Pages
(यहां ले जाएं ...)
मुख पृष्ठ
वीडियो पार्क
घुमक्कड़ी के ठिकाने
कविताएं
कहानियां
मेरी पुस्तकें
पुस्तक चर्चा
कतरनें
मीडिया
फोटो
परिचय
लोकेंद्र
▼
मंगलवार, 29 दिसंबर 2009
बस यूं ही बैठे-बैठे...
›
रविवार की सुबह वही रोज की तरह देरी से उठा करीब 11 बजे। जब से पत्रकारिता के पेशे में कदम रखा है तब से देर तक जागना और देर सबेरे उठने की गंदी ...
5 टिप्पणियां:
मंगलवार, 22 दिसंबर 2009
ये पाकिस्तान कहाँ से घुस आया
›
रमैया- ये कक्का एक बात पूछें तुमसे.. चार-छ: दिन से बहुत ही परेशान हैं समझ ही नहीं आ रही। पंचू- पूछो का बात है जो तिहाए भेजा में ना घुस...
4 टिप्पणियां:
‹
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें