शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

कांग्रेस से लोकतंत्र है या लोकतंत्र से कांग्रेस

 संसद  में कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि उसके कारण भारत में लोकतंत्र बचा हुआ है। कांग्रेस की ओर से संसद में उसके नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि कांग्रेस को देश में लोकतंत्र बनाए रखने का श्रेय मिलना चाहिए, जिसके कारण एक गरीब परिवार से आने वाले नरेंद्र मोदी भी भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा पाए। संसद में यह भाषण करते वक्त खडग़े भूल गए कि कांग्रेस ने १९७५ में लोकतंत्र का गला घोंटने की पूरी कोशिश की थी। आजादी के आंदोलन में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाली कलम पर पहरा बैठा दिया गया था। विरोधी विचारधारा के लोगों को पकड़-पकड़ कर जेलों में ठूंसा गया और उनको यातनाएं दी गईं। लेकिन, जनशक्ति के सामने कांग्रेस की तानाशाही टिक नहीं सकी और इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने के षड्यंत्र में कांग्रेस कामयाब नहीं हो सकी। आजादी के बाद से अब तक ७० साल में कांग्रेस ने जितने घोटाले किए हैं, उनके आधार पर उसे सत्ता मिलनी ही नहीं चाहिए, लेकिन यह लोकतंत्र है कि देश में भ्रष्टाचार का नाला बहाने के बाद भी कांग्रेस आज न केवल अस्तित्व में है, बल्कि कुछेक राज्यों में सत्तासीन भी है। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को समझना चाहिए कि भारत में लोकतंत्र उनके कारण नहीं बचा है, बल्कि लोकतंत्र के कारण वह बची हुई है। 

         कांग्रेस के बड़े बोलों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्य ही कहा कि कांग्रेस का लोकतंत्र केवल एक परिवार को समर्पित है। यह हास्यास्पद है कि जिस पार्टी में ही लोकतंत्र नहीं है, आज वह देश में लोकतंत्र बचाने का दंभ भर रही है। खडग़े सहित सभी कांग्रेसी नेताओं को यह मान लेना चाहिए कि इस देश में लोकतंत्र को मजबूत बनाने में सभी दलों के नेताओं का ही नहीं, बल्कि जनता का भी योगदान है। अति उत्साहित खडग़े देशहित में कांग्रेसी नेताओं के बलिदान को रेखांकित करते वक्त संसदीय मर्यादा का ध्यान रखना भी भूल गए। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए जिस शब्द (जानवर का नाम) का इस्तेमाल किया, उसे संसदीय कार्यवाही से हटना पड़ गया। खडग़े ने कहा कि महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने देश के लिए अपने प्राणों की आहूति दी। खडग़े ने कहा कि वर्तमान सत्ताधारी पार्टी से किसी ने भी देश के लिए अपने प्राणों की आहूति नहीं दी। स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई में कांग्रेस के शामिल रहने का दावा करने वाले नेताओं को यह स्पष्ट तौर पर समझाने की जरूरत है कि उस कांग्रेस और आज की कांग्रेस में बुनियादी अंतर है। आज कांग्रेस एक राजनीतिक पार्टी है और उस समय कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन का एक साझा मंच थी। सभी विचारधाराओं के नेता उस वक्त कांग्रेस के आंदोलनों में भाग लेते थे। जिस आधार पर कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने का दंभ भरती है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कहना भी उचित ही है कि १८५७ के स्वतंत्रता संग्राम में जब कांग्रेस का जन्म भी नहीं हुआ था, तब से कमल (भाजपा का निशान) स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बना हुआ है। 
          महात्मा गांधी आज की कांग्रेस के नेता नहीं थे, बल्कि उन्होंने तो आजादी के तत्काल बाद ही कहा था कि कांग्रेस का उद्देश्य पूर्ण हुआ, अब उसे समाप्त कर देना चाहिए। लेकिन, सत्ता पर नजरें गढ़ाकर बैठे लोगों ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। क्योंकि, वह अच्छे से जानते थे कि कांग्रेस को खत्म कर दिया तब सत्ता में पहुँचने की राह कठिन हो सकती है। यहाँ खडग़े को भाजपा नेताओं के साथ लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी टोक दिया। उन्होंने कहा कि आप इस तरह से कोई बात नहीं कह सकते। देश के लिए कई लोगों ने अपने प्राणों की आहूति दी है। खडग़े या कोई और कांग्रेसी नेता बता सकते हैं कि देश की एकता और अखण्डता के लिए बलिदान होने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय किस पार्टी के नेता थे? देश में लोकतंत्र बचाने के लिए लाठियां खाने वाले किस पार्टी के कार्यकर्ता और नेता थे? गोवा मुक्ति आंदोलन में सीने पर गोली खाने वाले लोग कौन थे? कांग्रेस के नेताओं को अपना भ्रम जल्द ही दूर करना चाहिए कि देश के लिए बलिदान होने वाले सिर्फ कांग्रेस में ही नहीं है। 

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