाल अपने वर्तमान व्यवहार के लिए क्या जवाब देंगे? किससे माफी मांगेंगे? उस समय किस आधार पर यू-टर्न लेंगे? जनता ने अरविन्द केजरीवाल को शासन-प्रशासन में से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए चुना था, भ्रष्ट अधिकारियों का संरक्षण करने के लिए नहीं। इसलिए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे प्रधान सचिव राजेन्द्र कुुमार के साथ खड़े होने से पहले अरविन्द केजरीवाल को ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए था। 

बुधवार, 16 दिसंबर 2015

ईमानदार को काहे का डर?

 दि ल्ली सचिवालय में मंगलवार की सर्द सुबह जैसे ही सीबीआई ने छापा मारा, देश में राजनीतिक गर्माहट फैल गई। आनन-फानन में ट्विट करके दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दावा किया है कि छापा उनके दफ्तर पर मारा गया है। जबकि सीबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि छापे की कार्यवाही प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार के दफ्तर में की गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने आदतन सीबीआई के छापे को केन्द्र सरकार के इशारे पर की गई कार्रवाई बता दिया। सीबीआई के छापे पर राजनीति करने के लिए अरविन्द केजरीवाल इतने उतावले हो गए कि प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का उपयोग करने से भी नहीं चूके। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कायर और मनोरोगी कह दिया। अपनी भाषा पर खेद जताने की जगह केजरीवाल ने शाम को गाँवों को भी बदनाम कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे शब्द खराब हो सकते हैं क्योंकि हम गाँव के साधारण लोग हैं, लेकिन सरकार के तो कर्म ही खोटे हैं। यह कितना उचित है कि अपनी बदजुबानी पर पर्दा डालने के लिए केजरीवाल गाँव और गाँववालों को बदनाम करें? अरविन्द केजरीवाल को किसने बताया कि गाँव के लोगों की भाषा असभ्य और अमर्यादित होती है?